जब श्री कृष्ण मथुरा चले गए, तब गोपियां यह आशा करती थीं कि कृष्ण जल्द ही वापस लौटेंगे और उनके साथ मिलकर उनका प्रेम बाँटेंगे या फिर वे कोई प्रेम संदेश भेजेंगे। इसी विश्वास के सहारे वे अपनी विरह की पीड़ा को सह रही थीं। लेकिन जब उनके पास प्रेम संदेश के बजाय उद्धव द्वारा दिया गया योग का संदेश पहुंचा, तो उनकी विरह की अग्नि और भी तीव्र हो गई। उद्धव का योग संदेश, जो संसार की वैराग्य और आत्मा के मिलन का उपाय था, गोपियों के दिलों में व्याप्त प्रेम की अग्नि में घी का काम करने के समान था। इस संदेश ने उनकी विरह की पीड़ा को और बढ़ा दिया, क्योंकि वे प्रेम के मार्ग पर चलते हुए, कृष्ण के साथ अपने अटूट संबंध की चाहत में और भी अधिक बुरी तरह जल उठीं।
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