पुरातत्त्ववेत्ता कैसे बनें?

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Archaeologist kaise bane

पुरातत्त्ववेत्ता (Archeologist) विभिन्न जगहों में खुदाई करके, पुरानी सभ्यताओं, कलाकृतियों, वस्तुओं आदि की खोज करते हैं और दुनिया को पास्ट से अवगत कराते हैं। जो लोग संस्कृति से जुड़े रहना चाहते हैं और पुरानी घटनाओं के बारे में जानने के प्रति क्यूरियस है, उनके लिए यह एक बेहतरीन करियर विकल्प है। इस क्षेत्र में करियर युवाओं को ऐतिहासिक खोज का हिस्सा बनने की अनुमति देता है। यदि आप भी पुरातत्त्ववेत्ता बनने का सपना देख रहे हैं तो आइए आगे ब्लॉग में विस्तार से जानते हैं archaeologist kaise bane ।

This Blog Includes:
  1. कौन होते हैं पुरातत्त्ववेत्ता?
  2. पुरातत्त्ववेत्ता के प्रकार
    1. जैव पुरातत्वविद्
    2. पर्यावरण पुरातत्वविद्
    3. लैंडस्केप पुरातत्वविद्
    4. एथनो पुरातत्वविद्
    5. समुद्री पुरातत्वविद्
    6. हवाई पुरातत्वविद्
    7. विमानन पुरातत्वविद्
    8. वाणिज्यिक पुरातत्वविद्
    9. औद्योगिक पुरातत्वविद्
  3. पुरातत्त्ववेत्ता के कार्य
  4. पुरातत्त्ववेत्ता बनने के लिए जरूरी स्किल
  5. पुरातत्त्ववेत्ता बनने के लिए योग्यता
  6. पुरातत्त्ववेत्ता कैसे बनें?
    1. 1.बैचलर डिग्री प्राप्त करें।
    2. 2. इंटर्नशिप प्रोग्राम का हिस्सा बनें।
    3. 3. मास्टर डिग्री प्राप्त करें।
    4.  4. डॉक्टरेट पर विचार करें।
    5. 5.पुरातत्व संघ में शामिल हों।
    6. 6. अपना रिज्यूमे बनाएं।
    7. 7. रोजगार की तलाश करें।
  7. पुरातात्विक कोर्सेज
  8. योग्यता
  9. विदेश में पुरातात्विक कोर्स के लिए टॉप यूनिवर्सिटीज
  10. भारत में पुरातात्विक कोर्स के लिए टॉप कॉलेज
  11. आवेदन प्रक्रिया 
  12. आवश्यक दस्तावेज 
  13. पुरातत्वविद् की सैलरी
  14. FAQs

कौन होते हैं पुरातत्त्ववेत्ता?

एक पुरातत्त्ववेत्ता, मानव प्रागैतिहासिक काल की स्टडी और मूल्यांकन करता है ताकि यह समझा जा सके कि मानव सभ्यता कैसे विकसित हुई है। वे खंडहर, मिट्टी के बर्तन, गुफा चित्र और निर्माण उपकरण आदि की खुदाई और रिकवरी करते हैं। वे अपने रिसर्च के माध्यम से जीवित प्रजाति के विकास की व्याख्या करते हैं। पुरातत्त्ववेत्ता मानव इतिहास की कुछ सबसे महत्वपूर्ण खोजों को उजागर करने के लिए जिम्मेदार हैं।  

पुरातत्त्ववेत्ता के प्रकार

पुरातत्व मानव विज्ञान की एक शाखा है और इसके अंतर्गत ऐसे कई क्षेत्र हैं जिनमें छात्र स्पेशलाइजेशन प्राप्त कर सकते हैं। आप जिस क्षेत्र को चुनते हैं, वह तय करता है कि आप किस प्रकार के पुरातत्त्ववेत्ता बनेंगे। पुरातत्त्ववेत्ता के कुछ सबसे सामान्य प्रकारों के बारे में नीचे दिया गया है:

जैव पुरातत्वविद्

जैव पुरातत्वविद ऐसे पेशेवर हैं जो पुरातात्विक (archeological) स्थलों पर कंकाल के अवशेषों का अध्ययन करते हैं। इसमें विभिन्न स्पेसिफिकेशन जैसे मानव अवशेषों , प्राचीन रोग और आनुवंशिक से जुड़े अध्ययन शामिल हो सकते हैं।

