सॉफ्टवेयर डेवलपर कैसे बनें?

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विदेश में पढ़ने से बढ़ती है एशिया लिटरेसी
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आज के इस डिजिटल युग में, टेक्नोलॉजी दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है, हमारे देश के अधिकांश छात्र कंप्यूटर क्षेत्र में रुचि ले रहे हैं क्योंकि इस विस्तृत क्षेत्र में करियर की संभावनाएं अधिक हैं, जैसे- कंप्यूटर हार्डवेयर इंजीनियर, सॉफ्टवेयर इंजीनियर, सॉफ्टवेयर डेवलपर, वेब डेवलपर, सिस्टम ऑपरेटर आदि। यदि आप सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में अपना करियर बनाना चाहते हैं, तो इस ब्लॉग के माध्यम से हम आपको बताएंगे की सॉफ्टवेयर डेवलपर कैसे बनें। 

प्रोफाइल सॉफ्टवेयर डेवलपर
कोर्स  -BSc computer science/BCA
-MSc computer science/MCA
Btech in software engineering
Computer science (अन्य संबंधित कोर्स )
कोर्स अवधि  डिप्लोमा कोर्स: 3 साल
-बैचलर डिग्री: 3 से 4 साल
-मास्टर डिग्री: 2 से 3 साल
-पीजी डिप्लोमा कोर्स: 1 से 2 साल
सैलरी  6 लाख रुपये से लेकर 12 लाख रुपये सालाना

सॉफ्टवेयर डेवलपर कौन होते हैं?

एक सॉफ्टवेयर डेवलपर वह व्यक्ति होता है जो सॉफ्टवेयर बनाने के साथ उसे डेवलप भी करता है। सॉफ़्टवेयर डेवलपर का कार्य अक्सर सॉफ़्टवेयर को डिज़ाइन करने या लिखने से अधिक होता है, यह आमतौर पर परियोजना का प्रबंधन करता है या केवल मुख्य चीजें करता है। अधिकांश सॉफ्टवेयर डेवलपर्स का नेतृत्व अभी भी एक लीड प्रोग्रामर द्वारा किया जाता है।

सॉफ्टवेयर डेवलपर के प्रकार

सॉफ्टवेयर डेवलपर के कई प्रकार होते हैं उनमें से मुख्य की लिस्ट नीचे दी गई है :

  • वेब डेवलपर
  • बैकेंड डेवलपर
  • फ़्रंटेन्ड डेवलपर
  • लैंग्वेज/कम्पाइलर डेवलपर
  • एम्बेडेड सिस्टम डेवलपर
  • ऑपरेटिंग सिस्टम्स डेवलपर
  • डाटा साइंटिस्ट
  • वीडियो गेम डेवलपर
  • डेवलपमेंट और ऑपरेशन्स डेवलपर
  • डेस्कटॉप डेवलपर
  • मोबाइल ऐप्स डेवलपर

सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में करियर क्यों चुनें? 

सॉफ्टवेयर डेवलपर को करियर के रूप में क्यों चुनें ये जानने के लिए नीचे दिए गए पॉइंट्स पढ़ें:

  • इंफॉर्मेशन और टेक्नोलॉजी क्षेत्र के तेजी से विकास के कारण सॉफ्टवेयर डेवलपर मांग में हैं। सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट प्रोग्रामिंग भाषाओं और कई सॉफ्टवेयर के डिजाइन और विकास पर केंद्रित है।
  • सॉफ्टवेयर डेवलपर के रूप में आपको सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट के मूल सिद्धांतों के बारे में जानने को मिलता है। 
  • आप निजी और साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में काम कर सकते हैं।
  • यह बड़े सॉफ्टवेयर की कठिनाईयों को कम करता है। बड़ा सॉफ्टवेयर हमेशा थोड़ा जटिल और चुनौती भरा होता है। डेवलपर के द्वारा बड़े प्रोजेक्ट की कठिनताओं को कम किया जा सकता है। जिससे छोटी प्रॉब्लम को आसानी से सॉल्व किया जा सकता है।
  • कोर्स करते समय स्टूडेंट्स को बड़े प्रोजेक्ट को हैंडल करना, प्लानिंग करना, मेथड्स को फॉलो करना, सॉफ्टवेयर को डेवलप करना आदि सब सिखाया जाता है जो आगे जाकर डेवलपर के काम आता है।

