मरीन इंजीनियर कैसे बनें?

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मरीन इंजीनियर

महासागर को नेविगेट करने के लिए आवश्यक तकनीक और उपकरण बनाना एक महत्वपूर्ण कार्य है। मरीन इंजीनियर अपने मैकेनिक्स और फिजिक्स के ज्ञान का उपयोग आवश्यक बेसिक इंफ्रास्ट्रक्चर को विकसित करने के लिए करते हैं, जो पानी में सफलतापूर्वक कार्य कर सकते हैं। यदि आप मरीन टेक्नोलॉजी में रुचि रखते हैं और बड़े पैमाने पर टेक्निकल प्रॉब्लम्स को हल करना पसंद करते हैं, तो मरीन इंजीनियर बनना आपके लिए सही करियर डिसीजन हो सकता है। इस ब्लॉग में, हम मरीन इंजीनियरिंग में करियर की मूल बातें समझाते हुए आपको बताएंगे कि आप एक मरीन इंजीनियर कैसे बन सकते हैं।

This Blog Includes:
  1. मरीन इंजीनियर किसे कहते है?
  2. मरीन इंजीनियर के कर्त्तव्य
  3. मरीन इंजीनियर बनने के लिए आवश्यक कौशल
  4. मरीन इंजीनियर कैसे बनें? (स्टेप बाई स्टेप गाइड)
    1. स्टेप 1: बैचलर्स डिग्री अर्जित करें
    2. स्टेप 2: मरीन इंजीनियरिंग से संबंधित इंटर्नशिप के लिए साइन अप करें
    3. स्टेप 3: मास्टर डिग्री पर विचार करें
    4. स्टेप 4: प्रवेश स्तर की मरीन इंजीनियरिंग भूमिकाओं के लिए आवेदन करें
    5. स्टेप 5: विशिष्ट योग्यता प्राप्त करें
  5. मरीन इंजीनियर बनने के लिए आवश्यक कोर्सेज
  6. मरीन इंजीनियरिंग सिलेबस
  7. दुनिया के टॉप विश्वविद्यालय
  8. भारत के टॉप विश्वविद्यालय
  9. पात्रता मानदंड
  10. मरीन इंजीनियर बनने के लिए शारीरिक योग्यता
  11. आवेदन प्रक्रिया
    1. भारतीय विश्वविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया
    2. विदेश में आवेदन प्रक्रिया
  12. आवश्यक दस्तावेज़
  13. प्रवेश परीक्षाएं
  14. आवश्यक पुस्तकें
  15. मरीन इंजीनियर के रूप में करियर स्कोप
  16. मरीन इंजीनियर की सैलरी
  17. शीर्ष भर्ती कंपनियां
  18. FAQs

मरीन इंजीनियर किसे कहते है?

एक मरीन इंजीनियर एक प्रकार का मैकेनिकल इंजीनियर होता है, जो जहाजों, नावों, पनडुब्बियों और अन्य जलयानों को डिजाइन करता है। वे समुद्री यात्रा और अन्य समुद्री गतिविधियों से संबंधित अन्य संरचनाएं, मशीनें और तकनीकी उपकरण भी बनाते हैं। मरीन इंजीनियर फ्लूइड मैकेनिक्स, हाइड्रोलिक्स और अन्य कॉन्सेप्ट्स की अपनी जटिल समझ के जरिए इच्छित उद्देश्यों के आधार पर टिकाऊ जल जहाजों की डिजाइनिंग और निर्माण का कार्य करते हैं।  वे एक जहाज को उसके डेस्टीनेशन तक सफलतापूर्वक गाइड करने और पानी में बाधाओं को दूर करने के लिए विद्युत, स्टीयरिंग, जलवायु नियंत्रण, रडार और इंजन सिस्टम को मिलाते हैं।

मरीन इंजीनियर यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार हैं कि अन्य समुद्री और नौसैनिक प्रोफेशनल्स अपने कार्यों को सुरक्षित रूप से पूरा कर सकें, चाहे वे बड़े जहाजों या फिर डॉक पर काम करें। वे उन सभी कारकों का आकलन करते हैं जो जलीय पर्यावरण को प्रभावित करते हैं और पानी में और उसके आसपास संचालन के लिए समाधान विकसित करते हैं। मरीन इंजीनियर जो मशीनें बनाते हैं, वे यात्रा, समुद्र संरक्षण, संसाधन जुटाने और यहां तक कि सैन्य खुफिया अभियानों (military intelligence missions) में भी उपयोग में लाए जाते हैं।