पर्यावरण पुरातत्वविद्

पर्यावरण पुरातत्वविद् लोगों के एक प्राचीन समूह और उनके प्रकृतिक वातावरण के बीच अंतर्संबंध का अध्ययन करते हैं। वे एक निश्चित समय में मौजूद पौधों, जानवरों और फसलों की जांच करते हैं और इसकी भी जांच करते हैं कि लोगों ने अपने दैनिक जीवन में उनका उपयोग कैसे किया। इनके कार्यों में प्रयोगशाला प्रयोग के साथ-साथ फील्ड स्टडी शामिल हैं।

लैंडस्केप पुरातत्वविद्

लैंडस्केप पुरातत्वविद् विभिन्न लैंडस्केप में होने वाले नेचुरल और आर्टिफीसियल चेंज का अध्ययन करते हैं। वे मानव व्यवहार के साथ निवास और लैंडस्केप के बीच संबंध को समझने का प्रयास करते हैं। वे यह भी व्याख्या करते हैं कि कैसे एक लैंडस्केप चेंज, कल्चरल चेंज ला सकता है।

एथनो पुरातत्वविद्

एथनो पुरातत्वविद् अतीत के बारे में ज्ञान प्राप्त करने के लिए लिविंग कम्युनिटीज की एथनोग्राफी जांच करते हैं। वे क्लू को उजागर करते हैं और एक निश्चित समय में रहने वाले लोगों की आदतें, संस्कृति और रीति-रिवाज में बहुमूल्य अंतर्दृष्टि प्रदान करते हैं। 

समुद्री पुरातत्वविद्

समुद्री पुरातत्वविद् मुख्य रूप से अंडर वाटर खंडहर का अध्ययन करते हैं और समुद्री पानी के नीचे शहर, जहाज और पुरातात्विक स्थल की खोज करते हैं। डूबे हुए सबूत खोजने के लिए, इन्हें अपने काम के अंतर्गत गहरे पानी में गोता लगाना होता है। रिसर्च के लिए परिष्कृत पुरातात्विक जैसे टूल्स का उपयोग करते हैं।

हवाई पुरातत्वविद्

हवाई सर्वेक्षण और फोटोग्राफी का उपयोग करके, ये पुरातत्त्ववेत्ता नए खुदाई स्थल को खोजते हैं। 

विमानन पुरातत्वविद्

विमानन पुरातत्वविद् एयरक्राफ्ट, परित्यक्त एयरबस, रनवे या विमानन इतिहास से संबंधित ऐतिहासिक अवशेष की खोज और अध्ययन करते हैं। अपने द्वारा एकत्रित की गई जानकारियों द्वारा विमानन पुरातत्वविद् उन पुरानी घटनाओं को समझाने की कोशिश करते हैं जिनके कारण एयरप्लेन क्रैश हुए हैं।

वाणिज्यिक पुरातत्वविद्

वाणिज्यिक पुरातत्वविद् उन वस्तुओं का अध्ययन करते हैं जिनका प्राचीन समूह के लोगों द्वारा व्यापार किया गया था। वे व्यावसायिक गतिविधियों में उपयोग किए जाने वाले ट्रांसपोर्टेशन के विभिन्न रूपों का भी अध्ययन करते हैं। वाणिज्यिक पुरातत्वविद् को प्राचीन व्यापार मार्ग, बंदरगाह, प्राचीन बाजार आदि की खोज भी करते हैं। 

औद्योगिक पुरातत्वविद्

औद्योगिक पुरातत्वविद्, इंडस्ट्री से संबंधित आर्टिफैक्ट्स और बाय-प्रोडक्ट के भौतिक अवशेष की खोज करते हैं। वे विभिन्न वस्तुओं के निर्माण के लिए उपयोग किए जाने वाले टूल्स और रॉ मेटेरियल के प्रकार को भी डिकोड करते हैं।

पुरातत्त्ववेत्ता के कार्य

Archaeologist kaise bane के साथ ही आपको पुरातत्त्ववेत्ता के कुछ सामान्य कार्यों के बारे में नीचे बताया गया है:

