आर्कियोलॉजिस्ट कैसे बनें: स्टेप बाय स्टेप गाइड

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आर्कियोलॉजिस्ट कैसे बनें

अगर आपको इतिहास, प्राचीन सभ्यताओं और पुरानी इमारतों में रुचि है और आप यह जानना चाहते हैं कि हमारे देश और दुनिया की संस्कृति समय के साथ कैसे बदलती रही, तो आर्कियोलॉजिस्ट बनना आपके लिए एक शानदार करियर विकल्प हो सकता है। आर्कियोलॉजिस्ट का काम प्राचीन स्थलों की खुदाई करना, वहाँ मिले अवशेषों और वस्तुओं का अध्ययन करना और इतिहास से जुड़ी नई जानकारियाँ इकट्ठा करना होता है। यह न केवल रोमांचक और ज्ञानवर्धक नौकरी है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों के लिए भी महत्वपूर्ण है। यदि आप जानना चाहते हैं कि आर्कियोलॉजिस्ट कैसे बनें, तो यह लेख पूरा पढ़ें।

This Blog Includes:
  1. आर्कियोलॉजिस्ट कौन होता है?
  2. आर्कियोलॉजिस्ट की प्रमुख जिम्मेदारियां
  3. 12वीं के बाद आर्कियोलॉजिस्ट कैसे बनें?
    1. स्टेप 1. 10वीं के बाद सही विषय चुनें
    2. स्टेप 2. 12वीं पास करने के बाद ग्रेजुएशन करें
    3. स्टेप 3. मास्टर डिग्री करें
    4. स्टेप 4. रिसर्च और स्पेशलाइजेशन
    5. स्टेप 5. प्रतियोगी परीक्षाएँ दें
    6. स्टेप 6. फील्ड वर्क और ट्रेनिंग का अनुभव लें
    7. स्टेप 7. अपने भीतर स्किल डेवलप करें
    8. स्टेप 8. जॉब में सेलेक्शन और करियर की शुरुआत करें
  4. आर्कियोलॉजिस्ट की सैलरी, भत्ते और सुविधाएँ
  5. विदेश में आर्कियोलॉजिस्ट की अनुमानित सैलरी 
  6. आर्कियोलॉजी प्रोग्राम ऑफर करने वाले भारत के प्रमुख कॉलेज/इंस्टीट्यूट
  7. विदेश में करियर बनाने की प्रक्रिया
  8. FAQs

आर्कियोलॉजिस्ट कौन होता है?

आर्कियोलॉजिस्ट वह विशेषज्ञ होता है जो प्राचीन सभ्यताओं और मानव संस्कृति का अध्ययन करता है। वह पुरानी इमारतों, बस्तियों, मूर्तियों, सिक्कों, औज़ारों और अन्य ऐतिहासिक वस्तुओं की खोज और जांच करता है। इन चीज़ों से यह समझने की कोशिश की जाती है कि पुराने समय में लोग कैसे रहते थे, उनकी जीवनशैली कैसी थी और समाज कैसे विकसित हुआ।

आर्कियोलॉजिस्ट की प्रमुख जिम्मेदारियां

आर्कियोलॉजिस्ट (पुरातत्ववेत्ता) का कार्य केवल खुदाई तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह एक वैज्ञानिक और व्यवस्थित प्रक्रिया है। उनकी प्रमुख जिम्मेदारियां निम्नलिखित हैं:

