Khushwant Singh Poems in Hindi : पढ़िए खुशवंत सिंह की वो कविताएं, जो आपका परिचय साहित्य के सौंदर्य से करवाएंगी

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Khushwant Singh Poems in Hindi

कविताएं संसार को साहस से परिचित कराती हैं, सही अर्थों में देखा जाए तो कविताएं ही मानव को समाज की कुरीतियों और अन्याय के विरुद्ध लड़ना सिखाती हैं। विद्यार्थी जीवन में विद्यार्थियों का उद्देश्य अधिकाधिक ज्ञान अर्जित करने का होता है, इसी ज्ञान की कड़ी में विद्यार्थियों को कविताओं की महत्वता को भी समझ लेना चाहिए। कविताओं के माध्यम से समाज की चेतना को जागृत करने वाले कवि “खुशवंत सिंह” की लेखनी ने सदा ही समाज के हर वर्ग को प्रेरित करने का काम किया है। Khushwant Singh Poems in Hindi (खुशवंत सिंह की कविताएं) विद्यार्थियों को प्रेरणा से भर देंगी, जिसके बाद उनके जीवन में एक सकारात्मक परिवर्तन देखने को मिलेगा।

कौन हैं खुशवंत सिंह?

Khushwant Singh Poems in Hindi (खुशवंत सिंह की कविताएं) पढ़ने सेे पहले आपको खुशवंत सिंह जी का जीवन परिचय पढ़ लेना चाहिए। भारतीय साहित्य की अप्रतीम अनमोल मणियों में से एक बहुमूल्य मणि खुशवंत सिंह भी हैं, जिनकी लेखनी आज के आधुनिक दौर में भी प्रासंगिक हैं। अपनी महान लेखनी और साहित्य की समझ से खुशवंत सिंह को हिंदी कवियों की श्रेणी में विशिष्ट स्थान प्राप्त है।

2 फरवरी 1915 को खुशवंत सिंह का जन्म पाकिस्तान के लाहौर शहर में हुआ था। खुशवंत सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा लाहौर में ही प्राप्त की, जिसके बाद उन्होंने सेंट स्टीफन्स कॉलेज, दिल्ली से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी करके, स्नातक की उपाधि प्राप्त की। इसके बाद खुशवंत सिंह ने इंग्लैंड में किंग्स कॉलेज, लंदन से कानून की डिग्री को प्राप्त किया।

अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता से शुरू करने वाले खुशवंत सिंह ने वर्ष 1942 में “द हिंदू” से अपना सफर शुरू किया। जिसके बाद उन्होंने एक पत्रकार, हिंदी साहित्य के जानकार और एक लेखक के अपने किरदार को बखूबी निभाया। उनके द्वारा लिखे उपन्यास, कहानी, निबंध, और कविताओं ने समाज पर एक गहरा प्रभाव छोड़ा।

खुशवंत सिंह के प्रमुख उपन्यसों में “ट्रेन टू पाकिस्तान”, “इंदिरा गाँधी: द डेथ ऑफ मदर इंडिया”, “ए वुमन एंड ए पैलेस”, “द लास्ट लीफ” आदि सुप्रसिद्ध हैं। साहित्य के लिए उनके अहम योगदान को देखते हुए उन्हें, पद्म भूषण और पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। 20 मार्च, 2014 को खुशवंत सिंह का नई दिल्ली में निधन हुआ।

मेरा भारत

Khushwant Singh Poems in Hindi (खुशवंत सिंह की कविताएं) आपकी जीवनशैली में साकारत्मक बदलाव कर सकती हैं। खुशवंत सिंह जी की प्रसिद्ध रचनाओं में से एक “मेरा भारत” भी है, जो हमारे भारत के स्वरुप को बेहद सुंदर रूप से चित्रित करती है, यह कविता कुछ इस प्रकार है:

मेरा भारत, मेरी मातृभूमि,
तू है अद्भुत और सुंदर।
तेरी धरती, तेरा आकाश,
तेरी नदियाँ, तेरे पर्वत,
सब ही अविस्मरणीय हैं।

तेरे लोग, तेरे संस्कृति,
तेरी विरासत, तेरा इतिहास,
सब ही गौरवशाली हैं।

तू है सत्य, तू है धर्म,
तू है शांति, तू है अहिंसा।
तू है ज्ञान, तू है दर्शन,
तू है प्रकाश, तू है जीवन।

