हिंदी साहित्य में कहानी विधा को जिन लेखकों ने अपनी प्रतिभा से पठनीय, लोकप्रिय और समृद्ध बनाया, उनमें एक नाम ‘सुदर्शन’ का भी है। वे हिंदी कथा-साहित्य में अग्रणी स्थान रखते हैं। आधुनिक हिंदी साहित्य में वे प्रेमचंद-युगीन कहानीकारों में गिने जाते हैं, जिन्होंने अपनी बहुमुखी प्रतिभा से गद्य और पद्य दोनों ही विधाओं को समृद्ध किया। बताया जाता है कि ‘हार की जीत’ उनकी पहली कहानी थी। यह कहानी हिंदी की श्रेष्ठतम कहानियों में से एक मानी जाती है। इस लेख में सुदर्शन का जीवन परिचय और उनकी प्रमुख साहित्यिक रचनाओं की जानकारी दी गई है।
| मूल नाम | पंडित बद्रीनाथ भट्ट |
| उपनाम | सुदर्शन |
| जन्म | लगभग सन 1896 के आसपास |
| जन्म स्थान | सियालकोट (वर्तमान पाकिस्तान) |
| पेशा | साहित्यकार, पटकथा लेखक, निर्देशन |
| भाषा | हिंदी, उर्दू |
| विधाएँ | उपन्यास, कहानी, फिल्म पटकथा, फिल्म निर्देशन, गीत व प्रहसन। |
| उपन्यास | भागवंती |
| कहानी-संग्रह | बचपन की एक घटना, परिवर्तन, पत्थरों का सौदागर, अपनी कमाई आदि। |
| प्रहसन | आननेरी मजिस्ट्रेट |
| निधन | 16 दिसंबर 1967 |
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सियालकोट में हुआ था जन्म
हिंदी साहित्य के प्रतिष्ठित साहित्यकार सुदर्शन का जन्म लगभग वर्ष 1896 के आसपास पाकिस्तान के सियालकोट में हुआ था। उनका मूल नाम ‘पंडित बद्रीनाथ भट्ट’ था, किंतु साहित्य-जगत में वे अपने उपनाम ‘सुदर्शन’ से विख्यात हुए। उनके माता-पिता और उनकी शिक्षा के बारे में विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है।
प्रेमचंदयुगीन कहानीकार थे सुदर्शन
सुदर्शन को हिंदी और उर्दू दोनों भाषाओं पर समान अधिकार प्राप्त था। वे प्रेमचंद-युगीन कहानीकार थे और कथासम्राट मुंशी प्रेमचंद तथा उपेंद्रनाथ अश्क की भांति प्रारंभ में मूलतः उर्दू में लेखन किया करते थे, किंतु बाद में उन्होंने हिंदी में साहित्य का सृजन किया।
सुदर्शन की साहित्यिक रचनाएँ
सुदर्शन ने आधुनिक हिंदी साहित्य की अनेक विधाओं में अनुपम कृतियों का सृजन किया है, जिनमें उपन्यास, कहानी, प्रहसन, गीत और फ़िल्म-पटकथा शामिल हैं। उनकी रचनाओं में प्रेमचंद-युग की सभी प्रमुख प्रवृत्तियाँ स्पष्ट रूप से दिखाई देती हैं। उन्होंने इस युग में सामाजिक, नैतिक और सुधारात्मक विषयों को आधार बनाकर लेखन किया। इन विषयों में बुराई पर अच्छाई की विजय, सुखांत कथानक, दुष्टों का हृदय-परिवर्तन और सुधारवादी दृष्टिकोण प्रमुख हैं। नीचे उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों की सूची दी गई है:-
उपन्यास
- भागवंती
कहानी-संग्रह
- बचपन की एक घटना
- परिवर्तन
- पत्थरों का सौदागर
- अपनी कमाई
- तीर्थ-यात्रा
- हेर-फेर
- सुप्रभात
- सुदर्शन-सुधा
प्रहसन
- आननेरी मजिस्ट्रेट
पटकथा
- सिकंदर
लोकप्रिय गीत
- तेरी गठरी में लागा चोर
- बाबा मन की आंखें खोल
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निधन
कई दशकों तक हिंदी और उर्दू साहित्य को अपनी बहुमुखी प्रतिभा से समृद्ध करने वाले सुदर्शन का निधन 16 दिसंबर, 1967 को 71 वर्ष की आयु में हुआ था। किंतु उनकी कालजयी रचनाओं के कारण उन्हें साहित्य-जगत में सदैव स्मरण किया जाता रहेगा।
FAQs
सुदर्शन का मूल नाम पंडित बद्रीनाथ भट्ट था, मगर वे लेखन में ‘सुदर्शन’ नाम से ही प्रसिद्ध हुए।
हार की जीत हिंदी के विख्यात साहित्यकार ‘सुदर्शन’ की सर्वश्रेष्ठ कहानी है।
‘भागवंती’ ‘सुदर्शन’ का लोकप्रिय उपन्यास है।
सुदर्शन का निधन 16 दिसंबर, 1967 को 72 वर्ष की आयु में हुआ था।
आशा है कि आपको हिंदी के प्रसिद्ध कहानीकार सुदर्शन का जीवन परिचय और साहित्यिक अवदान पर हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य प्रसिद्ध और महान व्यक्तियों के जीवन परिचय को पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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