मरीन इंजीनियर के कर्त्तव्य

प्रारंभिक ब्लूप्रिंट डिजाइन से लेकर जहाज के रखरखाव तक, मरीन इंजीनियर एक समुद्री जहाज बनाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल होते हैं। वे एक नए प्रोजेक्ट के लिए स्पेसिफिकेशंस को निर्धारित करने और जलीय वातावरण में लॉन्च के लिए परीक्षण करने के लिए अन्य इंजीनियरों और नौसेना तकनीशियनों का सहयोग करते हैं। मरीन इंजीनियरों के लिए कुछ प्राथमिक कर्तव्यों में शामिल हैं:

  • एक नए जहाज के फिजिकल एस्पेक्ट और इंटरनल लेआउट को चित्रित करना।
  • ऑपरेशनल गोल्स को प्राप्त करने के लिए आवश्यक उपकरणों और सप्लीमेंट मशीनों  के प्रकार का निर्धारण करना।
  • जहाज के डिजाइन लीगल रेगुलेशन का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए एनवायरमेंटल इंपैक्ट असेसमेंट की योजना बनाना।
  • समुद्री यात्रा की अवधि के लिए पर्याप्त ऊर्जा या ईंधन के साथ जहाज की आपूर्ति करने की योजना बनाना।
  • नियंत्रित वातावरण में वाटर पॉट कंपोनेंट्स की टेस्टिंग करना और एडजस्टमेंट करना।
  • समुद्री उपकरणों के निर्माण के लिए उपयुक्त सामग्री और निर्माण तकनीकों का चयन करना।
  • एमरजेंसी रिपेयर ट्रबलशूटिंग के लिए इंस्टालेशन इंस्ट्रक्शन और टेक्निकल मैनुअल लिखना।
  • एक प्रारंभिक प्रोजेक्ट और किसी भी चल रहे रखरखाव की लागत का अनुमान लगाना।
  • जहाज के सभी हिस्सों में स्टेबिलिटी और ड्यूरेबिलिटी सुनिश्चित करने के लिए ठेकेदारों को सुपरवाइज करना।
  • जहाज की गति, उछाल और अन्य प्रमुख मेट्रिक्स पर डेटा एकत्र करना और उसकी एनालिसिस करना।
  • निर्माण प्रक्रिया में प्रत्येक चरण को पूरा करने के लिए एक प्रोग्राम तैयार करना और समय सीमा को पूरा करने के लिए संचालन की निगरानी करना।

मरीन इंजीनियर बनने के लिए आवश्यक कौशल

मरीन इंजीनियरिंग क्षेत्र में सफल होने के लिए, आपके पास कई दक्षताओं में उन्नत ज्ञान और कौशल होना आवश्यक है। मरीन इंजीनियरों के लिए कुछ सबसे महत्वपूर्ण कौशल हैं:

  • रचनात्मकता: मरीन इंजीनियर स्पेसिफिक ऑपरेटिंग आवश्यकताओं को पूरा करने वाले कार्यात्मक जहाज डिजाइन और उपकरण विकसित करने के लिए रचनात्मकता का उपयोग करते हैं। अतः मरीन इंजीनियर बनने के इच्छुक छात्रों को क्रिएटिव अर्थात् रचनात्मक होने की आवश्यकता होती है।
  • प्रॉब्लम सॉल्विंग: टेस्टिंग और ट्रबलशूटिंग एक मरीन इंजीनियर की नौकरी का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके लिए उन्हें उन्नत प्रॉब्लम सॉल्विंग  स्किल्स की आवश्यकता होती है।
  • गणितीय क्षमता: गणितीय समीकरणों को जल्दी से हल करने और एक डिजाइन के लिए सही अनुपात निर्धारित करने में सक्षम होने से मरीन इंजीनियरों को संरचनात्मक रूप से जहाजों को विकसित करने में मदद मिलती है।
  • संगठन: एक प्रोजेक्ट के दौरान, मरीन इंजीनियरों को पूरी तरह से काम करने वाले जहाज के विकास में शामिल प्रत्येक घटक और पहलू को व्यवस्थित और समन्वयित करना होता है।
  • संचार: मरीन इंजीनियर अन्य इंजीनियरों, डिजाइनरों, निर्माण पेशेवरों और ग्राहकों के साथ मिलकर काम करते हैं। इसके लिए उन्हें उत्कृष्ट कम्युनिकेटर होने की आवश्यकता है।

