उत्तर- गोपियों को यह अनुभूति हुई कि मथुरा जाने के बाद कृष्ण में अनेक परिवर्तन आ गए हैं। अब वे पहले जैसे सरल, प्रेममय और आत्मीय नहीं रहे। उन्होंने न तो कोई प्रेम-संदेश भेजा है और न ही कभी मिलने आए हैं। गोपियों को लगा कि अब कृष्ण मथुरा में राजा बन गए हैं और राजनीतिक व्यवहार करने लगे हैं, जिससे उनमें छल-कपट आ गया है।
वे मानने लगीं कि कृष्ण ने योग-संदेश भेजकर उन्हें केवल बहलाने का प्रयास किया है। इन सब परिवर्तनों से व्यथित होकर गोपियाँ कहती हैं कि अब उन्हें कृष्ण के प्रेम में डूबा अपना मन वापस ले लेना चाहिए, क्योंकि जिस प्रेम में एकनिष्ठता और आत्मीयता न हो, वह प्रेम सार्थक नहीं होता।
अन्य प्रश्न
- गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?
- उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?
- गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलहाने दिए हैं?
- उद्धव द्वारा दिए गए योग के संदेश ने गोपियों की विरहाग्नि में घी का काम कैसे किया है?
- मरजादा न लही’ के माध्यम से कौनसी मर्यादा न रहने की बात की जा रही है?
- कृष्ण के प्रति अपने अनन्य प्रेम को गोपियों ने किस प्रकार अभिव्यक्त किया है?
- गोपियों ने उद्धव से योग की शिक्षा कैसे लोगों को देने की बात कही है?
- प्रस्तुत पदों के आधार पर गोपियों का योग-साधना के प्रति दृष्टिकोण स्पष्ट करें।
- गोपियों के अनुसार राजा का धर्म क्या होना चाहिए?

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2 comments
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