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उत्तर – गोपियों ने उद्धव से कहा कि हमारे लिए कृष्ण अब हारिल पक्षी की लकड़ी के समान हो गए हैं। जैसे वह पक्षी अपने बच्चों को छोड़ सकती है पर अपनी प्रिय लकड़ी को नहीं छोड़ती, वैसे ही हम भी अपने मन, वचन और कर्म से कृष्ण के रूप, स्मृति और प्रेम को कसकर थामे हुए हैं। चाहे वे हमें छोड़कर मथुरा चले गए हों, पर हम उन्हें अपने मन से कभी नहीं छोड़ सकते।
अन्य प्रश्न
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