1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस परेड में पहला मुख्य अतिथि कौन था? इस सवाल का जवाब है इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो। 26 जनवरी 1950 को आयोजित हुए भारत के पहले गणतंत्र दिवस परेड के दौरान सुकर्णो ने मुख्य अतिथि के रूप में हिस्सा लिया था। यह दिन भारतीय इतिहास में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित हुआ, जब भारत ने अपने संविधान को अपनाया और गणराज्य के रूप में अपनी पहचान बनाई।
इंडोनेशिया और भारत के बीच का गहरा संबंध
भारत और इंडोनेशिया के बीच सदियों पुराना सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संबंध है। ‘इंडो’ शब्द जो इंडोनेशिया के नाम में आता है, वह सीधे तौर पर भारत से जुड़ा हुआ है। इंडोनेशिया एक इस्लामिक देश होने के बावजूद अपने इतिहास में हिंदू संस्कृति को एक महत्वपूर्ण स्थान देता है, जिससे भारत और इंडोनेशिया के बीच सांस्कृतिक समानताएं हैं। यही कारण है कि भारत ने 1950 में गणतंत्र दिवस परेड के पहले मुख्य अतिथि के रूप में राष्ट्रपति सुकर्णो को आमंत्रित किया।
सुकर्णो का जीवन और उनकी राजनीति
सुकर्णो का जन्म 6 जून 1901 को जावा में हुआ था और 1949 में इंडोनेशिया के पहले राष्ट्रपति बने। उन्होंने अपने देश को एक नई दिशा दी और “निर्देशित लोकतंत्र” के तहत इंडोनेशिया में लोकतांत्रिक ढांचा स्थापित किया। हालांकि, उन्हें कई राजनीतिक संघर्षों का सामना करना पड़ा और 1965 में इंडोनेशिया की सेना ने उनका तख्तापलट किया, जिससे उन्हें राष्ट्रपति पद से हटा दिया गया। वे अपने आखिरी वर्षों में नजरबंद रहे और 1970 में उनका निधन हो गया।
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भारत के पहले गणतंत्र दिवस परेड की शुरुआत
1950 में, भारत ने अपना पहला गणतंत्र दिवस मनाया और सुकर्णो को मुख्य अतिथि बनाकर भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को एक नया आयाम दिया। इस दिन भारत के राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने भारतीय संघ के अध्यक्ष के रूप में अपना पहला कार्यकाल शुरू किया था। गणतंत्र दिवस परेड ने भारतीय सेना की ताकत, सांस्कृतिक धरोहर और देश की विभिन्न उपलब्धियों का प्रदर्शन किया।
[उत्तर] 1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस परेड में पहला मुख्य अतिथि कौन था?
1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस परेड में पहला मुख्य अतिथि कौन था? इस सवाल का उत्तर है इंडोनेशिया के राष्ट्रपति सुकर्णो, जिनका भारत दौरा दोनों देशों के बीच एक मजबूत सांस्कृतिक और राजनीतिक संबंधों का प्रतीक बन गया। उनके इस महत्वपूर्ण दौरे ने भारत और इंडोनेशिया के बीच दोस्ती को और भी गहरा किया और भारतीय गणराज्य के लिए यह दिन एक ऐतिहासिक क्षण बन गया।
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