होली क्यों मनाते हैं? (Holi Kyu Manate hai)

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Festival in Hindi

होली का त्यौहार हिंदू धर्म का पवित्र और मुख्य त्यौहारों में से एक है। होली हम सब मनाते हैं।होली का त्यौहार रंगों का त्योहार है जो वसंत ऋतु में मनाया जाता है।होली का त्योहार होली की रात्रि से एक दिन पूर्व आरंभ हो जाता है। लोग अपने-अपने गाँवों, मुहल्लों में उपलों, लकड़ियों का ढेर इकट्ठा करते हैं। फिर शुभ घड़ी में इस ढेर यानी होलिका में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। इसी अग्नि में लोग नए अनाज (गेहूँ, जौ आदि) की बालें भूनकर अपने आराध्य को अर्पित करते हैं । होलिका दहन का अगला दिन रंग-भरी होली का होता है। इसे धुलैंडी भी कहते हैं। इस दिन सभी धर्म और जाति के छोटे-बड़े, बच्चे-बूढ़े, स्त्री-पुरुष एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं और रंग डालते हैं। सड़कों पर मस्त युवकों की टोलियाँ गाती-बजाती निकलती हैं। एक-दूसरे को मिठाइयाँ खिलाते हैं और अपने मधुर संबंधों को और भी प्रगाढ़ बनाते हैं।Holi kyu manate hai इसकी पूरी जानकारी नीचे दी गई है यह बहुत आकर्षक और सीख देने वाली कहानी है आइए देखते हैं

Holi Essay in Hindi

Holi Kyu Manate Hai? रंगों का त्योहार होली

Courtesy: Flickr

होली एक ऐसा पवित्र त्योहार है, जिसमें छोटे-बड़े, अमीर-गरीब, जाति-पाँति आदि सभी प्रकार के भेदभाव समाप्त हो जाते हैं। प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे को गले लगा लेता है। लोग पुरानी से पुरानी शत्रुता भी होली के दिन भुला देते हैं।परंतु यह सब मनाने के बाद भी कई लोग Holi kyu manate hai यह नहीं जानते होली क्यों मनाई गई होली मनाए जाने का कारण कई लोगों को पता नहीं है इसलिए कई लोगों का प्रश्न होता है कि Holi kyu manate hai इसी का जवाब हम नीचे देने जा रहे हैं:

होली मनाए जाने के पीछे कहानी

रंगों के त्यौहार में सभी रंग को है भरमार ,
ढेर सारी खुशियों से भरा आपका संसार ,
यही दुआ है भगवान से हमारी हर बार,
होली मुबारक हो मेरे यार!
हिरण्यकश्यप और प्रहलाद की अत्यधिक प्रचलित कहानी

हर त्योहार के पीछे कोई न कोई कहानी या किस्सा प्रचलित होता है। ‘होली’ मनाए जाने के पीछे भी एक कहानी है। कहते हैं कि प्राचीनकाल में हिरण्यकश्यप नामक राजा बड़ा ही अत्याचारी तथा अत्यंत बलशाली असुर राजा था।अपनी शक्ति के मद में चूर होकर वह स्वयं को भगवान मानने लगा। जो अपने को ही भगवान समझता था। उसने सारी प्रजा को आदेश दिया कि सब लोग ईश्वर की आराधना छोड़कर केवल उसी की आराधना किया करें, प्रजा भगवान के स्थान पर उसकी पूजा करती थी,पर उसका बेटा प्रहलाद ईश्वर का अनन्य भक्त था।

Courtesy: Patrika

उसने अपने पिता की बात न मानी। उसने ईश्वर की भक्ति में ही अपने को लगाए रहा। पिता के क्रोध की सीमा न रही। हिरण्यकश्यप ने प्रहलाद को मरवाने के बहुत उपाय किए, पर ईश्वर की कृपा से कोई भी उपाय सफल न हो सका।

हिरण्यकश्यप की एक बहन थी, जिसका नाम था, होलिका। उसे यह वरदान प्राप्त था कि आग उसे जला नहीं सकती। हिरण्यकश्यप की आज्ञा से प्रहलाद को होलिका की गोदी में बिठाकर आग लगा दी गई, पर ईश्वर की महिमा अपरंपार होती है। प्रहलाद तो बच गया, पर होलिका जल गई। इसी घटना की याद में हर साल रात को होली जलाई जाती है और अगले दिन रंगों का त्योहार बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। 

भगवान कृष्ण पर आधारित कहानी

प्यार के रंगों से भरो पिचकारी, 
स्नेह के रंगों से रंग दो दुनिया सारी! 
यह रंग ना जाने ना कोई जात न बोली ,
सबको हो मुबारक ये हैप्पी होली!

