महात्मा गाँधी पर हिंदी में निबंध

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Mahatma Gandhi essay in Hindi

भारत के सबसे महान नेता व स्वतंत्रता सेनानी मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ था। ब्रिटिश शासन से भारत की स्वतंत्रता के लिए सफल अभियान का नेतृत्व करने के लिए इन्होंने अहिंसक प्रतिरोध का इस्तेमाल किया है। 1890 में इंग्लैंड से वकील बनकर भारत लौटे और भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के लिए अपना पूरा जीवन दे दिया। ब्रिटिशों के खिलाफ महात्मा गांधी ने कई आंदोलन किए, जिसमें चंपारण आंदोलन, खेड़ा आंदोलन, खिलाफत आंदोलन, नमक आंदोलन और भारत छोड़ो आंदोलन मुख्य रूप से शामिल है। विश्व में यह एकमात्र उदाहरण है कि गाँधी जी के सत्याग्रह के समक्ष अंग्रेजों को भी झुकना पड़ा। यह ब्लॉग आपको 100 शब्दों, 300 शब्दों और 500 शब्दों में महात्मा गांधी पर निबंधों (Mahatma Gandhi essay in Hindi) के उदाहरण देगा।

महात्मा गांधी पर निबंध कैसे लिखें?

Mahatma Gandhi essay in hindi
छवि स्रोत: Nature

महात्मा गांधी पर निबंध लिखने के लिए, आपको उनके बारे में निम्नलिखित विवरणों का उल्लेख करना होगा।

  • प्रस्तावना
  • जन्म स्थान
  • शिक्षा
  • देश के लिए योग
  • आजादी के लिए निभाया कर्तव्य
  • मृत्यु
  • उपसंहार

महात्मा गांधी पर निबंध 100 शब्द

02 अक्टूबर 1869 गुजरात के पोरबंदर गाँव में मोहनदास करमचंद गांधी का जन्म हुआ था। गांधीजी का भारत की स्वतंत्रता में काफी अहम योगदान था। गांधीजी हमेशा अहिंसा के रास्ते पर चलते  थे, वे लोगों से आशा करते थे कि वे भी अहिंसा का रास्ता अपनाएं। 1930 दांडी यात्रा करके नमक सत्याग्रह किया था। लोग गाँधीजी को प्यार से बापू कहते हैं।गांधीजी ने अपनी वकालत की पढ़ाई लंदन से पूरी की थी। बापू हिंसा के खिलाफ थे और अंग्रेजों के लिए काफी बड़ी मुश्किल बने हुए थे। आजादी में बापू के योगदान के कारण उन्हें राष्ट्रपिता का ओहदा दिया गया। बापू हमेशा साधारण सा जीवन जीते थे, वे चरखा चलाकर कर सूत कातते थे और उसी से बनी धोती पहना करते थे।

महात्मा गांधी पर निबंध 200 शब्द

महात्मा गाँधी जी को महात्मा, ‘महान आत्मा’ और कुछ लोगों द्वारा उन्हें बापू के नाम से जाना जाता है। महात्मा गांधी वह नेता थे जिन्होंने 200 से अधिक वर्षों से भारतीय जनता पर ब्रिटिश उपनिवेशवाद की बेड़ियों से भारत को मुक्त कराया था। विश्व स्तर पर प्रसिद्ध व्यक्ति, महात्मा गांधी को उनकी अहिंसक, अत्यधिक बौद्धिक और सुधारवादी विचारधाराओं के लिए जाना जाता है। महान व्यक्तित्वों में माने जाने वाले, भारतीय समाज में गांधी का कद बेजोड़ है क्योंकि उन्हें भारत के स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने के उनके श्रमसाध्य प्रयासों के लिए ‘राष्ट्रपिता’ के रूप में जाना जाता है। 

