Savitribai Phule Poems in Hindi: सावित्रीबाई फुले की कविताएं, जीवन परिचय, अनमोल विचार

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Savitribai Phule Poems in Hindi

Savitribai Phule Poems in Hindi: सावित्रीबाई फुले एक ऐसी भारतीय समाज सुधारक, नारी शिक्षा की अग्रदूत और महान कवयित्री थीं, जिन्होंने अपना सारा जीवन समाजिक उत्थान के लिए खपा दिया। उनकी कविताएँ समाज की असमानता और अन्याय के खिलाफ प्रखर आवाज उठाती हैं। उनकी कविताओं से प्रेरणा पाकर आप अपना जीवन समाज के कल्याण और नारी सशक्तिकरण के प्रति समर्पित कर पाएंगे। इस लेख में आपको शिक्षा के महत्व और सावित्रीबाई फुले के जीवन संघर्षों के बारे में जानने का अवसर मिलेगा। इस ब्लॉग में आप सावित्रीबाई फुले की कविताएं (Savitribai Phule Poems in Hindi) पढ़ पाएंगे, जो आपको जीवनभर प्रेरित करेंगे। यह कविताएं आपके जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने का प्रयास करेंगी।

सावित्रीबाई फुले की कविताएं – Savitribai Phule Poems in Hindi

सावित्रीबाई फुले की कविताएं (Savitribai Phule Poems in Hindi) कला-साहित्य के क्षेत्र में एक मुख्य भूमिका निभाती हैं, जो मानव को बेहतर जीवन जीने के लिए प्रेरित करती हैं। ये कविताएं कुछ इस प्रकार है;

  • उसे कैसे इन्सान कहें?
  • श्रेष्ठ धन
  • कवि और कविता में
  • ओ स्त्री जाग!
  • शिक्षा की ज्योति

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उसे कैसे इन्सान कहें?

Savitribai Phule Poems in Hindi आपकी चेतना को जागृत करने का सफल प्रयास करेंगी। इस श्रृंखला में उनकी पहली कविता “उसे कैसे इन्सान कहें?” है, जो कुछ इस प्रकार है:

ज्ञान नहीं, विद्या नहीं
पढ़-लिखकर शिक्षित होने की मंशा नहीं
दिमाग होकर भी उसे व्यर्थ गवाएं
उसे कैसे इन्सान कहें?

दे हरि खाट पर बैठे-बैठे,
पशु भी ऐसा कभी करे नहीं
विचार नहीं, आचार नहीं
उसे कैसे इन्सान कहें?

घर में बच्चों की भरमार
उनकी परवरिश और खाने-पीने के हाल
काम-चोर आलसी बना कंगाल
उसे कैसे इन्सान कहें?

सहानुभूति न देता कोई
सहायता न करे कोई
बेपरवाह न करे किसी की
उसे कैसे इन्सान कहें?

ज्योतिष, पंचाग, हस्तरेखा में पड़े मूर्ख
स्वर्ग-नरक की कल्पना करे
पशु जीवन की हकीकत देखे नहीं
उसे कैसे इन्सान कहें?

पत्नी काम करती रहे
मुफ्तखोर बेशर्म खावे
पशुओं में ऐसा अजूबा नहीं
उसे कैसे इन्सान कहें?

घर-संसार में कंगाली छाई रहे
जिसका कोइ पड़ोसी नहीं
धिक्कार करे सभी रिश्तेदार
उसे कैसे इन्सान कहें?

लिख-पढ़ न पावे,
अनसुनी करे भलाई की बात
पशु को भी बात समझ में आवे
उसे कैसे इन्सान कहें?

पशुता की शर्म नहीं
उस बेशर्मी को ही माने सुख
पशु जीवन की जो राह चले
उसे इन्सान कैसे कहें?

दूसरों की कभी मदद न करे
सेवा त्याग दया ममता से रहे हमेशा परे
जिसे सद्गुण सदाचार खले
उसे इन्सान कैसे कहें?

गुलामी का न जिसे रंज हो
न कभी उन्नति का संकल्प करे
मानवता को जो कहे मेरी ठोकर तले
उसे इन्सान कैसे कहें?

पशु-पक्षी, कीड़े-मकौड़े, बन्दर, इन्सान
जन्म-मृत्यु सभी चराचर को एक समान
जीवन का इतना सा सच जिसे समझ न आए
उसे इन्सान कैसे कहें?