सॉफ्टवेयर डेवलपर कोर्स अवधि 

सॉफ्टवेयर डेवलपिंग से संबंधित विभिन्न प्रकार के कोर्स की अवधि निम्नानुसार है:

  • डिप्लोमा कोर्स: 3 साल
  • बैचलर डिग्री: 3 से 4 साल
  • मास्टर डिग्री: 2 से 3 साल
  • पीजी डिप्लोमा कोर्स: 1 से 2 साल

सॉफ्टवेयर डेवलपर की स्किल्स

सॉफ्टवेयर डेवलपर के पास नीचे दी गई जरुरी स्किल्स होनी चाहिए, तभी वह अपने काम को अच्छे से कर पाएंगे। 

  • कोडिंग: एक सॉफ्टवेयर डेवलपर को अपने करियर में सफल होने के लिए कोडिंग की जानकारी होनी चाहिए।
  • संचार कौशल: सॉफ्टवेयर डेवलपर के पास अच्छी कम्युनिकेशन स्किल्स का होना जरूरी है।
  • समस्या को सुलझाने के कौशल: अपने काम में सॉफ्टवेयर डेवलपर को बहुत सारी परेशानी का सामना करना पड़ता है इसलिए समस्या को सुलझाने का कौशल होना चाहिए। 
  • रिसर्च स्किल:सॉफ्टवेयर डेवलपर को जानकारी खोजने और एक्सप्लेन करने के लिए रिसर्च स्किल्स की आवश्यकता होती है।
  • लचीलापन: सॉफ्टवेयर डेवलपर के लिए लचीलापन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह उन्हें विफलताओं के बाद भी वापस खड़ा होना पड़ता है।
  • साइबर सुरक्षा: सॉफ्टवेयर डेवलपर के लिए साइबर सुरक्षा को समझना महत्वपूर्ण है, क्योंकि वे अक्सर उन कंपनियों और व्यक्तियों के लिए प्रोग्राम और सॉफ्टवेयर कोडिंग करते हैं, जो अपनी जानकारी को निजी रखना चाहते हैं।

सॉफ्टवेयर डेवलपर की जिम्मेदारियां

एक प्रोग्रामर आमतौर पर केवल कोड लिखता है, लेकिन एक सॉफ्टवेयर डेवलपर पर कई जिम्मेदारियां होती है, जिनके बारे में नीचे बताया गया है:

  • क्रिएट किए गए सॉफ्टवेयर को चेंज करना या उसे अपडेट करना।
  • सॉफ्टवेयर में किसी भी प्रकार के एरर को सही करना।
  • सॉफ्टवेयर को नए हार्डवेयर में अपडेट करना।
  • सॉफ्टवेयर के इंटरफेस को अच्छा करना।
  • सॉफ्टवेयर की परफॉर्मेंस को सुधारना।
  • सॉफ्टवेयर सिस्टम टेस्टिंग करना। 
  • सॉफ़्टवेयर का उपयोग करने के लिए आवश्यकताओं को पूरा करता है। 
  • सॉफ्टवेयर डेवलपर प्रोटोटाइप विकसित करता है। 
  • परियोजना के बजट और वित्त पर काम करता है। 
  • सॉफ़्टवेयर जारी होने से पहले उनके द्वारा चुने गए परीक्षकों से विचार करता है।  
  • प्रदर्शनों या नमूनों पर काम करता है। 
  • सॉफ़्टवेयर के लिए अपडेट और पैच जारी करता है। 

सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिए स्टेप बाय स्टेप गाइड

सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिए स्टेप बाय स्टेप गाइड नीचे दी गई है:

  • सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिए सबसे पहले आपको किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से साइंस स्ट्रीम में 10+2 उत्तीर्ण करना होगा। 
  • 12वीं कक्षा पास करने के बाद किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से कंप्यूटर साइंस में ग्रेजुएशन करना होगा। या किसी मान्यता प्राप्त संस्थान/यूनिवर्सिटी से सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग डिग्री या डिप्लोमा कोर्स करना होगा। 
  • सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग में BE/B.Tech/ME/M.Tech डिग्री प्राप्त करनी होगी। 
  • इंजीनियरिंग कोर्स करने के बाद इंटर्नशिप करनी होगी। 
  • किसी कंपनी में फ्रेशर के तौर पर काम करना होगा और सॉफ्टवेयर बनाने एवं डेवेलोप करने का प्रयास करना होगा। 

सॉफ्टवेयर डेवलपर कोर्स

सॉफ्टवेयर डेवलपिंग से संबंधित विभिन्न प्रकार के कोर्स निम्नानुसार है:

  • BSc computer science/BCA
  • MSc computer science/MCA
  • Btech in software engineering
  • Computer science (अन्य संबंधित कोर्स )

सॉफ्टवेयर डेवलपर के विषय

सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिए सामान्य विषयों की जानकारी नीचे दी गई है:

  • कंप्यूटर प्रोग्रामिंग
  • कार्यक्रम डिजाइन
  • कंप्यूटर सिस्टम विश्लेषण
  • हार्डवेयर के मूल सिद्धांत
  • डेटाबेस, एसक्यूएल, और जेडीबीसी
  • फाइनल प्रोजेक्ट इंटरएक्टिव ग्रेडिंग
  • कंप्यूटर आर्किटेक्चर
  • प्रोफेशल अवेयरनेस 
  • मैथमेटिक्स फॉर कंप्यूटिंग 
  • इंट्रोडक्शन टू डेटाबेस 
  • अकादमिक स्किल्स फॉर कंप्यूटिंग 
  • फाइल आईओ, एक्सेप्शन हैंडलिंग वीक
  • डाटा स्ट्रक्चर्स
  • ऑब्जेक्ट-ओरिएंटेड प्रोग्रामिंग वीक
  • इनहेरिटेंस, इंटरफेससवीक
  • डिबगिंग, लॉगिंग वीक
  • मल्टीथ्रेडिंग बेसिक्स
  • उन्नत मल्टीथ्रेडिंग
  • रेगुलर एक्सप्रेशन, यूनिट परीक्षण
  • वेब, सॉकेट्स, HTML, HTTP
  • सर्वलेट्स, जेट्टी, कुकीज, सेशंस

टॉप विदेशी यूनिवर्सिटीज़

सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने की पढ़ाई करने के लिए यहां दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटीज़ की लिस्ट दी गई हैं :

टॉप भारतीय यूनिवर्सिटीज़

  • सभी आईआईटी 
  • C JM यूनिवर्सिटी कानपुर
  • दिल्ली विश्वविद्यालय
  • भोपाल बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, बनारस
  • बीएमएस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, बैंगलोर
  • जादवपुर विश्वविद्यालय, कोलकाता
  • बिरला इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मेसरा
  • गवर्नमेंट कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, कोयंबटूर
  • गवर्नमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज
  • देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर
  • मद्रास क्रिश्चियन कॉलेज, चेन्नई
  • गुरु गोविंद सिंह इंद्रप्रस्थ विश्वविद्यालय, दिल्ली
  • ऑक्सफोर्ड कॉलेज ऑफ साइंस बैंगलोर
  • नेताजी सुभाष इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी दिल्ली

सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिए योग्यता

सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने की पढ़ाई करने के लिए योग्यता नीचे उल्लिखित हैं: 