महात्मा गाँधी जी की शिक्षा 

2 अक्टूबर, 1869 को भारत के पोरबंदर में जन्मे महात्मा गांधी का असली नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। गांधी बचपन से ही न तो कक्षा में मेधावी थे और न ही खेल के मैदान में बेहतर थे। उस समय किसी ने अनुमान नहीं लगाया होगा कि लड़का देश में लाखों लोगों को एक कर देगा और दुनिया भर में लाखों लोगों का नेतृत्व करेगा। महात्मा गांधी की शिक्षा ने उन्हें दुनिया के सबसे महान लोगों में से एक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने पोरबंदर के एक प्राथमिक स्कूल में पढ़ाई की, जहां उन्होंने पुरस्कार और छात्रवृत्तियां जीतीं, लेकिन पढ़ाई के प्रति उनका दृष्टिकोण सामान्य था। 1887 में, गांधी ने बॉम्बे विश्वविद्यालय में मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की और भावनगर के  समालदास कॉलेज में प्रवेश लिया।

लंदन में प्रवास और अपने करियर की खोज

गांधी जी डॉक्टर बनना चाहते थे, लेकिन उनके पिता ने जोर देकर कहा कि वे बैरिस्टर बनें। उस समय, इंग्लैंड ज्ञान का केंद्र था, इसलिए उन्हें अपने पिता के सपने की खोज में स्मालदास कॉलेज छोड़ना पड़ा। अपनी माँ के आग्रह और संसाधनों की कमी के बावजूद, वह इंग्लैंड जाने के लिए अड़े थे। अंत में, सितंबर 1888 में, वह इंग्लैंड के लिए रवाना हुए, जहां उन्होंने लंदन के चार लॉ कॉलेजों में से एक, इनर टेम्पल में प्रवेश लिया। उन्होंने 1890 में लंदन विश्वविद्यालय में मैट्रिक की परीक्षा भी दी । 

लंदन में अपने समय के दौरान, उन्होंने अपनी पढ़ाई को गंभीरता से लिया और एक सार्वजनिक बोलने वाले अभ्यास समूह में भी शामिल हो गए, जिससे उन्हें कानून का अभ्यास करने के लिए अपने शर्मीलेपन को दूर करने में मदद मिली। लंदन में एक आक्रोशपूर्ण संघर्ष में, कुछ डॉक्टर बेहतर वेतन और शर्तों की मांग को लेकर हड़ताल पर चले गए। गांधीजी ने चर्च के धर्माध्यक्षों की स्थिति में मध्यस्थता की जिससे हड़ताल करने वालों को उनकी मांगों को सफलतापूर्वक प्राप्त करने में मदद मिली।

लंदन में एक और महत्वपूर्ण उदाहरण में शाकाहार के लिए उनका मिशनरी कार्य शामिल था। गांधीजी लंदन वेजिटेरियन सोसाइटी में कार्यकारी समिति के सदस्य बने और विभिन्न सम्मेलनों में भी भाग लिया और इसकी पत्रिका में लेखों का योगदान दिया। इंग्लैंड में शाकाहारी रेस्तरां की अपनी यात्राओं के दौरान, गांधी ने एडवर्ड कारपेंटर, जॉर्ज बर्नार्ड शॉ और एनी बेसेंट जैसे उल्लेखनीय समाजवादियों, फैबियन और थियोसोफिस्टों से मुलाकात की।

दक्षिण अफ्रीका में सक्रियता

थोड़े समय के लिए इंग्लैंड से भारत लौटने के बाद, गांधी जी ने अब्दुल्ला के चचेरे भाई के लिए वकील बनने के लिए दक्षिण अफ्रीका की यात्रा की जो दक्षिण अफ्रीका में एक सफल शिपिंग व्यापारी थे । दक्षिण अफ्रीका पहुंचने पर, गांधीजी देश की कठोर वास्तविकता से अवगत हुए, जिसमें नस्लीय भेदभाव शामिल था। महात्मा गांधी ने महसूस किया था कि शिक्षा सबसे शक्तिशाली उपकरण है जो समाज को नया आकार दे सकती है और भारतीय समाज को इसकी बहुत आवश्यकता है। गांधी जी की शिक्षा का विचार मुख्य रूप से चरित्र निर्माण, नैतिक मूल्यों, नैतिकता और मुक्त शिक्षा पर केंद्रित था। वह इस बात की वकालत करने वाले पहले लोगों में से थे कि शिक्षा को सभी के लिए मुफ्त और सभी के लिए सुलभ बनाया जाना चाहिए, चाहे वह किसी भी वर्ग का हो।