-सावित्रीबाई फुले

भावार्थ : इस कविता के माध्यम से कवियत्री उन लोगों पर व्यंग्य करती है जो दूसरों का शोषण करते हैं और उन्हें दबाते हैं। कविता के माध्यम से कवियत्री लोगों को अन्याय और अत्याचार के खिलाफ आवाज उठाने के लिए प्रेरित करती हैं। साथ ही यह कविता मानवता के मूल्यों को अपनाने और समाज में समानता स्थापित करने के लिए मानव को प्रेरित करती है।

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श्रेष्ठ धन

Savitribai Phule Poems in Hindi आपकी चेतना को जागृत करने का सफल प्रयास करेंगी। इस श्रृंखला में उनकी एक सुप्रसिद्ध बाल कविता “श्रेष्ठ धन” है, जो कुछ इस प्रकार है:

सुबह-सवेरे उठे जो बच्चा,
शौच आदि मुखमार्जन करे
हो जाए नहा-धोकर तैयार
और करे माता-पिता को अभिवादन।

स्मरण करके गुरू का
मन लगाकर करे पढ़ाई
लाभकारी है दिन जीवन के व्यर्थ ना गवाएं।

करे नित पढ़ाई ज्ञान पाने के लिए
विद्या को समझकर सर्वोच्च
लीजिए लाभ विद्या का
मन के एकाग्र करते हुए।

विद्या ही धन है
सभी धन-दौलत से सर्वश्रेष्ठ अच्छा
जिसके पास है ज्ञान का भण्डार
है वह ज्ञानी जनता की नजरों में सच्चा।

-सावित्रीबाई फुले

भावार्थ : इस कविता के माध्यम से कवियत्री शिक्षा को सर्वोच्च धन बताने का सफल प्रयास करती हैं, साथ ही इस कविता के माध्यम से कवियत्री समाज को शिक्षित होने के लिए प्रेरित करती है। यह कविता शिक्षा के महत्व पर भी अधिक जोर डालती है, जिसका लक्ष्य समाज से अज्ञानता के अंधकार को मिटाने का होता है। सरल भाषा में लिखी इस कविता के माध्यम से कवियत्री गरीबों और वंचितों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित करती हैं।

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कवि और कविता में

Savitribai Phule Poems in Hindi आपकी चेतना को जागृत करने का सफल प्रयास करेंगी। इस श्रृंखला में उनकी एक सुप्रसिद्ध कविता “कवि और कविता में” है, जो कुछ इस प्रकार है:

कवि करता है कविता का सृजन
कल्पना के सहारे
सुख-दुख की वह बातें करता
कभी स्वर्ग का अनुभव
तो कभी नरक का अनुभव करता है वह।

कवि पल में स्वयं रोता, रुलाता
कभी नाचने लगता, कभी गाता है
कभी देवता आराधना करता दिखाई देता है।

कवि अघटित घटना का सृजनहार
कवि अद्भुत-भव्य लय में गाता है
नजरों के सामने खड़ी करता है काल्पनिक परियाँ
किन्तु कवि से प्रेम, परी ना करें कभी।

गालों में मुस्कुराकर
मीठी-मीठी बातें कर
बहकावे कल्पनालोक की परियाँ
बाहों में भर कर लेती है चुम्बन
कवि के मन में ऐसा चित्र दिखाई दे!

-सावित्रीबाई फुले

भावार्थ : इस कविता के माध्यम से कवियत्री कवि और कविता के बीच संबंधों पर प्रकाश डालती हैं। इस कविता के माध्यम से कवियत्री कवियों को यह कहकर प्रेरित करती हैं कि वे अपनी कविता का उपयोग समाज के उत्थान के लिए करें। इस कविता को मुख्य रूप से तीन पहलुओं “कवि का कर्तव्य, कविता का प्रभाव तथा कवि और कविता का संबंध” में विभाजित करके आसानी से समझा जा सकता है। यह कविता समाज में कविताओं के महत्व और उनकी भूमिका के बारे में बताती हैं।

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ओ स्त्री जाग!

Savitribai Phule Poems in Hindi आपकी चेतना को जागृत करने का सफल प्रयास करेंगी। इस श्रृंखला में एक सुप्रसिद्ध कविता “ओ स्त्री जाग!” है, जो कुछ इस प्रकार है:

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तेरा घर कैसा जलता है?
तेरे पति, तेरे बेटा, तेरे भाई,
सब शराबी होकर हैं लड़ते-झगड़ते;
तू क्यों सोती है?

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तेरी बेटी को, तेरी बहू को,
सब सास-ससुर के घर में हैं रोती-बिलखती;
तू क्यों सोती है?