  • स्थल सर्वेक्षण (साइट सर्वे): संभावित पुरातात्विक स्थलों की पहचान के लिए भौगोलिक सर्वेक्षण, मानचित्र अध्ययन और ऐतिहासिक स्रोतों का विश्लेषण करना।
  • वैज्ञानिक खुदाई (एक्सकवेशन): निर्धारित पद्धति के अनुसार खुदाई करना, परतों (स्ट्रेटीग्राफी) का रिकॉर्ड रखना और मिले अवशेषों को सुरक्षित निकालना।
  • दस्तावेज़ीकरण और रिकॉर्डिंग: प्रत्येक वस्तु का स्थान, गहराई, स्थिति और संदर्भ नोट करना। इसके अलावा फोटोग्राफी, ड्राइंग और डिजिटल रिकॉर्ड तैयार करना।
  • अवशेषों का विश्लेषण: मिट्टी के बर्तन, औज़ार, सिक्के, शिलालेख या जैविक अवशेषों का प्रयोगशाला परीक्षण और डेटिंग तकनीकों (जैसे कार्बन डेटिंग) के माध्यम से अध्ययन करना।
  • संरक्षण (कंज़र्वेशन): मिले हुए अवशेषों को क्षति से बचाना और संग्रहालय या संरक्षण प्रयोगशाला में सुरक्षित रखना।
  • रिपोर्ट लेखन और प्रकाशन: शोध रिपोर्ट तैयार करना और निष्कर्षों को अकादमिक पत्रिकाओं या आधिकारिक अभिलेखों में प्रकाशित करना।
  • कानूनी और नैतिक पालन: खुदाई और शोध कार्य करते समय संबंधित सरकारी नियमों और विरासत संरक्षण कानूनों का पालन करना।

12वीं के बाद आर्कियोलॉजिस्ट कैसे बनें?

अगर आप आर्कियोलॉजिस्ट बनना चाहते हैं, तो इसके लिए कुछ जरूरी स्टेप्स होते हैं। नीचे हमने इन्हें क्रमबद्ध तरीके से बताया है, ताकि आप आसानी से समझ सकें कि इस क्षेत्र में करियर कैसे शुरू किया जा सकता है।

स्टेप 1. 10वीं के बाद सही विषय चुनें

आर्कियोलॉजिस्ट बनने के लिए 10वीं के बाद सही विषय चुनना बहुत जरूरी है। इसके लिए इतिहास, भूगोल और समाजशास्त्र जैसे विषय सबसे अच्छे माने जाते हैं, क्योंकि ये विषय पुरातत्व और सभ्यताओं को समझने में मदद करते हैं। अगर आप विज्ञान स्ट्रीम के छात्र हैं, तब भी आप आर्ट्स या आर्कियोलॉजी में ग्रेजुएशन कर सकते हैं, लेकिन इतिहास जैसे विषय लेने से पुरातत्व की पढ़ाई जल्दी और आसानी से समझ में आती है। 10वीं के बाद इन विषयों का चयन करना आपके लिए फायदेमंद रहेगा।

स्टेप 2. 12वीं पास करने के बाद ग्रेजुएशन करें

12वीं के बाद ग्रेजुएशन करना जरूरी है। इसमें आप विभिन्न कोर्स कर सकते हैं।

पाठ्यक्रमअवधिमुख्य विषय
B.A. History3 सालइतिहास, पुरानी सभ्यताएँ
B.A. (Ancient Indian History, Culture & Archaeology)3 सालखुदाई तकनीक, खुदाई तकनीक
B.A. Anthropology3 सालमानव समाज, संस्कृति
B.Sc. Geology3 सालपृथ्वी विज्ञान, मिट्टी, पत्थर

स्टेप 3. मास्टर डिग्री करें

UGC-NET (आर्कियोलॉजी) के लिए न्यूनतम अंक/श्रेणी नियम NTA/UGC के सूचना पत्र में निर्दिष्ट होते हैं। ग्रेजुएशन के बाद मास्टर डिग्री करना ज़रूरी है। आप कर सकते हैं:

  • M.A. Archaeology
  • M.A. History
  • M.Sc. Anthropology
  • M.A. Ancient Indian Culture

मास्टर डिग्री से आपको किसी विशेष क्षेत्र में विशेषज्ञ बनने का मौका मिलता है। उदाहरण के लिए मोहनजोदड़ो सभ्यता, प्राचीन कला या सिक्कों का अध्ययन। यह डिग्री प्रतियोगी परीक्षाओं और फील्डवर्क की तैयारी में भी मदद करती है।

