Answer
Verified
उत्तर: लक्ष्मण के अनुसार ब्राह्मण से युद्ध करना न तो नीति के अनुसार उचित है और न ही कुल-परंपरा के अनुकूल। वे कहते हैं कि ब्राह्मण का वध करना महापाप माना गया है और उनसे युद्ध करने पर अपयश मिलता है। ब्राह्मण पूज्य होते हैं, अतः उनके साथ युद्ध करना घाटे का सौदा है। साथ ही, क्षत्रिय कुल की मर्यादा यह है कि वह ब्राह्मणों से संघर्ष नहीं करते, बल्कि उनकी सेवा और सम्मान करते हैं।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
- फरसे को दिखाते हुए परशुराम ने लक्ष्मण से आवेगपूर्ण वाणी में क्या कहा था?
- ‘अहो मुनीसु महाभट मानी’ में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
- पाठ ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर परशुराम की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।
- लक्ष्मण द्वारा परशुराम पर किए गए व्यंग्यों का उल्लेख कीजिए।
- ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ में राम के किस स्वभाव की प्रशंसा व्यक्त हुई है?
- तुलसीदास का व्यक्तित्व एवं कृतित्व संक्षेप में लिखिए।
- परशुराम के क्रोधित होने का क्या कारण था?
- लक्ष्मण के वचनों का परशुराम पर क्या प्रभाव पड़ा?
- ‘सेवकु सो जो करै सेवकाई’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
- परशुराम ने लक्ष्मण को क्या चेतावनी दी?
- परशुराम ने अपने पराक्रम की प्रशंसा किस प्रकार की?
- ‘परसु मोर अति घोर’ का आशय स्पष्ट कीजिए।
- पद्यांश में वर्णित वार्तालाप क्या है और यह किनके बीच चल रहा है?
- “इहाँ कुम्हड़बतिया कोउ नाहीं। जे तरजनी देखि मरि जाहीं॥” पंक्ति का भावार्थ लिखिए।

One app for all your study abroad needs

2,00,000+ students realized their study abroad dream with us. Take the first step today.