महात्मा गांधी पर निबंध 300 शब्द

“अहिंसा परमो धर्मः” के सिद्धांत को नींव बना कर, विभिन्न आंदोलनों के माध्यम से महात्मा गाँधी ने देश को गुलामी की जंजीर से आजाद कराया। वह अच्छे राजनीतिज्ञ के साथ बहुत अच्छे वक्ता भी थे। उनके द्वारा बोले गए वचनों को आज भी लोगों द्वारा दोहराया जाता है।

महात्मा गाँधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में हुआ। इनके पिता का नाम करमचंद गाँधी तथा माता का नाम पुतलीबाई था। महात्मा गाँधी के पिता कठियावाड़ के छोटे से रियासत (पोरबंदर) के दिवान थे। आस्था में लीन माता और उस क्षेत्र के जैन धर्म के परंपराओं के कारण गाँधी जी के जीवन पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा, जैसे की आत्मा की शुद्धि के लिए उपवास करना आदि। 13 वर्ष की आयु में गाँधी जी का विवाह कस्तूरबा से करवा दिया गया था।

 बचपन से ही गांधी जी का पढ़ाई में मन नहीं लगता था । इनकी प्रारंभिक शिक्षा पोरबंदर से संपंन हुई, हाईस्कूल की परिक्षा इन्होंने राजकोट में पूरी की और मैट्रीक के लिए इन्हें अहमदाबाद भेज दिया गया। बाद में वकालत इन्होंने लंदन से पूरी की । महात्मा गाँधी का शिक्षा में योगदान यह मानना था कि भारतीय शिक्षा सरकार के नहीं अपितु समाज के अधिन है, इसलिए महात्मा गाँधी भारतीय शिक्षा को ‘द ब्यूटिफुल ट्री’ कहा करते थे। शिक्षा के क्षेत्र में उनका विशेष योगदान रहा। भारत का हर नागरिक शिक्षित हो यही उनकी इच्छा थी। गाँधी जी का मूल मंत्र ‘शोषण विहिन समाज की स्थापना’ करना था।

7 से 14 वर्ष के बच्चों को निःशुल्क तथा अनिवार्य शिक्षा मिलनी चाहिए। शिक्षा का माध्यम मातृभाषा हो। साक्षरता को शिक्षा नहीं कहा जा सकता। शिक्षा बालक के मानवीय गुणों का विकास करता है। गांधीजी को बचपन में लोग मंदबुद्धि समझते थे, पर आगे चल कर इन्होंने भारतीय शिक्षा में अपना महत्वपूर्ण योगदान दिया।

महात्मा गांधी पर निबंध – 400 शब्द

महात्मा गांधी पर निबंध – 400 शब्दों में इस प्रकार है:

परिचय

देश की आजादी में मूलभूत भूमिका निभाने वाले तथा सभी को सत्य और अहिंसा का मार्ग दिखाने वाले बापू को सर्वप्रथम बापू कहकर, राजवैद्य जीवराम कालिदास ने 1915 में संबोधित किया। आज दशकों बाद भी संसार उन्हें बापू के नाम से पुकारता हैं।

