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उत्तर- उद्धव एक ज्ञानी पुरुष थे और नीति-शास्त्र के गहरे जानकार भी। वे अपने ज्ञान और तर्कों के माध्यम से गोपियों को कृष्ण-प्रेम से हटाकर उन्हें निर्गुण ब्रह्म की भक्ति की ओर प्रेरित करना चाहते थे। किंतु गोपियों के वाक्-चातुर्य के सम्मुख उनकी सारी तर्कशक्ति निष्प्रभ हो गई। इसका कारण यह था कि गोपियों के पास निश्छल, निष्कपट और एकनिष्ठ कृष्ण-प्रेम की वह शक्ति थी, जो उनके वचनों में स्वतः मुखरित हो उठी थी। यह प्रेम ही था, जो उनके वचनों को तर्क से अधिक प्रभावशाली बना रहा था और उद्धव जैसे विद्वान को भी निरुत्तर कर गया।
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