BDS का फुल फॉर्म ‘बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी’ है, जो दंत चिकित्सा में एक प्रोफेशनल ग्रेजुएशन डिग्री है। यह कोर्स उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जो डॉक्टर बनना चाहते हैं और दंत चिकित्सा, मौखिक स्वास्थ्य और दांतों से जुड़ी बीमारियों के उपचार में रुचि रखते हैं। BDS कोर्स में एडमिशन के लिए 12वीं कक्षा में फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) के साथ पास होना तथा NEET-UG परीक्षा पास करना अनिवार्य है, जिसे राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) आयोजित करती है। इस लेख आपके लिए बीडीएस कोर्स से संबंधित सभी आवश्यक जानकारी दी गई है।
This Blog Includes:
- बीडीएस कोर्स का ओवरव्यू
- बीडीएस कोर्स क्या है?
- बीडीएस कोर्स क्यों करें?
- बीडीएस कोर्स की योग्यता
- बीडीएस कोर्स की संरचना और अवधि
- NEET UG प्रवेश परीक्षा क्या है?
- बीडीएस कोर्स की अनुमानित फीस
- बीडीएस कोर्स के लिए सिलेबस
- भारत के टॉप BDS कॉलेज और संस्थान
- बीडीएस के बाद करियर स्कोप
- बीडीएस के बाद अनुमानित सैलरी
- बीडीएस बनाम एमबीबीएस की तुलना
- पिछले कुछ वर्षों की BDS कट-ऑफ
- FAQs
बीडीएस कोर्स का ओवरव्यू
| कोर्स | बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) |
| कोर्स लेवल | ग्रेजुएशन |
| कोर्स ड्यूरेशन | 5 वर्ष |
| इंटर्नशिप | 1 वर्ष (अनिवार्य) |
| एडमिशन प्रोसेस | एंट्रेंस बेस्ड |
| कोर्स एलिजिबिलिटी | कक्षा 12वीं (फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी) और NEET |
| एंट्रेंस परीक्षा | NEET UG |
| बीडीएस कॉलेज | मौलाना आज़ाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (MAIDS) दिल्ली गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज एंड हॉस्पिटल, दिल्ली बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, बनारस पोस्ट ग्रेजुएट इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज, रोहतक किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय, लखनऊ |
| टॉप रिक्रूटर्स | अस्पताल, दंत चिकित्सालय, शैक्षणिक संस्थान, दंत उत्पाद निर्माता आदि। |
बीडीएस कोर्स क्या है?
बीडीएस एक 5 वर्षीय पूर्णकालिक स्नातक कोर्स है, जिसमें 4 वर्ष की शैक्षणिक पढ़ाई और 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होती है। यह कोर्स डेंटल काउंसिल ऑफ इंडिया (DCI) के दिशानिर्देशों के अनुसार संचालित किया जाता है। भारत में बीडीएस में एडमिशन के लिए हर साल लाखों छात्र ‘राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी’ (NTA) द्वारा आयोजित NEET-UG परीक्षा में भाग लेते हैं। इस कोर्स को पूरा करने के बाद आप भारत में दंत चिकित्सक के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए पात्र होते हैं, बशर्ते वे संबंधित राज्य डेंटल काउंसिल में पंजीकरण कराएं।
बीडीएस कोर्स क्यों करें?
