ऑर्थोपेडिक डॉक्टर कैसे बनें?

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हमारे देश में आज भी एक डॉक्टर के प्रोफेशन को अव्वल दर्जे के पेशों में से माना जाता है। विश्व भर में इनकी मांग को देखते हुए युवा पीढ़ी अपनी दसवीं कक्षा के पश्चात साइंस स्ट्रीम चुनकर डॉक्टर बनने का विकल्प चुनना पसंद कर रही है। हालांकि ये इतना आसान टास्क भी नहीं जिसे हर कोई कर पाएं। डॉक्टर बनने की प्रक्रिया काफी लम्बी और कठिन मानी जाती है जिसमें आपकी पढ़ाई और प्रैक्टिकल आपके चुनें गए स्पेशलाइज़ेशन पर भी निर्भर करती है। डॉक्टर के प्रकार और उससे जुड़ी विस्तृत जानकारी के लिए ऑर्थोपेडिक डॉक्टर पर आधारित यह ब्लॉग आखिर तक पढ़ें। 

विषय  ऑर्थोपेडिक डॉक्टर 
ऑर्थोपेडिक प्रैक्टिस के प्रकार -हैंड एंड अपर एक्सट्रेमिटी 
-फुट एंड एंकल 
-मस्क्युलोस्केलेटेल ऑन्कोलॉजी 
-पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स 
-स्पोर्ट्स मेडिसिन 
-स्पाइन सर्जरी 
-ट्रॉमा सर्जरी 
-जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी आदि।
स्किल्स  -कम्युनिकेशन स्किल्स
-इमोशनल इंटेलिजेंस
-प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स
-अटेंशन टू डिटेल स्किल
-डिसीज़न मेकिंग स्किल्स
टॉप रिक्रूटर्स  -Tata Memorial Center
-Fortis Hospital
-AIIMS
-UPSC
-Apollo Hospital
-Ganga Hospital
-Government Medical Institutions
-Private Medical Institutions
-CMC, Vellore
-Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital
-RML Hospital, Delhi
-PGIMER

ऑर्थोपेडिक क्या है?

ऑर्थोपेडिक मुख्यतः मेडिसिन और मनुष्य की हड्डी से जुड़ी समस्याओं के क्षेत्र में स्टडी और ट्रीटमेंट के बारे में हैं। इस स्टडी और रिसर्च में मुख्य रूप से रीड की हड्डी, जॉइंट्स और मसल्स पर फोकस किया जाता है। बारीकी से जानें तो यह स्टडीज़ मनुष्य के शरीर में हड्डी से जुड़ी समस्याओं और रिसर्च से डील करता है। जिसमें ज़्यादातर उसमें आने वाली बीमारियों, कठिनाईयों और अन्य नए आयामों के बारे में जांच के साथ-साथ उनसे निपटने के तरीके भी शामिल हैं। 

विश्व में बढ़ती बीमारियों के चलते आज डॉक्टर्स की मांग अत्याधिक बढ़ गई है। भोजन में न्यूट्रिशंस की कमी, गलत खान पान और वर्क लाइफ इसका मुख्य कारण हैं। इसके कारण ही डॉक्टर बनने के क्षेत्र में हर श्रेणी और शरीर के हिस्से का अलग डॉक्टर देखने को मिल सकता है। ऐसे ही हड्डियों के विषय में गहन जानकारी और रिसर्च के कार्य के लिए एक व्यक्ति ऑर्थोपेडिक की गहराई में पढ़ाई करता है। ऑर्थोपेडिक यानी हड्डियों से जुड़ी जानकारी के लिए पढ़ाई करने वाले और डिग्री पूर्ण करने वाले व्यक्ति को ऑर्थोपेडिक डॉक्टर कहा जाता है। आइए ऑर्थोपेडिक प्रैक्टिस के प्रकार समझते हुए कौन होते है ऑर्थोपेडिक डॉक्टर जानते हैं विस्तार से । 

ऑर्थोपेडिक प्रैक्टिस के प्रकार

एक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर अपने ही क्षेत्र में एक विशेष ब्रांच चुन सकता है। इन ब्रांचेज को सबस्पेशलाइज़ेशन के नाम से जाना जाता है। कुछ सबस्पेशलाइज़ेशन के नाम निम्नलिखित हैं :-

  • हैंड एंड अपर एक्सट्रेमिटी 
  • फुट एंड एंकल 
  • मस्क्युलोस्केलेटेल ऑन्कोलॉजी 
  • पीडियाट्रिक ऑर्थोपेडिक्स 
  • स्पोर्ट्स मेडिसिन 
  • स्पाइन सर्जरी 
  • ट्रॉमा सर्जरी 
  • जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी आदि। 

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर कौन होते है? 

