RPSC 2nd Grade सिलेबस, परीक्षा पैटर्न और स्मार्ट स्टडी टिप्स

1 minute read
RPSC 2nd ग्रेड का सिलेबस

राजस्थान में सरकारी शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं के लिए राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा आयोजित द्वितीय श्रेणी (वरिष्ठ अध्यापक) भर्ती परीक्षा एक महत्वपूर्ण अवसर है। इस परीक्षा में सफलता पाने के लिए उम्मीदवारों को दो पेपरों (पेपर-1 और पेपर-2) से होकर गुजरना पड़ता है। यह परीक्षा न केवल अकादमिक ज्ञान, बल्कि आपकी शिक्षण योग्यता, विषय की समझ और सामान्य जागरूकता का भी परीक्षण करती है। RPSC सेकंड ग्रेड परीक्षा की तैयारी कर रहे उम्मीदवारों को सिलेबस और परीक्षा पैटर्न की जानकारी होना अत्यंत आवश्यक है। इस गाइड में अभ्यर्थियों को RPSC 2nd ग्रेड सिलेबस, परीक्षा पैटर्न और एग्जाम टिप्स से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है।

कंडक्टिंग बॉडीराजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC)
पोस्ट का नामआरपीएससी ग्रेड 2 टीचर
कैटेगरीआरपीएससी ग्रेड 2 सिलेबस
एक्जाम लेवलस्टेट लेवल
आरपीएससी ग्रेड 2 एग्जाम की अवधिपेपर 1: 2 घंटे
पेपर 2: 2 घंटे 30 मिनट
आरपीएससी मार्किंग स्कीमप्रत्येक सही उत्तर के लिए दो अंक और प्रत्येक गलत उत्तर के लिए संबंधित प्रश्न के निर्धारित अंकों का 1/3 अंक काटा जाएगा।
आरपीएससी ऑफिशियल वेबसाइटrpsc.rajasthan.gov.in

RPSC सेकंड ग्रेड परीक्षा क्या है?

सेकंड ग्रेड टीचर परीक्षा एक प्रतियोगी परीक्षा है, जिसका आयोजन राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) द्वारा किया जाता है। यह परीक्षा उन अभ्यर्थियों के लिए होती है जो सेकंड ग्रेड स्तर पर शिक्षण पदों के लिए पात्रता प्राप्त करना चाहते हैं। इस परीक्षा के माध्यम से उम्मीदवारों की शिक्षण से संबंधित ज्ञान और कौशल का मूल्यांकन किया जाता है। इसमें बाल विकास, पाठ्यक्रम योजना, कक्षा प्रबंधन तथा विषय-विशेष ज्ञान जैसे गणित, पठन, लेखन और विद्यार्थियों के लिए उपयुक्त शैक्षणिक तकनीकों की समझ शामिल होती है। परीक्षा में सफल होने के बाद अभ्यर्थी सेकंड ग्रेड शिक्षक पद के लिए पात्र हो जाते हैं।

RPSC सेकंड ग्रेड सीनियर टीचर सिलेबस

यहां RPSC सेकंड ग्रेड सीनियर टीचर परीक्षा का पूरा सिलेबस दिया गया है, जिसे देखकर उम्मीदवार अपनी तैयारी सही दिशा में कर सकते हैं:

प्रथम पेपर – I

1: राजस्थान का भौगोलिक, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और सामान्य ज्ञानः

  • भौतिक विशेषताएँ, जलवायु, जल निकासी, वनस्पति, कृषि, पशुधन, डेयरी विकास, जनसंख्या वितरण, वृद्धि, साक्षरता, लिंगानुपात, जनजातियों, उद्योग और प्रमुख पर्यटन केंद्र।
  • राजस्थान की प्राचीन संस्कृति और सभ्यताः कालीबंगा, आहड, गणेश्वर, बैराठ।
  • 8वीं से 18वीं शताब्दी तक का राजस्थान का इतिहासः
  • गुर्जर प्रतिहार
  • अजमेर के चौहान
  • दिल्ली सल्तनत के साथ संबंध मेवाड़, रणथंभौर और जानौर।
  • राजस्थान और मुगल सांगा, प्रताप, आमेर के मानसिंह, चंद्रसेन, बीकानेर के रायसिंह, मेवाड़ के राजसिंह।

