Holi Essay in Hindi

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अनुशासन पर निबंध [Essay on Discipline]

पर्व मैं किसी भी जाति के जीवन में मनोरंजन और ऊर्जा भरते हैं ।प्रत्येक देश की संस्कृति के अनुसार ही का निर्धारण होता है ।कुछ पर्व जातीय घटनाओं और स्मृतियों पर आधारित होते हैं ।जैसे -होली, दिवाली, दशहरा हिंदुओं की  जातीय  स्मृति के परिचायक है। कुछ पर्व सामाजिक संबंधों को सुदृढ़ करने के लिए होते हैं। कुछ पर्व पूरे देश की अखंडता से संबंधित होते हैं। इनमें से होली का त्योहार भी एक निबंध लेखन का महत्वपूर्ण विषय है। कई परीक्षाओं में इस विषय पर Holi Essay in Hindi (निबंध) पूछा जाता है आइए देखते हैं होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है?होली मनाए जाने के पीछे कहानी? होली का वर्णन? होली को पवित्र क्यों माना जाता है ?आदि। इस ब्लॉग में Holi Essay in Hindi (होली के निबंध लेखन) के कई नमूने नीचे दिए गए हैंI

Holi Essay in Hindi Sample 1(होली पर निबंध नमूना 1)

होली: रंगों का त्योहार

संकेत बिंदु:
1.प्रस्तावना 
2.होली मनाए जाने के पीछे कहानी 
3.होली का वर्णन 
4.उपसंहारI

1.प्रस्तावना 

होली का त्योहार रंगों का त्योहार है, जो बसंत ऋतु में मनाया जाता है । सारी प्रकृति में रंग-बिरंगे फूल वसंत के आगमन का  मानो हृदय से स्वागत करते हैं। बसंत के रंगों का प्रतीक बनकर यह त्योहार हर साल फागुन मास में पूर्णिमा के दिन बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसीलिए फागुन का महीना मौज-मस्ती का महीना कहा जाता है। 

2.होली मनाए जाने के पीछे कहानी 

Holi essay in Hindi
Image Source: TRIPSAVVY

हर त्योहार के पीछे कोई ना कोई कहानी या किस्सा प्रचलित होता है। होली मनाए जाने की पीछे भी एक कहानी है। कहते हैं कि हिरण्यकश्यप नामक राजा बड़ा ही अत्याचारी था, जो अपने को ही भगवान समझता था। उसने सारी प्रजा को आदेश दिया था कि सब लोग ईश्वर की आराधना छोड़कर केवल उसी की आराधना किया करें, पर उसका बेटा प्रहलाद ईश्वर का अनन्य भक्त था। उसने अपने पिता की बात ना मानी। उसने ईश्वर की भक्ति में ही अपने को लगाए रहा। पिता की क्रोध की सीमा न रही हिरण्यकश्यप प्रहलाद को मरवाने के बहुत उपाय किए, ईश्वर की कृपा से कोई भी उपाय सफल ना हो सका।  हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम था होलिका। उसे यह वरदान प्राप्त था कि आग उसे जला नहीं सकती। हिरण्यकश्यप की आज्ञा से प्रहलाद को होलिका की गोदी में बिठा कर आग लगा दी गई पर ईश्वर की महिमा अपरंपार होती है। प्रह्लाद तो बच गया पर होलिका जल गई।इसी घटना की याद में हर साल रात को होली जलाई जाती है और अगले दिन रंगों का त्योहार  बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है।

3.होली का वर्णन

होली का त्योहार होली की रात्रि से एक दिन पूर्व आरंभ हो जाता है। लोग अपने अपने गांव,मोहल्ले में उपलो,लकड़ियों का ढेर इकट्ठा करते हैं । फिर शुभ घड़ी में इस ढेर यानी होलिका में अग्नि प्रज्वलित की जाती है। इसी अग्नि में लोग नए  अनाज की बाली भूनकर  अपने आराध्य को अर्पित करते हैं।

 होलिका दहन अगला दिन रंग-भरी होली का होता है। इसे धुलैंडी भी कहते हैं। इस दिन सभी धर्म और जाति के छोटे-बड़े बच्चे-बूढ़े, स्त्री-पुरुष एक दूसरे को गुलाल लगाते हैं और रंग डालते हैं।सड़कों पर मस्त युवकों की टोली गाती बजाती निकलती है। एक-दूसरे को मिठाईयां खिलाते हैं और अपने मधुर संबंधों को और भी प्रगाढ़ बनाते हैं।

4.उपसंहार

इसी प्रकार होली एक ऐसा पवित्र त्योहार है। जिसमें छोटे-बड़े ,अमीर-गरीब आदि सभी प्रकार के भेदभाव समाप्त हो जाते हैं।प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे को गले लगा लेता है। लोग पुरानी से पुरानी शत्रुता भी होली के दिन भुला देते हैं। 

यह Holi Essay in Hindi पर पहला नमूना था I अगले नमूने पर चलते हैं

Holi Essay in Hindi Sample 2 (होली पर निबंध नमूना 2) 

रंगों का त्योहार होली

संकेत बिंदु :
1.हिंदुओं का पवित्र धार्मिक पर्व होली
2.होली से जुड़ी कथाएं
3.धुलैंडी
4.वृंदावन की होली विश्व प्रसिद्ध
5.बड़े दुख की बात है कि आज होली का रूप  विकृत हो रहा है I