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर मेडिकल फील्ड का वो प्रकार है जिसमें एक मेडिकल स्टूडेंट मुख्यतः हड्डियों और मासपेशियों के बारे में पढ़ता है और उन्हीं पर रिसर्च कर उनसे जुड़ी बारीकियों को जानकर मरीज़ों की परेशानियों का निवारण करता है। हालांकि कुछ स्टूडेंट्स शरीर में हड्डी और मासपेशी से जुड़ी हर परेशानियों से डील करते है जबकि कुछ शरीर के कुछ अंगो को लक्ष्य बनाकर उन्हीं से जुड़ी समस्यायों के निवारण करने में सक्षम होते हैं। उदाहरण के तौर पर कुछ ऑर्थोपेडिक डॉक्टर्स सिर्फ रीड की हड्डी, जोड़ और मांसपेशियों से जुड़ी परेशानियों से डील करते हैं।

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ऑर्थोपेडिक डॉक्टर क्यों बनें?

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के कुछ बेहतरीन फायदे निम्नलिखित हैं :-

  • समय अनुसार लोगों के जोड़ और रीड की हड्डी से जुड़ी समस्यायों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है जिस कारण एक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की मांग विश्व भर में बढ़ोतरी पर है। 
  • आज के समय के वर्क कल्चर अनुसार, सभी लोग अपनी नौकरी और उससे जुड़े काम लैपटॉप या कंप्यूटर के सामने घंटो बैठकर करते हैं। जिसके कारण रीड की हड्डी और गर्दन में स्ट्रेन आने की समस्याएं युवा पीढ़ी में भी भारी मात्रा में देखने को मिली है। जिससे हड्डियों के स्पेशलिस्ट की मांग बढ़ती नज़र आ रही हैं। 
  • डॉक्टर बनने के क्षेत्र में वैसे तो हर स्पेशलाइजेशन की अपनी एक महत्वता है जिसकी पॉप्युलैरिटी अपनी-अपनी जगह काफी अधिक है और आगे बढ़ती नज़र आ रही है। 
  • विदेश की अगर बात करें तो आपकी पढ़ाई, स्कोर और कला अनुसार आप विदेश में भी बेहतर पर्फ़ोम कर सकते हैं। एक ऑर्थोपेडिक होने के नाते आप कुछ स्टेप्स को फॉलो कर विदेश के अस्पताल में भी अपनी जगह पा सकते हैं। 

आवश्यक स्किल्स 

पढ़ाई में अच्छे होने के साथ-साथ एक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर में कुछ महत्वपूर्ण स्किल्स का होना आवश्यक है जो एक छात्र को बेहतर डॉक्टर बनने के लिए अनिवार्य है। एक अच्छे ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए एक व्यक्ति में निम्नलिखित स्किल्स होना अनिवार्य है:

  • कम्युनिकेशन स्किल्स

करियर के हर पड़ाव पर कम्युनिकेशन की स्किल आपको बहुत लाभ पंहुचा सकती है। यह आपको अपनी बात कहने में और दूसरे व्यक्ति की बात समझने में मदद करती है जोकि आगे बढ़ने के लिए अति आवश्यक स्किल्स मानी जा सकती है। मरीजों से बात करना, उनकी समस्या को बेहतर तरीके से सुनना विचार करना और हालात अनुसार उनका जवाब दे पाना इस स्किल्स के भीतर आता है।

  • इमोशनल इंटेलिजेंस

कई बार परिस्थितियों के अनुसार आपको अपने भाव को आगे रखकर मरीज़ की बात को गहराई से समझने की आवश्यकता पड़ती है जिसमें आपके भाव को महसूस करने की प्रक्रिया को तीव्र होना माईने रखता है। इसलिए एक डॉक्टर को इमोशनल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करना ज़रूरी है।

  • प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स

मेडिकल फील्ड एक तरह से डिटेक्टिव वर्क जैसा माना जाता है जिसमें छोटी-छोटी कड़ियों को जानकार आपको अंजाम और मुख्य समस्या तक पहुंचना होता है। इस कार्य के लिए आपकी चीज़ों को सुलझाने और समस्या की गहराई तक जाने की स्किल्स काम में आती है जिसे प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स कहा जा सकता है।

  • अटेंशन टू डिटेल स्किल

एक डॉक्टर को बहुत से ऐसे क्षण देखने को मिलते है जिसमें आपको कम समय में सटीक काम करने की आवश्यकता होती है। अस्पताल जैसी जगह जहाँ छोटी बातें नज़रंदाज़ होने की गुंजाइश ज़्यादा रहती है वहां भी आपको हर छोटी डिटेल पर विस्तार से और ध्यान से जांच करने की आवश्यकता होगी। यह स्किल आपको छोटी चीज़ों पर भी बारीकी से ध्यान देने के बारे में है।