राजस्थान में स्वतंत्रता संग्राम का इतिहासः

  • 1857 का विद्रोह।
  • राजनीतिक जागरुकता।
  • प्रजामंडल आंदोलन 
  • किसान और जनजातीय आंदोलन 

राजस्थान का एकीकरण।

  • समाज और धर्मः
  • लोक देवता और देवियां।
  • राजस्थान के संत।
  • स्थापत्य कला मंदिर, किले और महल।
  • चित्रकला विभिन्न शैलियां।
  •  मेले और त्यौहार।
  • रीति-रिवाज, वेशभूषा और आभूषण।
  • लोक संगीत और नृत्य।
  • भाषा और साहित्य।

राजस्थान की राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्थाः

  • राज्यपाल का कार्यालयः भूमिका और कार्य।
  • मुख्यमंत्री और मंत्रिमंडल (राज्य मंत्रिपरिषद)।
  • राज्य सचिवालय और मुख्य सचिव।
  • राजस्थान लोक सेवा आयोग का संगठन और भूमिका।
  • राज्य मानवाधिकार आयोग।
  • पंचायत राज (स्थानीय स्वशासन प्रशासन)।
  • राजस्थान की राज्य विधान सभा।

II: राजस्थान की समसामयिकीः

राज्य स्तर पर सामाजिक-आर्थिक, राजनीतिक, खेल और खेलकूद से संबंधित प्रमुख समसामयिक मुद्दे और घटनाएँ।

III: विश्व और भारत का सामान्य ज्ञानः

  • महाद्वीप, महासागर और उनकी विशेषताएँ, वैश्विक पवन प्रणाली, पर्यावरणीय मुद्दे और रणनीतियाँ, पैश्वीकरण और उसके प्रभाव, जनसंख्या वितरण और प्रवास।
  • भारतः भौतिक विशेषताएँ, मानसूनी प्रणाली, जल निकासी, वनस्पति और ऊर्जा संसाधन।

भारतीय अर्थव्यवस्थाः-

  • कृषि, उद्योग और सेवा क्षेत्र में वृद्धि और विकास। भारत का विदेशी व्यापारः रुझान, संरचना और दिशा।

भारतीय संविधान, राजनीतिक व्यवस्था और विदेश नीतिः

  • भारत का संवैधानिक इतिहासः विशेष रूप से 1919 और 1935 के भारत सरकार अधिनियम।
  • भारतीय संविधानः अंबेडकर की भूमिका, संविधान निर्माण, प्रमुख विशेषताएँ, मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य, राज्य के नीति निदेशक सिद्धांत।
  • भारत के राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री का कार्यालय।
  • राजनीतिक दल और दबाव समूह।
  • भारत की विदेश नीति के सिद्धांत और इसके निर्माण में नेहरू का योगदान।
  • भारत और संयुक्त राष्ट्र, वैश्विक राजनीति में उभरते रुझान विशेष रूप से वैश्वीकरण के संदर्भ में।

IV: शैक्षिक मनोविज्ञान

  • शैक्षिक मनोविज्ञान – अर्थ, क्षेत्र एवं कक्षाकक्ष स्थितियों में शिक्षक के लिए इसका निहितार्थ।
  • अधिगमकर्ता का विकास – वृद्धि और विकास की अवधारणा, शारीरिक, भावनात्मक, संज्ञावात्मक, नैतिक और सामाजिक विकास।
  • अधिगम – इसका अर्थ, प्रकार, विभिन्न अधिगम सिद्धांत और शिक्षक के लिए उनके विहितार्थ, अधिगम को प्रभावित करने वाले कारक, निर्माणवादी अधिगम।
  • व्यक्तित्व – परिभाषा, सिद्धांत और मापन, समायोजन और इसकी युक्तियां, कुसमायोजन।
  • बुद्धि और रचनात्मकता – परिभाषा, सिद्धांत और मापन, अधिगम में भूमिका।
  • प्रेरणा – अधिगम प्रक्रिया में अर्थ और भूमिका, उपलब्धि प्रेरणा।
  • व्यक्तिगत विभिन्नताएं – परिभाषा और स्रोत, विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की शिक्षा प्रतिभाशाली, धीमे
  • शिक्षार्थी और अपराधी।
  • अवधारणाएं और शिक्षा में इनका निहितार्थ: स्व-अवधारणा (Self-concept), दृष्टिकोण (Attitudes), रुचि और आदतें (Habits), अभिक्षमता (Aptitude) और सामाजिक कौशल (Social Skills)

