Mother Teresa Biography in Hindi

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Mother Teresa Biography in Hindi

आपने अपने और अपने परिवार के लिए बहुत अच्छे-अच्छे सपने देखें होंगे, लेकिन क्या आपने अपने से अलग समाज के लिए कोई सपना देखा है? दुनिया में ऐसे बहुत कम लोग हैं, उनमें से एक हैं मदर टेरेसा। मदर टेरेसा को किसी परिचय की ज़रूरत नहीं हैं। इनके किए कार्य आपको खुद ही दिख जाएँगे। अपना जीवन दूसरों के नाम कर देना और उस पर सिर्फ चलते ही रहना यह है सामाजिक सद्भाव की भावना, आइए, बतातें हैं आपको Mother Teresa Biography in Hindi के बारे में विस्तार से – 

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बचपन से दयालु

Mother Teresa Biography in Hindi
Source – Angelus News

मदर टेरेसा का जन्म 26 अगस्त 1910 को नार्थ मेसेडोनिया में हुआ था, इनका नाम अगनेस गोंझा बोयाजिजू (Agnes Gonxha Bojaxhiu) था। इनके पिता एक व्यवसायी थी, जो येशु के अनुयायी थे। 1919 इनकी मौत हो गई, जिसके बाद मदर टेरेसा को उनकी माता ने बड़ा किया था। पिता के जाने se मदर टेरेसा के परिवार को आर्थिक परेशानी से गुजरना पड़ा। लेकिन उनकी माता ने उनको बचपन से ही मिल बाँट कर खाने और रहने की शिक्षा दी थी। Mother Teresa Biography in Hindi में उनमें बचपन से ही सामाजिक सद्भावना की भावना कूट-कूट के भरी थी।

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धार्मिक शिक्षा

Mother Teresa Biography in Hindi
Source – Biography

मदर टेरेसा ने अपनी स्कूल की पढ़ाई पूरी की. वह सुरीली आवाज की भी धनी थी। वे चर्च में अपनी माँ व बहन के साथ येशु की महिमा के गाने गाया करती थी। 12 साल की उम्र में वे अपने चर्च के साथ एक धार्मिक यात्रा में गई थी, जिसके बाद उनका मन बदल गया और उन्होंने येशु के वचन को दुनिया में फ़ैलाने का फैसला किया। 1928 में 18 साल के होने पर अगनेस ने बपतिस्मा लिया और क्राइस्ट को अपना लिया। इसके बाद वे डबलिन में जाकर रहने लगी, इसके बाद वे वापस कभी अपने घर नहीं गई और न अपनी माँ व बहन को दोबारा देखा। नन बनने के बाद उनका नया जन्म हुआ और उन्हें सिस्टर मेरी टेरेसा नाम मिला। Mother Teresa Biography in Hindi में धार्मिक शिक्षा लेने के बाद उनके अंदर समाज के लिए काफी बदलाव आए।

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लोगों का दर्द समझा

Mother Teresa Biography in Hindi
Source – Holyart

Mother Teresa Biography in Hindi में 1929 में मदर टेरेसा अपने इंस्टीट्यूट की बाकी नन के साथ मिशनरी के काम से भारत के दार्जिलिंग शहर आई। यहाँ उन्हें मिशनरी स्कूल में पढ़ाने के लिए भेजा गया था। मई 1931 में उन्होंने नन के रूप में प्रतिज्ञा ली। इसके बाद उन्हें भारत के कलकत्ता शहर के ‘लोरेटो कॉन्वेंट आ गईं’। यहाँ उन्हें गरीब बंगाली लड़कियों को शिक्षा देने को कहा गया। डबलिन की सिस्टर लोरेटो द्वारा सैंट मैरी स्कूल की स्थापना की गई, जहाँ गरीब बच्चे पढ़ते थे। मदर टेरेसा को बंगाली व हिंदी दोनों भाषा का बहुत अच्छे से ज्ञान था, वे इतिहास व भूगोल बच्चों को पढ़ाया करती थी। कई सालों तक उन्होंने इस कार्य को किया।