  • डिसीज़न मेकिंग स्किल्स

फैसले लेने की कला यहाँ बहुत आवश्यक मानी गयी है। एक डॉक्टर के हाथ में एक मरीज़ की जान और उसकी बेहतरी की ज़िम्मेदारी होती है और सही समय पर सही फैसला किसी की जान बचा भी सकता है और खतरे में भी डाल सकता है। एक डॉक्टर के अंदर सही और फास्ट फैसले लेने की कला या स्किल्स होना अनिवार्य है।

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ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए स्टेप बाए स्टेप गाइड 

एक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनना आसान नहीं। इस क्षेत्र को चुनने के बारे में सोचने से ही आपकी गंभीरता और फैसले लेने की प्रक्रिया में बदलाव आ जाता है। एक एवरेज स्टूडेंट अपनी दसवीं के बाद मेडिकल लेने की नहीं सोच सकता। इसी स्टेप से मालूम पड़ता है कि अगर आप अपनी पढ़ाई में गंभीरता से जुड़े हैं तो ही इस फील्ड की और कदम रख सकते हैं। अगर आप ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने की ख्वाहिश को सच्चाई में बदलना चाहते है तो दिए गए स्टेप्स आपको आपके लक्ष्य की और तेज़ी से ले जाएंगे।

  • दसवीं के बाद साइंस चुनें : डॉक्टर बनने की शुरुआत के लिए आपको अपनी दसवीं पार करने के बाद साइंस स्ट्रीम को चुनना आवश्यक है जिससे आपको साइंस के बेसिक विषयों की जानकारी प्राप्त होती है। इसके अलावा आपके दसवीं के मार्क्स भी ज़रूरी है जिसके आधार पर ही स्कूल आपको साइंस स्ट्रीम देने योग्य समझता है।
  • सही डिग्री चुनें : डॉक्टर बनने के लिए मुख्य तौर पर बैचलर ऑफ़ मेडिसिन और बैचलर ऑफ़ सर्जरी (MBBS) की डिग्री को बेसिक कोर्स माना गया है। अपनी बारहवीं के बाद आपको MBBS डिग्री का चुनाव करना होगा जोकि एक पांच साल की अवधि वाली अंडरग्रेजुएट डिग्री है। भारत में डिग्री चुनने के निर्णय के बाद आपको एक एंट्रेंस एग्जाम भी देना अनिवार्य होता है जिनमे से कुछ के नाम इस प्रकार हैं :- NEET, AIIMS और JIPMER MBBS एग्ज़ाम आदि। यह प्रोग्राम एक मेंडेटरी इंटर्नशिप और 12 महीने के ट्रेनिंग पीरियड के साथ पूरा किया जाता है।
  • ट्रेनिंग : अपनी ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद आपको एक ऑर्थोपेडिक रेज़ीडेंसी प्रोग्राम के अंतर्गत 5 साल की ट्रेनिंग पूरी करनी होगी। ध्यान रहे कि आपका यह प्रोग्राम एक्रेडिटेशन कौंसिल फॉर ग्रेजुएट मेडिकल एज्युकेशन से या रॉयल कॉलेज ऑफ़ फिज़िशियन एंड सर्जन्स ऑफ़ कनाडा से अप्रूवड होना अनिवार्य माना गया है। 
  • ख़ुद को रजिस्टर करें : एक डॉक्टर बनने का सफर सिर्फ डिग्री पाकर और ट्रेनिंग लेकर पूरा नहीं होता। समाज में अपनी ऑथेंटिकेशन दिखाने के लिए आपको रजिस्टर होना और किसी विशेष डिपार्टमेंट से सर्टिफाइड होना आवश्यक है। जो यह प्रमाण देता है कि आप अपनी सर्विस समाज में देने योग्य हैं और आप पर भरोसा किया जा सकता है।
  • उच्च डिग्री चुनें : MBBS पूरी करने के बाद भी आप अपनी पढ़ाई को जारी रखकर मेडिसिन में उच्च डिग्री प्राप्त कर सकते हैं। इसमें आपको अपनी पसंद अनुसार विकल्प चुनकर डॉक्टर ऑफ़ मेडिसिन या MD डिग्री के लिए अप्लाई कर सकते हैं। या फिर आप चाहें तो डॉक्टर के प्रकारों में से किसी और विकल्प को चुनकर उसमें अपना भविष्य बना सकते हैं। ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए आपको ऑर्थोपेडिक विषय का चुनाव करना होगा। विकल्पों में कार्डियोलॉजी, न्यूरोलॉजी, गाइनेकोलॉजी आदि भी शामिल हैं। अगर आप सर्जन बनना चाहते हैं तो मास्टर डिग्रीज में मास्टर ऑफ़ सर्जरी और MS डिग्री भी चुनें जा सकतें हैं। आप तौर पर पोस्टग्रैजुएशन डिग्री की अवधि तीन साल मानी गयी है जिसमें सिलेबस में थ्योरी और प्रैक्टिकल दोनों का समावेश शामिल होता है। एक उच्च डिग्री आपको भविष्य में बेहतर ऑप्शंस की तरफ लेकर जाती है।
  • किसी हस्पताल से जुड़ें या स्वतंत्र रूप से अभ्यास करें : MBBS की डिग्री पूरी करने और ऑर्थोपेडिक में उच्च डिग्री हासिल करने के बाद आपने ख़ुद को रजिस्टर कराया। इसके बाद आप चाहें तो कोई अस्पताल चुन सकतें या स्वतंत्र रूप से प्रैक्टिस कर सकतें हैं। पढ़ाई और ट्रेनिंग के बाद आपकी प्रैक्टिस आपको बेहतर ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनाने में मदद करती है। आप चाहें तो अपना क्लिनिक भी खोल सकते है जिसमें आप मरीज़ो की समस्याओं को करीब से जान पाएंगे और निर्णय ले पाएंगे।

