कारगिल विजय दिवस

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कारगिल विजय दिवस

कारगिल विजय दिवस की 21वीं वर्षगांठ पर पूरा देश भारत के वीर सपूतों के अदम्य साहस और कुर्बानी को याद कर रहा है। 1999 में भारतीय सैनिकों ने अदम्य साहस के दम पर पाकिस्तानी सेना को शिकस्त दी थी।कारगिल युद्ध भारत और पाकिस्तान के बीच मई से जुलाई 1999 के बीच लद्दाख में कारगिल की चोटियों पर लड़ा गया था। 21 साल पहले भारतीय सेना ने करीब 18 हजार फुट से ज्यादा ऊंची चोटियों पर बैठे दुश्मनों को मार भगाया था। कारगिल युद्ध में भारत ने 527 वीर योद्धाओं को खोया। चलिए जानता है कारगिल विजय दिवस के बारे में ।

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कारगिल युद्ध से जुड़े महत्वपूर्ण दिन

  • 25 मई 1999 : भारतीय सेना ने स्वीकार किया कि 600-800 घुसपैठियों ने एलओसी पार किया है और कारगिल में और उसके आसपास उन्‍होंने अपना ठिकाना बना लिया है। इसके बाद भारतीय सेना के और जवानों को कश्मीर रवाना किया गया।
  • 26 मई 1999 : भारत ने जवाबी कार्रवाई करते हुए घुसपैठियों के ठिकानों पर हमले किए। इसमें भारतीय वायुसेना के विमानों की भी मदद ली गई।
  • 27 मई 1999 : फ्लाइट लेफ्टिनेंट के। नचिकेता का विमान मिग-27 आग की लपटों में घिर गया। वह पाकिस्‍तान के नियंत्रण वाले इलाके में जा पहुंचे, जहां उन्‍हें युद्धबंदी बना लिया गया। इसी दौरान एक अन्‍य मिग-21 विमान को मार गिराया गया, जिसे स्‍क्‍वाड्रनन लीडर अजय आहूजा उड़ा रहे थे। इसमें वह शहीद हो गए।
  • 31 मई 1999 : तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहार वाजपेयी ने पाकिस्तान के साथ ‘युद्ध जैसी स्थिति’ का ऐलान किया।
  • जून 1999 : तत्कालीन रक्षा मंत्री जॉर्ज फर्नांडीस ने घुसपैठियों को पाकिस्तान वापस भेजने के लिए ‘सुरक्षित मार्ग’ की पेशकश की, जिस पर विवाद भी पैदा हुआ। इस बीच पाकिस्तान ने हमलों को तेज कर दिया। भारत-पाकिस्‍तान के बढ़ते तनाव के बीच फ्रांस और अमेरिका जैसे देशों ने पाकिस्‍तान को नियंत्रण रेखा के उल्‍लंघन के लिए जिम्‍मेदार ठहराया।
  • 3 जून 1999 : पाकिस्तान ने फ्लाइट लेफ्टिनेंट के नचिकेता को ‘सद्भावना’ के तौर पर भारत को सौंप दिया।
  • 10 जून 1999 : पाकिस्तान ने जाट रेजिमेंट के छह सैनिकों के क्षत-विक्षत शव भारत को भेजे।
  • 13 जून 1999 : भारत ने दौरान बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए सामरिक रूप से महत्‍वपूर्ण तोलोलिंग चोटी को फिर से अपने कब्‍जे में ले लिया। 
  • 15 जून 1999 : अमेरिका के तत्‍कालीन राष्ट्रपति बिल क्लिंटन ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ से टेलीफोन पर बातचीत कर अपने सैनिकों को कारगिल से बाहर निकालने के लिए कहा।
  • 23-27 जून 1999 : अमेरिकी जनरल जिन्‍नी ने इस्लामाबाद का दौरा किया, जिसमें नवाज शरीफ से फिर पीछे हटने के लिए कहा गया।
  • 4 जुलाई 1999 : भारतीय सेना ने टाइगर हिल पर कब्जा कर लिया। इस बीच बिल क्लिंटन वाशिंगटन डीसी में नवाज शरीफ से मिले और उन पर सेना को वापस बुलाने के लिए दबाव बनाया।
  • 11 जुलाई 1999 : पाकिस्तानी सैनिक पीछे हटने लगे। भारत ने बटालिक में प्रमुख चोटियों पर कब्जा किया।
  • 12 जुलाई 1999 : नवाज शरीफ ने टेलीविजन के जरिये देश को संबोधित करते हुए सैनिकों को वापस बुलाने की घोषणा की और वाजपेयी के साथ वार्ता का प्रस्ताव रखा।
  • 14 जुलाई 1999 : वाजपेयी ने ‘ऑपरेशन विजय’ को सफल घोषित किया। सरकार ने पाकिस्तान के साथ बातचीत के लिए शर्त रखी।
  • 26 जुलाई 1999 : कारगिल युद्ध आधिकारिक रूप से समाप्त हो गया है। इस खास दिन को भारत में कारगिल विजय दिवस के रूप में मनाया जाता है।