द्वितीय पेपर – II 

खंड-प्रथम

माध्यमिक व उच्च माध्यमिक स्तर :-

वर्ण-व्यवस्था

  • स्वर व व्यंजनों का वर्गीकरण
  • कोश-क्रम

शब्द-वर्गीकरण (स्रोत के आधार पर)

  • तत्सम
  • तदद्भव
  • विदेशी

शब्द-वर्गीकरण (व्याकरण आधारित)

  • संज्ञा, सर्वनाम, विशेषण, क्रिया व इन सभी के भेद
  • क्रियाविशेषण व भेद

व्याकरणिक कोटियाँ

  • लिंग
  • वचन
  • कारक
  • काल

शब्द-रचना

  • संधि (स्वर व व्यंजन) व भेद
  • समास व भेद
  • उपसर्ग
  • प्रत्यय व भेद

शब्द-ज्ञान

  • पर्यायवाची शब्द
  • विलोम शब्द
  • अनेकार्थी शब्द
  • समश्रुत भिन्नार्थक शब्द
  • वाक्यांश के लिए एक शब्द

वाक्य – रचना

  • वाक्य के अंग
  • वाक्य के भेद-उपभेद
  • शब्द-शुद्धीकरण
  • वाक्य – शुद्धीकरण
  • मुहावरे एवं लोकोक्तियाँ अर्थ एवं प्रयोग

खंड-द्वितीय

स्नातक स्तरः-

शब्द शक्तियाँ, काव्य-गुण

  • भेद व उदाहरण

काव्य-दोष

  • श्रुतिकटुत्व, ग्राम्यत्व, अप्रतीतत्व, क्लिष्टत्व, अक्रमत्व तथा दुष्क्रमत्व

अलंकार

  • श्लेष, यमक, उपमा, रूपक, उत्प्रेक्षा, विभावना, संदेह, भ्रातिमान, विरोधाभास, अतिशयोक्ति, असंगति, अपहुति ।


छंद

  • द्रुतविलम्बित, हरिगीतिका, दोहा, सोरठा, कुण्डलिया, चौपाई, छप्पय, मन्दाक्रान्ता, मनहरण कवित्त, मत्तगयन्द सवैया

रस

  • रस का स्वरूप, रसाव्यव, रस-भेद

हिंदी साहित्य का इतिहास (पूर्व आधुनिक काल)

  • नामकरण व कालविभाजन
  • आदिकाल, भक्तिकाल व रीतिकाल
  • काव्य धाराएँ, प्रमुख प्रवृत्तियों, रचनाएँ व रचनाकार

हिंदी साहित्य का इतिहास (आधुनिक काल)

पद्य

  • भारतेंदु युग, द्विवेदी युग, छायावाद, छायावादोत्तर युग की प्रमुख प्रवृत्तियों, रचनाएँ व रचनाकार

गद्य

  • कहानी, उपन्यास, नाटक, निबन्ध की प्रमुख प्रवृत्तियों, रचनाएँ व रचनाकार

हिंदी भाषा

  • हिंदी भाषा का उद्‌भव और विकास
  • हिंदी एवं उसकी बोलियाँ
  • राजस्थानी की प्रमुख बोलियाँ
  • देवनागरी लिपि का मानक स्वरूप