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तेरे घर का, तेरे धन का,
सब चोर-डाकू लूटकर ले जाते हैं;
तू क्यों सोती है?

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तेरे जीवन का, तेरे सुख का,
सब दुश्मन छीनकर ले जाते हैं;
तू क्यों सोती है?

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तेरे भविष्य का, तेरे उद्धार का,
सब राह दिखाई देती है;
तू क्यों सोती है?

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तेरा कर्तव्य पुकारता है;
तू क्यों सोती है?

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तेरा समय निकलता है;
तू क्यों सोती है?

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तेरा जीवन खत्म होता है;
तू क्यों सोती है?

ओ स्त्री जाग! जाग! तू क्यों सोती है?
देख तू अब नहीं सो सकती है;
तू जाग! जाग! जाग! तू जाग!

-सावित्रीबाई फुले

भावार्थ : इस कविता के माध्यम से कवियत्री स्त्रियों को जागृत करने और उन्हें अपने अधिकारों के लिए लड़ने के लिए प्रेरित करती हैं। इस कविता में कवियत्री ने नारियों को उनकी शक्ति का एहसास कराने का सफल प्रयास किया है। कविता में कवियत्री द्वारा मुख्य रूप से स्त्रियों को “शिक्षा प्राप्त करने, सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने और पुरुषों के समान अधिकारों के लिए लड़ने” के लिए प्रेरित करती है।

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शिक्षा की ज्योति

Savitribai Phule Poems in Hindi आपकी चेतना को जागृत करने का सफल प्रयास करेंगी। इस श्रृंखला में उनकी एक लोकप्रिय कविता “शिक्षा की ज्योति” है, जो कुछ इस प्रकार है:

शिक्षा की ज्योति जलाकर,
अंधेरे को मिटाना है।
ज्ञान का दीप जलाकर,
जीवन को सजाना है।

स्त्री शिक्षा की ज्योति जले,
यह हमारा नारा है।
अंधश्रद्धा और कुरीतियों को,
दूर भगाना है।

शिक्षा की ज्योति से ही,
महिलाओं का उद्धार होगा।
वे भी पुरुषों के समान,
समाज में आगे बढ़ेंगी।

शिक्षा की ज्योति से ही,
समाज का विकास होगा।
एक नया समाज बनेगा,
जहाँ सभी को समान अधिकार होंगे।

आओ, हम सब मिलकर,
शिक्षा की ज्योति जलाएं।
और एक बेहतर समाज का निर्माण करें।

-सावित्रीबाई फुले

भावार्थ : इस कविता के माध्यम से कवियत्री ने शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डालने का प्रयास किया है। इस कविता में कवियत्री स्त्री शिक्षा पर विशेष जोर देती हैं। इस कविता के माध्यम से हमें शिक्षा की ज्योति जलाने और एक बेहतर समाज का निर्माण करने की प्रेरणा मिलती है। इस कविता की सरल और स्पष्ट भाषा में समाज सुधारक सावित्रीबाई फुले की प्रगतिशील विचारधारा को देखा जा सकता है।

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सावित्रीबाई फुले का संक्षिप्त जीवन परिचय

सावित्रीबाई फुले की कविताएं पढ़ने से पहले आपको सावित्रीबाई फुले के बारे में अवश्य पढ़ लेना चाहिए। सावित्रीबाई फुले भारत की एक अग्रणी सामाजिक सुधारक थीं, जिन्होंने 19वीं सदी में महिलाओं की शिक्षा और अधिकारों तथा जाति भेदभाव को मिटने के लिए जीवनभर संघर्ष किया। उन्हें भारत की पहली महिला शिक्षिका का भी दर्जा प्राप्त है और वे महिला आंदोलन की अग्रणी हस्तियों में से एक हैं।

सावित्रीबाई फुले जी का जन्म 3 जनवरी, 1831 को महाराष्ट्र में हुआ था। सावित्रीबाई पहली महिला शिक्षक के रूप में जानी जाती हैं, जिन्होंने भारत में पहली-सर्व-बालिका विद्यालय में पढ़ाया। उन्होंने अपना सारा जीवन वंचितों के उत्थान और अछूतों को समाज का एक समान हिस्सा बनाकर जाति व्यवस्था को समाप्त करने के लिए समर्पित कर दिया।

वर्ष 1852 में उन्होंने अछूत लड़कियों के लिए एक स्कूल खोला और उन्हें मुफ्त में पढ़ाकर भारत की पहली महिला शिक्षक बनीं। सावित्रीबाई फुले जी का निधन 10 मार्च, 1897 को हुआ था।