महात्मा गाँधी द्वारा किए गए आंदोलन

असहयोग आंदोलन

जलियांवाला बाग नरसंहार से गाँधी जी को यह ज्ञात हो गया था कि ब्रिटिश सरकार से न्याय की अपेक्षा करना व्यर्थ है। अतः उन्होंने सितंबर 1920 से फरवरी 1922 के मध्य भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के नेतृत्व में असहयोग आंदोलन चलाया। लाखों भारतीय के सहयोग मिलने से यह आंदोलन अत्यधिक सफल रहा। और इससे ब्रिटिश सरकार को भारी झटका लगा।

नमक सत्याग्रह

12 मार्च 1930 से साबरमती आश्रम (अहमदाबाद में स्थित स्थान) से दांडी गांव तक 24 दिनों का पैदल मार्च निकाला गया। यह आंदोलन ब्रिटिश सरकार के नमक पर एकाधिकार के खिलाफ छेड़ा गया। गाँधी जी द्वारा किए गए आंदोलनों में यह सर्वाधिक महत्वपूर्ण आंदोलन था।

दलित आंदोलन

गाँधी जी द्वारा 1932 में अखिल भारतीय छुआछूत विरोधी लीग की स्थापना की गई और उन्होंने छुआछूत विरोधी आंदोलन की शुरूआत 8 मई 1933 में की।

भारत छोड़ो आंदोलन

ब्रिटिश साम्राज्य से भारत को तुरंत आजाद करने के लिए महात्मा गाँधी द्वारा अखिल भारतीय कांग्रेस के बॉम्बे अधिवेशन से द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान 8 अगस्त 1942 को भारत छोड़ो आंदोलन आरम्भ किया गया।

चंपारण सत्याग्रह

ब्रिटिश ज़मींदार गरीब किसानों से अत्यधिक कम मूल्य पर जबरन नील की खेती करा रहे थे। इससे किसानों में भूखे मरने की स्थिति पैदा हो गई थी। यह आंदोलन बिहार के चंपारण जिले से 1917 में प्रारंभ किया गया। और यह उनकी भारत में पहली राजनैतिक जीत थी।

निष्कर्ष

महात्मा गाँधी के शब्दों में “कुछ ऐसा जीवन जियो जैसे की तुम कल मरने वाले हो, कुछ ऐसा सीखो जिससे कि तुम हमेशा के लिए जीने वाले”। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी इन्हीं सिद्धान्तों पर जीवन व्यतीत करते हुए भारत की आजादी के लिए ब्रिटिश साम्राज्य के खिलाफ अनेक आंदोलन लड़े।

महात्मा गांधी पर निबंध 500 शब्द

2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर में गांधी जी का जन्म हुआ था। भारत को स्वतंत्रता दिलवाने में उन्होंने एहम भूमिका निभायी थी। 2 अक्टूबर को हम उन्हीं की याद में गाँधी जयंती मनाते है। वह सत्य के पुजारी थे। गांधीजी का पूरा नाम मोहनदास करमचंद गाँधी था। उनके पिता का नाम करमचंद उत्तमचंद गाँधी था और वह राजकोट के दीवान रह चुके थे। गाँधी जी की माता का नाम पुतलीबाई था और वह धर्मिक विचारों और नियमों का पालन करती थी। कस्तूरबा गांधी उनकी पत्नी का नाम था वह उनसे 6 माह बड़ी थी। कस्तूरबा और गांधी जी के पिता मित्र थे इसलिए उन्होंने अपनी दोस्ती को रिश्तेदारी में बदल दी। कस्तूरबा गाँधी ने हर आंदोलन में गांधी जी का सहयोग दिया था।
उन्होंने अपनी शिक्षा पोरबंदर में की थी फिर माध्यमिक परीक्षा के लिए राजकोट गए थे। फिर वह अपनी वकालत की आगे की पढ़ाई पूरी करने के लिए इंग्लैंड चले गए। गाँधी जी ने 1891 में अपनी वकालत की शिक्षा पूरी की। लेकिन किसी कारण वश उन्हें अपने कानूनी केस के सिलसिले में दक्षिण अफ्रीका जाना पड़ा। वहां जाकर उन्होंने रंग के चलते हो रहे भेद-भाव को महसूस किया और उसके खिलाफ अपनी आवाज़ उठाने की सोची। वहां के गोरे लोग काले लोगों पर ज़ुल्म करते थे और उनके साथ दुर्व्यवहार करते थे।

