“मैं भी बहुत अजीब हूँ इतना अजीब हूँ कि बस, ख़ुद को तबाह कर लिया और मलाल भी नहीं” ये शेर है उर्दू साहित्य के मशहूर शायरों में एक जॉन एलिया का। जिन्होंने अपने शब्दों में दर्द और मोहब्बत की ऐसी मिसाल पेश की कि लोग उन्हें दिल की गहराइयों से महसूस करते हैं। एलिया के शेर ना सिर्फ भारत-पकिस्तान में बल्कि पूरी दुनिया में बड़ी अदब के साथ पढ़े जाते हैं। इस वर्ष उनका 14 दिसंबर, 2026 को 95वां जन्मदिवस मनाया जाएगा। इस लेख में जॉन एलिया का जीवन परिचय और उनकी प्रमुख साहित्यिक कृतियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई है।
| मूल नाम | सैयद हुसैन सिब्त-ए-असगर नकवी |
| उपनाम | ‘जॉन एलिया’ |
| जन्म | 14 दिसंबर, 1931 |
| जन्म स्थान | अमरोहा, उत्तर प्रदेश |
| पिता का नाम | सय्यद शफ़ीक़ हसन एलिया |
| शिक्षा | एम.ए. |
| पत्नी का नाम | ज़ाहिदा हिना (Zahida Hina) |
| कार्य क्षेत्र | शायर, पत्रकार, विचारक, अनुवादक व गद्यकार। |
| भाषा | उर्दू, फ़ारसी |
| काव्य-संग्रह | शायद, गोया, लेकिन, यानी और गुमान आदि। |
| मृत्यु | 08 नवंबर, 2002 कराची, सिंध |
| वर्षगांठ 2026 | 95वीं |
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अविभाजित भारत में हुआ था जन्म
मशहूर शायर जॉन एलिया का जन्म 14 दिसंबर 1931 को उत्तर प्रदेश के अमरोहा जिले (अविभाजित भारत) में हुआ था। उनका असली नाम ‘सैयद हुसैन सिब्त-ए-असगर नकवी’ था, लेकिन शायरी के लिए उन्होंने ‘जॉन एलिया’ नाम अपनाया। उनके पिता का नाम ‘सैय्यद शफ़ीक़ हसन एलिया’ था, जो स्वयं एक शायर और विद्वान थे। पाकिस्तान के प्रख्यात पत्रकार रईस अमरोहवी और मशहूर मनोवैज्ञानिक मुहम्मद तक़ी, जॉन एलिया के भाई थे, जबकि मशहूर फिल्म निर्देशक साज़ कमाल अमरोही उनके चचेरे भाई थे। कुल पांच भाईयों में जॉन सबसे छोटे थे।
1947 भारत और पाकिस्तान का विभाजन
जॉन एलिया की प्रारंभिक शिक्षा अमरोहा के मदरसों में हुई, जहाँ उन्होंने अरबी, फारसी और उर्दू भाषाएँ सीखी। हालांकि प्रारंभ में पाठ्य-पुस्तकों में उनकी विशेष रुचि नहीं थी, लेकिन बाद में उनकी साहित्य में दिलचस्पी बढ़ गई। इसके परिणामस्वरूप उन्होंने उर्दू, फ़ारसी और दर्शन शास्त्र में एम.ए. की डिग्री प्राप्त की। जॉन अंग्रेज़ी और संस्कृत भाषा के भी ज्ञाता थे। वर्ष 1947 में देश विभाजन के दौरान उनका परिवार भारत छोड़कर पाकिस्तान के कराची शहर में बस गया। इसके बावजूद पाकिस्तान में रहते हुए उन्होंने अमरोहा को हमेशा अपने मन में संजोकर रखा। उनका कहना था, “पाकिस्तान आकर में हिन्दुस्तानी हो गया।”
विस्तृत रहा कार्य-क्षेत्र
जॉन एलिया ने शुरुआत में आजीविका के लिए रईस अमरोहवी की साहित्यिक पत्रिका ‘इंशा’ में संपादकीय लिखने का कार्य किया। इसके बाद उन्होंने ब्रिटिश आंदोलन से संबंधित विषयों सहित दर्शन शास्त्र, अंग्रेज़ी, अरबी और फ़ारसी की कई पुस्तकों का अनुवाद भी किया। ‘इंशा’ पत्रिका के दौरान उनकी मुलाकात जर्नलिस्ट और अफ़साना निगार ज़ाहिदा हिना से हुई, और वर्ष 1970 में दोनों का विवाह हुआ। इनकी तीन संतानें हुईं, लेकिन वर्ष 1984 में आपसी मतभेद के कारण उनका तलाक हो गया।
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जॉन एलिया की प्रमुख रचनाएँ
जॉन एलिया उर्दू अदब में सबसे अधिक पढ़े जाने वाले शायरों की फेहरिस्त में शीर्ष पर हैं। वह पुरानी परंपरा को तोड़ने वाले एक ऐसे शायर के रूप में याद किए जाते हैं जिन्होंने उर्दू अदब और उर्दू ज़बान को एक नई दुनिया से परिचित कराया। रेख़्ता की ऑफिशियल वेबसाइट के अनुसार वर्ष 1992 में उनका प्रथम काव्य-संग्रह ‘शायद’ प्रकाशित हुआ था जो कि काव्य प्रेमियों के बीच बहुत लोकप्रिय हुआ। नीचे उनकी समग्र साहित्यिक कृतियों की सूची दी गई है:-
काव्य-संग्रह
| काव्य-संग्रह | प्रकाशन |
| शायद | वर्ष 1992 |
| यानी | वर्ष 2003 |
| गुमान | वर्ष 2006 |
| गोया | वर्ष 2008 |
अनूदित कृतियाँ
- मसीह-ए-बगदाद हल्लाज
- ज्योमेट्रिया
- तवासिन
- इसागोजी
- रहीश-ओ-कुशैश
- रसल अख़्वान-उस-सफ़ा
विचार प्रधान लेख
- ‘फरनूद’ वर्ष 2012 में प्रकाशित जॉन एलिया के विचारप्रधान लेखों का संकलन है जिसमें वर्ष 1958 से 2002 के बीच लिखे गए निबंध और लेख शामिल हैं। इन लेखों में जॉन एलिया ने राजनीति, संस्कृति, इतिहास, भाषाशास्त्र जैसे विविध विषयों पर अपने विचार व्यक्त किए हैं।
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कराची में हुआ था निधन
जॉन एलिया का 8 नवंबर, 2002 को 70 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन के बाद पाकिस्तान सरकार ने उनके सम्मान में एक स्मारक डाक टिकट भी जारी किया। आज भी वे अपनी लोकप्रिय शायरी के लिए जाने जाते हैं और आने वाले समय में भी इसी कारण याद किए जाते रहेंगे।
FAQs
उनका मूल नाम ‘सैयद हुसैन सिब्त-ए-असगर नकवी’ था।
जॉन एलिया का जन्म अमरोहा, उत्तर प्रदेश में 14 दिसंबर 1931 को हुआ था।
उनकी पत्नी का नाम ज़ाहिदा हिना था।
जॉन एलिया का वर्ष 1992 में प्रथम काव्य-संग्रह ‘शायद’ प्रकाशित हुआ था।
जॉन एलिया का 08 नवंबर, 2002 को पाकिस्तान के कराची शहर में इंतकाल हुआ था।
आशा है कि आपको उर्दू के अजीम शायर जॉन एलिया का जीवन परिचय पर हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य प्रसिद्ध और महान व्यक्तियों के जीवन परिचय को पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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