  1. उत्खनन से प्राप्त कलाकृतियों की पहचान, विश्लेषण और डेटिंग करना।
  2. उत्खनन स्थल पर मिली वस्तुएँ और अन्य संपत्ति का डेटा रिकॉर्ड रखना।
  3. पिछली संस्कृति और मानव सभ्यता के अन्य पहलुओं के बारे में तार्किक निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए डेटा विश्लेषण करना।
  4. भौगोलिक सूचना प्रणाली (जीआईएस) और कंप्यूटर डिजाइन (सीएडी) जैसे कंप्यूटर एप्लीकेशन का उपयोग करके साइट या आर्टिफैक्ट्स पास्ट में कैसी दिखती थीं, इसका पुरातात्विक अनुकरण विकसित करना। 
  5. खुदाई स्थलों का पता लगाने के लिए हवाई फोटोग्राफी और भूभौतिकीय सर्वेक्षण का उपयोग करना।
  6. शोध और खोजों का दस्तावेज़ीकरण और रिपोर्ट लिखना।
  7. उत्खनन कार्य के कर्मचारी प्रबंधन करना।
  8. पुरातत्व सूची का रखरखाव करना।
  9. कलाकृतियों की सफाई, बहाली और सुरक्षा का ध्यान रखना।
  10. अंतर या समानता को समझने के लिए पुरातात्विक डेटा के माध्यम से एक उत्खनन स्थल के निष्कर्ष की तुलना किसी उत्खनन स्थलों से करना।

पुरातत्त्ववेत्ता बनने के लिए जरूरी स्किल

Archaeologist kaise bane जानने के साथ साथ यह भी जानना जरूरी है कि पुरातत्त्ववेत्ता बनने के लिए आपके पास कौन कौन सी स्किल्स होनी चाहिए। पुरातत्त्ववेत्ता बनने के लिए जरूरी स्किल्स इस प्रकार हैं:

  • पुरातत्त्ववेत्ता को लिखित और मौखिक दोनों तरह से अच्छी तरह से कम्यूनिकेट करने में सक्षम होना चाहिए क्योंकि उन्हें अक्सर अपना काम, क्लियर और संक्षिप्त रूप से दूसरों के सामने प्रस्तुत करना होता है। 
  • मजबूत सुनने का कौशल आपके सहकर्मियों के साथ आपके कम्युनिकेशन को सुविधाजनक बनाने में मदद करेगा ।
  • समस्याओं को हल करने और सही निर्णय लेने के लिए लॉजिकल स्किल का होना बेहद जरूरी है।
  • लिखित सामग्री को समझने की क्षमता आपको अपने रिसर्च में मदद करेगी। आपके पास नई नई चीजों को समझने के लिए अच्छी नॉलेज का होना आवश्यक है।
  • आपको अपने काम में फील्ड वर्क के अंतर्गत विभिन्न शारीरिक गतिविधियां लंबे समय तक करनी पड़ सकती हैं जहां आपको आराम करने का भी वक्त मिलना मुश्किल है। अतः ज़रुरी है कि आप शारीरिक रूप से मजबूत रहें।

पुरातत्त्ववेत्ता बनने के लिए योग्यता

यदि आप इस क्षेत्र में डिग्री प्राप्त करने के इच्छुक हैं, तो आपको अपने चुने हुए विश्वविद्यालय द्वारा निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करना होगा। ये आवश्यकताएं कोर्सेज के स्तर के अनुसार भिन्न होती हैं, जैसे बैचलर, मास्टर या डिप्लोमा:

  1. इतिहास / पुरातत्व / प्राचीन इतिहास में स्नातक पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से किसी भी स्ट्रीम में कक्षा 12 में लगभग 45 – 50% अंक
  2. पुरातत्व में मास्टर डिग्री के लिए, आपको यूजी डिग्री में कम से कम 50% अंक प्राप्त करने होंगे। कुछ विश्वविद्यालय एमए पुरातत्व पाठ्यक्रम के लिए किसी भी स्ट्रीम के छात्रों को मानते हैं
  3. कुछ विश्वविद्यालय एमए पुरातत्व पाठ्यक्रम में प्रवेश के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित करते हैं। छात्रों को प्रवेश सुरक्षित करने के लिए प्रवेश परीक्षा के लिए अर्हता प्राप्त करने की आवश्यकता है।
  4. विदेश की अधिकतर यूनिवर्सिटीज बैचलर्स के लिए SAT और मास्टर्स कोर्सेज के लिए GRE स्कोर की मांग करते हैं।
  5. विदेश की यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए IELTS या TOEFL टेस्ट स्कोर, अंग्रेजी प्रोफिशिएंसी के प्रमाण के रूप में ज़रूरी होते हैं। जिसमे IELTS स्कोर 7 या उससे अधिक और TOEFL स्कोर 100 या उससे अधिक होना चाहिए।
  6. विदेश यूनिवर्सिटीज में पढ़ने के लिए SOP, LOR, सीवी/रिज्यूमे और पोर्टफोलियो भी जमा करने की जरूरत होती है।

पुरातत्त्ववेत्ता कैसे बनें?