भारत वापस आने के बाद उन्होंने अंग्रेजी हुकूमत की तानाशाह को जवाब देने के लिए और अपने लिखे समाज को एकजुट करने के बारे में सोचा। इसी दौरान उन्होंने कई आंदोलन किये जिसके लिए वे कई बार जेल भी जा चुके थे। गाँधी जी ने बिहार के चम्पारण जिले में जाकर किसानों पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ अपनी आवाज़ बुलंद की। यह आंदोलन उन्होंने जमींदार और अंग्रेज़ों के खिलाफ किया था। एक बार गाँधीजी को स्वयं एक गोरे ने ट्रेन से उठाकर बाहर फेंक दिया क्योंकि उस श्रेणी में केवल गोरे यात्रा करना अपना अधिकार समझते थे परंतु गांधी जी उस श्रेणी में यात्रा कर रहे थे।
गाँधीजी ने तभी से प्रण लिया कि वह काले लोगों और भारतीयों के लिए संघर्ष करेंगे । उन्होंने वहाँ रहने वाले भारतीयों के जीवन सुधार के लिए कई आन्दोलन किये । दक्षिण अफ्रीका में आन्दोलन के दौरान उन्हें सत्य और अहिंसा का महत्त्व समझ में आया। जब वह भारत वापस आए तब उन्होंने वही स्थिति यहां पर भी देखी, जो वह दक्षिण अफ्रीका में देखकर आए थे। 1920 में उन्होंने सविनय अवज्ञा आन्दोलन चलाया और अंग्रेजों को ललकारा। 1930 में उन्होंने असहयोग आन्दोलन की स्थापना की और 1942 में उन्होंने अंग्रेजों से भारत छोड़ने का आह्वान किया। अपने इन आन्दोलन के दौरान वह कई बार जेल गए।

हमारा भारत 1947 में आजाद हुआ पर दुःख की बात यह है कि नाथुरम गोडसे नामक व्यक्ति ने 30 जनवरी 1948 को गोली मारकर महात्मा गाँधी की हत्या कर दी जब वह संध्या प्रार्थना के लिए जा रहे थे ।

महात्मा गांधी पर निबंध पीडीएफ

महात्मा गांधी उद्धरण हिंदी में

Mahatma Gandhi Essay in Hindi
Source – Republic World

Mahatma Gandhi Essay in Hindi में हम आपके सामने ला रहे हैं महात्मा गाँधी के कुछ अनमोल विचार जो आपको एक ज़िन्दगी जीने का एक नया मतलब दे देंगे।

  1. “एक कायर प्यार का प्रदर्शन करने में असमर्थ होता है, प्रेम बहादुरों का विशेषाधिकार है।”
  2. “मेरा धर्म सत्य और अहिंसा पर आधारित है। सत्य मेरा भगवान है, अहिंसा उसे पाने का साधन।”
  3. “किसी चीज में यकीन करना और उसे ना जीना बेईमानी है।”
  4. “राष्ट्रीय व्यवहार में हिन्दी को काम में लाना देश की उन्नति के लिए आवश्यक है।”
  5. “पृथ्वी सभी मनुष्यों की ज़रुरत पूरी करने के लिए पर्याप्त संसाधन प्रदान करती है, लेकिन लालच पूरी करने के लिए नहीं।”
  6. “प्रेम दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है और फिर भी हम जिसकी कल्पना कर सकते हैं उसमे सबसे नम्र है।”
  7. “एक राष्ट्र की संस्कृति उसमे रहने वाले लोगों के दिलों में और आत्मा में रहती है।”
  8. “जहाँ प्रेम है वहां जीवन है।”
  9. “सत्य बिना जन समर्थन के भी खड़ा रहता है, वह आत्मनिर्भर है।” 
  10. “एक धर्म जो व्यावहारिक मामलों के कोई दिलचस्पी नहीं लेता है और उन्हें हल करने में कोई मदद नहीं करता है वह कोई धर्म नहीं है।”