मरीन इंजीनियर कैसे बनें? (स्टेप बाई स्टेप गाइड)

मरीन इंजीनियरिंग कोर्स के लिए आप पीसीएम सब्जेक्ट से 12वीं पास होने चाहिए। इसके लिए आप बीटेक इन मरीन इंजीनियरिंग या बीएससी इन नॉटिकल साइंस कोर्स कर इस फील्ड में प्रवेश कर सकते हैं। बीटेक मरीन इंजीनियरिंग कोर्स की अवधि 4 बर्ष होती है। बीएससी नॉटिकल साइंस 3 वर्ष का कोर्स होता है। नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो करके आप एक मरीन इंजीनियर के रूप में अपने करियर की शुरुआत कर सकते हैं–

स्टेप 1: बैचलर्स डिग्री अर्जित करें

एक मरीन इंजीनियर के रूप में अपना करियर शुरू करने के लिए, विभिन्न मरीन इंजीनियरिंग कार्यक्रमों के बारे में जानकारी एकत्र करें। आप उन कॉलेजों और विश्वविद्यालयों की तलाश कर सकते हैं जिनमें मरीन इंजीनियरिंग प्रमुख कोर्स है। इसके अलावा आप एक मरीन अकादमी में आवेदन कर सकते हैं जो एक इंजीनियरिंग विशेषता प्रदान करता है। आप AI Course Finder की मदद से अपनी रुचि के अनुसार अपने मनपसंद मरीन इंजीनियरिंग कोर्स का चयन कर सकते हैं। कुछ मरीन इंजीनियरों के पास सामान्य इंजीनियरिंग की डिग्री होती है, लेकिन उन कोर्सेज का चयन करना सुनिश्चित करना चाहिए जो सीधे मरीन इंजीनियरिंग वातावरण पर लागू होते हैं। 

स्टेप 2: मरीन इंजीनियरिंग से संबंधित इंटर्नशिप के लिए साइन अप करें

अपनी बैचलर्स की डिग्री पूरी करते समय, इंटर्नशिप के अवसरों के लिए आवेदन करें जो आपको दिखा सकें कि एक मरीन इंजीनियर बनना कैसा होता है। अपनी रुचियों के आधार पर, आप नौसेना आर्किटेक्चर या पानी के नीचे के जहाजों जैसे विशिष्ट क्षेत्रों से संबंधित इंटर्नशिप के लिए आवेदन कर सकते हैं। मरीन इंजीनियरिंग इंटर्नशिप खोजने के लिए सामान्य स्थानों में ऊर्जा कंपनियां, डिजाइन फर्म, जहाज निर्माण कंपनियां, मिलिट्री एंड लेजर क्रूजेस कंपनियां जैसे क्रूज लाइन या नौका डेवलपर्स शामिल हैं।

स्टेप 3: मास्टर डिग्री पर विचार करें

यदि आपके पास पहले से ही समुद्री इंजीनियरिंग के लिए किसी विशिष्ट विषय में बैचलर्स की डिग्री है तो मास्टर डिग्री वैकल्पिक हो सकती है। हालाँकि, यदि आपके पास किसी अन्य प्रकार की इंजीनियरिंग की डिग्री है, तो आपको एक मास्टर डिग्री की आवश्यकता हो सकती है जो स्पष्ट रूप से समुद्री इंजीनियरिंग पर केंद्रित हो। एक मास्टर डिग्री आपको पनडुब्बियों जैसे समुद्री इंजीनियरिंग के एक विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञता हासिल करने में भी मदद कर सकती है।

