छत्रपति शिवाजी टर्मिनस: इतिहास, वास्तुकला और महत्व की पूरी जानकारी

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छत्रपति शिवाजी टर्मिनस

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, दुनिया की सबसे बेहतरीन कार्यात्मक रेलवे स्टेशन इमारतों में से एक है, जिसका उपयोग प्रतिदिन तीन मिलियन से अधिक यात्री करते हैं। यह केवल एक रेलवे स्टेशन नहीं बल्कि वास्तुकला, इतिहास और संस्कृति का एक अद्भुत संगम है। बता दें कि छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST) भारत के सबसे प्रतिष्ठित रेलवे स्टेशनों में से एक है, जो मुंबई शहर का एक प्रमुख रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है, इसी कारण इसे भारतीय रेलवे की शान माना जाता है। यह इमारत भारतीय और यूरोपीय वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण है, जिसके हर कोने में इतिहास की कहानियां छिपी हुई हैं। इसके बारे में अधिक जानने के लिए ये ब्लॉग अंत तक पढ़ें। इस ब्लॉग के माध्यम से आपको छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के इतिहास, वास्तुकला और कुछ रोचक तथ्यों के बारे में जानने को मिलेगा।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के बारे में

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CST), जिसे पहले विक्टोरिया टर्मिनस (VT) के नाम से जाना जाता था, मुंबई के पश्चिमी भाग में स्थित है। यह ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है जिसका निर्माण 1887 में ब्रिटिश वास्तुकार एफ. डब्ल्यू. स्टीवंस द्वारा किया गया था। विक्टोरियन गोथिक शैली में बना यह स्टेशन भारतीय वास्तुकला के तत्वों का मिश्रण है और अपने इसी भव्य वास्तुकला और समृद्ध इतिहास के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। वहीं इसी के चलते 1996 में यूनेस्को के विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया गया। आईये जानते हैं आखिर क्या है इस ऐतिहासिक इमारत का इतिहास। 

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छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का इतिहास

पूर्व में विक्टोरिया टर्मिनस के नाम से जाने जाना वाला छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस का निर्माण 1878 में शुरू हुआ था और 1887 में पूरा हुआ। इस भव्य बिल्डिंग का डिजाइन आर्किटेक्ट फ्रेडरिक स्टीवेंस द्वारा तैयार किया गया था। पूरा होने के बाद इस स्टेशन का नाम महारानी विक्टोरिया के नाम पर विक्योरिया टर्मिनस रखा गया। लेकिन 1996 में, स्टेशन का नाम बदल दिया गया। इसे विक्टोरिया टर्मिनस से बदलकर छत्रपति शिवाजी टर्मिनस कर दिया गया, जो मराठा साम्राज्य के संस्थापक छत्रपति शिवाजी महाराज को श्रद्धांजलि है। वहीं इसके बाद 2004 में यूनेस्को ने इस भवन को विश्व विरासत की सूची में स्थान दिया। 

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छत्रपति शिवाजी टर्मिनस की वास्तुकला

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (सीएसटी), जिसे पहले विक्टोरिया टर्मिनस के नाम से जाना जाता था, अपनी भव्य वास्तुकला और समृद्ध इतिहास के लिए दुनियाभर में प्रसिद्ध है। इसकी वास्तुकला आश्चर्यजनक है। बता दें कि इस खूबसूरत बिल्डिंग का डिजाइन आर्किटेक्ट फ्रेडरिक स्टीवेंस ने तैयार किया जिसे बनने में एक दशक का समय लगा था। इस इमारत के ऊंचे मेहराब, नुकीले टावर और गुंबद, और जटिल पत्थर की नक्काशी एक भव्य यूरोपीय महल जैसा एहसास दिलाती है।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST) की वास्तुकला विक्टोरियन गोथिक शैली की है, जिसमें भारतीय और यूरोपीय डिज़ाइन का अद्भुत समन्वय देखने को मिलता है। इस स्टेशन की इमारत में सुंदर गुंबद, मेहराब और खिड़कियां हैं, जो इसे एक अनोखी पहचान देती हैं। इसके अलावा यहाँ मौजूद गुंबद को ऊपर उठाते हुए एक बड़ी मूर्ति है। जो “प्रगति” की देवी को दर्शाती है। वहीं स्टेशन भर में पत्थर की नक्काशी देख सकते हैं जिसमें भारतीय पौराणिक कथाओं को दर्शाया गया है। इन सब के अलावा यहाँ मौजूद रंगीन कांच की खिड़कियां विभिन्न पैटर्न और कहानियों को चित्रित करती हैं।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का नामकरण

बता दें कि छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का पुराना नाम विक्टोरिया टर्मिनस था। वर्ष 1996 में, महाराष्ट्र सरकार ने इस ऐतिहासिक स्टेशन का नाम बदलकर महान मराठा शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के सम्मान में ‘छत्रपति शिवाजी टर्मिनस’ कर दिया गया। यह बदलाव भारतीय सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस क्यों बनाया गया था?