होली का पर्व किस खुशी में मनाया जाता है, इसके विषय में अनेक कथाएँ प्रचलित हैं। एक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने दुष्टों का वध कर गोप व गोपियों के साथ रास रचाई तब से होली का प्रचलन हुआ।

COURTESY: POPSUGAR

वृंदावन में श्री कृष्ण ने राधा और गोप गोपियों के साथ रंगभरी होली खेली थी इसी कारण वृंदावन की होली सबसे अच्छी और विश्व प्रसिद्ध मानी जाती है। इस मान्यता के अनुसार जब श्री कृष्ण। दुष्टों का संहार करके वृंदावन लौटे थे तब से होली का प्रचलन हुआ हिंदू धर्म में एक ही त्यौहार के मनाए जाने के पीछे कई कहानियां है परंतु Holi kyu manate hai? इसके पीछे जुड़ी श्री कृष्ण की कहानी को बहुत कम लोग जानते हैं। हिंदू मान्यता के अनुसार श्री कृष्ण ने रंगों के माध्यम से  रास रचाई तब से होली का प्रचलन हुआ। सूरदास नंददास आदि कृष्ण भक्त कवियों ने श्री कृष्ण और राधा के होली खेलने का बड़ा ही मनोहारी वर्णन उनके पदों में किया है। आज भी वृंदावन की कुंज गलियों में जब सुनहरी पिचकारी उसे रंग बिरंगे फव्वारे छूटते हैं तथा अबीर गुलाल बिखरता है तो स्वयं देवता भी भारत भूमि में जन्म लेना चाहने लगते हैं देश विदेश से अनेक लोग वृंदावन की होली देखने आते हैं।

परंतु होली के विषय में सबसे प्रसिद्ध कथा प्रह्लाद और अत्याचारी हिरण्यकश्यप की है। Holi kyu manate hai यह जानना हमारे लिए जरूरी है यह हमें जानकारी के साथ-साथ प्रतियोगी परीक्षाओं और हिंदू धर्म पर आधारित कथाओं को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित भी करता है।

होली मनाए जाने के पीछे का भाव

COURTESY: BRITANNICA

होली के दिन लोग एक दूसरे से मिलने जाते हैं जहां गुलाल और रंग से उनका स्वागत किया जाता है। इस दिन लोग अपनी शत्रुता भूलकर शत्रु को भी गले लगा लेते हैं। होली के रंग में रंगकर धनी-निर्धन, काले-गोरे, ऊंच-नीच, स्त्री-पुरुष, बालक-वृद्ध के बीच की सभी दीवारें टूट जाती है मनुष्य केवल मनुष्य रह जाता है।इस दिन सभी धर्म और जाति के छोटे-बड़े एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं। होली मनाए जाने की पीछे का भाव यह है  कि लोग एक-दूसरे से शत्रुता को भूल जाए। और फिर से रिश्तों की शुरुआत करें होली का त्योहार आपसी मतभेद और बेर को दूर करने का त्योहार है।

होली के अलग-अलग रूप

विश्व के अलग-अलग कोने में अलग-अलग तरह से होली खेली जाती है कहीं फूल भरी होली तो कहीं लठमार होली तो कहीं होली का नाम ही अलग होता है। होली खेलने का तरीका भले ही सबका अलग अलग हो लेकिन होली हर जगह रंगों के साथ जरूर खेली जाती है तो आइए देखते हैं अलग-अलग होली कैसे मनाई जाती है-