स्टेप 4: प्रवेश स्तर की मरीन इंजीनियरिंग भूमिकाओं के लिए आवेदन करें

प्रवेश स्तर के मरीन इंजीनियर नौकरियों के लिए आवेदन करना शुरू करें जहां आप व्यावहारिक अनुभव प्राप्त कर सकते हैं। आपकी पहली मरीन इंजीनियरिंग स्थिति संभवतः एक जूनियर इंजीनियरिंग की भूमिका होगी जहां एक वरिष्ठ इंजीनियर से निर्देश लेते हैं जो आपके इंजीनियरिंग कार्यों का प्रतिनिधि और पर्यवेक्षण करता है। अपनी पहली मरीन इंजीनियर भूमिका के लिए आवेदन करते समय, ऐसी नौकरियों की तलाश करें जो आपकी रुचि के विशिष्ट क्षेत्र में उन्नति के अवसर प्रदान करें।

स्टेप 5: विशिष्ट योग्यता प्राप्त करें

एक बार जब आप ग्रेजुएट हो जाते हैं, तो जिस भी देश में आप नौकरी करना चाहते हैं, वहां की इंजीनियरिंग और मैरिटाइम अथॉरिटी से सर्टिफिकेट प्राप्त करें। UK में 4 साल के वर्क एक्सपीरियंस के बाद ही आप लाईसेंस प्राप्त कर सकते हैं। UK में मरीन इंजीनियर के रूप में काम करने के लिए आपको NCEES द्वारा आयोजित PE परीक्षा क्लियर करनी होगी। अंततः UK में एक लाइसेंस प्राप्त इंजीनियर बनने के लिए PE पास करना एक अनिवार्य योग्यता है। इंडिया में आप अपनी बैचलर्स डिग्री के बाद ही प्रवेश स्तर की नौकरियों के लिए अप्लाई कर सकते हैं, साथ ही आपको 2–4 साल के वर्क एक्सपीरियंस की भी आवश्यकता होगी। वहीं मास्टर्स डिग्री और हाई स्किल्ड वाले न्यू कमर्स को अधिक प्रिफरेंस दी जाती है।

मरीन इंजीनियर बनने के लिए आवश्यक कोर्सेज

मरीन इंजीनियरिंग कोर्सेज की एक श्रृंखला बैचलर और मास्टर दोनों स्तरों पर उपलब्ध है, जिसे चुनकर आप इस क्षेत्र की उत्कृष्ट ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। नीचे कुछ लोकप्रिय मरीन इंजीनियरिंग कोर्सेज की लिस्ट दी गई हैं–

कोर्स स्तर कोर्स
डिप्लोमा – Diploma in Marine Geomatics
– Diploma in Marine Engineering Technology
अंडरग्रेजुएट – BSc Nautical Science 
– BSc Marine Science
– BEng(Honors) Marine and Small Craft Technology
– BE Naval Engineering
– BEng Marine Technology
– BEng Marine and Mechanical engineering
पोस्टग्रेजुएट – MSc Subsea Engineering
– MSc Coastal Engineering
MSc Marine Engineering
– Master of Ocean Leadership
– MSc Marine Transport Management
– Master of Marine Science and Management
– Master of Ocean Leadership

मरीन इंजीनियरिंग सिलेबस

नीचे प्रमुख विषय उल्लेख किए गए हैं जो आपको समुद्री इंजीनियरिंग का अध्ययन करने के लिए मिल सकते हैं- 

  • यंत्र विज्ञान अभियांत्रिकी
  • अनुप्रयुक्त यांत्रिकी प्रयोगशाला 
  • कार्यशाला प्रौद्योगिकी
  • द्रव यांत्रिकी
  • गर्मी और रासायनिक प्रयोगशाला
  • सामग्री विज्ञान प्रयोगशाला
  • उन्नत समुद्री नियंत्रण इंजीनियरिंग और स्वचालन
  • समुद्री भाप इंजीनियरिंग
  • उन्नत समुद्री प्रौद्योगिकी
  • जहाज संचालन और प्रबंधन
  • बंदरगाहों का निर्माण, योजना, संचालन और प्रबंधन
  • समुद्री भू-तकनीकी इंजीनियरिंग
  • पोर्ट प्लानिंग और ड्रेजिंग