कलकत्ता में उन्होंने वहां की गरीबी, लोगों में फैलती बीमारी, लाचारी व अज्ञानता को करीब से देखा। ये सब बातें उनके मन में घर करने लगी और वे कुछ ऐसा करना चाहती थी, जिससे वे की तकलीफ कम कर सकें। 1937 में उन्हें मदर की उपाधि से सम्मानित किया गया। 1944 में वे सैंट मैरी स्कूल की प्रिंसीपल भी बन गई।

वह एक अनुशासित शिक्षिका थीं और विद्यार्थी उनसे बहुत स्नेह करते थे। वर्ष 1944 में वह हेडमिस्ट्रेस बन गईं। उनका मन शिक्षण में पूरी तरह रम गया था पर उनके आस-पास फैली गरीबी, दरिद्रता और लाचारी उनके मन को बहुत अशांत करती थी। Mother Teresa Biography in Hindi में मदर टेरेसा को लोगों की छोटी सी पीड़ा भी उनको असहाय कर देती थी।

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मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी

Mother Teresa Biography in Hindi
Source – The Independent

Mother Teresa Biography in Hindi में ‘मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ का आरम्भ मात्र 13 लोगों के साथ हुआ था। 1946 में उन्होंने गरीबों, असहायों, बीमारों और लाचारों की मदद करने का मन बना लिया। इसके बाद मदर टेरेसा ने पटना के होली फॅमिली हॉस्पिटल से आवश्यक नर्सिंग ट्रेनिंग पूरी की और 1948 में वापस कोलकाता आ गईं और वहां से पहली बार तालतला गई, जहां वह गरीब बुजुर्गो की देखभाल करने वाली संस्था के साथ रहीं।

धीरे-धीरे उन्होंने अपने कार्य से लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। इन लोगों में देश के उच्च अधिकारी और भारत के प्रधानमंत्री भी शामिल थे, जिन्होंने उनके कार्यों की सराहना की।

मदर टेरेसा के अनुसार, इस कार्य में शुरूआती दौर बहुत कठिन था। वह लोरेटो छोड़ चुकी थीं इसलिए उनके पास कोई आमदनी नहीं थी – उनको अपना पेट भरने तक के लिए दूसरों की मदद लेनी पड़ी।

7 अक्टूबर 1950 को उन्हें वैटिकन सिटी से ‘मिशनरीज ऑफ़ चैरिटी’ की स्थापना की अनुमति मिली। इस संस्था का उद्देश्य भूखों, निर्वस्त्र, बेघर, दिव्यांगों, चर्म रोग से ग्रसित और ऐसे लोगों की सहायता करना था जिनके लिए समाज में कोई जगह नहीं थी। मदर टेरेसा ने ‘निर्मल हृदय’ और ‘निर्मला शिशु भवन’ के नाम से आश्रम भी खोले।‘

जब वह भारत आईं तो उन्होंने यहाँ बेसहारा और विकलांग बच्चों और सड़क के किनारे पड़े असहाय रोगियों की दयनीय स्थिति को अपनी आँखों से देखा। इन सब बातों ने उनके ह्रदय को झकझोर दिया था। इसके पश्चात उन्होंने जनसेवा का जो व्रत लिया, जिसका पालन वो अनवरत करती रहीं। Mother Teresa Biography in Hindi में उनके रहते-रहते लोग उनके काम की तारीफ कर रहे थे।

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सम्मान और पुरस्कार

Mother Teresa Biography in Hindi
Source – Mother Tesera Catholic Elemantary School

मदर टेरेसा को मानवता की सेवा के लिए अनेक अंतर्राष्ट्रीय सम्मान एवं पुरस्कार प्राप्त हुए। उनके किए गए कार्य पूरी दुनिया में उन्हें प्रसिद्धि दिला रहे थे। तो आइए, नज़र डालते हैं Mother Teresa Biography in Hindi में उन्हें मिले सम्मान और पुरस्कार –   

  • 1962 में भारत सरकार से पद्मश्री
  • 1980 में भारत रत्न (देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान)
  • 1985 में अमेरिका का मेडल आफ़ फ्रीडम 
  • 1979 में नोबेल शांति पुरस्कार (मानव कल्याण के लिए किये गए कार्यों के लिए) 
  • मदर तेरस ने नोबेल पुरस्कार की 192,000 डॉलर की धन-राशि को गरीबों के लिए एक फंड के तौर पर इस्तेमाल करने का निर्णय लिया।
  • 2003 में पॉप जॉन पोल ने मदर टेरेसा को धन्य कहा, उन्हें ब्लेस्ड टेरेसा ऑफ़ कलकत्ता कहकर सम्मानित किया.

