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उत्तर – गोपियों ने कृष्ण को ‘हारिल’ पक्षी की लकड़ी के समान कहा है। जिस प्रकार हारिल पक्षी अपने बच्चों को छोड़कर उड़ जाती है, लेकिन अपनी प्रिय लकड़ी को कभी नहीं छोड़ती, उसी प्रकार कृष्ण भी गोपियों को छोड़कर मथुरा चले गए, परंतु अपने योग-सिद्धांत और ज्ञान की बातों को नहीं छोड़ा। गोपियों को लगता है कि कृष्ण के लिए प्रेम से अधिक महत्व ज्ञान और तर्क का है। इसीलिए उन्होंने कृष्ण को हारिल की लकड़ी के समान बताया है।
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