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कुछ बातें कारगिल युद्ध के बारे में

3 मई 1999 को एक चरवाहे ने भारतीय सेना को कारगिल में पाकिस्तान सेना के घुसपैठ कर कब्जा जमा लेने की सूचना दी थी। तब कारगिल सेक्टर की पहाड़ियों में संघर्ष हुआ। भारत ने एलओसी (LoC ) से पाकिस्‍तानी सैनिकों को खदेड़ने के लिए कारगिल सेक्टर में ऑपरेशन विजय (Operation Vijay) अभियान चलाया था। 26 जुलाई को भारत ने कारगिल युद्ध में जीत हासिल की थी। यह युद्ध 18 हजार फीट की ऊंचाई पर लड़ा गया था।कारगिल में हुए हमले के 20 साल बाद भी ऐसा बहुत कुछ है जिसे हम अपनी सेना में लागू नहीं कर पाए हैं

लगभग तीन महीने के ‘ऑपरेशन विजय’ में भारत के 527 जवान शहीद और 1363 जवान घायल हुए। वहीं भारतीय सेना ने पाकिस्तान के 3 हजार सैनिकों को मार गिराया था। कारगिल युद्ध के समय अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे। कारगिल युद्ध की जीत की घोषणा तत्कालीन पीएम अटल बिहारी वाजेपयी ने 14 जुलाई को की थी, लेकिन आधिकारिक तौर पर 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस की घोषणा की गई थी। भारतीय सेना प्रमुख वेद प्रकाश मालिक थे।

भारतीय सेना की विफलताएं (कारगिल रिव्यू कमेटी रिपोर्ट)

कारगिल युद्ध समाप्त होने के तुरंत बाद, तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने कारगिल घुसपैठ के विभिन्न पहलुओं पर गौर करने के लिए के सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में कारगिल रिव्यू कमेटी (KRV) गठित की थी। इस समिति के तीन अन्य सदस्य लेफ्टिनेंट जनरल (retd) के।के। हजारी, बीजी वर्गीज और सतीश चंद्र, सचिव, राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय (NSCS) थे।

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कारगिल रिव्यू (KRV) कमेटी रिपोर्ट

समिति ने अपनी रिपोर्ट में इस बात को बड़ी ही प्रमुखता से बल दिया कि –

1- देश की सुरक्षा प्रबंधन प्रणाली में गंभीर कमियों के कारण कारगिल संकट पैदा हुआ।
2- रिपोर्ट ने खुफिया तंत्र और संसाधनों और समन्वय की कमी को जिम्मेदार ठहराया।
3- इसने पाकिस्तानी सेना के गतिविधियों का पता लगाने में विफल रहने के लिए RAW को दोषी ठहराया।
4- रिपोर्ट ने “एक युवा और फिट सेना” की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला था।

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क्या 20 साल बाद भारतीय सेना को कारगिल युद्ध से सीख मिली है?