सिलेबस और सब्जेक्ट्स 

MBBS लेवल पर पढ़ने वाले विषयों की सूची नीचे दी गई है। इन चरणों में विभिन्न सब्जेक्ट्स शामिल हैं। जिसमें से कुछ एनाटॉमी, फिज़ियोलॉजी, फॉरेंसिक मेडिसिन, माइक्रोबॉयोलॉजी, पैथोलॉजी, पीडियाट्रिक्स, सर्जरी आदि हैं। ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए आपकी डिग्री में इन विषयों का समावेश हो सकता है। यह सब्जेक्ट्स आपके यूनिवर्सिटी, कॉलेज या डिग्री अनुसार अलग पाए जा सकते हैं। 

  • फिज़िकल एन्थ्रोपॉलजी 
  • अप्लाईड एनाटॉमी 
  • हिस्टोलॉजी 
  • अप्लाईड रेडिओलॉजी 
  • अप्लाईड डेंटल मटीरियल्स 
  • न्यूट्रीशियन 
  • फिज़िकल एन्थ्रोपॉलजी
  • चाइल्ड साइकोलॉजी 
  • अप्लाईड फिज़िओलॉजी  
  • अप्लाईड पैथोलॉजी 
  • स्टडी ऑफ़ बॉयोस्टैटिक्स 

आपके MS ऑर्थोपेडिक्स कोर्स के दौरान कवर होने वाले कुछ विषयों के नाम नीचे दिए गए हैं :-

  • ट्रॉमाटोलॉजी और जनरल ऑर्थोपेडिक्स 
  • इन्फेक्शन्स एंड ट्यूमर्स 
  • स्पाइन अनोमली 
  • स्पोर्ट्स मेडिसिन 
  • एम्प्यूटेशन 
  • इमेजिंग (फुट/एंकल)

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ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए कोर्सेज़ 

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए आपका MBBS डिग्री पूरा करना अति आवश्यक है। आपके ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने की प्रक्रिया के लिए आपका बेसिक फ्रेमवर्क तैयार रखना अनिवार्य है जो MBBS आपको प्रोवाइड करती है। इसके बाद अपना पसंद का ब्रांच चुनकर उसमें पढ़ाई जारी रख सकते हैं। आपके नौ सेमेस्टर्स में आपको आपकी डिग्री के तीन फेज़िज़ देखने को मिलेंगे और वो फेज़िज़ है क्लिनिकल, प्री-क्लीनिकल और पैरा-क्लीनिकल। 

जब आप इस स्टेज को पार कर लेते हैं तब आप अपनी पोस्ट-ग्रेजुएट डिग्री पर फोकस कर सकते हैं। MD/MS ऑर्थोपेडिक्स यह डिग्री एक मास्टर्स डिग्री होने के नाते आपको थ्योरी के साथ प्रैक्टिकल हैंड ऑन प्रैक्टिस भी प्रोवाइड करती है। 

टॉप वर्ल्ड यूनिवर्सिटी 

विदेश में कई बेहतरीन मेडिकल स्कूल मौजूद हैं जो मेडिकल डिग्री उपलब्ध कराते हैं जोकि MBBS की डिग्री के समान ही महत्व भी रखते हैं और आपके लिए बेहतर एक्सपोज़र प्रोवाइड करते हैं। आइए विदेश की कुछ यूनिवर्सिटीज के बारे में जानते है जिन्हे QS वर्ल्ड रैंकिंग फॉर मेडिसिन के अनुसार टेबल में दर्शाया गया है –