निर्धारित पाठः-

कबीर ग्रन्थावली – सं० श्यामसुन्दर दास

  • साखी प्रारंभिक 5 अंग
  • पद प्रारंभिक 10 पद

रामचरितमानस – तुलसीदास, गीता प्रेस, गोरखपुर

  • बालकाण्ड

भ्रमरगीतसार – सूरदास सं० रामचन्द्र शुक्ल

  • पद- प्रारंभिक 20 पद

मीरां पदावली – सं० शम्भूसिंह मनोहर

  • पद प्रारंभिक 20 पद

बिहारी रत्नाकर – सं० जगन्नाथदास रत्नाकर

  • दोहे- प्रारंभिक 20 दोहे

वीर सतसई – सूर्यमल्ल मीसण सं० नरोत्तमदास स्वामी, डॉ. नरेन्द्र भानावत, लक्ष्मी कमल

  • दोहे- प्रारंभिक 20 दोहे

कुरुक्षेत्र – रामधारी सिंह दिनकर

  • छठा सर्ग

कामायनी – जयशंकर प्रसाद

  • श्रद्धा सर्ग

चिन्तामणि (भाग-1) – आचार्य रामचन्द्र शुक्ल

  • उत्साह
  • श्रद्धा और भक्ति
  • लोभ और प्रीति

गोदान – प्रेमचंद 

कहानियाँ

  • उसने कहा था – चन्द्रधर शर्मा गुलेरी
  • पूस की रात – प्रेमचंद
  • यही सच है – मन्नू भंडारी
  • आषाढ़ का एक दिन – मोहन राकेश

खंड-तृतीय

हिंदी शिक्षण एवं शिक्षण विधियाँ

(अ)

  • भाषायी कौशलों के विकास हेतु निम्नांकित पक्षों के स्वरूप का शिक्षण श्रवण, उच्चारण, वर्तनी, वाचन (सस्वर व मौन) अभिव्यक्ति (लिखित एवं मौखिक)
  • हिंदी की विभिन्न विधाओं का शिक्षण, शिक्षण विधियों एवं पाठ योजना निर्माण (इकाई व दैनिक) गद्य शिक्षण, पद्य शिक्षण, व्याकरण शिक्षण, रचना शिक्षण, नाटक शिक्षण

(आ)

  • भाषा शिक्षण में निदानात्मक परीक्षण व उपचारात्मक शिक्षण
  • भाषा शिक्षण में सहायक सामग्री का उपयोग
  • भाषा शिक्षण में मूल्यांकन सतत एवं समग्र मूल्यांकन, पाठान्तर्गत व पाठोपरांत मूल्यांकन

नोट: यह सिलेबस राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC), अजमेर की ऑफिशियल वेबसाइट rpsc.rajasthan.gov.in से लिया गया है जिसमें बदलाव संभव है। 

यह भी पढ़ें: RPSC RO EO सिलेबस और परीक्षा पैटर्न

RPSC सेकंड ग्रेड सीनियर टीचर के लिए परीक्षा पैटर्न

यहाँ RPSC सेकंड ग्रेड सीनियर टीचर के लिए एग्जाम पैटर्न दिया गया है, जिसमें दोनों पेपर का एग्जाम पैटर्न शामिल है:

आरपीएससी सेकंड ग्रेड पेपर 1 एग्जाम पैटर्न और अंकतालिका

  • प्रश्न पत्र अधिकतम 200 अंकों का होगा।
  • प्रश्न पत्र की अवधि दो घंटे होगी।
  • प्रश्न पत्र में बहुविकल्पीय 100 के प्रश्न होंगे।
  • सभी प्रश्नों पर समान अंक हैं।
  • उत्तर के मूल्यांकन में नेगेटिव मार्किंग होगी। प्रत्येक गलत उत्तर के लिए संबंधित प्रश्न के निर्धारित अंकों का 1/3 अंक काटा जाएगा।
सब्जेक्ट क्वेश्चंस की संख्याकुल अंक
राजस्थान की ज्योग्राफिकल, हिस्टोरिकल, कल्चरल और जनरल नॉलेज 4080
राजस्थान के करंट अफेयर्स1020
विश्व और भारत की जनरल नॉलेज3060
एजुकेशनल साइकोलॉजी2040
कुल100200

