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‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ कविता के आधार पर छायावादी युग के प्रतिष्ठित कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी के काव्य शिल्प की विशेषताएं इस प्रकार हैं:-
- इन कविताओं में प्रकृति के मनोहर चित्रण के अतिरिक्त मानव हृदय की भावना व्यक्त की गई है। उनकी कविताओं में जहां एक ओर शृंगार रस है, वहीं दूसरी ओर ओज का स्वर भी है।
- निराला जी ने छंद-मुक्त होकर अपने काव्य की रचना की है। उन्होंने अपनी रचनाओं में मानवीकरण, अनुप्रास और उपमा अलंकार के साथ-साथ तत्सम शब्दों का प्रयोग किया है।
- उनकी कविताओं में गीति शैली के गुण दिखाई देते हैं। उन्होंने अनुपम शब्दों का प्रयोग कर कविताओं को सुंदर रूप प्रदान किया है।

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