ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि, बूँद न ताकौं लागी’ पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।

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ज्यौं जल माहँ तेल की गागरि बूँद न ताकौं लागी पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए
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उत्तर- जैसे तेल से चिकनी हुई गागरि (मटकी) को पानी में डालने पर भी पानी की बूँद उस पर टिक नहीं पाती, वैसे ही उद्धव कृष्ण के प्रेम से पूरी तरह दूर थे। उनका मन कृष्ण के प्रेम से अस्पर्शित था और वे गोपियों की तरह कृष्ण की भावना को महसूस नहीं कर सके। इस पंक्ति से यह बताया गया है कि उद्धव का कृष्ण प्रेम से नाता बिलकुल कमजोर या नहीं के बराबर था।

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