बीडीएस कोर्स उन छात्रों के लिए एक आदर्श विकल्प है जो चिकित्सा क्षेत्र में करियर बनाना चाहते हैं और डेंटिस्ट के रूप में समाज की सेवा करना चाहते हैं। नीचे दिए गए बिंदुओं में आपको BDS कोर्स करने के प्रमुख कारण बताए गए हैं:
- यह कोर्स न केवल एक प्रोफेशनल डिग्री प्रदान करता है, बल्कि आपको समाज में एक सम्मानजनक और प्रतिष्ठित स्थान भी दिलाता है।
- वर्तमान समय में ओरल हेल्थ समस्याओं में तेजी से वृद्धि हो रही है, जिससे योग्य और प्रशिक्षित डेंटिस्ट की मांग निरंतर बनी हुई है।
- इसके अतिरिक्त, यह एक आर्थिक रूप से लाभकारी करियर विकल्प है, जिसमें आप स्वतंत्र रूप से अपना क्लिनिक खोलकर आत्मनिर्भर बन सकते हैं।
- बीडीएस की डिग्री उच्च शिक्षा और विशेषज्ञता के लिए नए रास्ते खोलती है, जिससे देश-विदेश में भी रोजगार के अवसर प्राप्त होते हैं।
- दंत चिकित्सा में लगातार नई तकनीकें (डिजिटल एक्स-रे, लेजर ट्रीटमेंट, 3डी प्रिंटिंग) आ रही हैं, जो इसे एक रोमांचक और आधुनिक क्षेत्र बनाती हैं।
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बीडीएस कोर्स की योग्यता
बैचलर ऑफ डेंटल सर्जरी (BDS) कोर्स के लिए योग्यता इस प्रकार है:
- शैक्षणिक योग्यता: छात्र ने 12वीं कक्षा फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी (PCB) विषयों के साथ पास की हो।
- न्यूनतम अंक: सामान्य वर्ग के छात्रों को 12वीं में न्यूनतम 50% अंक और आरक्षित वर्ग (SC/ST/OBC) के लिए नियमानुसार छूट प्राप्त होती है।
- NEET परीक्षा: राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित ‘नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट’ (NEET UG) को पास करना अनिवार्य है।
- आयु सीमा: NEET के अनुसार न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए (एडमिशन वर्ष के 31 दिसंबर तक)। अधिकतम आयु सीमा सामान्यतः नहीं होती पर कुछ संस्थानों में हो सकती है।
- शैक्षणिक स्थिति: जो छात्र अभी 12वीं में पढ़ रहे हैं, वे भी NEET UG प्रवेश परीक्षा के लिए अप्लाई कर सकते हैं।
बीडीएस कोर्स की संरचना और अवधि
बीडीएस कोर्स की संरचना और अवधि को निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझ सकते हैं –
- बीडीएस कोर्स एक 5 वर्षीय ग्रेजुएशन डिग्री प्रोग्राम है, जिसमें 4 वर्ष की शैक्षणिक शिक्षा और 1 वर्ष की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होती है।
- यह कोर्स फुलटाइम या पार्टटाइम रूप से किया जा सकता है, लेकिन इसमें एडमिशन के लिए NEET UG प्रवेश परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य होता है।
- बीडीएस की पढ़ाई में थ्योरी, प्रैक्टिकल और क्लिनिकल ट्रेनिंग का संतुलित समावेश होता है।
- कई संस्थानों में इसे सेमेस्टर प्रणाली के तहत पढ़ाया जाता है, जबकि कुछ में वार्षिक परीक्षा पद्धति अपनाई जाती है।
- कोर्स पूरा करने के बाद छात्र एक योग्य दंत चिकित्सक के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए एलिजिबल हो जाते हैं।
NEET UG प्रवेश परीक्षा क्या है?
नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET-UG) भारत की एकमात्र राष्ट्रीय मेडिकल प्रवेश परीक्षा है, जिसे ‘राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी’ (NTA) आयोजित करती है। इसके माध्यम से MBBS, BDS, AYUSH (BAMS, BHMS, BUMS) और कुछ नर्सिंग कोर्स में एडमिशन मिलता है। यह परीक्षा ऑफलाइन (OMR) मोड में होती है, जिसमें फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी से कुल 720 अंक के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसलिए, BDS कोर्स में एडमिशन लेने के इच्छुक छात्रों को शैक्षणिक योग्यता के साथ-साथ NEET परीक्षा की भी तैयारी करनी चाहिए।
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बीडीएस कोर्स की अनुमानित फीस
इस कोर्स की फीस स्ट्रक्चर काफी हद तक मेडिकल कॉलेज और यूनिवर्सिटी पर निर्भर करता है। सामान्यत: बीडीएस कोर्स की सालाना फीस सरकारी और प्राईवेट कॉलेज में भिन्न-भिन्न हो सकती है। कुछ प्राइवेट संस्थानों में यह फीस थोड़ी ज्यादा भी हो सकती है जबकि सरकारी संस्थानों में फीस अपेक्षाकृत कम रहती है। इस कोर्स की फीस में ट्यूशन चार्ज, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और कभी-कभी स्टडी मटेरियल की लागत भी शामिल हो सकती है।
| संस्थान का प्रकार | फीस की अनुमानित सीमा (प्रति वर्ष) | कुल कोर्स लागत (अनुमानित 5 वर्ष) |
| सरकारी कॉलेज | INR 10,000 – INR 50,000 | INR 50,000 – INR 2.5 लाख |
| निजी कॉलेज (प्रबंधन कोटा/सामान्य) | INR 3 लाख – INR 8 लाख | INR 15 लाख – INR 40 लाख |
| डीम्ड/निजी विश्वविद्यालय (उच्च शुल्क) | INR 7 लाख – INR 12 लाख या इससे अधिक | INR 35 लाख – INR 60 लाख या इससे अधिक |
नोट: दी गई जानकारी विभिन्न स्त्रोतों से ली गई है, इसलिए इसमें बदलाव संभव है। आपको सलाह दी जाती है कि चयनित मेडिकल संस्थान या कॉलेज में आवेदन करने से पहले उसकी ऑफिशियल वेबसाइट से फीस स्ट्रक्चर की जानकारी जरूर प्राप्त कर लें।
बीडीएस कोर्स के लिए सिलेबस
बीडीएस कोर्स का सिलेबस राज्य और कॉलेज/यूनिवर्सिटी के अनुसार थोड़ा अलग हो सकता है, लेकिन इसका सामान्य और बुनियादी सिलेबस कुछ इस प्रकार होता है:
| वर्ष | प्रमुख विषय | विषय का सार |
| प्रथम वर्ष | मानव शरीर रचना विज्ञान (Human Anatomy) | मानव शरीर की संरचना, विशेष रूप से सिर, गर्दन और दांतों से संबंधित संरचनाओं का गहन अध्ययन। |
| मानव शरीर क्रिया विज्ञान (Human Physiology) | शरीर के विभिन्न अंगों और प्रणालियों के कार्य करने के तरीके (जैसे पाचन, श्वसन) का अध्ययन। | |
| जैव रसायन (Biochemistry) | शरीर में होने वाली रासायनिक प्रक्रियाओं, चयापचय और आणविक आधारों को समझना। | |
| डेंटल मटेरियल (Dental Materials) | दंत चिकित्सा में उपयोग होने वाली सामग्री (जैसे अमलगम, कंपोजिट, सीमेंट) के गुण और उपयोग। | |
| द्वितीय वर्ष | सामान्य पैथोलॉजी (General Pathology) | रोगों के कारण, तंत्र और ऊतकों पर उनके प्रभावों का अध्ययन। |
| माइक्रोबायोलॉजी (Microbiology) | बैक्टीरिया, वायरस और कवक जैसे सूक्ष्मजीवों और मौखिक संक्रमणों में उनकी भूमिका का अध्ययन। | |