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देहांत

Mother Teresa Biography in Hindi
Source – The Catholic Register

वर्ष 1983 में 73 वर्ष की आयु में मदर टेरेसा को पहली बार दिल का दौरा पड़ा। उस समय मदर टेरेसा रोम में पॉप जॉन पॉल द्वितीय से मिलने के लिए गई थीं। दूसरा दिल का दौरा उन्हें 1989 में आया और उन्हें पेसमेकर लगाया गया। 1991 में मैक्सिको में न्यूमोनिया के बाद उनके ह्रदय की परेशानी और बढ़ गयी। इसके बाद उनकी सेहत लगातार गिरती रही। 5 सितंबर 1997 को उनकी मौत हो गई। उनकी मौत के समय तक ‘मिशनरीज ऑफ चैरिटी’ में 4000 सिस्टर और 300 अन्य सहयोगी संस्थाएं काम कर रही थीं जो विश्व के 123 देशों में समाज सेवा में कार्यरत थीं।

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मदर टेरेसा के अनमोल विचार

Mother Teresa Biography in Hindi
Source – Pinterest

Mother Teresa Biography in Hindi में आप जानेंगे उनके कुछ ऐसे विचार जिनका पालन करने से जिंदगी का नजरिया बदल सकता है. तो आइए, जानते उनके कुछ सबसे अच्छे विचार – 

  • “मैं चाहती हूँ कि आप अपने पड़ोसी के बारे में चिंतित रहें। क्या आप अपने पड़ोसी को जानते हैं?”
  • “यदि हमारे बीच शांति की कमी है तो वह इसलिए क्योंकि हम भूल गए हैं कि हम एक दूसरे से संबंधित हैं।”
  • “यदि आप एक सौ लोगों को भोजन नहीं करा सकते हैं, तो कम से कम एक को ही करवाएं।”
  • “यदि आप प्रेम संदेश सुनना चाहते हैं तो पहले उसे खुद भेजें। जैसे एक चिराग को जलाए रखने के लिए हमें दिए में तेल डालते रहना पड़ता है।”
  • “अकेलापन सबसे भयानक ग़रीबी है।”
  • “अपने क़रीबी लोगों की देखभाल कर आप प्रेम की अनुभूति कर सकते हैं।”
  • “अकेलापन और अवांछित रहने की भावना सबसे भयानक ग़रीबी है।”
  • “प्रेम हर मौसम में होने वाला फल है, और हर व्यक्ति के पहुंच के अन्दर है।”
  • “आज के समाज की सबसे बड़ी बीमारी कुष्ठ रोग या तपेदिक नहीं है, बल्कि अवांछित रहने की भावना है।”
  • “प्रेम की भूख को मिटाना, रोटी की भूख मिटाने से कहीं ज्यादा मुश्किल है।”
  • “अनुशासन लक्ष्यों और उपलब्धि के बीच का पुल है।”
  • “सादगी से जियें ताकि दूसरे भी जी सकें।”
  • “प्रत्येक वस्तु जो नहीं दी गयी है खोने के सामान है।”
  • “हम सभी महान कार्य नहीं कर सकते लेकिन हम कार्यों को प्रेम से कर सकते हैं।”
  • “हम सभी ईश्वर के हाथ में एक कलम के सामान है।”

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हमेशा आशा है कि आपको Mother Teresa Biography in Hindi का यह ब्लॉग आपको मदर टेरेसा के अच्छे कार्यों से जुड़ी जानकारी देगा। ऐसे ही और बेहतरीन ब्लॉग्स पढ़ने के लिए आप Leverage Edu पर जाकर पढ़ सकते हैं।

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