Archaeologist kaise bane समझाने के लिए हमने नीचे कुछ स्टेप्स बताए हैं जिन्हें फॉलो करके आप पुरातत्त्ववेत्ता बनने के अपने सपने को पूरा कर सकते हैं। आइए जानते हैं archaeologist kaise bane ।

1.बैचलर डिग्री प्राप्त करें।

पुरातत्त्ववेत्ता बनने के लिए सबसे पहले आपको मानव विज्ञान, भूगोल और इतिहास जैसे किसी अन्य संबंधित क्षेत्र में अपनी बैचलर डिग्री पूरी करनी होगी। अपनी शिक्षा के दौरान, आप पुरातात्विक अवशेष का पेशेवर मूल्यांकन करेंगे साथ ही खदान परियोजना में भाग भी ले सकते  हैं। इससे आपको ऐतिहासिक जानकारियों का मूल्यांकन और व्याख्या करने में मदद मिलेगी।

2. इंटर्नशिप प्रोग्राम का हिस्सा बनें।

इंटर्नशिप या फ़ेलोशिप एक अच्छा फील्ड अनुभव प्रदान करते हैं जो कई पुरातत्व नौकरी के लिए आवश्यक है। कुछ स्थान जैसे– संग्रहालयों, पुरातात्विक संगठनों और सरकारी एजेंसियों के इंटर्नशिप कार्यक्रमों की पेशकश करते हैं। इसके जरिए आप इस काम के लिए अपनी उपयुक्तता अनुमान कर सकते हैं और सुनिश्चित कर सकते हैं कि यह आपके लिए एक सही करियर विकल्प है।

3. मास्टर डिग्री प्राप्त करें।

एक मास्टर डिग्री इस क्षेत्र की अधिक गहन समझ प्रदान करती है और आपके टेक्निकल स्किल को विकसित करती है। कुछ सामान्य मास्टर डिग्री में पुरातत्व या इससे संबंधित क्षेत्र में एम.ए., एम.फिल., डिप्लोमा और पीजी डिप्लोमा शामिल हैं।

 4. डॉक्टरेट पर विचार करें।

यदि आप पुरातत्व में प्रोफेसर के रूप में काम करना चाहते हैं या हाई लेवल प्रोजेक्ट्स का नेतृत्व करना चाहते हैं, तो आपको पुरातत्व या इससे संबंधित क्षेत्र में पीएचडी की डिग्री हासिल करने पर विचार करना होगा। एक स्पेसिफिक शोध प्रबंध में कई महीनों के क्षेत्र रिसर्च के अलावा, एक डॉक्टरेट को पूरा होने में आमतौर पर तीन साल लगते हैं।

5.पुरातत्व संघ में शामिल हों।

जब आप किसी पुरातात्विक संघ में शामिल होते हैं, तो आप ऐसे लोगों के संपर्क में आते हैं जो इस क्षेत्र के बारे में अत्यधिक जानते हैं। इन संघ या संगठन के माध्यम से आप इस क्षेत्र की नवीनतम समाचार के बारे में जान सकते हैं और पुरातत्व से संबंधित पत्रिकाएँ पढ़ सकते हैं। इससे आपका नेटवर्क बनता है,आपको अपने रिसर्च को शेयर करने में मदद मिलती है और आपके कौशल का विकास होता है। आपके द्वारा बनाए गए कनेक्शन आपको बेहतर करियर के अवसर खोजने में मदद कर सकते हैं।

6. अपना रिज्यूमे बनाएं।

आपकी प्रासंगिक शिक्षा, कौशल और अनुभव को प्रदर्शित करने वाला CV/रिज्यूमे संभावित नियोक्ता को प्रभावित कर सकता है। इसलिए एक आकर्षक CV या रिज्यूमे बनाए।

7. रोजगार की तलाश करें।

अपनी रूचि के क्षेत्र के आधार पर, आप अंडर ग्रेजुएट और पोस्टग्रेजुएट डिग्री के बाद रोजगार की तलाश कर सकते हैं। अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद एक उपयुक्त नौकरी ढूँढना आपके करियर में अनुभव और प्रोग्रेस हासिल करने के लिए महत्वपूर्ण है। 

पुरातात्विक कोर्सेज

पुरातत्व के अंतर्गत कुछ प्रमुख डिप्लोमा, प्रमाणपत्र, बैचलर पाठ्यक्रम और मास्टर्स पाठ्यक्रम के बारे में नीचे बताया गया है।