रोचक तथ्य

Mahatma Gandhi Essay in Hindi
Source – The Atlantic

Mahatma Gandhi Essay in Hindi में हम आपके सामने ला रहे हैं महात्मा गाँधी से जुड़े कुछ रोचक तथ्य। जानते हैं कौन से हैं वह रोचक तथ्य।

  1. महात्मा गांधी की मातृ-भाषा गुजराती थी।
  2. महात्मा गांधी ने राजकोट के अल्फ्रेड हाई स्कूल से पढ़ाई की थी।
  3. महात्मा गांधी के जन्मदिन 2 अक्टूबर को ही अंतरराष्ट्रीय अंहिसा दिवस के रूप मे विश्वभर में मनाया जाता है।
  4. वह अपने माता-पिता के सबसे छोटी संतान थे उनके दो भाई और एक बहन थी।
  5. माधव देसाई, गांधी जी के निजी सचिव थे।
  6. महात्मा गांधी की हत्या बिरला भवन के बगीचे में हुई थी।
  7. महात्मा गांधी और प्रसिध्द लेखक लियो टॉलस्टॉय के बीच लगातार पत्र व्यवहार होता था।
  8. महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह संघर्ष के दोरान, जोहांसबर्ग से 21 मील दूर एक 1100 एकड़ की छोटी सी कालोनी, टॉलस्टॉय फार्म स्थापित की थी।
  9. महात्मा गांधी का जन्म शुक्रवार को हुआ था, भारत को स्वतंत्रता भी शुक्रवार को ही मिली थी तथा महात्मा गांधी की हत्या भी शुक्रवार को ही हुई थी।
  10. महात्मा गांधी के पास नकली दांतों का एक सेट हमेशा मौजूद रहता था।

महात्मा गांधी जी के सिद्धांत, प्रथा और विश्वास

गांधी जी के बयानों, पत्रों और जीवन के सिद्धांतों, प्रथाओं और विश्वासों ने राजनीतिज्ञों और विद्वानों को आकर्षित किया है, जिसमें उन्हें प्रभावित किया है। कुछ लेखक उन्हें नैतिक जीवन और शांतिवाद के प्रतिमान के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जबकि अन्य उन्हें उनकी संस्कृति और परिस्थितियों से प्रभावित एक अधिक जटिल, विरोधाभासी और विकसित चरित्र के रूप में प्रस्तुत करते हैं, जिसकी जानकारी नीचे दी गई है:

सिद्धांत

सत्य और सत्याग्रह

गांधी ने अपना जीवन सत्य की खोज और पीछा करने के लिए समर्पित कर दिया, और अपने आंदोलन को सत्याग्रह कहा, जिसका अर्थ है “सत्य के लिए अपील करना, आग्रह करना या उस पर भरोसा करना”। एक राजनीतिक आंदोलन और सिद्धांत के रूप में सत्याग्रह का पहला सूत्रीकरण 1920 में हुआ, जिसे उन्होंने उस वर्ष सितंबर में भारतीय कांग्रेस के एक सत्र से पहले ” असहयोग पर संकल्प ” के रूप में पेश किया।

अहिंसा

हालांकि अहिंसा के सिद्धांत को जन्म देने वाले गांधी जी नहीं थे, वे इसे बड़े पैमाने पर राजनीतिक क्षेत्र में लागू करने वाले पहले व्यक्ति थे। अहिंसा की अवधारणा का भारतीय धार्मिक विचार में एक लंबा इतिहास रहा है, इसे सर्वोच्च धर्म माना जाता है। 

