उत्तर: श्रीराम का स्वभाव शांत, विनम्र और विनयी था। जब परशुराम ने उनसे पूछा कि धनुष किसने तोड़ा है, तो श्रीराम ने अपने विनम्र स्वभाव का परिचय देते हुए स्वयं को दास कहा और परशुराम को नाथ कहकर सम्बोधित किया। परशुराम की कड़ी ललकारों के बावजूद श्रीराम शांतिपूर्ण बने रहे और केवल अनुनय-विनय से उनकी क्रोधाग्नि को शांत करने का प्रयास करते रहे। उनके मधुर और नम्र वचन उनके संयम और शील का परिचय देते हैं। इससे स्पष्ट होता है कि श्रीराम न केवल शांतचित्त और मधुरभाषी थे, बल्कि वे गुरुजनों, मुनियों, ब्राह्मणों तथा समस्त सभाजनों का सम्मान करने वाले आदर्श पुरुष थे।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
- ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ पाठ में क्या संदेश दिया गया है?
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- सभा में हाहाकार क्यों मच गया था?
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- परशुराम ने राम की विनयपूर्ण बातों का क्या जवाब दिया और क्यों?
- फरसे को दिखाते हुए परशुराम ने लक्ष्मण से आवेगपूर्ण वाणी में क्या कहा था?
- ‘अहो मुनीसु महाभट मानी’ में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
- पाठ ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर परशुराम की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।
- लक्ष्मण द्वारा परशुराम पर किए गए व्यंग्यों का उल्लेख कीजिए।

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