यूनिवर्सिटीज  /कॉलेज QS वर्ल्ड रैंकिंग फॉर मेडिसिन 2021 स्थान   एवरेज फीस (INR)
हार्वर्ड मेडिकल स्कूल 1 USA $49859 (38 लाख)
यूनिवर्सिटी ऑफ़ ऑक्सफोर्ड 2 UK $48548 (37 लाख)
स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी  3 USA $170573 (1.30 करोड़)
यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैंब्रिज 4 UK $78726 (60 लाख)  
जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी  5 USA $56420 (43 लाख)  
कैरोलिंस्का इंस्टिट्यूट 6 स्वीडन 185805 (15 लाख)
यूनिवर्सिटी ऑफ़ कैलिफोर्निया, लॉस एंजल्स (UCLA) 7 USA $26242 (20 लाख)  
येल यूनिवर्सिटी  8 USA $72165 (55 लाख)  
यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन 9 UK £27822 (28 लाख)  
इम्पेरियल कॉलेज लंदन 10 UK £31796 (32 लाख)

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टॉप इंडियन यूनिवर्सिटी 

MBBS करने के लिए भारत के टॉप इंस्टिट्यूशंस के नाम NIRF की रेटिंग के आधार पर नीचे दिए गए हैं:

कॉलेज मेडिकल रैंकिंग NIRF 2021 स्थान
ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेडिकल साइंस 1 नई दिल्ली
क्रिस्टियान मेडिकल कॉलेज, वेल्लोर 3 वेल्लोर
नेशनल इंस्टिट्यूट ऑफ़ मेन्टल हैल्थ एंड न्युरो साइंस 4 बैंगलोर
अमृता विश्वा विद्यापीठ 6 कोयम्बतौर
बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी  7 वाराणसी
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी  9 लखनऊ
कस्तूरबा मेडिकल कॉलेज, मणिपाल 10 मणिपाल
इंस्टिट्यूट ऑफ़ लिवर एंड बॉयेलरी साइंस 12 नई दिल्ली
सेंट जॉन मेडिकल कॉलेज 13 बैंगलोर
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी  15 अलीगढ़

योग्यता 

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए आपको निम्नलिखित योग्यताओं का ध्यान रखना आवश्यक है। पहला कदम लेते हुए आपको पहले अपनी फॉउंडेशन डिग्री यानी MBBS की योग्यताओं के बारे में पूरा ज्ञान लेना होगा जोकि निम्नलिखित है :-

  • आपकी बारहवीं साइंस बैकग्राउंड से होना अनिवार्य है जिसमें बायोलॉजी, फिज़िक्स, कैमिस्ट्री, मैथ्स आदि शामिल हैं।
  • अगर आप पहले से ग्रेजुएशन कर चुकें हैं तो आपकी बैचलर डिग्री होना अनिवार्य है।
  • अगर आप विदेश में पढ़ाई का सोच रहे हैं तो आपका इंग्लिश प्रोफिशिएंसी का टेस्ट जिसमें  IELTS स्कोर 6.5–7.0 या TOEFL या C1 एडवांस लैंग्वेज सर्टिफिकेट्स शामिल है क्लियर होना आवश्यक है।
  • GPA स्कोर कम से कम 3 या उससे ज़्यादा होना आवश्यक है।
  • जगह अनुसार अन्य मेडिकल एग्ज़ाम देने की आवश्यकता हो सकती है जिसमें भारत के लिए NEET, United Kingdom के लिए BMAT  या UCAT, United States के लिए MCAT आदि शामिल हैं।

नोट : दी गयी योग्यताएं एक बेसिक मापदंड है जो राज्य अनुसार बदल सकता है। बेहतर जानकारी के लिए चुनी गई यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट ज़रूर विज़िट करें।

पोस्ट ग्रेजुएट एग्ज़ाम के लिए निम्नलिखित योग्यताओं की आवश्यकता होगी :-

  • विद्यार्थिओं की MBBS की डिग्री कम से कम 55% मार्क्स के साथ किसी मान्यता प्राप्त यूनिवर्सिटी से होना अनिवार्य है। भारत में यह मान्यता मेडिकल कॉउन्सिल ऑफ़ इंडिया से होनी चाहिए। 
  • MBBS डिग्री प्राप्त करने के बाद करने वाली इंटर्नशिपस व ट्रेनिंग की मान्यता है। इसमें आपको प्रैक्टिकल एक्सपोज़र मिलता है जिसकी महत्वता मानी जाती है। 
  • अगर आप विदेश में पढ़ाई का सोच रहे हैं तो आपका इंग्लिश प्रोफिशिएंसी का टेस्ट जिसमें  IELTS स्कोर 6.5–7.0 या TOEFL या C1 एडवांस लैंग्वेज सर्टिफिकेट्स शामिल है क्लियर होना आवश्यक है।