  • छात्र को 10+2 न्यूनतम 50% के साथ साइंस स्ट्रीम से पास करना होगा।
  • सॉफ्टवेयर इंजीनियरिंग के लिए छात्रों को  JEE Main,JEE Advanced, MHT CET, OJEE, BCECE जैसे एंट्रेंस एग्जाम पास करने होंगे। विदेश में बैचलर्स कोर्स के लिए SAT या ACT एग्जाम पास करना होगा। 
  • यदि आप सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिए मास्टर डिग्री करना चाहते हैं, तो बैचलर्स डिग्री का होना आवश्यक है।
  • विदेश में सॉफ्टवेयर डेवलपर में मास्टर डिग्री प्रोग्राम में एडमिशन लेने के लिए छात्रों के पास एक अच्छा GRE स्कोर होना चाहिए। 
  • विदेश में सॉफ्टवेयर डेवलपर बनने के लिए एक अच्छा IELTS/ TOEFL स्कोर अंग्रेजी भाषा की दक्षता के रूप में में होना आवश्यक है। 
  • विदेश में कुछ यूनिवर्सिटीज कुछ स्पेसिफिक कोर्सेज के लिए के लिए 2 वर्ष के अनुभव की भी मांग करती है, जिसका समय यूनिवर्सिटी के लिए अलगअलग भी हो सकता है।

आवेदन प्रक्रिया

विदेश के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया इस प्रकार है–

  • आपकी आवेदन प्रक्रिया का फर्स्ट स्टेप सही कोर्स चुनना है, जिसके लिए आप AI Course Finder की सहायता लेकर अपने पसंदीदा कोर्सेज को शॉर्टलिस्ट कर सकते हैं। 
  • एक्सपर्ट्स से कॉन्टैक्ट के पश्चात वे कॉमन डैशबोर्ड प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई विश्वविद्यालयों की आपकी आवेदन प्रक्रिया शुरू करेंगे। 
  • अगला कदम अपने सभी दस्तावेजों जैसे SOP, निबंध (essay), सर्टिफिकेट्स और LOR और आवश्यक टेस्ट स्कोर जैसे IELTS, TOEFL, SAT, ACT आदि को इकट्ठा करना और सुव्यवस्थित करना है। 
  • यदि आपने अभी तक अपनी IELTS, TOEFL, PTE, GMAT, GRE आदि परीक्षा के लिए तैयारी नहीं की है, जो निश्चित रूप से विदेश में अध्ययन करने का एक महत्वपूर्ण कारक है, तो आप Leverage Live कक्षाओं में शामिल हो सकते हैं। ये कक्षाएं आपको अपने टेस्ट में उच्च स्कोर प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण कारक साबित हो सकती हैं।
  • आपका एप्लीकेशन और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद, एक्सपर्ट्स आवास, छात्र वीजा और छात्रवृत्ति / छात्र लोन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करेंगे । 
  • अब आपके प्रस्ताव पत्र की प्रतीक्षा करने का समय है जिसमें लगभग 4-6 सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। ऑफर लेटर आने के बाद उसे स्वीकार करके आवश्यक सेमेस्टर शुल्क का भुगतान करना आपकी आवेदन प्रक्रिया का अंतिम चरण है। 

भारत के विश्वविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया, इस प्रकार है–

  • सबसे पहले अपनी चुनी हुई यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट में जाकर रजिस्ट्रेशन करें।
  • यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक यूजर नेम और पासवर्ड प्राप्त होगा।
  • फिर वेबसाइट में साइन इन के बाद अपने चुने हुए कोर्स का चयन करें जिसे आप करना चाहते हैं।
  • अब शैक्षिक योग्यता, वर्ग आदि के साथ आवेदन फॉर्म भरें।
  • इसके बाद आवेदन फॉर्म जमा करें और आवश्यक आवेदन शुल्क का भुगतान करें। 
  • यदि एडमिशन, प्रवेश परीक्षा पर आधारित है तो पहले प्रवेश परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करें और फिर रिजल्ट के बाद काउंसलिंग की प्रतीक्षा करें। प्रवेश परीक्षा के अंको के आधार पर आपका चयन किया जाएगा और लिस्ट जारी की जाएगी।