| फार्माकोलॉजी और थेराप्यूटिक्स (Pharmacology & Therapeutics) | दवाओं की क्रिया, उपयोग, खुराक और दंत चिकित्सा में उनके अनुप्रयोगों का अध्ययन। | |
| डेंटल एनाटॉमी और हिस्टोलॉजी (Dental Anatomy & Histology) | दांतों की संरचना, विकास और मौखिक ऊतकों का विस्तृत अध्ययन। | |
| तृतीय वर्ष | सामान्य चिकित्सा (General Medicine) | सामान्य चिकित्सा स्थितियों (जैसे मधुमेह, हृदय रोग) का निदान और उपचार, जो दंत चिकित्सा उपचार को प्रभावित कर सकते हैं। |
| सामान्य सर्जरी (General Surgery) | सर्जरी के सिद्धांत और शरीर के सामान्य सर्जिकल रोगों का प्रबंधन। | |
| ओरल पैथोलॉजी और माइक्रोबायोलॉजी (Oral Pathology & Microbiology) | मौखिक गुहा (मुंह) के रोगों का निदान और अध्ययन। | |
| सामुदायिक दंत चिकित्सा (Community Dentistry) | सार्वजनिक स्वास्थ्य, निवारक दंत चिकित्सा, और सामुदायिक स्तर पर मौखिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के तरीके। | |
| चतुर्थ वर्ष | प्रोस्थोडोंटिक्स (Prosthodontics) | कृत्रिम दांत (डेन्चर, ब्रिज) लगाने और पुनर्वास का अध्ययन। |
| ओरल और मैक्सिलोफेशियल सर्जरी (Oral & Maxillofacial Surgery) | मुंह, जबड़े और चेहरे की सर्जरी का अध्ययन। | |
| ऑर्थोडोंटिक्स और डेंटोफेशियल ऑर्थोपेडिक्स (Orthodontics) | दांतों की अनियमितताओं को ठीक करना (ब्रेसेस/एलाइनर)। | |
| पीडोडोंटिक्स और प्रिवेंटिव डेंटिस्ट्री (Pedodontics) | बच्चों के दांतों की देखभाल और निवारक दंत चिकित्सा। | |
| पीरियडोंटिक्स (Periodontics) | मसूड़ों के रोग और उनका उपचार। | |
| कंजर्वेटिव डेंटिस्ट्री और एंडोडोंटिक्स (Conservative Dentistry & Endodontics) | दांतों की सड़न का उपचार (फिलिंग) और रूट कैनाल ट्रीटमेंट (RCT)। | |
| ओरल मेडिसिन और रेडियोलॉजी (Oral Medicine & Radiology) | मौखिक रोगों का निदान और एक्स-रे व इमेजिंग तकनीकों का उपयोग। | |
| पांचवां वर्ष | अनिवार्य इंटर्नशिप (Mandatory Internship) | अस्पताल/क्लिनिक में सभी विभागों में वास्तविक रोगियों का इलाज करके व्यावहारिक अनुभव प्राप्त करना। |
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भारत के टॉप BDS कॉलेज और संस्थान
यहां भारत के कुछ टॉप बीडीएस कॉलेज एवं संस्थानों की सूची दी जा रही है, जो शिक्षा की गुणवत्ता, फैकल्टी, इंफ्रास्ट्रक्चर और प्लेसमेंट के आधार पर काफी प्रतिष्ठित माने जाते हैं:
| क्रम संख्या | कॉलेज/संस्थान का नाम | स्थान |
| 1 | सविता इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एंड टेक्निकल साइंसेज (Saveetha Institute of Medical & Technical Sciences) | चेन्नई, तमिलनाडु |
| 2 | डॉ. डी. वाई. पाटिल विद्यापीठ (Dr. D. Y. Patil Vidyapeeth) | पुणे, महाराष्ट्र |
| 3 | मणिपाल कॉलेज ऑफ डेंटल साइंसेज (Manipal College of Dental Sciences – MCODS) | मणिपाल, कर्नाटक |
| 4 | मौलाना आजाद इंस्टीट्यूट ऑफ डेंटल साइंसेज (Maulana Azad Institute of Dental Sciences) | नई दिल्ली, दिल्ली |
| 5 | एआईआईएमएस (AIIMS) | नई दिल्ली, दिल्ली (डेंटल विंग) |
| 6 | किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) | लखनऊ, उत्तर प्रदेश |
