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उत्तर: परशुराम की तीव्र प्रतिक्रिया सुनकर विश्वामित्र ने उन्हें विनम्रतापूर्वक समझाते हुए प्रार्थना की कि साधुजन बालकों के दोषों को तूल नहीं देते। वे उन्हें क्षमा कर देते हैं, क्योंकि बालक कभी-कभी नासमझीवश ऐसी बातें कह देते हैं। अतः उन्होंने परशुराम से आग्रह किया कि लक्ष्मण को बालक समझकर उसके अपराध को क्षमा कर दें और उसके दोष पर ध्यान न दें।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
- अपने किसी परिचित या मित्र के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।
- दूसरों की क्षमताओं को कम नहीं समझना चाहिए इस विषय पर कहानी लिखिए।
- उन घटनाओं को याद करके लिखिए जब आपने अन्याय का प्रतिकार किया हो।
- लक्ष्मण के वचनों से बढ़े हुए परशुराम जी के क्रोध को किसने और कैसे शान्त किया?
- ‘दोहा’ नामक छंद के लक्षण लिखिए।
- लक्ष्मण को परशुराम को मारने पर पाप और अपयश की सम्भावना क्यों थी?
- क्रोध पर विनय और व्यंग्य का अलग-अलग प्रभाव कैसे पड़ता है? ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
- ‘कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।’ इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
- शूरवीर और कायर में क्या अंतर बताया गया है?
- ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ पाठ में क्या संदेश दिया गया है?
- परशुराम ने लक्ष्मण के बारे में विश्वामित्र से क्या-क्या कहा?

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