भारत इस बार अपना 76वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी दी जाती है जो सम्मान और प्रशंसा का प्रतीक है। यह सलामी हर साल 26 जनवरी को आयोजित गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान सबसे प्रतिष्ठित क्षणों में से एक है। यह औपचारिक सलामी भारतीय सेना द्वारा नई दिल्ली के राजसी राजपथ पर राष्ट्रगान के साथ दी जाती है। 21 तोपों की सलामी भव्य गणतंत्र दिवस परेड का एक हिस्सा है जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, सैन्य शक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रदर्शित करती है। इसलिए इस ब्लाॅग में आपको गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितने तोपों की सलामी दी जाती है? के बारे में बताया जा रहा है।
उत्सव | प्रमुख सम्मान | गन सल्यूट की संख्या |
गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) | राष्ट्रपति को सम्मानित करना | 21 गन सल्यूट |
गणतंत्र दिवस पर राष्ट्रपति को कितने तोपों की सलामी दी जाती है?
गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति को राष्ट्रीय समारोह के हिस्से के रूप में 21 तोपों की सलामी दी जाती है। यह सलामी सम्मान और आदर का प्रतीक है जो राष्ट्र के प्रमुख के रूप में राष्ट्रपति के महत्व को पहचानता है। 21 तोपों की सलामी नई दिल्ली के राजपथ पर गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान राष्ट्रपति के आगमन के तुरंत बाद होती है। यह सलामी भारतीय सेना द्वारा दी जाती है, और इसके साथ ही राष्ट्रगान भी गाया जाता है। 21 तोपों की सलामी एक पुरानी परंपरा है जो इस ऐतिहासिक दिन पर भारतीय राष्ट्रपति के सम्मान, शक्ति और महत्व को दर्शाती है।
आपको बता दें कि भारत ने पिछले कुछ वर्षों में कई बदलाव किए हैं। इस गणतंत्र दिवस पर भारत के राष्ट्रपति और राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाएगी। आजादी के बाद 26 जनवरी 1950 को भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ राजेंद्र प्रसाद घोड़ा गाड़ी में सवार होकर राष्ट्रपति भवन से इरविन एम्फीथिएटर (मेजर ध्यानचंद स्टेडियम मे जाकर राष्ट्रपति को दी जाने वाली 21 तोपों की सलामी ली थी।
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21 तोपों की सलामी क्या है?
गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के दिन 21 तोपों की सलामी के लिए गणतंत्र दिवस परेड के समय राष्ट्रपति और राष्ट्रीय ध्वज के लिए ‘राष्ट्रीय सलामी’ के नारे पर राष्ट्रपति के बॉडी गार्ड्स (PBG) के कमांडेंट अपनी तलवार को नीचे रखते हैं और राष्ट्रगान बजते समय 21 तोपों की सलामी दी जाती है। आपको बता दें की इसके अतिरिक्त, गणतंत्र दिवस पर सात तोपों द्वारा सलामी दी जाती है, जो 2.25 सेकंड के अंतराल पर तीन राउंड फायर करती हैं और 52 सेकंड का राष्ट्रगान बजाया जाता है।
कहा जाता है की जब तक 21वीं राउंड फायर न हो जाए तबतक जय जय हे गाया या बजाया जा रहा हो। हर नए राष्ट्रपति को शपथ ग्रहण के बाद और गणतंत्र दिवस पर 21 तोपों की सलामी से सम्मानित किया जाता है। वहीं हर वर्ष की तरह गणतंत्र दिवस परेड कमेंट्री के साथ सभी दूरदर्शन चैनलों पर प्रसारित की जाएगी। आप अपने मोबाइल, पीसी या स्मार्ट टीवी पर इस परे़ड की लाइव स्ट्रीम करने के लिए दूरदर्शन या भारतीय प्रेस ब्यूरो के आधिकारिक यूट्यूब चैनल को भी देख सकते हैं।
21 तोपों की सलामी का महत्व क्या है?
21 तोपों की सलामी सम्मान, प्रतिष्ठा और मान्यता का प्रतीक है। यह भारत के राष्ट्रपति जैसे राष्ट्राध्यक्षों को दिया जाने वाला सर्वोच्च सैन्य सम्मान है, और यह सलामी दिए जाने वाले व्यक्ति के महत्व को दर्शाता है। 21 तोपों को चलाने की परंपरा 18वीं शताब्दी से चली आ रही है, जब इसे शक्ति और ताकत का प्रतीक माना जाता था। सलामी सात के अंतराल पर दी जाती है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से कई संस्कृतियों में सात को एक शक्तिशाली संख्या माना जाता था। गणतंत्र दिवस और स्वतंत्रता दिवस जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अवसरों पर, 21 तोपों की सलामी देश के नेतृत्व और उसके लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति सम्मान को दर्शाती है।
1950 में भारत के पहले गणतंत्र दिवस परेड में पहला मुख्य अतिथि कौन था?
FAQs
21 तोपों की सलामी दी जाती हैं।
पहला गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की उपस्थिति में नई दिल्ली में मनाया गया था।
हर साल 26 जनवरी को गणतंत्र दिवस मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस का जश्न उद्घाटन समारोह और दीप प्रज्ज्वलन के साथ शुरू होता है, उसके बाद ध्वजारोहण और सांस्कृतिक गतिविधियाँ होती हैं।
गणतंत्र दिवस 26 जनवरी 1950 को लागू हुए भारत के संविधान को अपनाने के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।
21 तोपों की सलामी के पीछे क्या अर्थ है?
21 तोपों की सलामी एक पारंपरिक सम्मान है जो उच्चतम सम्मान और गौरव का प्रतीक मानी जाती है। यह सलामी राष्ट्र के प्रमुख, जैसे राष्ट्रपति, को दी जाती है जो देश की एकता और समृद्धि का प्रतीक होते हैं। 21 तोपों की सलामी का मतलब यह है कि व्यक्ति या पद को अत्यधिक सम्मान दिया जा रहा है।
राष्ट्रपति को 21 तोपों की सलामी गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) के मौके पर दी जाती है। यह सलामी राष्ट्रपति के राजपथ पर पहुंचने के बाद दी जाती है, जब वह राष्ट्रीय ध्वज फहराते हैं और गणतंत्र दिवस समारोह की शुरुआत होती है। यह सलामी उनके पद और राष्ट्र की प्रतीकात्मकता का आदर करती है।
स्वतंत्रता दिवस पर 15 अगस्त को राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाती है। यह सलामी भारतीय स्वतंत्रता संग्राम की महत्वपूर्ण विजय और राष्ट्र के स्वतंत्रता के प्रतीक के रूप में होती है।
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