दुनिया के टॉप विश्वविद्यालय

जब आप अपनी रुचियों के अनुरूप कोर्स चुन लेते हैं, तो अगला कदम एक ऐसे विश्वविद्यालय का चयन करना है, जो आपको आपके चुने हुए क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन प्राप्त करने के लिए एक आदर्श मंच प्रदान कर सके। नीचे कुछ प्रमुख विश्वविद्यालय दिए गए हैं, जिनके माध्यम से आप इंजीनियरिंग के इस विशेष क्षेत्र में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं–

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भारत के टॉप विश्वविद्यालय

मरीन इंजीनियरिंग कोर्सेज की पेशकश करने वाले कुछ टॉप भारतीय विश्वविद्यालयों और कॉलेजों की लिस्ट नीचे दी गई है–

  • आंध्र यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग, विशाखापत्तनम
  • एनआईटी सुरथकल – नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी कर्नाटक
  • इंस्टीट्यूशंस ऑफ इंजीनियर्स इंडिया, कोलकाता
  • सीवी रमन ग्लोबल यूनिवर्सिटी, भुवनेश्वर
  • वेल्स विश्वविद्यालय – वेल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस टेक्नोलॉजी एंड एडवांस्ड स्टडीज
  • श्रीनिवास इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, मैंगलोर
  • मरीन इंजीनियरिंग और रिसर्च इंस्टीट्यूट, कोलकाता
  • शिवाजी विश्वविद्यालय, कोल्हापुरी
  • इंडियन मैरीटाइम यूनिवर्सिटी, चेन्नई
  • पार्क कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, कोयंबटूर
  • समुंद्रा इंस्टीट्यूट ऑफ मैरीटाइम स्टडीज, पुणे
  • जीकेएम कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी, चेन्नई

पात्रता मानदंड

यदि आप इस क्षेत्र में डिग्री प्राप्त करने के इच्छुक हैं, तो आपको अपने चुने हुए विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा। ये आवश्यकताएं कोर्सेज के स्तर के अनुसार भिन्न होती हैं, जैसे बैचलर, मास्टर या डिप्लोमा। मरीन इंजीनियरिंग कोर्सेज के लिए कुछ सामान्य पात्रता इस प्रकार हैं–

  • मरीन इंजीनियरिंग में बैचलर्स डिग्री प्रोग्राम के लिए ज़रुरी है कि उम्मीदवारों ने किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से PCM (फिजिक्स, केमिस्ट्री, गणित) से 10+2 प्रथम श्रेणी से पास किया हो।
  • भारत में मरीन इंजीनियरिंग में बैचलर्स के लिए कुछ कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज में JEE mains, JEE Advanced जैसे प्रवेश परीक्षा के स्कोर अनिवार्य हैं। साथ ही कुछ कॉलेज और यूनिवर्सिटीज अपनी स्वयं की प्रवेश परीक्षाएं आयोजित करतीं हैं। विदेश में इन कोर्सेज  के लिए यूनिवर्सिटी द्वारा निर्धारित आवश्यक ग्रेड आवश्यकताओं को पूरा करना जरुरी है, जो हर यूनिवर्सिटी और कोर्स के अनुसार अलग–अलग हो सकती है।
  • मरीन इंजीनियरिंग में PG प्रोग्राम के लिए संबंधित क्षेत्र में प्रथम श्रेणी के साथ बैचलर्स डिग्री होना आवाश्यक है। साथ ही कुछ यूनिवर्सिटीज प्रवेश परीक्षा के आधार पर भी एडमिशन स्वीकार करतीं हैं।
  • विदेश की अधिकतर यूनिवर्सिटीज बैचलर्स के लिए SAT और मास्टर्स कोर्सेज के लिए GRE स्कोर की मांग करते हैं।
  • विदेश की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए IELTS या TOEFL टेस्ट स्कोर, अंग्रेजी प्रोफिशिएंसी के प्रमाण के रूप में ज़रूरी होते हैं। जिसमे IELTS स्कोर 7 या उससे अधिक और TOEFL स्कोर 100 या उससे अधिक होना चाहिए।
  • विदेश यूनिवर्सिटीज में पढ़ने के लिए SOP, LOR, सीवी/रिज्यूमे और पोर्टफोलियो भी जमा करने की जरूरत होती है।।