मेरा भारत, मेरी मातृभूमि,
तू है मेरे हृदय में बसता।
मैं तेरा सदैव ऋणी रहूँगा।

-खुशवंत सिंह

आजादी

Khushwant Singh Poems in Hindi (खुशवंत सिंह की कविताएं) आपकी सोच का विस्तार कर सकती हैं, खुशवंत सिंह जी की सुप्रसिद्ध रचनाओं में से एक रचना “आजादी” भी है। यह कविता कुछ इस प्रकार है:

लाखों लोगों की कुर्बानी के बाद,
आखिरकार भारत को आजादी मिल गई।
15 अगस्त 1947 का दिन,
भारत के इतिहास का एक स्वर्णिम दिन है।

इस दिन भारत को गुलामी की जंजीरों से मुक्त किया गया,
और वह एक स्वतंत्र देश बना।
इस दिन भारत के लोगों ने नए भारत के सपने देखे,
और उन्होंने एक बेहतर भविष्य की कामना की।

आजादी एक ऐसा उपहार है,
जिसे हमें कभी नहीं भुलाना चाहिए।
हमें इस उपहार की रक्षा करनी चाहिए,
और इसे आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाना चाहिए।

-खुशवंत सिंह

विभाजन

Khushwant Singh Poems in Hindi आपकी जीवनशैली में साकारत्मक बदलाव कर सकती हैं, खुशवंत सिंह जी की सुप्रसिद्ध रचनाओं की श्रेणी में से एक रचना “विभाजन” भी है। यह कविता विभाजन की विभीषका को मार्मिक रूप से चित्रित किया गया है, जो कि कुछ इस प्रकार है:

धर्म के नाम पर हुआ विभाजन,
देश को दो टुकड़ों में बाँट दिया।
हिन्दू और मुसलमान, दोनों ही हुए हारे,
दोनों ही हुए दर्द से तड़पते।

घर-बार, परिवार, सब कुछ छिन गया,
लोगों को अपने ही देश में शरणार्थी होना पड़ा।
रक्तपात, अत्याचार, और बर्बरता,
सब कुछ देखने को मिला।

विभाजन एक ऐसा कलंक है,
जिसकी कभी भी सफाई नहीं हो सकती।
यह हमारे देश के इतिहास का एक काला अध्याय है,
जिसे कभी भी नहीं भूलना चाहिए।

-खुशवंत सिंह

मैं हूँ

Khushwant Singh Poems in Hindi के माध्यम से आपको कवि की भावनाओं का अनुमान लगेगा, खुशवंत सिंह जी की सुप्रसिद्ध रचनाओं में से एक रचना “मैं हूँ” भी है। यह कुछ इस प्रकार है:

मैं हूँ, जो हूं,
मैं हूं, जो हूं,
मेरी पहचान,
मेरा नाम नहीं है।

मेरी पहचान,
मेरा चेहरा नहीं है,
मेरी पहचान,
मेरी जाति नहीं है।

मेरी पहचान,
मेरा धर्म नहीं है,
मेरी पहचान,
मेरा देश नहीं है।

मेरी पहचान,
मेरा प्रेम है,
मेरी पहचान,
मेरा करुणा है।

मेरी पहचान,
मेरा कर्तव्य है,
मेरी पहचान,
मेरा मानवता है।

-खुशवंत सिंह

प्रेम

Khushwant Singh Poems in Hindi के माध्यम से आपको कवि की भावनाओं का अनुमान लगेगा, खुशवंत सिंह जी की रचनाओं में से एक रचना “प्रेम” भी है। यह कविता कुछ इस प्रकार है:

प्रेम है एक अद्भुत शक्ति,
जो जीवन को सुंदर बनाती है।
प्रेम है एक अनमोल उपहार,
जो हमें खुशी और आनंद देता है।

प्रेम है एक मधुर संगीत,
जो हमारे दिलों को छूता है।
प्रेम है एक सुगंधित फूल,
जो हमारे जीवन को महकाता है।

प्रेम है एक दीप्तिमान प्रकाश,
जो हमारे जीवन को रोशन करता है।
प्रेम है एक दिव्य शक्ति,
जो हमें पूर्णता की ओर ले जाती है।

-खुशवंत सिंह

आशा है कि Khushwant Singh Poems in Hindi (खुशवंत सिंह की कविताएं) के माध्यम से आप खुशवंत सिंह की रचनाएं पढ़ पाएं होंगे, जो कि आपको सदा प्रेरित करती रहेंगी। साथ ही यह ब्लॉग आपको इंट्रस्टिंग और इंफॉर्मेटिव भी लगा होगा, इसी प्रकार की अन्य कविताएं पढ़ने के लिए हमारी वेबसाइट Leverage Edu के साथ बने रहें।

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