यहाँ पढ़िए चंद्रशेखर आजाद के बारे में 20 लाइन और 10 लाइन

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चंद्रशेखर आजाद के बारे में 20 लाइन

चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से हम सभी भली भांति परिचित है। चंद्रशेखर आजाद का नाम भारतीय इतिहास में एक अमर नाम है। वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी थे जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई में अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनकी वीरता, साहस और त्याग की कहानी आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं। चंद्रशेखर आजाद के बारे में अधिक जानने के लिए ये लेख अंत तक पढ़ें। यहाँ आपको चंद्रशेखर आजाद के बारे में 20 लाइन, 10 लाइन और 4 लाइन में बताया गया है। आइये जानते हैं इस वीर के बारे में विस्तार से।

चंद्रशेखर आजाद के बारे में 20 लाइन

चंद्रशेखर आजाद के बारे में 20 लाइन इस प्रकार से है :

  1. चन्द्रशेखर आजाद भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी थे
  2. उन्होंने भारत को आजाद कराने के लिए अपनी जिंदगी कुर्बान कर दी थी।
  3. ऐसे महान वीर का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाभरा गांव में हुआ था।
  4. चन्द्रशेखर आजाद के पिता का नाम पण्डित सीताराम तिवारी और उनकी माँ का नाम जगरानी देवी था।
  5. चंद्रशेखर आज़ाद का असली नाम ‘चंद्रशेखर तिवारी’ था, परन्तु उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी पहचान ‘आजाद’ के नाम से बनाई।
  6. वे एक कुशल निशानेबाज और घुड़सवार भी थे।
  7. चन्द्रशेखर आजाद शहीद राम प्रसाद बिस्मिल व शहीद भगत सिंह के करीबी मित्र में से एक थे।
  8. उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्रायगराज में पूरी की।
  9. आजाद ने वाराणसी के किशोरीलाल विद्या मंदिर से स्नातक की डिग्री हासिल की।
  10. चंद्रशेखर आजाद ने बनारस में संस्कृत, हिंदी, उर्दू और अंग्रेजी भाषाओं का अध्ययन किया।
  11. चन्द्रशेखर आजाद ने भारत को ब्रिटिश साम्राज्य से स्वतंत्रता दिलाने के लिए कई अभियान चलाए।
  12. उन्होंने मात्र 14 वर्ष की आयु में गांधी जी के असहयोग आंदोलन में हिस्सा लिया।
  13. वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के प्रमुख संगठनों में से एक, ‘हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन आसोसिएशन’ (HSRA) के सहसंस्थापक भी थे।
  14. उन्होंने 1925 में काकोरी ट्रेन डकैती में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
  15. वहीं उन्होंने 1928 में अंग्रेज पुलिस अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या कर दी।
  16. उन्होंने 1931 में ‘अल्फ्रेड पार्क’ कांड में अकेले 30 मिनट तक अंग्रेजों से लोहा लिया।
  17. चंद्रशेखर आजाद का संघर्ष सिर्फ शारीरिक ही नहीं बल्कि मानसिक और आदर्शों से भरपूर भी था।
  18. चंद्रशेखर आजाद का निधन 27 फरवरी 1931 को हुआ।
  19. चंद्रशेखर आजाद का स्वर्गवास इलाहबाद के एक पार्क में हुआ था इस कारण से उनके सम्मान में उस पार्क का नाम चंद्रशेखर आजाद पार्क रखा गया।
  20. भारत देश के इस वीर सपूत का नाम इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित रहेगा।

यह भी पढ़ें : Chandra Shekhar Azad Essay in Hindi

चंद्रशेखर आजाद के बारे में 10 लाइन

चंद्रशेखर आजाद के बारे में 10 लाइन इस प्रकार से है :

  1. चंद्रशेखर आज़ाद को भारतीय स्वतंत्रता के इतिहास में एक महान व्यक्ति के रूप में याद किया जाता है।
  2. वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी सेनानी और योद्धा थे।
  3. चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाभरा गांव में हुआ था।
  4. चंद्रशेखर का नाम पहले ‘चंद्रशेखर तिवारी’ था।
  5. बाद में उन्हें चंद्रशेखर आज़ाद के नाम से जाना जाने लगा।
  6. उन्होंने बचपन से ही स्वतंत्रता संग्राम के प्रति उत्साह दिखाया और ब्रिटिश साम्राज्य से भारत को स्वतंत्रता दिलाने के लिए कई अभियान चलाए।
  7. वह कहते थे ‘दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे, हम आजाद हैं और आजाद ही रहेंगे।’
  8. उन्होंने ब्रिटिश पुलिस से बचकर खुदकुशी कर ली, ताकि वे ब्रिटिश साम्राज्य के हाथ से नहीं गिर सकें।
  9. उन्होंने 27 फरवरी 1931 को प्रयागराज (इलाहाबाद) के अल्फ्रेड पार्क में ब्रिटिश पुलिस से मुकाबले में आत्महत्या कर ली।
  10. इस तरह चंद्रशेखर आजाद की शहादत ने उनके साहस, निष्ठा और आत्मा की अद्वितीयता को स्पष्ट किया।
चंद्रशेखर आजाद के बारे में 10 लाइन

चंद्रशेखर आजाद का जन्म कहां हुआ?

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महान सेनानी और वीर योद्धा चंद्रशेखर आजाद, का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाभरा गांव में हुआ था। उनका असली नाम ‘चंद्रशेखर तिवारी’ था, परन्तु उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अपनी पहचान ‘आजाद’ के नाम से बनाई। उनके पिता का नाम सीताराम तिवारी और माता का नाम जगरानी देवी था। आजाद का प्रारंभिक जीवन आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र में स्थित भाबरा गाँव में ही बीता। अपने बचपन में ही आजाद ने भील बालकों के साथ मिलकर निशानेबाजी और धनुर्विद्या सिखी ली थी। चंद्रशेखर आजाद ने प्रण लिया था कि वह कभी पकड़े नहीं जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी। इसीलिए अपने प्रण को पूरा करने के लिए उन्होंने अपनी पिस्तौल की आखिरी गोली खुद को मार ली और मातृभूमि के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी।

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