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मरीन इंजीनियर बनने के लिए शारीरिक योग्यता

मरीन इंजीनियर बनने के लिए शारीरिक योग्यता नीचे दी गई है:

आयु 

  • आवेदन करता की आयु न्यूनतम आयु 17 वर्ष होनी चाहिए और अधिकतम आयु 25 वर्ष होनी चाहिए। 
  • अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए आयु सीमा में 5 साल की छूट प्राप्त है 

पुरुष 

  • उम्मीदवार की लम्बाई 150 सेमी होनी चाहिए। 
  • आंखों में किसी प्रकार का रोग नहीं होना चाहिए और न ही कलर ब्लाइंडनेस होना चाहिए। 
  • उम्मीदवार की आंखों की दृष्टि 6/6 और 6/9 होनी चाहिए। 

महिला 

  • उम्मीदवार की लम्बाई 150 सेमी होनी चाहिए। 
  • आंखों में किसी प्रकार का रोग नहीं होना चाहिए और न ही कलर ब्लाइंडनेस होना चाहिए। 
  • उम्मीदवार की आंखों की दृष्टि 6/6 और 6/9 होनी चाहिए।

आवेदन प्रक्रिया

विभिन्न मरीन इंजीनियरिंग कोर्सेज के लिए भारत और विदेशी विश्वविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया के बारे में नीचे बताया गया है–

भारतीय विश्वविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया

भारत के विश्वविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया, इस प्रकार है–

  1. सबसे पहले अपनी चुनी हुई यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट में जाकर रजिस्ट्रेशन करें।
  2. यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक यूजर नेम और पासवर्ड प्राप्त होगा।
  3. फिर वेबसाइट में साइन इन के बाद अपने चुने हुए कोर्स का चयन करें जिसे आप करना चाहते हैं।
  4. अब शैक्षिक योग्यता, वर्ग आदि के साथ आवेदन फॉर्म भरें।
  5. इसके बाद आवेदन फॉर्म जमा करें और आवश्यक आवेदन शुल्क का भुगतान करें। 
  6. यदि एडमिशन, प्रवेश परीक्षा पर आधारित है तो पहले प्रवेश परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करें और फिर रिजल्ट के बाद काउंसलिंग की प्रतीक्षा करें। प्रवेश परीक्षा के अंको के आधार पर आपका चयन किया जाएगा और लिस्ट जारी की जाएगी।

विदेश में आवेदन प्रक्रिया

विदेश के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया इस प्रकार है–

यदि आप विदेश में पढ़ना चाहते हैं, तो एप्लीकेशन प्रोसेस की जानकारी के लिए आप  Leverage Edu एक्सपर्ट्स को 1800 572 000 पर कॉल कर सकते है। 

  • आपकी आवेदन प्रक्रिया का फर्स्ट स्टेप सही कोर्स चुनना है, जिसके लिए आप AI Course Finder की सहायता लेकर अपने पसंदीदा कोर्सेज को शॉर्टलिस्ट कर सकते हैं। 
  • एक्सपर्ट्स से कॉन्टैक्ट के पश्चात वे कॉमन डैशबोर्ड प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई विश्वविद्यालयों की आपकी आवेदन प्रक्रिया शुरू करेंगे। 
  • अगला कदम अपने सभी दस्तावेजों जैसे SOP, निबंध (essay), सर्टिफिकेट्स और LOR और आवश्यक टेस्ट स्कोर जैसे IELTS, TOEFL, SAT, ACT आदि को इकट्ठा करना और सुव्यवस्थित करना है। 
  • यदि आपने अभी तक अपनी IELTS, TOEFL, PTE, GMAT, GRE आदि परीक्षा के लिए तैयारी नहीं की है, जो निश्चित रूप से विदेश में अध्ययन करने का एक महत्वपूर्ण कारक है, तो आप Leverage Live कक्षाओं में शामिल हो सकते हैं। ये कक्षाएं आपको अपने टेस्ट में उच्च स्कोर प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण कारक साबित हो सकती हैं।
  • आपका एप्लीकेशन और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद, एक्सपर्ट्स आवास, छात्र वीजा और छात्रवृत्ति / छात्र लोन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करेंगे । 
  • अब आपके प्रस्ताव पत्र की प्रतीक्षा करने का समय है जिसमें लगभग 4-6 सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। ऑफर लेटर आने के बाद उसे स्वीकार करके आवश्यक सेमेस्टर शुल्क का भुगतान करना आपकी आवेदन प्रक्रिया का अंतिम चरण है। 