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स्टेप 4. रिसर्च और स्पेशलाइजेशन

मास्टर डिग्री के बाद आप किसी खास क्षेत्र में रिसर्च कर सकते हैं। इससे आपको नई खोजों का अनुभव मिलता है और आप विशेषज्ञ बनते हैं। इसके लिए आपको NET/JRF क्लियर करना होगा और PhD करनी होगी। इसके साथ ही आप निम्नलिखित विशियों पर स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं:

  • प्राचीन भारतीय सभ्यता
  • हड़प्पा और मोहनजोदड़ो सभ्यता
  • वास्तुकला और मूर्तिकला
  • सिक्कों और शिलालेखों का अध्ययन

स्टेप 5. प्रतियोगी परीक्षाएँ दें

आर्कियोलॉजिस्ट बनने के लिए आपको सरकारी नौकरी, रिसर्च और शिक्षण के क्षेत्र में आगे बढ़ने हेतु कुछ प्रमुख प्रतियोगी परीक्षाएँ देनी होती हैं। यदि आप विश्वविद्यालयों या रिसर्च संस्थानों में काम करना चाहते हैं, तो NET/JRF सबसे महत्वपूर्ण परीक्षा है, जो आपको रिसर्च फेलोशिप और प्रोफेसर बनने का अवसर देती है। इसके अलावा, ASI (आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया) या राज्य स्तरीय पुरातत्व विभागों में नौकरी आमतौर पर SSC, UPSC या State PSC द्वारा आयोजित भर्तियों के माध्यम से मिलती है।

ध्यान रखें कि IAS जैसी UPSC सिविल सर्विसेज परीक्षाएँ प्रशासनिक सेवाओं के लिए होती हैं और ये पुरातत्व करियर का सीधा मार्ग नहीं हैं। इन संबंधित परीक्षाओं में सफल होने पर आप सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और विभिन्न रिसर्च संस्थानों में आर्कियोलॉजिस्ट, रिसर्चर या लेक्चरर के रूप में करियर शुरू कर सकते हैं।

स्टेप 6. फील्ड वर्क और ट्रेनिंग का अनुभव लें

पढ़ाई के साथ-साथ फील्डवर्क और ट्रेनिंग जरूरी है। इससे आपको हाथों-हाथ अनुभव मिलता है। आप कर सकते हैं:

  • पुरातात्विक खुदाई (Excavation) में हिस्सा लेना।
  • संग्रहालय और ऐतिहासिक स्थलों में इंटर्नशिप करना।
  • अवशेषों का अध्ययन और रिपोर्ट तैयार करना।

स्टेप 7. अपने भीतर स्किल डेवलप करें

इतिहास और संस्कृति की गहरी समझ होने के साथ-साथ निम्नलिखित स्किल्स को डेवलप करके आप आर्कियोलॉजिस्ट के रूप में अपने करियर की अच्छी शुरुआत कर सकते हैं –

  • शैक्षणिक और तकनीकी कौशल (Academic and Technical Skills)
  • व्यावहारिक और फील्डवर्क कौशल (Practical and Fieldwork Skills)
  • ड्राइंग और फोटोग्राफी (Drawing and Photography)
  • संचार कौशल (Communication Skills)
  • समस्या समाधान (Problem Solving)
  • टीम वर्क (Team Work)

स्टेप 8. जॉब में सेलेक्शन और करियर की शुरुआत करें

सभी स्टेप्स पूरा करने के बाद आप सरकारी या निजी क्षेत्र में नौकरी शुरू कर सकते हैं।

क्षेत्रनौकरी विकल्प
सरकारी संस्थानभारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI), राज्य पुरातत्व विभाग, संग्रहालय
शैक्षणिक क्षेत्रविश्वविद्यालय और कॉलेज में प्रोफेसर/रिसर्चर
अन्यविरासत प्रबंधन, सांस्कृतिक पर्यटन व संरक्षण परियोजनाएं आदि।

