“जहाँ नदियाँ समुंद्र से मिलती हैं वहाँ मेरा क्या है, मैं नहीं जानता लेकिन एक दिन जाना है उधर” पंक्तियों के रचियता आलोक धन्वा आधुनिक हिंदी साहित्य में अपना अग्रणी स्थान रखते हैं। वहीं, साहित्य और शिक्षा के क्षेत्र में अपना विशेष योगदान देने के लिए उन्हें बिहार राष्ट्रभाषा परिषद का ‘साहित्य सम्मान’, ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ व ‘पहल सम्मान’ से पुरस्कृत किया जा चुका है। इस लेख में कवि आलोक धन्वा का जीवन परिचय और उनकी साहित्यिक रचनाओं की जानकारी दी गई है।
| नाम | आलोक धन्वा |
| जन्म | 2 जुलाई, 1948 |
| जन्म स्थान | मुंगेर जिला, बिहार |
| शिक्षा | स्वाध्याय |
| पत्नी का नाम | क्रांति भट्ट |
| भाषा | हिंदी |
| विधाएँ | कविता |
| कविता-संग्रह | ‘दुनिया रोज़ बनती है’ |
| पुरस्कार एवं सम्मान | ‘साहित्य सम्मान’, ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’ व ‘पहल सम्मान’ आदि। |
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बिहार के मुंगेर जिले में हुआ था जन्म
आधुनिक हिंदी कविता के प्रतिष्ठित कवि आलोक धन्वा का जन्म 2 जुलाई, 1948 को बिहार के मुंगेर जिले में हुआ था। बता दें कि उनके माता-पिता व शिक्षा के बारे में अधिक जानकारी उपलब्ध नहीं है। जानकारी के अनुसार, आलोक धन्वा की पत्नी का नाम ‘क्रांति भट्ट’ हैं। ‘क्रांति भट्ट रंगमंच की कलाकार और अभिनेत्री हैं। उनके पिता ‘सुरेश भट्ट’ जानेमाने समाजसेवी थे।
रंगकर्म और साहित्य से जुड़े रहे
आलोक धन्वा ने रंगकर्म और साहित्य के विकास में अपना अतुलनीय योगदान दिया है। साथ ही उन्होंने कई अध्ययन मंडलियों का संचालन किया है। यह भी उल्लेखनीय है कि वे रंगकर्म और साहित्य पर कई राष्ट्रीय संस्थानों एवं विश्वविद्यालयों में अतिथि व्याख्याता रह चुके हैं। वह महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय विश्वविद्यालय, वर्धा में राइटर-इन-रेज़िडेंस भी रह चुके हैं। इसके अतिरिक्त वह वर्ष 2014 से 2017 तक ‘बिहार संगीत नाटक अकादमी’ के अध्यक्ष रहे हैं।
आलोक धन्वा का साहित्यिक परिचय
माना जाता है कि आलोक धन्वा का साहित्य में पर्दापण वर्ष 1972 में हुआ था। वहीं, उनकी पहली कविता ‘जनता का आदमी’ साहित्यिक ‘वाम पत्रिका’ में छपी थी। इसके कुछ समय बाद उनकी दूसरी कविता ‘गोली दागो पोस्टर’ ‘फ़िलहाल’ पत्रिका में प्रकाशित हुई। बताना चाहेंगे सातवें-आठवें दशक में उन्होंने अपनी कुछ चंद कविताओं से आपार लोकप्रियता हासिल की थी। उनका पहला कविता संग्रह ‘दुनिया रोज बनती है’ वर्ष 1988 में प्रकाशित हुआ था। ‘मुलाकातें’ उनका दूसरा कविता-संग्रह है।
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आलोक धन्वा की साहित्यिक रचनाएँ
आलोक धन्वा ने आधुनिक हिंदी साहित्य की काव्य विधा में मुख्य रूप से लेखन कार्य किया है। यहां उनकी प्रमुख साहित्यिक रचनाओं के बारे में बताया गया है:-
कविता-संग्रह
- दुनिया रोज बनती है
- मुलाकातें
नई कविताएँ
- चेन्नई में कोयल
- ओस
- फूलों से भरी डाल
- पाने की लड़ाई
- मुलाक़ातें
- आम के बाग़
- गाय और बछड़ा
- नन्हीं बुलबुल के तराने
- बारिश
- सवाल ज़्यादा है
- रात
- उड़ानें
- श्रृंगार
- रेशमा
- भूल
रचनाओं का कई भाषाओं में हुआ अनुवाद
आलोक धन्वा की कविताएँ अंग्रेज़ी के साथ-साथ कई भारतीय भाषाओं में अनूदित हुई हैं। यह उल्लेखनीय है कि प्रो. डेनियल वाइसबोर्ट और गिरधर राठी के संपादन में साहित्य अकादमी द्वारा प्रकाशित हिंदी कविताओं के अंग्रेज़ी संकलन ‘Survival’ में भी उनकी कविताएँ संकलित हैं। इसके अलावा, अमेरिकी पत्रिका ‘Critical Inquiry’ में भी उनके काव्य का अंग्रेज़ी अनुवाद प्रकाशित हो चुका है।
पुरस्कार एवं सम्मान
आलोक धन्वा को आधुनिक काव्य और शिक्षा के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान देने के लिए सरकारी एवं गैर-सरकारी संस्थाओं द्वारा कई प्रतिष्ठित पुरस्कार एवं सम्मान प्रदान किए गए हैं, जिनकी सूची इस प्रकार है:-
- बिहार राष्ट्रभाषा परिषद का ‘साहित्य सम्मान’
- ‘पहल सम्मान’
- ‘बनारसी प्रसाद भोजपुरी सम्मान’
- ‘नागार्जुन सम्मान’
- ‘फ़िराक़ गोरखपुरी सम्मान’
- ‘गिरिजा कुमार माथुर सम्मान’
- ‘भवानीप्रसाद मिश्र स्मृति सम्मान’
- ‘प्रकाश जैन स्मृति सम्मान’
- ‘राहुल सम्मान’
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FAQs
आलोक धन्वा की प्रमुख रचनाएं हैं, जनता का आदमी, भागी हुई लड़कियां और ब्रूनो की बेटियां।
‘पतंग’ कविता प्रख्यात कवि आलोक धन्वा के काव्य-संग्रह ‘दुनिया रोज़ बनती है’ में संकलित है।
आलोक धन्वा की कविता सरल, प्रभावी भाषा में गहरी संवेदनाएं और सशक्त सामाजिक संदेश प्रस्तुत करती है, जहां जटिलता कम और व्यावहारिकता अधिक होती है।
आशा है कि आपको कवि आलोक धन्वा का जीवन परिचय पर हमारा यह ब्लॉग पसंद आया होगा। ऐसे ही अन्य प्रसिद्ध कवियों और महान व्यक्तियों के जीवन परिचय को पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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