आवेदन प्रक्रिया 

मेडिकल यूनिवर्सिटी में एडमिशन के लिए निम्नलिखित स्टेप्स को फॉलो करना आवश्यक है। यह आवेदन प्रक्रिया आपको आपके मन चाहे कॉलेज में एडमिशन दिलाने के लिए महत्वपूर्ण है-

  • पहले मेडिकल फीलड में डॉक्टर बनने से जुड़े सभी कोर्सेज को जानें और अपने लिए एक बेहतर विकल्प चुनें। 
  • उसके बाद कौन से कॉलेजेस आपका चुना कोर्स उपलब्ध करातें है पता लगाएं। 
  • ध्यान से कोर्स और कॉलेज के लिए दी गई योग्यता को पढ़ें। 
  • मेडिकल फील्ड में आपके चुनें विकल्प के लिए देने वाले एंट्रेंस एग्ज़ाम्स का पता लगाएं और आपके कॉलेज द्वारा स्वीकार किया जाने योग्य एग्ज़ाम चुनें। 
  • मेडिकल के क्षेत्र में प्रोग्राम के लिए एनरोल कर रहे कैंडिडेट का एंट्रेंस एग्जाम क्लियर करना आवश्यक है। कुछ यूनिवर्सिटीज मेरिट बेस यानी आपकी बारहवीं के एग्ज़ाम में आये मार्क्स को ध्यान में रखकर भी एडमिशन स्वीकार करते हैं जिसे कट ऑफ के अनुसार एडमिशन कहा जाता है।
  • कई यूनिवर्सिटीज आपके एंट्रेंस एग्ज़ाम रिज़ल्ट अनुसार डायरेक्ट एडमिशन भी देतीं हैं जबकि कुछ उसके बाद भी एडिशनल चीज़ों के मुताबिक़ सेलेक्शन किया करती हैं जिसमें ज़्यादातर ग्रुप डिस्कशन और पर्सनल इंटरव्यू शामिल होतें हैं। 
  • रिजल्ट आने के बाद,काउंसिलिंग के लिए रजिस्टर करें और प्रोसेस फॉलो करें। 
  • अपने चुनें गए कॉलेज और कोर्स को काउंसिलिंग में सेलेक्ट करें। 
  • रजिस्टर करें और दस्तावेज़ जमा कराएं।

विदेश में आवेदन प्रक्रिया 

विदेश के विश्वविद्यालयों में आवेदन करने वाले अंतरराष्ट्रीय छात्रों को अपनी आवेदन प्रक्रिया का ख़ास ध्यान रखना होगा, नीचे दिए गए स्टेप्स को ध्यान से पढ़ें-

  • कोर्सेज़ और यूनिवर्सिटीज को शॉर्टलिस्ट करें: आवेदन प्रक्रिया में पहला स्टेप आपके शैक्षणिक प्रोफ़ाइल के अनुसार कोर्सेज़ और यूनिवर्सिटीज को शॉर्टलिस्ट करना है। छात्र AI Course Finder के माध्यम से कोर्स और यूनिवर्सिटी को शॉर्टलिस्ट कर सकते हैं और उन यूनिवर्सिटीज की एक लिस्ट तैयार कर सकते हैं, जहां उन्हें अप्लाई करना सही लगता है।
  • अपनी समय सीमा जानें: अगला कदम विदेश में उन यूनिवर्सिटीज और कॉलेजों की समय सीमा जानना है, जिनमें आप आवेदन करने का सोच रहे हैं। अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को आवेदन प्रक्रिया के लिए काफी पहले (वास्तविक समय सीमा से एक वर्ष से 6 महीने पहले) ध्यान देना होता है। यह सुनिश्चित करता है कि छात्र कॉलेज की सभी आवश्यकताओं जैसे SOP, सिफारिश के पत्र, फंडिंग / स्कालरशिप का विकल्प और आवास को पूरा कर सकते हैं।
  • प्रवेश परीक्षा लें: विदेशी यूनिवर्सिटीज के लिए आवेदन प्रक्रिया के तीसरे स्टेप मे छात्रों को IELTS, TOEFL, PTE और यूनिवर्सिटी क्लिनिकल एप्टीट्यूड टेस्ट (UCAT) जैसे टेस्ट देने होते हैं। इंग्लिश प्रोफिशिएंसी टेस्ट में एक नया Duolingo टेस्ट है जो छात्रों को अपने घरों से परीक्षा में बैठने की अनुमति देता है और दुनिया भर में स्वीकार किया जाता है।
  • अपने दस्तावेज़ कंप्लीट करें: अगला कदम आवेदन प्रक्रिया के लिए सभी आवश्यक दस्तावेज़ो और स्कोर को पूरा करके एक जगह पर संभल लें। इसका मतलब है कि छात्रों को अपना SOP लिखना शुरू कर देना चाहिए, शिक्षकों और सुपरवाइज़र्स से सिफारिश के पत्र प्राप्त करना चाहिए और अपने फाइनेंशियल स्टेटमेंट्स को अन्य दस्तावेज़ों जैसे टेस्ट स्कोरकार्ड के साथ सिस्टेमैटिक तरह से रखलें। COVID-19 महामारी के साथ, छात्रों को अपना वैक्सीन प्रमाणपत्र डाउनलोड करना होगा। 
  • अपने आवेदन करने की प्रक्रिया प्रारंभ करें: एक बार जब आपके पास सभी दस्तावेज़ मौजूद हों, तो छात्र सीधे या UCAS के माध्यम से आवेदन प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। विदेश की यूनिवर्सिटीज में आवेदन करने वाले छात्र जो सीधे आवेदन स्वीकार करते हैं, वे यूनिवर्सिटी वेबसाइट के माध्यम से आवेदन करके शुरू कर सकते हैं। उन्हें कोर्सेज़ का चयन करना होगा, आवेदन शुल्क का भुगतान करना होगा और ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू करनी होगी।