आर्कियोलॉजिस्ट की सैलरी, भत्ते और सुविधाएँ

आर्कियोलॉजिस्ट बनने के बाद सैलरी आपके पद, कार्यक्षेत्र, एक्सपीरियंस, सरकारी तथा प्राइवेट सेक्टर व शहर के अनुसार भिन्न हो सकती है। Indeed की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, भारत में एक आर्कियोलॉजिस्ट की वार्षिक सैलरी INR 6,37,247 तक होती है। हालांकि किसी विशेष राज्य में यह अधिक भी हो सकती है। वहीं ERI आर्थिक अनुसंधान संस्थान के मुताबिक, आर्कियोलॉजिस्ट की औसत सैलरी INR 1,384,538 तक होती है। 

यदि आप सरकारी विभाग में आर्कियोलॉजिस्ट के पद पर हैं, तो आपको उच्च सैलरी के साथ यात्रा भत्ता, मकान किराया भत्ता (HRA), चिकित्सा सुविधाएं, महंगाई भत्ता (DA), पेंशन, प्रोविडेंट फंड (PF), राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (NPS) तथा सेवानिवृत्ति लाभ जैसे कई लाभ मिलते हैं। इसके साथ ही रिसर्च और फील्डवर्क के लिए विशेष फंड भी प्रदान किया जाता है।

विदेश में आर्कियोलॉजिस्ट की अनुमानित सैलरी 

यहां विदेश के कुछ प्रमुख देशों में आर्कियोलॉजिस्ट की वार्षिक सैलरी SalaryExpert की आधिकारिक वेबसाइट salaryexpert.com के अनुसार दी गई है:

देश अनुमानित वार्षिक सैलरी 
कनाडा $90,728 (CAD)
ऑस्ट्रेलिया $106,373 (AUD)
चीन ¥258,130 (CNY)
मिस्र304,679 (EGP)
फ्रांस 49 300 € (EUR)
जापान ¥7,136,124 (JPY)

आर्कियोलॉजी प्रोग्राम ऑफर करने वाले भारत के प्रमुख कॉलेज/इंस्टीट्यूट

आर्कियोलॉजी प्रोग्राम ऑफर करने वाले भारत के प्रमुख कॉलेज/इंस्टीट्यूट के नाम इस प्रकार हैं, जिनमें प्रवेश लेने के लिए कोर्स के लेवल के आधार पर योग्यताएं भिन्न हो सकती हैं। हालाँकि इसके लिए आप अपने द्वारा चुने गए कोर्स के आधार पर निम्नलिखित संस्थानों की आधिकारिक वेबसाइट विजिट कर सकते हैं –

  • डेक्कन कॉलेज पोस्ट-ग्रेजुएट एवं रिसर्च इंस्टीट्यूट, पुणे
  • बनारस हिंदू यूनिवर्सिटी (बीएचयू)
  • कलकत्ता यूनिवर्सिटी
  • मद्रास यूनिवर्सिटी
  • केरल यूनिवर्सिटी
  • महाराजा सयाजीराव यूनिवर्सिटी (एमएसयू), बड़ौदा
  • दिल्ली यूनिवर्सिटी (प्राचीन इतिहास एवं पुरातत्व संबंधी कार्यक्रम)
  • जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU), दिल्ली

नोट – यह सूची संकेतात्मक है। आर्कियोलॉजी कोर्स के लिए प्रवेश पात्रता, फीस और पाठ्यक्रम संरचना संबंधित विश्वविद्यालय की आधिकारिक वेबसाइट पर जरूर चेक कर लेनी चाहिए।