एक आकर्षक SOP लिखने से लेकर कंप्लीट एप्लीकेशन प्रोसेस में मदद के लिए आप Leverage Edu के एक्सपर्ट्स की सहायता ले सकते हैं।

आवश्यक दस्तावेज़

कुछ जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट नीचे दी गई हैं–

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प्रवेश परीक्षाएं

यहां उन सभी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रवेश परीक्षाओं की सूची दी गई है जिनका उपयोग भारत और विदेशों के विश्वविद्यालय इंजीनियरिंग डिग्री के लिए छात्रों को प्रवेश देने के लिए करते हैं–

SAT (विदेश में बैचलर्स के लिए) GRE (विदेश में मास्टर्स के लिए)
JEE Mains JEE Advanced
AICET IMU CET
MERI Entrance Exam

आवश्यक पुस्तकें

किसी भी विषय की पढ़ाई करने के लिए आवश्यक है सही पुस्तकों का चयन करना। नीचे मरीन इंजीनियर बनने के लिए मत्वपूर्ण पुस्तकों की जानकारी दी गई है:

मरीन इंजीनियर के रूप में करियर स्कोप

मरीन इंजीनियरिंग में अपनी डिग्री पूरी करने के बाद आपके पास करियर के कई अवसर उपलब्ध होते हैं। अपने डिग्री स्तर के आधार पर, आप सार्वजनिक और निजी क्षेत्र में कई प्रतिष्ठित जॉब प्रोफाइल का पता लगा सकते हैं जो आपको ऑफशोर और ऑनशोर दोनों में काम करने का अधिकार देगा। इसके अलावा, आप मास्टर स्तर की डिग्री के लिए अध्ययन करने का विकल्प चुन सकते हैं जो आपको इस डोमेन के विशेषज्ञ ज्ञान से परिपूर्ण करेगा और पीएचडी का विकल्प चुनकर, आप रिसर्च या शिक्षा क्षेत्र में अपना करियर बना सकते हैं। यदि आप मरीन इंजीनियर की जॉब को चुनते हैं, तो उनके वर्किंग एनवायरनमेंट के बारे में नीचे बताया गया है–

  • मरीन इंजीनियर एक परियोजना के पूरा होने के दौरान विभिन्न वातावरणों की एक श्रृंखला में काम कर सकते हैं, एक कार्यालय से जहां वे अपने द्वारा डिजाइन किए गए जहाजों में से एक के डेक पर योजनाएँ बना सकते हैं।
  • वे वाणिज्यिक मरीन कंपनियों, गैर-लाभकारी संगठनों या नौसेना जैसी सरकारी एजेंसियों के लिए काम कर सकते हैं।
  • मरीन इंजीनियर अपने डिजाइन के विकास की निगरानी के लिए शिपयार्ड, निर्माण सुविधाओं और डॉक का दौरा करते हैं।
  • कुछ मरीन इंजीनियर सुरक्षित ड्रिलिंग के समन्वय के लिए अपतटीय तेल रिसाव पर भी काम करते हैं।

मरीन इंजीनियर की सैलरी

एक समुद्री इंजीनियर का औसत वेतन अक्सर योग्यता, स्थान और अनुभव के वर्षों के आधार पर भिन्न होता है। कंपनियां आमतौर पर प्रवेश स्तर के समुद्री इंजीनियरों को कम वेतन देती हैं, जबकि अधिक जिम्मेदारी वाले वरिष्ठ समुद्री इंजीनियर औसत राशि से अधिक कमा सकते हैं। नीचे Payscale के अनुसार मरीन इंजीनियर की सैलरी दी गई है–

देश  औसत सालाना वेतन (INR में)
भारत 7 से 15 लाख
यूके 25-30 लाख
यूएसए 50-60 लाख
कनाडा 35-44 लाख
ऑस्ट्रेलिया 50-57 लाख