  • Certificate Course in Epigraphy
  • Certificate in Archaeology
  • Certificate Course in Architecture and Sculpture
  • Advanced Diploma in Epigraphy
  • Diploma in Archeology
  • B.A. in Culture and Archaeology
  • B.A. in Music and Archaeology
  • B.A. in Ancient Indian History and Archaeology
  • M.A. in History and Archaeology
  • M.A. in Archaeology
  • Post Graduate Diploma in Archaeology

योग्यता

विभिन्न पुरातात्विक कोर्सेज के लिए कुछ सामान्य योग्यता इस प्रकार हैं:

  • इतिहास / पुरातत्व / प्राचीन इतिहास में बैचलर डिग्री कोर्स में प्रवेश लेने के लिए किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से किसी भी स्टीम में कक्षा 12 में लगभग 45 – 50% अंक जरूरी हैं।
  • पुरातत्व में मास्टर डिग्री के लिए, आपको यूजी डिग्री में कम से कम 50% अंक प्राप्त करने होंगे। 
  • कुछ मास्टर्स प्रोग्राम में एडमिशन के लिए यूनिवर्सिटीज प्रवेश परीक्षा आयोजित करतीं हैं इसके बाद ही आप इन कोर्सेज के लिए योग्य हो सकते हैं।
  • विदेश में पुरातात्विक कोर्सेज के लिए आपको ऊपर दी गई आवश्यकताओं के साथ IELTS या TOEFL स्कोर की भी आवश्यकता होती है।
  • विदेशी यूनिवर्सिटीज में एडमिशन के लिए SOP, LOR, CV/रिज्यूमे और पोर्टफोलियो भी जमा करने होंगे।

विदेश में पुरातात्विक कोर्स के लिए टॉप यूनिवर्सिटीज

विदेश में पुरातात्विक कोर्स उपलब्ध करने वाली कुछ टॉप यूनिवर्सिटीज इस प्रकार हैं:

भारत में पुरातात्विक कोर्स के लिए टॉप कॉलेज

भारत में पुरातात्विक कोर्स उपलब्ध करने वाली कुछ टॉप यूनिवर्सिटीज इस प्रकार हैं:

  • राष्ट्रसंत तुकड़ोजी महाराज नागपुर विश्वविद्यालय
  • मैसूर विश्वविद्यालय
  • कुवेम्पु विश्वविद्यालय
  • पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय
  • अनुमान कॉलेज
  • सेंट जेवियर्स कॉलेज, मुंबई
  • पंजाब विश्वविद्यालय
  • आचार्य नागार्जुन विश्वविद्यालय
  • इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय
  • अवधेश प्रताप सिंह विश्वविद्यालय
  • केरल विश्वविद्यालय
  • डॉ. राम मनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय
  • दीन दयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय
  • बनारस हिंदू विश्वविद्यालय
  • मद्रास विश्वविद्यालय

आवेदन प्रक्रिया 

विदेश के विश्वविद्यालयों में प्रवेश के लिए आवेदन प्रक्रिया इस प्रकार है–

  • आपकी आवेदन प्रक्रिया का फर्स्ट स्टेप सही कोर्स चुनना है, जिसके लिए आप AI Course Finder की सहायता लेकर अपने पसंदीदा कोर्सेज को शॉर्टलिस्ट कर सकते हैं। 
  • एक्सपर्ट्स से कॉन्टैक्ट के पश्चात वे कॉमन डैशबोर्ड प्लेटफॉर्म के माध्यम से कई विश्वविद्यालयों की आपकी आवेदन प्रक्रिया शुरू करेंगे। 
  • अगला कदम अपने सभी दस्तावेजों जैसे SOP, निबंध (essay), सर्टिफिकेट्स और LOR और आवश्यक टेस्ट स्कोर जैसे IELTS, TOEFL, SAT, ACT आदि को इकट्ठा करना और सुव्यवस्थित करना है। 
  • यदि आपने अभी तक अपनी IELTS, TOEFL, PTE, GMAT, GRE आदि परीक्षा के लिए तैयारी नहीं की है, जो निश्चित रूप से विदेश में अध्ययन करने का एक महत्वपूर्ण कारक है, तो आप Leverage Live कक्षाओं में शामिल हो सकते हैं। ये कक्षाएं आपको अपने टेस्ट में उच्च स्कोर प्राप्त करने का एक महत्त्वपूर्ण कारक साबित हो सकती हैं।
  • आपका एप्लीकेशन और सभी आवश्यक दस्तावेज जमा करने के बाद, एक्सपर्ट्स आवास, छात्र वीजा और छात्रवृत्ति / छात्र लोन के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू करेंगे । 
  • अब आपके प्रस्ताव पत्र की प्रतीक्षा करने का समय है जिसमें लगभग 4-6 सप्ताह या उससे अधिक समय लग सकता है। ऑफर लेटर आने के बाद उसे स्वीकार करके आवश्यक सेमेस्टर शुल्क का भुगतान करना आपकी आवेदन प्रक्रिया का अंतिम चरण है। 