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (CST) को निम्नलिखत कारणों से बनाया गया था:

  • उस समय भारत में रेलवे नेटवर्क का विस्तार  तेजी से हो रहा था। ऐसे में भारत के महत्वपूर्ण शहर मुंबई एक भव्य और सुविधाजनक रेलवे स्टेशन की आवश्यकता थी। जिसके वजह से छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस का निर्माण किया गया। 
  • इसका निर्माण मुंबई शहर को दुनिया के अन्य हिस्सों से जोड़ने के लिए किया गया था ताकि व्यापार और वाणिज्य को बढ़ावा मिल सके।
  • इस स्टेशन का मुंबई शहर का और अधिक सुंदर और आकर्षक बनाने के लिए भी किया गया था।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का महत्त्व और विशेषताएँ

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का महत्त्व और विशेषताएँ निम्नलिखित बिंदुओं के माध्यम से आसानी से समझा जा सकता है, जो इस प्रकार हैं –

  1. यूनेस्को विश्व धरोहर स्थल: वर्ष 2004 में, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल का दर्जा दिया गया।
  2. मुंबई की जीवनरेखा: बता दें कि छत्रपति शिवाजी टर्मिनस भारतीय रेलवे का एक प्रमुख केंद्र है और प्रतिदिन लाखों यात्रियों की आवाजाही का गवाह बनता है।
  3. सुरक्षा और प्रशासन: छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर उच्च स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था है, जिससे यह यात्रियों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक बनता है।

शिवाजी टर्मिनस को विश्व धरोहर में कब शामिल किया गया?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST) को 2004 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर स्थल की सूची में शामिल किया गया था। आपको बता दें कि अभी तक भारत में कुल 42 विश्व धरोहर स्थल है जिसमें से 33 सांस्कृतिक, 7 प्राकृतिक स्थल और 1 मिश्रित विश्व विरासत स्थल हैं। यह भी बता दें कि वर्ल्ड हेरिटेज साइट्स इन इंडिया में सबसे पहले 1983 में अजंता की गुफाएं, एलोरा की गुफाएं, ताजमहल और आगरा के किले को शामिल किया गया था। उसके बाद धीरे धीरे कई स्थल जुड़ते चले गए। वहीं हाल ही में शांतिनिकेतन और होयसल के पवित्र मंदिर समूह को वैश्विक धरोहर की सूची में शामिल किया गया है। 

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के बारे में रोचक तथ्य

Chhatrapati Shivaji Terminus के बारे में रोचक तथ्य निम्नलिखित है : 

  • यह स्टेशन भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक है जो हर दिन लगभग 300,000 यात्रियों की सेवा करता है।
  • ऐतिहासिक इमारत ताज महल के बाद यह स्टेशन भारत का दूसरा सबसे अधिक फोटो खींचा जाने वाला स्मारक है।
  • यह 18 प्लेटफार्मों के साथ 10 हेक्टेयर के क्षेत्र में फैला हुआ है।
  • यह स्टेशन मुंबई शहर का एक महत्वपूर्ण लैंडमार्क होने के साथ साथ शहर के समृद्ध इतिहास और संस्कृति का प्रतीक भी माना जाता है।
  • यह स्टेशन भारतीय और यूरोपीय वास्तुकला का अद्भुत मिश्रण है।
  • वर्तमान में छत्रपति शिवाजी टर्मिनस डिजिटल और हाई-टेक स्टेशन बन चुका है, जिसके तहत स्टेशन पर सीसीटीवी कैमरे, इलेक्ट्रॉनिक डिस्प्ले बोर्ड, और आधुनिक सुविधाएं मौजूद हैं।
  • छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर पर्यटकों के लिए गाइडेड टूर की सुविधा भी उपलब्ध है।

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FAQs

भारत में कुल कितने वैश्विक धरोहर स्थल है?

भारत में कुल 42 वैश्विक धरोहर स्थल है। 

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस में कितने प्लेटफार्म हैं?

छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस में 18 प्लेटफार्म हैं।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का पुराना नाम क्या है?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस का पुराना नाम विक्टोरिया टर्मिनस था।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस क्या है?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस (CST) भारत के मुंबई शहर में स्थित एक ऐतिहासिक रेलवे स्टेशन है, जो भारतीय रेलवे का प्रमुख केंद्र है।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस किसके द्वारा और कब बनाया गया था?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को ब्रिटिश वास्तुकार फ्रेडरिक विलियम स्टीवंस द्वारा डिजाइन किया था, और इसका निर्माण वर्ष 1887 में पूरा हुआ था।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस की वास्तुकला की खासियत क्या है?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस की वास्तुकला विक्टोरियन गोथिक स्टाइल और भारतीय स्थापत्य कला का अनूठा संगम है, जिसमें सुंदर नक्काशीदार गुंबद, तोरण और मीनारें शामिल हैं।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को विश्व धरोहर स्थल का दर्जा कब मिला?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस को वर्ष 2004 में यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर स्थल घोषित किया था।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस किन रेलवे लाइनों से जुड़ा है?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस सेंट्रल रेलवे और हार्बर लाइन का प्रमुख जंक्शन है और भारत के विभिन्न शहरों को जोड़ता है।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस पर रोज़ाना कितनी ट्रेनों का संचालन होता है?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस यहां से रोजाना हजारों लोकल और लंबी दूरी की ट्रेनें संचालित होती हैं, जिससे यह भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में से एक बन जाता है।

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई के किन प्रमुख स्थानों से जुड़ा हुआ है?

छत्रपति शिवाजी टर्मिनस मुंबई के दादर, ठाणे, कल्याण, चर्चगेट और पश्चिमी रेलवे स्टेशनों से सीधे जुड़ा हुआ है।

आशा है कि आपको छत्रपति शिवाजी टर्मिनस से जुड़ी सभी जानकारी इस लेख में मिल गयी होगी। वैश्विक धरोहर से जुड़े ऐसे ही अन्य ब्लॉग पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहिए।

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