| 7 | एसआरएम डेंटल कॉलेज (SRM Dental College) | चेन्नई, तमिलनाडु |
| 8 | गवर्नमेंट डेंटल कॉलेज (Government Dental College) | नागपुर, महाराष्ट्र |
| 9 | शिक्षा ‘ओ’ अनुसंधान विश्वविद्यालय (Siksha ‘O’ Anusandhan University) | भुवनेश्वर, ओडिशा |
| 10 | जामिया मिल्लिया इस्लामिया (Jamia Millia Islamia) | नई दिल्ली, दिल्ली |
| 11 | श्री रामचंद्र उच्च शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (SRIHER) | चेन्नई |
| 12 | एमजीएम डेंटल कॉलेज और अस्पताल | नवी मुंबई, मुंबई |
बीडीएस के बाद करियर स्कोप
बीडीएस कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों के पास करियर के कई बेहतरीन विकल्प होते हैं, जो इस प्रकार हैं:-
- निजी प्रैक्टिस या स्वयं का क्लिनिक खोलना: बीडीएस के बाद छात्र अपना डेंटल क्लिनिक शुरू कर सकते हैं, जहाँ वे स्वतंत्र रूप से मरीजों का इलाज कर सकते हैं। बता दें कि अच्छी लोकेशन, उपकरण और वैध लाइसेंस के साथ यह एक लाभकारी और आत्मनिर्भर विकल्प है।
- सरकारी नौकरी: बीडीएस ग्रेजुएट्स के लिए सरकारी अस्पतालों, सेना, रेलवे और राज्य स्वास्थ्य सेवाओं में दंत चिकित्सक के पद उपलब्ध होते हैं। इसके लिए NEET, AIIMS, KEAM या संबंधित राज्य स्तरीय परीक्षाएं देनी अनिवार्य होती हैं।
- उच्च शिक्षा: जो छात्र हायर स्टडी करना चाहते हैं, वे ‘मास्टर ऑफ डेंटल सर्जरी’ (MDS) कर सकते हैं। इसमें ओरल सर्जरी, ऑर्थोडोंटिक्स, पीडोडोंटिक्स जैसे विभिन्न स्पेशलाइजेशन उपलब्ध हैं।
- रिसर्च और शिक्षण: बीडीएस के बाद छात्र रिसर्च फील्ड में काम कर सकते हैं। वहीं MDS के बाद छात्र डेंटल कॉलेजों में प्रोफेसर या लेक्चरर बन सकते हैं, जिससे उन्हें एक शैक्षणिक करियर का अवसर मिलता है।
- कॉर्पोरेट और इंडस्ट्रियल सेक्टर में करियर: बीडीएस के बाद छात्र दवा कंपनियों, डेंटल इक्विपमेंट मैन्युफैक्चरिंग कंपनियों और हेल्थकेयर स्टार्टअप्स में मेडिकल एडवाइजर, सेल्स एवं मार्केटिंग एक्सपर्ट या कंसल्टेंट के रूप में काम कर सकते हैं। यह विकल्प उन छात्रों के लिए उपयुक्त है जो क्लिनिकल फील्ड से हटकर कॉर्पोरेट में काम करना चाहते हैं।
यह भी पढ़ें: फार्मेसी कोर्स गाइड: योग्यता, फीस और करियर विकल्प की जानकारी
बीडीएस के बाद अनुमानित सैलरी
बीडीएस कोर्स पूरा करने के बाद छात्रों को शुरुआती स्तर पर 40,000 से 60,000 रुपये प्रति माह तक की औसत सैलरी मिल सकती है, जो संस्था और स्थान के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। वहीं अनुभव बढ़ने पर सैलरी में भी वृद्धि होती है और 3-5 वर्षों के अनुभव के बाद 70,000 से 1 लाख रुपये या उससे अधिक प्रति माह तक सैलरी मिल सकती है।
हालांकि प्राइवेट क्लिनिक या अस्पतालों में सैलरी आपके स्किल्स और पेशेंट हैंडलिंग पर निर्भर करती है, जबकि सरकारी सेक्टर में सैलरी फिक्स होती है। इसके साथ ही अन्य अलाउंस भी मिलते हैं। आर्मी डेंटल कोर, सरकारी अस्पतालों और अन्य सरकारी संस्थानों में स्थिर वेतन के साथ जॉब सिक्योरिटी भी मिलती है।
बीडीएस बनाम एमबीबीएस की तुलना
यहां BDS बनाम MBBS की तुलना की गई है, जिससे आपको यह समझने में मदद मिलेगी कि आपके लिए कौनसा कोर्स अधिक उपयुक्त है:
| तुलना का आधार | BDS | MBBS |