KRV समिति रिपोर्ट को लागू करना भारतीय सेना के लिए बेहद फायदेमंद साबित हुआ। KRV रिपोर्ट के पेश किए जाने के कुछ महीनों बाद राष्ट्रीय सुरक्षा पर मंत्रियों का समूह (GoM) का गठन किया गया जिसने खुफिया तंत्र को मजबूत करने की आवश्यकता पर सहमति जतायी थी। सेना के पूर्व अधिकारियों ने कहा कि कारगिल सेक्टर में 1999 तक बहुत कम सेना के जवान थे, लेकिन युद्ध के बाद, बहुत कुछ बदल गया। ब्रिगेडियर (रिटायर्ड) कुशकल ठाकुर, जो 18 ग्रेनेडियर्स के कमांडिंग ऑफिसर थे। साथ ही जो टॉलोलिंग और टाइगर हिल पर कब्जा करने में शामिल थे, ने भी कहा कि, ‘कारगिल में पाकिस्तानी घुसपैठ के पीछे खुफिया विफलता मुख्य कारण थी। लेकिन पिछले 20 वर्षों में, बहुत कुछ बदल गया है। हमारे पास अब बेहतर हथियार, टेक्नोलॉजी, खुफिया तंत्र हैं जिससे भविष्य में कारगिल-2संभव नहीं है।

लेफ्टिनेंट जनरल (रिटायर्ड) अमर औल, जो ब्रिगेड कमांडर के रूप में टॉलोलिंग और टाइगर हिल पर फिर से कब्जा करने के अभियानों में शामिल थे, ने कहा कि, जी हां, हमने अपने सबक सीखे। हमारे पास 1999 में कारगिल में LoC की रक्षा के लिए एक बटालियन थी। आज हमारे पास कारगिल LoC की रक्षा के लिए एक डिवीजन के कमांड के तहत तीन ब्रिगेड हैं।

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KRV रिपोर्ट ने एक युवा और फिट सेना का जिक्र किया था। आज हमारी सेना में पहले की तुलना में कमांडिंग यूनिट जवान (30 वर्ष) अधिकारी हैं। यह एक बहुत महत्वपूर्ण परिवर्तन है। 2002 में डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी और 2004 में राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (NTRO) का निर्माण, कवर रिपोर्ट के कुछ प्रमुख परिणाम थे। लेकिन कुछ महत्वपूर्ण सिफारिशें, जैसे कि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) का पद बनाना अधूरा रह गया है। चिंताजनक यह है कि इस विषय पर कई सरकारें राजनीतिक सहमति बनाने में विफल रहीं।

KVR रिपोर्ट ने काउंटर-इंसर्जेन्सी में सेना की भूमिका को कम करने की भी सिफारिश की थी, लेकिन इसे अभी तक लागू नहीं किया गया है। 1999-2001 में सरकार द्वारा संसाधित फास्ट-ट्रैक अधिग्रहण को कभी भी दोहराया नहीं गया और भारतीय सैनिकों ने अभी तक उन्हीं राइफलों से लड़ाई लड़ी जिसके साथ उन्होंने 1999 में लड़ी थी। इसलिए कारगिल युद्ध की 20 वीं सालगिरह का जश्न मनाने का सबसे अच्छा तरीका होगा की KRV और GoM रिपोर्ट की समीक्षा करके लंबे समय से लंबित राष्ट्रीय सुरक्षा सुधारों को पूरा किया जाए। विशेष रूप से चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ की नियुक्ति, फास्ट-ट्रैक रक्षा सुधार और उनके समय पर कार्यान्वयन किये जाएं। हमे ये नहीं भूलना चाहिए कि बालाकोट के बाद, पाकिस्तान को ठीक करना भारत के सामने अब भी एक बहुत बड़ी चुनौती है।

Source: Aaj Tak

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