भारत के विश्वविद्यालयों में आवेदन प्रक्रिया, इस प्रकार है–

  1. सबसे पहले अपनी चुनी हुई यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबसाइट में जाकर रजिस्ट्रेशन करें।
  2. यूनिवर्सिटी की वेबसाइट में रजिस्ट्रेशन के बाद आपको एक यूजर नेम और पासवर्ड प्राप्त होगा।
  3. फिर वेबसाइट में साइन इन के बाद अपने चुने हुए कोर्स का चयन करें जिसे आप करना चाहते हैं।
  4. अब शैक्षिक योग्यता, वर्ग आदि के साथ आवेदन फॉर्म भरें।
  5. इसके बाद आवेदन फॉर्म जमा करें और आवश्यक आवेदन शुल्क का भुगतान करें। 
  6. यदि एडमिशन, प्रवेश परीक्षा पर आधारित है तो पहले प्रवेश परीक्षा के लिए रजिस्ट्रेशन करें और फिर रिजल्ट के बाद काउंसलिंग की प्रतीक्षा करें। प्रवेश परीक्षा के अंको के आधार पर आपका चयन किया जाएगा और लिस्ट जारी की जाएगी।

आवश्यक दस्तावेज 

कुछ जरूरी दस्तावेजों की लिस्ट नीचे दी गई हैं–

पुरातत्वविद् की सैलरी

एक फ्रेशर पुरातत्वविद् के रूप में आप प्रति वर्ष 2.5 से 3.5 लाख रुपये के बीच सैलरी मिल सकती हैं । अनुभवी पेशेवर की सालाना सैलरी प्रति वर्ष 5 से 8 लाख रुपये के बीच हो सकती है। वेतन पैकेज, शिक्षा, कार्य क्षेत्र, कौशल स्तर, अनुभव और कई अन्य कारकों पर भी निर्भर करता है। 

FAQs

क्या पुरातत्वविद् बनना कठिन है?

पुरातत्वविद् बनना कोई सरल कार्य नहीं हैं, लेकिन आपने कभी न कभी सुना ही होगा कि No pain, No gain अर्थात बिना मेहनत (परिश्रम) के आप कुछ हासिल नहीं कर सकते। अतः आप निरंतर कठिन परिश्रम कर अपने लक्ष्य को प्राप्त करें ।

क्या पुरातत्वविद् एक अच्छा करियर?

भारत की एक समृद्ध सांस्कृतिक विरासत है इसलिए भारत में पुरातत्वविद् की मांग अधिक है। योग्य छात्र प्राइवेट और सरकारी क्षेत्र में पुरातत्वविद् के अंतर्गत विभिन्न जॉब प्रोफाइल के लिए आवेदन कर सकते हैं। भारत के साथ पूरे विश्व में पुरातत्व ग्रेजुएट्स के पास विभिन्न कॉलेज, यूनिवर्सिटीज में नौकरियों के साथ-साथ रिसर्च के लिए भी काफी संभावनाएं हैं। अतः यह एक अच्छा करियर विकल्प है।

पुरातत्वविद् के लिए कौन सा देश सबसे अच्छा है?

21 प्रविष्टियों के साथ, अमेरिका पुरातात्त्विक रैंकिंग में सबसे अच्छा प्रतिनिधित्व वाला देश है।

क्या पुरातत्वविद् की मांग है?

जॉब आउटलुक 2020 से 2030 तक पुरातत्वविद् का रोज़गार 7 प्रतिशत बढ़ने का अनुमान है। अतः पुरातत्वविद् की मांग बढ़ने वाली है।

विश्व के सर्वश्रेष्ठ पुरातत्वविद् कौन हैं?

दुनिया के 5 सर्वश्रेष्ठ पुरातत्वविद्–
फ्लेवियो बायोंडो
थॉमस जेफरसन
मोर्टिमर व्हीलर
कैथलीन केन्योन
डोरोथी गैरोड

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