राग-रंग का पर्व होली हिंदुओं का लोकप्रिय पर्व है। होली आनंद उत्साह का, मौज और मस्ती का, रवानी और जवानी का, रंगीनी और अलमस्ती की यादगार का रंगों से सराबोर महोत्सव है। वास्तव में होलिका दहन और होलिकोत्सव नास्तिकता पर आस्तिकता का, बुराई पर भलाई का, पाप पर पुण्य का तथा दानवता पर देवत्व की विजय का मांगलिक पर्व है ।

होली का त्योहार फाल्गुन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है यह पर्व बसंत के आगमन का संदेशवाहक है। यह त्योहार पूर्णिमा से पूर्व बसंत पंचमी से ही शुरू हो जाता है। होली का पर्व किस खुशी में मनाया जाता है, इसके विषय में अनेक कथाएं प्रचलित है। एक कथा के अनुसार भगवान कृष्ण ने दुष्टों का वध कर गोपियों के साथ रास रचाई तब से होली का प्रचलन हुआ, परंतु होली के विषय में सबसे प्रसिद्ध कथा इस प्रकार है-

 प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नामक अत्यंत बलशाली राजा था। अपनी शक्ति के मद में चूर होकर वह स्वयं को भगवान मानने लगा। उसकी प्रजा भगवान की स्थान पर उसकी पूजा करती थी, परंतु उसका अपना पुत्र प्रहलाद ईश्वर भक्त था । हिरण्यकश्यप ने  वध के अनेक  उपाय किए, परंतु वह सफल ना हो सका। फिर उसने प्रहलाद को आग में जलाकर मार डालना चाहा।हिरण्यकश्यप की एक बहन थी जिसका नाम होलिका था।होलिका को यह वरदान प्राप्त था कि वह आग में नहीं  जल सकती। हिरण्यकश्यप के आदेश पर होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर लकड़ियों के ढेर में पर बैठ गई। उस घर में आग लगा दी गई परंतु भगवान की लीला तो अद्भुत है ।जिस होलिका को आग में न जलने का वरदान प्राप्त था, वह तो जल गई और प्रहलाद का बाल बांका भी नहीं हुआ।

फाल्गुन की पूर्णिमा के दिन स्त्रियां व्रत रखती है और होली पूजने जाती है। किसी चौक में अथवा खुले स्थान पर लकड़ियों के ढेर या उपलो से होली बनाई जाती है। रात्रि के समय निश्चित समय पर होली जलाई जाती है होली की आग में गेहूं तथा चने की बालियां भूलने की परंपरा है।  इसे होलिका दहन कहते हैं।

 होली से अगला दिन अर्थात चैत्र की प्रतिपदा को लोग रंग खेलते हैं। इसे धुलंडी कहते हैं । लोग एक दूसरे से मिलने के लिए उनके घर जाते हैं जहां गुलाल और रंग से उनका स्वागत किया जाता है इस दिन लोग अपनी शत्रुता भूलकर शत्रु को भी गले लगाते हैं। होली के रंग में रंगकर धनी-निर्धन, काले-गोरे, ऊंच-नीच, स्त्री- पुरुष, बालक-वृद्ध के बीच  की सभी दीवारें टूट जाती है, मनुष्य केवल मनुष्य रह जाता है।

 वृंदावन की होली विश्व प्रसिद्ध है। सूरदास, नंददास आदि कृष्ण भक्त कवियों ने श्री कृष्ण और राधा के होली खेलने का बड़ा ही मनोहारी वर्णन अनेक पदों में किया है। आज भी वृंदावन की कुंज गलियों में जब सुनहरी पिचकारियों  से  रंग बिरंगे  फव्वारे छूटते है  तथा गुलाल बिखरता है तो स्वयं देवता भी भारत भूमि में जन्म लेना चाहने लगते हैं। देश विदेश से अनेक लोग वृंदावन की होली देखने आते हैं।

 बड़े दुर्भाग्य की बात है कि आजकल होली का रूप बिगड़ गया है। लोग रासायनिक रंगों का प्रयोग करने लगे हैं, बच्चे गुब्बारे मारते हैं। कुछ लोग कीचड़ आदि भी डालते हैं। अनेक व्यक्ति शराब,गांजा,भांग,चरस आदि का सेवन करते हैं, गंदे गाने गाते हैं तथा गाली-गलौज करते हैं। हमें शीघ्र-अतिशीघ्र इस त्योहार से इन बुराइयों को दूर करना चाहिए। तभी हम अपनी संस्कृति पर गर्व कर सकते हैं।

 होली प्रेम व भाईचारे का त्योहार है, रंगों का त्योहार है, हर्षोल्लास का त्यौहार है। होली का गुलाबी रंग प्रेम का प्रतीक है। होली मनुष्यों को आपस में जोड़ने का त्योहार है कवि मैथिलीशरण गुप्त होली का सजीव चित्रण इन पंक्तियों में प्रकट करते हैं:

काली- काली कोयल बोली, होली, होली, होली ।
फूटा यौवन फाड़ प्रकृति की पीली, पीली, चोली। । 

यह Holi Essay in Hindi पर हमारा दूसरा नमूना था I आशा है आपको पसंद आया होगा I

कई परीक्षाओं में होली का त्योहार क्यों मनाया जाता है?होली मनाए जाने के पीछे कहानी? होली का वर्णन? होली को पवित्र क्यों माना जाता है ? इस विषय पर निबंध पूछा जाता है I उम्मीद है इस Holi Essay in Hindi (होली पर निबंध) आप की परीक्षाओं में आपके काम आएगा और भी जानकारी लेने के लिए Leverage Edu के एक्सपर्ट्स आपकी सहायता करेंगे।

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