आवश्यक दस्तावेज़ 

जानने के साथ साथ उससे जुड़े कोर्स में अप्लाई करने के लिए छात्र को नीचे दिए गए दस्तावेज़ों की आवश्यकता होगी-

  • 10वीं और 12वीं उत्तीर्ण की मार्कशीट। 
  • ग्रेजुएशन उत्तीर्ण की मार्कशीट। 
  • भरा गया ऍप्लिकेशन फॉर्म।
  • कॉलेज छोड़ने का सर्टिफिकेट। 
  • हेल्थ सेक्टर में डिप्लोमा या वर्क एक्सपीरियंस की कॉपी।
  • भारतीय नागरिकता का प्रमाण जिसमें जन्म पत्री या पासपोर्ट हो सकता है। 
  • किसी मान्यता प्राप्त डॉक्टर द्वारा दिया गया ‘फिज़िकल फिटनेस सर्टिफिकेट’
  • विदेश में पड़ने के लिए जाने वाले छात्र का पासपोर्ट और वीज़ा
  • कैंडिडेट की 5 पासपोर्ट साइज़ फोटो। 
  • लैंग्वेज टेस्ट स्कोर शीट IELTS, TOEFL आदि। 
  • Statement of Purpose (SOP) जमा कराएं। 
  •  Letters of Recommendation (LORs). जमा कराएं। 

एंट्रेंस एग्ज़ाम 

एक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए पहला कदम आपकी MBBS की डिग्री के लिए अप्लाई करना होगा जिसके लिए एंट्रेंस एग्ज़ाम देने की आवश्यकता होगी। MBBS की डिग्री वमिलने के बाद आप मेडिकल साइंस के किसी भी विषय को चुनकर उसमें महारथ हासिल क्र सकते है। ऑर्थोपेडिक डॉक्टर बनने के लिए MBBS के बाद ऑर्थोपेडिक चुने और आगे बढ़ें। किसी भी MBBS की डिग्री के लिए दिए जाने वाले सभी एंट्रेंस एग्ज़ाम की लिस्ट नीचे दी गई है :-

NEET BMAT AIIMS-MBBS
UCAT  MCAT  JIPMER
CMC Vellore  EAMCET  BHU PMT
USMLE FPMT OJEE
CMSE FMGE OMET 

करियर स्कोप 

ऑर्थोपेडिकस में करियर बनाना आपके लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकता है। आपकी ग्रेजुएशन के बाद आप ऑर्थोपेडिकस में अपनी आगे की पढ़ाई चुनकर उसमें करियर बना सकते हैं। यह पढ़ाई पोस्ट ग्रेजुएशन कोर्स की है जो मूल रूप से ऑर्थोपेडिकस में विस्तार से पढ़ाई पर फोकस्ड होती है। विद्यार्थी अपनी इन डिग्रियों को हासिल करने के बाद आराम से किसी बेहतरीन जगह मेडिकल अफसर बन सकता है। अगर आप अपनी स्टडीज़ में बहुत मेहनत करते हैं और ट्रेनिंग्स के दौरान फोकस्ड रहते हुए अपना कार्य करते है तो आपके सामने कई बेहतरीन ऑप्शंस का पिटारा है जिसमें रिसर्चर, सर्जन, थेरेपिस्ट, स्पोर्ट्स मेडिसिन फिज़िशियन और मेडिकल कंसलटेंट जैसी पोस्ट्स शामिल हैं। 

