प्लेटो यूनान के महान दार्शनिक ‘सुकरात’ के शिष्य और ‘अरस्तु’ के गुरु थे। उन्हें पाश्चात्य काव्यशास्त्र और सौंदर्यशास्त्र का जन्मदाता माना जाता है। उन्होंने विभिन्न विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं। काव्य के संदर्भ में उनके विचार आज भी संदर्भप्रासंगिक और विचारणीय माने जाते हैं। वे एक दार्शनिक होने के साथ-साथ यूनान के विख्यात गणितज्ञ भी थे। उन्होंने लगभग 35 संवादात्मक ग्रंथों की रचना की, जिन्हें तीन भागों में विभाजित किया गया है- सुकरातकालीन संवाद, यात्रीकालीन संवाद और प्रौढ़कालीन संवाद। इनमें कुछ प्रमुख ग्रंथ हैं: ‘रिपब्लिक’, ‘स्टेट्समैन’, ‘प्रोटागोरस’ और ‘क्रीटो’ आदि। इस लेख में प्लेटो का जीवन और प्रमुख रचनाओं की जानकारी दी गई है।
| नाम | प्लेटो |
| अन्य नाम | अफलातून |
| जन्म | 429 या 423 ईसा पूर्व |
| जन्म स्थान | ईजिना द्वीप, एथेंस, ग्रीस |
| पिता का नाम | अरिस्टोन |
| माता का नाम | पेरिक्टोन |
| गुरु का नाम | सुकरात |
| शिष्य का नाम | अरस्तु |
| पेशा | दार्शनिक |
| स्थापना | शिक्षण ‘अकादमी’ |
| प्रमुख रचनाएँ | अपॉलॉजी, क्रीटो, रिपब्लिक, सोफिस्ट, स्टेट्समैन, फ़ेडो व लॉज आदि। |
| मृत्यु | 347 ईसा पूर्व |
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प्लेटो का जन्म
ग्रीक दार्शनिक प्लेटो का जन्म एथेंस के समीपवर्ती ईजिना नामक द्वीप में लगभग 429 या 427 ईसा पूर्व में हुआ था। उनका परिवार सामंती वर्ग से संबंधित था। प्लेटो के पिता का नाम ‘अरिस्टोन’ और माता का नाम ‘पेरिक्टोन’ था। उन्हें ‘अफलातून’ (Aflatoon) नाम से भी जाना जाता है।
प्लेटो के प्रारंभिक जीवन और शिक्षा के बारे में सीमित जानकारी उपलब्ध है, किंतु ऐसा कहा जाता है कि वे बचपन से ही अत्यंत कुशाग्र बुद्धि के थे और उनके भीतर दार्शनिक प्रवृत्ति के लक्षण अल्पायु से ही दिखाई देने लगे थे। उन्होंने प्रारंभ में व्याकरण, संगीत, शारीरिक शिक्षा और दर्शनशास्त्र की शिक्षा प्राप्त की थी।
प्रथम संस्था ‘अकादमी’ की स्थापना की
प्लेटो मूलतः एक महान दार्शनिक थे, साथ ही वे यूनान के एक प्रसिद्ध गणितज्ञ भी थे। वे यूनान के प्रसिद्ध दार्शनिक ‘सुकरात’ (Socrates) के शिष्य तथा ‘अरस्तु’ (Aristotle) के गुरु थे। पश्चिमी दर्शन की पृष्ठभूमि को तैयार करने में सुकरात, प्लेटो और अरस्तु की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका रही है।
ऐसा कहा जाता है कि अपने गुरु सुकरात की मृत्यु के बाद प्लेटो प्रजातांत्रिक शासन की कमियों से बहुत आहत हुए। इसके उपरांत उन्होंने मिस्र, इटली सहित कई देशों की यात्रा की और अंततः एथेंस लौटकर वहाँ ‘अकादमी’ नामक एक शिक्षण संस्था की स्थापना की, जो पाश्चात्य जगत में उच्च शिक्षा का पहला संगठित केंद्र माना जाता है।
प्लेटो का अनुकरण सिद्धांत
‘रिपब्लिक’ प्लेटो की महानतम और सर्वश्रेष्ठ कृति मानी जाती है। इसे उन्होंने लगभग 40 वर्ष की आयु में, जब उनके विचार परिपक्व और प्रौढ़ हो चुके थे, तब लिखा था। इस ग्रंथ में उन्होंने विचार को आधारभूत सत्य माना है। काव्य के संदर्भ में प्लेटो का मत था कि काव्य वस्तुओं की अनुकृति की भी अनुकृति है। वे अनुकरण (माइमेसिस) को समस्त कलाओं की मौलिक विशेषता मानते थे। इस दृष्टिकोण से कवि और कलाकार मात्र अनुकरणकर्ता हैं।