| कोर्स का उद्देश्य | दांत, मसूड़े और मौखिक स्वास्थ्य से जुड़ी बीमारियों का इलाज | पूरे मानव शरीर की बीमारियों का निदान और उपचार |
| कोर्स अवधि | 5 वर्ष (4 वर्ष पढ़ाई + 1 वर्ष अनिवार्य इंटर्नशिप) | 5.5 वर्ष (4.5 वर्ष पढ़ाई + 1 वर्ष इंटर्नशिप) |
| प्रवेश परीक्षा | NEET-UG | NEET-UG |
| सीटों की प्रतिस्पर्धा | प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम, लेकिन निजी कॉलेजों में फीस अधिक | अत्यधिक प्रतिस्पर्धा, सरकारी सीटें बहुत सीमित |
| पढ़ाई की प्रकृति | क्लिनिकल + प्रैक्टिकल केंद्रित, शुरुआती वर्षों से हैंड-स्किल्स | थ्योरी-हेवी + क्लिनिकल, शुरुआती वर्षों में सीमित हैंड-ऑन |
| सरकारी नौकरी के अवसर | सीमित पद, राज्य-स्तरीय भर्तियाँ | अधिक अवसर (राज्य, केंद्र, PSU, रक्षा सेवाएं) |
| शुरुआती आय (भारत) | आमतौर पर INR 15,000 – INR 35,000/माह | आमतौर पर INR 30,000 – INR 60,000/माह (सरकारी/प्राइवेट) |
| प्राइवेट प्रैक्टिस | स्वयं का क्लिनिक संभव, लेकिन निवेश और समय आवश्यक | क्लिनिक संभव, लेकिन विशेषज्ञता (MD/MS) के बाद बेहतर |
| उच्च शिक्षा | MDS (स्पेशलाइजेशन अनिवार्य नहीं लेकिन लाभकारी) | MD/MS लगभग अनिवार्य मानी जाती है |
| विदेश में प्रैक्टिस | देश-विशेष लाइसेंसिंग परीक्षा आवश्यक | देश-विशेष लाइसेंसिंग परीक्षा आवश्यक |
| करियर जोखिम | मार्केट सेच्युरेशन, लोकेशन-डिपार्टमेंट ग्रोथ | लंबी पढ़ाई, वर्कलोड और स्ट्रेस अधिक |
पिछले कुछ वर्षों की BDS कट-ऑफ
यहां आप पिछले वर्षों की BDS प्रवेश कट-ऑफ देख सकते हैं:
| वर्ष | वर्ग | परसेंटाइल | NEET कटऑफ अंक |
2025 | UR/EWS | 50th परसेंटाइल | 686 – 144 |
| OBC | 40th परसेंटाइल | 143 – 113 | |
| SC | 40th परसेंटाइल | 143 – 113 | |
| ST | 40th परसेंटाइल | 143 – 113 | |
2024 | UR/EWS | 50th परसेंटाइल | 720 – 164 |
| SC/ST/OBC | 40th परसेंटाइल | 163 – 129 | |
| SC/OBC-PwD | 40th परसेंटाइल | 120 – 107 | |
| ST – PwD | 40th परसेंटाइल | 120 – 107 | |
2023 | UR | 50th परसेंटाइल | 720 – 137 |
| जनरल – PwD | 45th परसेंटाइल | 136 – 121 | |
| SC/ST/OBC | 40th परसेंटाइल | 136 – 107 | |
| SC/OBC – PwD | 40th परसेंटाइल | 120 – 107 | |
| ST – PwD | 40th परसेंटाइल | 120 – 107 |
FAQs
BDS एक 5 वर्षीय ग्रेजुएशन कोर्स है, जिसमें 4 साल की पढ़ाई और 1 साल की अनिवार्य इंटर्नशिप शामिल होती है।
वर्तमान में BDS कोर्स में एडमिशन के लिए NEET परीक्षा उत्तीर्ण करना अनिवार्य है।
BDS के बाद विदेश में प्रैक्टिस संभव है, लेकिन वहां की आवश्यक लाइसेंसिंग परीक्षा पास करनी होती है।
बीडीएस कोर्स करने के लिए 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री, बायोलॉजी और अंग्रेज़ी के साथ न्यूनतम 50% अंक और NEET परीक्षा उत्तीर्ण होना अनिवार्य है।
बीडीएस डॉक्टर दांतों और मुंह की समस्याओं का इलाज करते हैं और मरीजों की ओरल हेल्थ का ध्यान रखते हैं।
हमें उम्मीद है कि इस लेख में आपको बीडीएस कोर्स की सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्स से संबंधित लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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