गांधीवादी अर्थशास्त्र

गांधी जी सर्वोदय आर्थिक मॉडल में विश्वास करते थे, जिसका शाब्दिक अर्थ है “कल्याण, सभी का उत्थान”। समाजवाद मॉडल की तुलना में एक बहुत अलग आर्थिक मॉडल था।

विश्वास 

बौद्ध, जैन और सिख

गांधी जी का मानना ​​था कि बौद्ध, जैन और सिख धर्म हिंदू धर्म की परंपराएं हैं, जिनका साझा इतिहास, संस्कार और विचार हैं।

मुस्लिम 

गांधी के इस्लाम के बारे में आम तौर पर सकारात्मक और सहानुभूतिपूर्ण विचार थे, और उन्होंने बड़े पैमाने पर कुरान का अध्ययन किया। उन्होंने इस्लाम को एक ऐसे विश्वास के रूप में देखा जिसने शांति को सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया, और महसूस किया कि कुरान में अहिंसा का प्रमुख स्थान है।

ईसाई

गांधी ने ईसाई धर्म की आलोचना के साथ-साथ प्रशंसा भी की। वह ब्रिटिश भारत में ईसाई मिशनरी प्रयासों के आलोचक थे, क्योंकि वे चिकित्सा या शिक्षा सहायता को इस मांग के साथ मिलते थे कि लाभार्थी ईसाई धर्म में परिवर्तित हो जाए। सीधे शब्दों में समझें तो गांधीजी हर धर्म का सम्मान और विश्वास करते थे करते थे। 

प्रथा 

महिला

गांधी जी ने महिलाओं की मुक्ति का पुरजोर समर्थन किया, और “महिलाओं को अपने स्वयं के विकास के लिए लड़ने के लिए” आग्रह किया। उन्होंने पर्दा, बाल विवाह, दहेज और सती प्रथा का विरोध किया।

अस्पृश्यता और जातियां

गांधी जी ने अपने जीवन के शुरुआती दिनों में अस्पृश्यता के खिलाफ बात की थी। 

नई शिक्षा प्रणाली, बुनियादी शिक्षा

गांधी जी ने शिक्षा प्रणाली के औपनिवेशिक पश्चिमी प्रारूप को खारिज कर दिया। 

साहित्यिक कार्य

गांधी एक अच्छे वकील के साथ-साथ एक कुशल लेखक भी थे। उनकी लेखन शैली सरल, सटीक, स्पष्ट और कृत्रिमता से रहित थी। गांधी द्वारा लिखा गया हिंद स्वराज, 1909 में गुजराती में प्रकाशित हुआ। इन्होंने गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में हरिजन सहित कई समाचार पत्रों का संपादन किया जैसे- इंडियन ओपिनियन जबकि दक्षिण अफ्रीका में और, यंग इंडिया, अंग्रेजी में, और नवजीवन, एक गुजराती मासिक। भारत लौटने पर गांधी जी ने अपनी आत्मकथा, द स्टोरी ऑफ माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ सहित कई किताबें भी लिखी। गांधी की पूरी रचनाएं भारत सरकार द्वारा 1960 के दशक में द कलेक्टेड वर्क्स ऑफ़ महात्मा गांधी के नाम से प्रकाशित की गयी थी। 

FAQs

महात्मा गाँधी ने दलितों के लिए क्या किया ?

महात्मा गांधी ने अस्पृश्यता निवारण के लिए देशभर में यात्रा की थी। हरिजनो को मंदिर-प्रवेश, उनके लिए पाठशालाएं, कुएं और अन्य कार्य गांधीजी द्वारा दिए गए लोकशिक्षण के ही परिणाम थे। इस लोक शिक्षण का परिणाम इतना जबरदस्त आया कि स्वतंत्रता मिलने के साथ ही हमारे देश से कानून अस्पृश्यता निवारण हो गया। भारत में स्वतंत्रता मिलने के साथ ही अस्पृश्यतानिवारण का कानून बन गया यह गांधीजी के लोकशिक्षण का ही प्रभाव था।

महात्मा गाँधी को राष्ट्रपिता का दर्जा किसने दिया?