प्लेटो के अनुसार अनुकरण वह प्रक्रिया है, जो वस्तुओं को उनके यथार्थ रूप में नहीं, बल्कि आदर्श रूप में प्रस्तुत करती है। इसलिए काव्य सत्य से दूर होता है। उन्होंने मुख्यतः दो आधारों पर काव्य और कवियों का विरोध किया पहला, दर्शनशास्त्रीय दृष्टिकोण से; दूसरा, राज्य या लोककल्याण के हित को ध्यान में रखते हुए।
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प्लेटो का काव्य सिद्धांत
प्लेटो की काव्य सृजन प्रक्रिया के संबंध में यह मान्यता है कि सभी समर्थ कवि अपनी रचनाएँ केवल कलात्मक कौशल से नहीं, बल्कि दैवीय प्रेरणा और आध्यात्मिक उन्माद से करते हैं। उन्होंने अपने संवादों में कवि के ‘दिव्य पागलपन’ (Divine Madness) की चर्चा कई स्थानों पर की है। प्लेटो का यह भी मानना था कि सृजन-काल में परमात्मा कवि से उसका मस्तिष्क छीन लेता है और यह क्षमता दैवीय शक्ति की प्रेरणा से उदित होती है।
प्लेटो ने प्राचीन ग्रीक कवि ‘होमर’ की प्रसिद्ध काव्य कृतियाँ ‘इलियाड’ और ‘ओडिसी’ के संदर्भ में यह विचार व्यक्त किया कि इनमें भावावेग और कल्पनातिरेक अधिक है। उनका यह भी मत था कि कविता किसी साधारण कौशल से नहीं, बल्कि दिव्य प्रेरणा से उत्पन्न होती है, जो कवि को एक शृंखला की तरह जोड़ती और संचालित करती है।
प्लेटो की प्रमुख रचनाएँ
प्लेटो की प्रमुख कृतियों में उनके संवाद विशेष उल्लेखनीय हैं। प्लेटो ने लगभग 35 संवादों की रचना की है। इनके संवादों को तीन भागों में विभाजित किया जा सकता है- सुकरातकालीन संवाद, यात्रीकालीन संवाद और प्रौढ़कालीन संवाद। प्लेटो की रचनाओं में ‘द रिपब्लिक’ (Republic), ‘द स्टैट्समैन’ (Statesman), ‘द लाग’, ‘इयोन’, ‘सिम्पोजियम’ (Symposium) आदि प्रमुख हैं। बाकी कुछ प्रमुख ग्रंथों के नाम इस प्रकार हैं:-
- प्रोटागोरस
- हिप्पियास माइनर
- ऐपोलॉजी
- क्रीटो
- क्लाइसिस
- क्रेटिलस
- जॉजियस
- सिम्पोसियान
- फिलेब्रुस
- ट्रिमेर्यास
- रिपब्लिक
- फीडो
यह भी पढ़ें – महान पाश्चात्य दार्शनिक सुकरात का जीवन परिचय और विचार
FAQs
प्लेटो का जन्म एथेंस में समीपवर्ती ईजिना नामक द्वीप में 429 या 423 ईसा पूर्व के आसपास हुआ था।
प्लेटो एक प्राचीन यूनानी दार्शनिक और गणितज्ञ थे। उन्हें विभिन्न विषयों पर दार्शनिक चिंतन में उनके योगदान के लिए जाना जाता है।
माना जाता है कि प्लेटो की मृत्यु 348/347 ईसा पूर्व में हुई थी।
आशा है कि आपको पाश्चात्य दर्शन के जनक प्लेटो का जीवन परिचय पर हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य प्रसिद्ध और महान व्यक्तियों के जीवन परिचय को पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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2 comments
namster nirajbhai
ye aaj aapka pelto ke bare me mene pathay kiya
aap ne ye accha uska vichar Kiya he .ak bat aapko add karna batata hu ki aap uske jivas kon se aadar se achha bana vo bat aap batao .usne hamara purana shreemad Bhagvadgeeta ka vichar uske jivan me sanchar koya or vo aage badhe .uske bare me bhi aap ye aapka study me bata sakte ho.dhnyvad niraj ji.
नमस्ते तरूण जी, आपके सुझाव और टिप्पणी के लिए धन्यवाद। आपने जो श्रीमद्भगवद्गीता के संदर्भ में विचार रखने की बात कही है, वह बहुत महत्वपूर्ण है। आगे के अध्ययन में इस पहलू को भी शामिल करने का प्रयास करूंगा।