सावित्रीबाई फुले के अनमोल विचार

Savitribai Phule Poems in Hindi को पढ़ने के बाद आपको इस ब्लॉग में सावित्रीबाई फुले के अनमोल विचार भी पढ़ने का अवसर प्राप्त होगा। सावित्रीबाई फुले के अनमोल विचार कुछ इस प्रकार हैं;

  • शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है, जिसका उपयोग आप पूरे समुदाय को बदलने के लिए कर सकते हैं।
  • कोई तुम्हें कमजोर समझे, इससे पहले तुम्हे शिक्षा के महत्व को समझना होगा।
  • शिक्षा स्वर्ग का द्वार खोलती है, खुद को जानने का अवसर देती है।
  • मेरा मानना है कि शिक्षा हर महिला की मुक्ति की कुंजी है।
  • शिक्षा स्वर्ग का मार्ग खोलता है, स्वयं को जानने का मौका देता है।

FAQs

सावित्रीबाई फुले कौन थीं?

सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका, समाज सुधारक और कवयित्री थीं। उन्होंने महिला शिक्षा, दलित उत्थान और सामाजिक समानता के लिए अपना जीवन खपाया और समाज का मार्गदर्शन किया।

सावित्रीबाई फुले की कविताओं की मुख्य विशेषताएं क्या हैं?

सावित्रीबाई फुले की कविताओं में सामाजिक असमानता, जातिवाद, महिला सशक्तिकरण और शिक्षा का महत्व जैसे विषय प्रमुखता से शामिल हैं। उनकी रचनाओं की भाषा बेहद ही सरल और आम जनता को प्रेरित करने वाली है।

सावित्रीबाई फुले की कविताओं का समाज पर क्या प्रभाव पड़ा?

सावित्रीबाई फुले की कविताओं ने समाज में शिक्षा का महत्व बढ़ाया और महिलाओं को सशक्त होने के लिए प्रेरित किया। इसके साथ ही उन्होंने अपने शब्दों के माध्यम से जातिवाद और लैंगिक भेदभाव के विरुद्ध अपनी प्रखर आवाज उठाई।

सावित्रीबाई फुले की कविताओं को कहां पढ़ा जा सकता है?

सावित्रीबाई फुले की कविताएं उनके द्वारा लिखित पुस्तकों और लेखों में संकलित हैं। इसके अलावा, कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और लाइब्रेरी में भी उनकी रचनाएं उपलब्ध हैं, जिन्हें आप आसानी से पढ़ सकते हैं।

क्या सावित्रीबाई फुले की कविताओं का अन्य भाषाओं में अनुवाद हुआ है?

हां, सावित्रीबाई फुले की कविताओं का मराठी, अंग्रेजी और अन्य भारतीय भाषाओं में अनुवाद किया गया है। यह उनकी कविताओं की प्रासंगिकता और गहराई को दर्शाता है।

सावित्रीबाई फुले की कविताओं से हमें क्या सीखने को मिलता है?

सावित्रीबाई फुले की कविताएं हमें शिक्षा का महत्व, समाज में समानता और महिलाओं के अधिकारों के प्रति जागरूक करती हैं। ये रचनाएं हमें सामाजिक बुराइयों के खिलाफ खड़े होने और समाज को बेहतर बनाने की प्रेरणा देती हैं।

सावित्रीबाई फुले की कविताओं का आधुनिक समाज में महत्व क्या है?

सावित्रीबाई फुले की कविताएं आधुनिक समाज में आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, जितनी वे अपने रचना के कालखंड में हुआ करती थी। उनकी कविताएं महिला सशक्तिकरण, शिक्षा और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरणा स्रोत हैं, जो समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सक्षम हैं।

सावित्रीबाई फुले की कविताओं का उपयोग कहां किया जा सकता है?

सावित्रीबाई फुले की कविताओं का उपयोग शिक्षा के क्षेत्र, सामाजिक जागरूकता अभियानों और महिला सशक्तिकरण कार्यक्रमों में किया जा सकता है। उनके लिखे शब्द आज की पीढ़ी को भी प्रेरित कर सकते हैं।

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आशा है कि इस ब्लॉग में आपको सावित्रीबाई फुले की कविताएं (Savitribai Phule Poems in Hindi) पढ़ने का अवसर मिला होगा, यह कविताएं आपको सदा ही प्रेरित करेंगी। आशा है कि यह ब्लॉग आपको इंट्रस्टिंग और इंफॉर्मेटिव भी लगा होगा, इसी प्रकार की अन्य कविताएं पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट Leverage Edu के साथ बने रहें।

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