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उत्तर: जब श्रीराम ने देखा कि लक्ष्मण के तीखे वचनों से परशुराम का क्रोध बढ़ता जा रहा है, तब रघुकुल के सूर्य श्रीराम ने उसे शांत करने के लिए जल के समान शीतल और मधुर वचन बोले। यहाँ श्रीराम को “रघुकुलभानु” अर्थात् रघुकुल के सूर्य कहा गया है।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
- पद्यांश में वर्णित वार्तालाप क्या है और यह किनके बीच चल रहा है?
- “इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥” पंक्ति का भावार्थ लिखिए।
- लक्ष्मण के अनुसार ब्राह्मण से युद्ध करना क्यों उचित नहीं है?
- ‘ब्यर्थ धरहु धनु बान कुठारा’ में निहित भाव को स्पष्ट कीजिए।
- लक्ष्मण की किन बातों से परशुराम ने अपमान महसूस किया था?
- सूर समर – कथहिं प्रतापु।। इन पंक्तियों में लक्ष्मण के मन का कौनसा भाव प्रकट हुआ है?
- लक्ष्मण ने परशुराम पर क्या आरोप लगाया?
- ‘अयमय खाँड़ न ऊखमय’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
- लक्ष्मण ने क्या कहकर परशुराम की क्रूरता पर व्यंग्य किया है?
- लक्ष्मण के व्यंग्य को सुनकर परशुराम के स्वभाव की कौन-सी विशेषता दृष्टिगोचर हुई?

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