महात्मा गांधी जी को भारत में राष्ट्रपिता के रूप में सम्मानित किया जाता है। स्वतंत्र भारत के संविधान द्वारा महात्मा को राष्ट्रपिता की उपाधि प्रदान किए जाने से बहुत पहले, नेताजी सुभाष चंद्र बोस ही थे, जिन्होंने कस्तूरबा के निधन पर महात्मा को अपने शोक संदेश में उन्हें सबसे पहले इस तरह संबोधित किया था।

गांधी जी के साहित्यिक कार्य कौन से हैं?

गांधी द्वारा लिखा गया हिंद स्वराज, 1909 में गुजराती में प्रकाशित हुआ। इन्होंने गुजराती, हिंदी और अंग्रेजी भाषा में हरिजन सहित कई समाचार पत्रों का संपादन किया जैसे- इंडियन ओपिनियन जबकि दक्षिण अफ्रीका में और, यंग इंडिया, अंग्रेजी में, और नवजीवन, एक गुजराती मासिक, भारत लौटने पर। गांधी ने अपनी आत्मकथा, द स्टोरी ऑफ माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ सहित कई किताबें भी लिखी।

गांधीजी की माता नियमित रूप से क्या रखती थीं?

गांधी की मां पुतलीबाई अत्यधिक धार्मिक थीं। उनकी दिनचर्या घर और मंदिर में बंटी हुई थी। वह नियमित रूप से उपवास रखती थीं और परिवार में किसी के बीमार पड़ने पर उसकी सेवा सुश्रुषा में दिन-रात एक कर देती थीं।

गांधी जी के अनुसार स्वराज क्या है?

गाँधी का मत था स्वराज का अर्थ है जनप्रतिनिधियों द्वारा संचालित ऐसी व्यवस्था जो जन-आवश्यकताओं तथा जन-आकांक्षाओं के अनुरूप हो।

सत्याग्रह कहाँ से शुरू हुआ?

इसका सूत्रपात सर्वप्रथम महात्मा गांधी ने 1894 ई. में दक्षिण अफ़्रीका में किया था।

सरल शब्दों में महात्मा गांधी कौन है?

महात्मा गांधी, मोहनदास करमचंद गांधी के नाम से, (जन्म 2 अक्टूबर, 1869, पोरबंदर, भारत- मृत्यु 30 जनवरी, 1948, दिल्ली), भारतीय वकील, राजनीतिज्ञ, सामाजिक कार्यकर्ता, और लेखक जो अंग्रेजों के खिलाफ राष्ट्रवादी आंदोलन के नेता बने।

भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन में महात्मा गांधी का क्या योगदान था?

1919 ई० से 1947 ई० तक राष्ट्रीय आंदोलन में गांधी जी की अग्रणी भूमिका रही। गांधीजी के द्वारा बिहार के चंपारण में सत्याग्रह का प्रथम प्रयोग किया गया। चंपारण एवं खेरा में कृषक आंदोलन एवं अहमदाबाद में मजदूर आंदोलन का नेतृत्व प्रदान कर गांधी जी ने प्रभावशाली राजनेता के रूप में अपनी राष्ट्रीय पहचान बनाई।

हमें उम्मीद है कि इस ब्लॉग ने आपको यह समझने में मदद की कि महात्मा गांधी पर हिंदी में निबंध कैसे लिखें। यदि आप विदेश में पढ़ाई करना चाहते हैं, तो हमारे Leverage Edu विशेषज्ञ के साथ 30 मिनट का फ्री सेशन 1800 57 2000 पर कॉल कर बुक करें।

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    1. आपका आभार, ऐसे आप हमारी वेबसाइट पर बने रहिए।

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