आवश्यक दस्तावेज़ 

कुछ जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट नीचे दी गई हैं–

प्रवेश परीक्षाएं

सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट कोर्स में एडमिशन लेने के लिए एंट्रेंस एग्जाम की लिस्ट नीचे दी गई है: 

टॉप रिक्रूटर्स

सॉफ्टवेयर डेवलपर के लिए टॉप रिक्रूटिंग कंपनीज़ की लिस्ट नीचे दी गई हैं:

  • Google
  • Flipkart
  • Accenture
  • Mahindra Tech
  • HCL
  • Tata Consultancy Services
  • Wipro
  • Infotech
  • TCS
  • IBM
  • Oracle
  • Infosys
  • Cognizant
  • Microsoft
  • Symantec

सॉफ्टवेयर डेवलपर की सैलरी

Pay scale और Glassdoor के अनुसार एक सॉफ्टवेयर डेवलपर 6 लाख रुपये से लेकर 12 लाख रुपये सालाना कमा सकता है। वहीं विदेश में यूके, यूएसए, कनाडा, जर्मनी जैसे देशों में 8 लाख से 30 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ-साथ सैलरी में भी बढ़ती है। 

FAQs

सॉफ्टवेयर डेवलपर की सैलरी कितनी होती है?

Pay scale और Glassdoor के अनुसार एक सॉफ्टवेयर डेवलपर 6 लाख रुपये से लेकर 12 लाख रुपये सालाना कमा सकता है। वहीं विदेश में यूके, यूएसए, कनाडा, जर्मनी जैसे देशों में 8 लाख से 30 लाख रुपये तक कमा सकते हैं। अनुभव बढ़ने के साथ-साथ सैलरी में भी बढ़ती है। 

सॉफ्टवेयर डेवलपर के लिए टॉप रिक्रूटिंग कंपनीज़ कौनसी हैं?

Google, Flipkart, Accenture, Mahindra Tech, HCL, Tata Consultancy Services, Wipro, Infotech, IBM, TCS आदि सॉफ्टवेयर डेवलपर के लिए टॉप रिक्रूटिंग कंपनीज़ हैं।

सॉफ्टवेयर डेवलपर कौन होते हैं?

एक सॉफ्टवेयर डेवलपर वह व्यक्ति होता है जो सॉफ्टवेयर बनाने के साथ उसे डेवलप भी करता है। सॉफ़्टवेयर डेवलपर का कार्य अक्सर सॉफ़्टवेयर को डिज़ाइन करने या लिखने से अधिक होता है, यह आमतौर पर परियोजना का प्रबंधन करता है या केवल मुख्य चीजें करता है। अधिकांश सॉफ्टवेयर डेवलपर्स का नेतृत्व अभी भी एक लीड प्रोग्रामर द्वारा किया जाता है।

सॉफ्टवेयर डेवलपर कितने प्रकार के होते हैं?

सॉफ्टवेयर डेवलपर के कई प्रकार होते हैं उनमें से मुख्य की लिस्ट नीचे दी गई है :
वेब डेवलपर
बैकेंड डेवलपर
फ़्रंटेन्ड डेवलपर
लैंग्वेज/कम्पाइलर डेवलपर
एम्बेडेड सिस्टम डेवलपर
ऑपरेटिंग सिस्टम्स डेवलपर
डाटा साइंटिस्ट
वीडियो गेम डेवलपर
डेवलपमेंट और ऑपरेशन्स डेवलपर
डेस्कटॉप डेवलपर
मोबाइल ऐप्स डेवलपर

उम्मीद है, कि इस ब्लॉग ने आपको सॉफ्टवेयर डेवलपर कैसे बनें के बारे में सभी जानकारी मिल गई होगी। यदि आप विदेश में सॉफ्टवेयर डेवलपर की पढ़ाई करना चाहते हैं, तो हमारे Leverage Edu एक्सपर्ट्स के साथ 30 मिनट का फ्री सेशन 1800 572 000 पर कॉल कर बुक करें।

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