विदेश में करियर बनाने की प्रक्रिया

आर्कियोलॉजी का क्षेत्र केवल भारत तक सीमित नहीं है, बल्कि विदेशों में भी इस विषय में रिसर्च, शिक्षण, फील्डवर्क और म्यूज़ियम से जुड़े कई अवसर उपलब्ध हैं। अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, इजिप्ट, इटली जैसे देशों की यूनिवर्सिटीज़ और हेरिटेज संस्थान विशेष रूप से आर्कियोलॉजी से जुड़े रिसर्चर्स और प्रोफेशनल्स को अवसर प्रदान करते हैं। यदि आप विदेश में आर्कियोलॉजी में करियर बनाना चाहते हैं, तो इसकी प्रक्रिया इस प्रकार है:

  • विदेश की यूनिवर्सिटीज़ से M.A. या Ph.D. Archaeology/Anthropology करें।
  • स्कॉलरशिप और रिसर्च प्रोग्राम्स में आवेदन करें ताकि पढ़ाई का खर्च कम हो सके।
  • रिसर्च पेपर्स को इंटरनेशनल जर्नल्स में पब्लिश करें।
  • अपनी स्टडी के साथ-साथ प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय फील्ड स्कूलों से अंतर्राष्ट्रीय अनुभव प्राप्त करें और भाषा के कौशल को बढ़ाएं।
  • विदेशों में आयोजित कॉन्फ्रेंस और वर्कशॉप्स में हिस्सा लें और नेटवर्क बनाएँ।
  • पढ़ाई पूरी होने के बाद विदेश में नौकरी करने के लिए वर्क परमिट या वीज़ा लें।
  • कुछ यूनिवर्सिटीज़ और रिसर्च इंस्टिट्यूट रिसर्चर्स को वीज़ा स्पॉन्सर भी करते हैं।
  • करियर के अवसर म्यूज़ियम, यूनिवर्सिटीज़, रिसर्च इंस्टिट्यूट्स और हेरिटेज मैनेजमेंट सेक्टर में मिलते हैं।
  • UNESCO और इंटरनेशनल NGOs में भी काम करने के मौके होते हैं।

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FAQs

आर्कियोलॉजिस्ट बनने के लिए कौन-सा स्ट्रीम चुनना चाहिए?

आमतौर पर आर्ट्स स्ट्रीम में इतिहास लेना बेहतर होता है, लेकिन साइंस स्ट्रीम वाले छात्र भी आगे आर्कियोलॉजी में पढ़ाई कर सकते हैं।

आर्कियोलॉजिस्ट बनने में कितना समय लगता है?

12वीं के बाद ग्रेजुएशन (3 साल), मास्टर (2 साल) और रिसर्च/Ph.D. करने पर कुल मिलाकर 7-8 साल लग सकते हैं।

क्या विदेशों में आर्कियोलॉजी में नौकरी के अवसर हैं?

अमेरिका, यूके, ऑस्ट्रेलिया, इजिप्ट और इटली जैसे देशों में आर्कियोलॉजी के अच्छे अवसर हैं, जहां रिसर्च, विश्वविद्यालयों और हेरिटेज प्रोजेक्ट्स में रोजगार मिलता है।

क्या आर्कियोलॉजी में गणित जरूरी है?

पुरातत्व में गणित महत्वपूर्ण है क्योंकि यह खुदाई स्थलों का सर्वेक्षण, मानचित्रण और विश्लेषण करने के लिए आवश्यक है, साथ ही पुरातात्विक डेटा की डेटिंग और व्याख्या करने के लिए भी ज़रूरी है।

आर्कियोलॉजिस्ट बनने के लिए कौन-सी पढ़ाई करनी होती है?

12वीं के बाद इतिहास या प्राचीन इतिहास में ग्रेजुशन करना उपयोगी होता है। इसके बाद पुरातत्व या प्राचीन इतिहास में पोस्ट ग्रेजुएशन करना बेहतर माना जाता है। कुछ विश्वविद्यालय पुरातत्व में विशेष (स्पेशल) कार्यक्रम भी संचालित करते हैं।

आशा है कि इस लेख में आप जान पाए होंगे कि आर्कियोलॉजिस्ट कैसे बनें। ऐसे ही अन्य करियर से जुड़े लेख पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें।

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