यह करियर सब्र मांगता है और एक्सपीरियंस अनुसार ही ग्रो करता है। समय के साथ जैसे जैसे आप अपने काम निपूर्ण होते जाते है आप आगे बढ़ते जाते हैं। अर्थराइटिस या कोई भी ऐसी परेशानी जो इंसानी ढाँचे से जुड़ी है वो उम्र देखकर नहीं आती। ऑर्थोपेडिक डॉक्टर आज कल काफी डिमांड में हैं। दुनिया में सभी लोगो का खराब लाइफ स्टाइल उन्हें हड्डियों से जुड़े कई बिमारिओं की और धकेल रहा है जिससे ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की मांग पर असर आया है। प्राइवेट कंपनियों से लेकर सरकारी हॉस्पिटल तक ऑर्थोपेडिक डॉक्टर की मांग आपको काफी ज़्यादा देखने को मिलेगी। 

टॉप रिक्रूटर्स 

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर को मिलने वाली नौकरियों और उन्हें नौकरी का ऑफर देने वाली कंपनियों की लिस्ट काफी लम्बी है जिसे देखकर आप अंदाज़ा लगा पाएंगे की ऑर्थोपेडिकस की डिग्री वाकई आपके काम आयी है। आईये ऑर्थोपेडिक डॉक्टर को अच्छी जॉब प्रोवाइड करने वाले टॉप रिक्रूटर्स की और नज़र डालते हैं :

  • Tata Memorial Center
  • Fortis Hospital
  • AIIMS
  • UPSC
  • Apollo Hospital
  • Ganga Hospital
  • Government Medical Institutions
  • Private Medical Institutions
  • CMC, Vellore
  • Kokilaben Dhirubhai Ambani Hospital
  • RML Hospital, Delhi
  • PGIMER

जॉब प्रोफाइल एंड सैलरी 

ऑर्थोपेडिक डॉक्टर से जुड़ी जॉब प्रोफाइल्स और सैलरी निम्नलिखित हैं :-

जॉब प्रोफाइल्स  एवरेज सैलरी 
थेरेपिस्ट  4 लाख-6 लाख सालाना (अंदाज़न)
सर्जन्स  9 लाख-11 लाख सालाना (अंदाज़न)
ऑर्थोपेडिक्स  9 लाख-18 लाख सालाना (अंदाज़न)
रिसर्चर्स  6 लाख-9 लाख सालाना (अंदाज़न)
स्पेशलिस्ट्स  3 लाख-4 लाख सालाना (अंदाज़न)

FAQs 

आर्थोपेडिक सर्जन क्या करते हैं?

मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम (हड्डियों, जोड़ों, मांसपेशियों, स्नायुबंधन, टेंडन, नर्वस आदि) के क्षेत्र में विशेषज्ञता रखने वाले फिजिशियन को आर्थोपेडिक सर्जन कहा जाता है। वे मस्कुलोस्केलेटल सिस्टम के रोगों के इलाज के लिए सर्जिकल और नॉन-सर्जिकल तरीकों का उपयोग करते हैं।

आर्थोपेडिक को हिंदी में क्या कहते हैं?

ओर्थोपेडिक मेडिकल क्षेत्र मे एक ख़ास डिग्री है जो मरीज की हड्डी में हुई गड़बड़ी को ट्रीटमेंट, रोकता है तथा सही करता है।

हड्डी के डॉक्टर को क्या कहते हैं?

हड्डियों का डॉक्टर होता है तो हम उसे बोन डॉक्टर कहते हैं जो असल में गलत है. इसलिए हमने सोचा क्यूं न आज आपको ‘अंग्रेजी की बातें हिन्दी में डॉक्टर्स के बारे में बताएं कि उन्हें क्या कहते है और कैसे प्रनाउंस करते हैं। ये वो डॉक्टर होते हैं जो आपके आंखों का ध्यान रखते हैं। 

ऑर्थो डॉक्टर का क्या काम होता है?

ऑर्थोपेडिक सर्जन हड्डियों, जोड़ों, स्नायुबंधन, टेंडन और मांसपेशियों संबंधी विकारों की रोकथाम, निदान और उपचार के लिए काम करते हैं।

डॉक्टर की सबसे बड़ी डिग्री कौन सी है?

मेडिकल साइंस के क्षेत्र में एमबीबीएस अंडरग्रेजुएट डिग्री या फर्स्ट प्रोफेशनल डिग्री है। एमबीबीएस कोर्सेज का लक्ष्य छात्रों को मेडिसिन की फील्ड में ट्रेंड करना है। एमबीबीएस पूरी होने पर, कोई व्यक्ति पेशेंट्स के रोगों को डायग्नोस करने के बाद उन्हें मेडिसिन्स प्रिस्क्राइब करने के योग्य बन जाता है। 

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