शीर्ष भर्ती कंपनियां

  • शिपिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया
  • सिनर्जी समुद्री समूह
  • भारतीय नौसेना
  • टॉर्म
  • एमएससी परिभ्रमण
  • फ्लीट मैनेजमेंट लिमिटेड
  • SMEC ऑटोमेशन प्रा. लिमिटेड
  • अमेरिकन क्रूज लाइन्स
  • मारिनटेक डिजाइन एंड इंजीनियरिंग प्रा. लिमिटेड
  • जीएमएमसीओ लिमिटेड
  • जीई शिपिंग कंपनी लिमिटेड
  • कार्निवल क्रूज लाइन
  • टीएमसी शिपिंग प्रा. लिमिटेड
  • इट शिपिंग प्राइवेट लिमिटेड
  • मेर्स्क समूह

FAQs

मरीन इंजीनियर किसे कहते हैं?

एक मरीन इंजीनियर एक प्रकार का मैकेनिकल इंजीनियर होता है, जो जहाजों, नावों, पनडुब्बियों और अन्य जलयानों को डिजाइन करता है। वे समुद्री यात्रा और अन्य समुद्री गतिविधियों से संबंधित अन्य संरचनाएं, मशीनें और तकनीकी उपकरण भी बनाते हैं। मरीन इंजीनियर फ्लूइड मैकेनिक्स, हाइड्रोलिक्स और अन्य कॉन्सेप्ट्स की अपनी जटिल समझ के जरिए इच्छित उद्देश्यों के आधार पर टिकाऊ जल जहाजों की डिजाइनिंग और निर्माण का कार्य करते हैं।  वे एक जहाज को उसके डेस्टीनेशन तक सफलतापूर्वक गाइड करने और पानी में बाधाओं को दूर करने के लिए विद्युत, स्टीयरिंग, जलवायु नियंत्रण, रडार और इंजन सिस्टम को मिलाते हैं।

मरीन इंजीनियर क्या करते हैं?

प्रारंभिक ब्लूप्रिंट डिजाइन से लेकर जहाज के रखरखाव तक, मरीन इंजीनियर एक समुद्री जहाज बनाने की पूरी प्रक्रिया में शामिल होते हैं। वे एक नए प्रोजेक्ट के लिए स्पेसिफिकेशंस को निर्धारित करने और जलीय वातावरण में लॉन्च के लिए परीक्षण करने के लिए अन्य इंजीनियरों और नौसेना तकनीशियनों का सहयोग करते हैं। 

मरीन इंजीनियर की सैलरी कितनी होती है?

मरीन इंजीनियरिंग में जिस तरह जॉब्‍स की भरपूर संभावनाएं है, उसी तरह इस फील्‍ड में इंजीनियरों को अच्‍छी सैलरी भी मिलती है। एक मरीन इंजीनियर को शुरुआती तौर पर 40 से 50 हजार रूपये प्रति माह तक मिल जाते हैं, वहीं अनुभव और ज्ञान बढ़ने के बाद इंजीनियर की सैलरी कुछ वर्षों के अंदर ही लाखों में पहुंच जाती है।

क्या मरीन इंजीनियरिंग के लिए कोई शॉर्ट टर्म कोर्स उपलब्ध है?

मरीन इंजीनियरिंग में शॉर्ट टर्म डिप्लोमा कोर्सेज उपलब्ध हैं, जो इस प्रकार हैं–
– Diploma in Marine Geomatics
– Diploma in Marine Engineering Technology

हम आशा करते हैं कि इस ब्लॉग ने आपको मरीन इंजीनियर किसे कहते हैं से लेकर कैसे बनें तक की सारी जानकारी दी होगी। यदि आप मरीन इंजीनियरिंग से संबंधित कोर्स विदेश से करना चाहते हैं तो आप आज ही हमारे Leverage Edu के एक्सपर्ट्स से सलाह ले सकते हैं, वे आपको एक उचित मार्गदर्शन के साथ एप्लीकेशन प्रोसेस और वीजा प्राप्त करने तक में आपकी मदद करेंगे। एक्सपर्ट्स के साथ 30 मिनट का फ्री सेशन बुक करने के लिए हमें 1800 572 000 पर कॉल करें।

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