आरपीएससी सेकंड ग्रेड पेपर 2 एग्जाम पैटर्न और अंकतालिका

  • क्वेश्चन पेपर अधिकतम 200 अंकों का होगा।
  • क्वेश्चन पेपर की अवधि दो घंटे (120 मिनट) होगी।
  • क्वेश्चन पेपर में MCQs के 100 प्रश्न होंगे।
  • सभी प्रश्नों के अंक समान हैं।
  • उत्तरों के मूल्यांकन में नेगेटिव मार्किंग लागू होगी।
सब्जेक्ट का नामक्वेश्चंस की संख्याकुल अंक
प्रासंगिक विषय वस्तु के बारे में माध्यमिक और वरिष्ठ माध्यमिक मानक का ज्ञान90180
11वीं विषय वस्तु के बारे में स्नातक मानक का ज्ञान4080
प्रासंगिक विषय की शिक्षण विधियाँ2040
कुल150300

यह भी पढ़ें: राजस्थान पटवारी परीक्षा का नवीनतम सिलेबस और परीक्षा पैटर्न

RPSC सेकंड ग्रेड एग्जाम की तैयारी के लिए टिप्स

यहां अभ्यर्थियों के लिए RPSC सेकंड ग्रेड परीक्षा की तैयारी के लिए कुछ महत्वपूर्ण टिप्स दी गई हैं:

  • परीक्षा में बेहतर प्रदर्शन के लिए सबसे पहले परीक्षा पैटर्न को अच्छी तरह समझें और उसी के अनुसार अपनी तैयारी की रणनीति बनाएं।
  • सिलेबस का विश्लेषण करें और उन प्रमुख विषयों व टॉपिक्स की पहचान करें, जिन पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
  • स्पीड और एक्युरेसी बढ़ाने के लिए पिछले वर्षों के प्रश्न पत्रों और मॉक/नमूना प्रश्नों को समय सीमा में हल करने का अभ्यास करें।
  • प्रत्येक विषय के लिए संक्षिप्त और व्यवस्थित नोट्स बनाएं, जो अंतिम समय में रिवीजन के लिए उपयोगी हों।
  • महत्वपूर्ण अवधारणाओं पर मजबूत पकड़ बनाने के लिए नियमित रिवीजन को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाएं।
  • अपनी तैयारी का मूल्यांकन करने के लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन मॉक टेस्ट दें और कमजोर क्षेत्रों की पहचान कर उन पर काम करें।
  • शिक्षा क्षेत्र से जुड़े नवीनतम विकास, नीतिगत बदलाव और महत्वपूर्ण शैक्षणिक पहलों से खुद को अपडेट रखें।
  • तैयारी के दौरान सकारात्मक सोच बनाए रखें, नियमित ब्रेक लें और अपनी क्षमताओं पर विश्वास रखें।

FAQs

RPSC 2nd ग्रेड में कितने पेपर होते हैं?

RPSC 2nd ग्रेड परीक्षा में दो पेपर होते हैं: पेपर-1 (सामान्य ज्ञान) और पेपर-2 (विषय-विशेष)।


राजस्थान में टीचर बनने के लिए कितनी उम्र चाहिए?

भर्ती में शामिल होने के लिए उम्मीदवारों की न्यूनतम उम्र 18 वर्ष और अधिकतम उम्र 40 वर्ष होनी चाहिए। आयुसीमा की गणना 1 जनवरी के आधार पर की जाती है।

सेकंड ग्रेड टीचर के लिए क्या योग्यता चाहिए?

द्वितीय श्रेणी शिक्षक बनने के लिए उम्मीदवार के पास स्नातक + B.Ed. की डिग्री होनी चाहिए।

आशा है कि इस लेख में आपको RPSC 2nd Grade सिलेबस से जुड़ी सभी आवश्यक जानकारी मिल गई होगी। ऐसे ही अन्य कोर्सेज से संबंधित ब्लॉग्स पढ़ने के लिए Leverage Edu के साथ बने रहें। 

Leave a Reply

Required fields are marked *

*

*

1 comment