वृंदावन और मथुरा में होली

COURTESY: NEWSTV18

उत्तर प्रदेश के ये मंदिर शहर होली मनाने के लिए जगह-जगह हैं! होली के अनूठे उत्सव का अनुभव करने के लिए हर साल मार्च के महीने में दुनिया भर के लोग इन दो शहरों में जाते हैं। मथुरा में, होली का उत्सव एक भव्य प्रसंग है क्योंकि यह भगवान कृष्ण की जन्मभूमि है; मंदिरों को सजाया गया है और घाटों के चारों ओर संगीतमय जुलूस सुने जा सकते हैं। लोग मजेदार रस्मों में भाग लेते हैं जैसे लठामार होली, फूलन वाली होली और लोकप्रिय रंगवाली होली। वृंदावन में बांके बिहारी मंदिर होली उत्सव के लिए आकर्षण का केंद्र है जहाँ लोग फूलों का उपयोग कर होली खेलते हैं! ये उत्सव आश्चर्यजनक और एक सप्ताह से अधिक समय तक चलते हैं।

पंजाब में होली

courtesy: adotrip

पंजाब में होला मोहल्ला नामक एक त्योहार है जो हिंदू त्योहार होली के साथ मेल खाता है। यह तीन दिवसीय त्योहार है जहां सिख अपनी सैन्य शैली और साहस का प्रदर्शन करके अपनी संस्कृति और सिख योद्धाओं को मनाते हैं। इसमें घुड़सवारी, रंगों के साथ खेलना, भांगड़ा, संगीत बजाना और कविता पाठ करना जैसे कई मजेदार समारोह शामिल हैं!

राजस्थान में होली

Braj Holi in Rajasthan
Courtesy: TourMyIndia

हिंदू राजघरानों का घर; यह राज्य जानता है कि होली कैसे मनाई जाती है! होली के लिए सबसे अच्छे शहर अजमेर, उदयपुर, पुष्कर, बीकानेर और जयपुर हैं; उत्सव की शुरुआत होलिका के पुतलों को जलाने और होली की पूर्व संध्या पर अलाव जलाने से होती है, अगले दिन लोगों को लोक संगीत का आनंद लेते हुए देखा जा सकता है, लोक नाटकों और सड़कों पर नृत्य किया जा सकता है! राजस्थान में माली होली जैसी विविधताएँ भी हैं जहाँ पुरुष महिलाओं पर रंग फेंकते हैं जबकि महिलाएँ कपड़े या डंडे के टुकड़ों से प्रतिशोध लेती हैं। 

केरल में होली

courtesy: bookmyflowers

हालांकि यह छुट्टी केरल में एक नीची मामला है और उत्तरी राज्यों में होने वाले पागलपन के आसपास कहीं नहीं है। इसका नाम मंजुल कुली है और कुछ मंदिरों में कोंकणी समुदायों, कुडुम्बी और गौड़ सारावत ब्राह्मणों द्वारा मनाया जाता है। अनुष्ठानों में होली की पूर्व संध्या पर अलाव जलाना या देवी दुर्गा को अर्पित करने के लिए मिट्टी से मगरमच्छ का निर्माण करना और बुराई पर लड़ाई शामिल है। अगले दिन इन समुदायों के सभी सदस्य रंगों, पानी की बंदूकें और नृत्य के साथ खेलते हैं!

होली सेलिब्रेशन अब्रॉड! 

courtesy: thinkright.me

जबकि हजारों विदेशी होली मनाने के लिए भारत आते हैं, लेकिन भारतीय उन लोगों के लिए त्योहार ले गए हैं जो नहीं कर सकते। यह पागल त्योहार नेपाल, संयुक्त राज्य अमेरिका, कनाडा, न्यूजीलैंड, यूनाइटेड किंगडम, दक्षिण अफ्रीका, ऑस्ट्रेलिया और अधिक जैसे देशों में लोकप्रिय है! यहां तक कि लोकप्रिय विश्वविद्यालय जैसे ब्रिटेन में ससेक्स विश्वविद्यालय, कनाडा में ब्रिटिश कोलंबिया विश्वविद्यालय, संयुक्त राज्य अमेरिका में फ्लोरिडा अंतर्राष्ट्रीय विश्वविद्यालय और ऑस्ट्रेलिया में मोनाश विश्वविद्यालय।

Happy Holi 2021: Splash into the Spring with the Queen Festival of Colors!

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