उत्तर: उपरोक्त चौपाई में लक्ष्मण परशुराम के प्रति व्यंग्य करते हुए कहते हैं कि वे स्वयं को बहुत बड़ा योद्धा (महाभट) मान बैठे हैं। लक्ष्मण हँसते हुए मृदु वाणी में कटाक्ष करते हैं कि आप बार-बार मुझे फरसा (कुठार) दिखाकर डराने का प्रयास कर रहे हैं। यह प्रयास ऐसा प्रतीत होता है मानो कोई व्यक्ति फूँक मारकर पहाड़ को उड़ाने की कोशिश कर रहा हो। अर्थात् यह केवल दिखावा और वाचालता भर है, जिससे कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
इस चौपाई में लक्ष्मण की व्यंग्यात्मक शैली, साहस और परशुराम की आक्रामकता पर उनकी तीखी प्रतिक्रिया को दर्शाया गया है। साथ ही, यह भी स्पष्ट होता है कि लक्ष्मण अहंकारी नहीं, बल्कि निडर और तर्कशील हैं।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
- परशुराम के क्रोध करने पर लक्ष्मण ने धनुष के टूट जाने के लिए कौन-कौनसे तर्क दिए?
- परशुराम के क्रोध करने पर राम और लक्ष्मण की जो प्रतिक्रियाएँ हुईं उनके आधार पर दोनों के स्वभाव की विशेषताएँ अपने शब्दों में लिखिए।
- लक्ष्मण और परशुराम के संवाद का जो अंश आपको सबसे अच्छा लगा उसे अपने शब्दों में संवाद शैली में लिखिए।
- परशुराम ने अपने विषय में सभा में क्या-क्या कहा निम्न पद्यांश के आधार पर लिखिए।
- लक्ष्मण ने वीर योद्धा की क्या-क्या विशेषताएँ बताई?
- साहस और शक्ति के साथ विनम्रता हो तो बेहतर है। इस कथन पर अपने विचार लिखिए।

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