उत्तर: रोपण कृषि व्यापारिक खेती का एक खास तरीका है जिसमें फसलें एक बार बोई जाती हैं और कई सालों तक लगातार पैदावार देती रहती हैं। यह कोई छोटी-मोटी खेती नहीं, बल्कि बड़े पैमाने पर की जाने वाली उत्पादन का तरीका है। जिसमें कुछ खास फसलें जैसे: चाय, कॉफी, काजू, रबड़, केला और कपास प्रमुख तौर से उगाए जाते हैं।
रोपण कृषि की विशेषताएं
रोपण कृषि एक खास तरह की खेती है जो बड़े पैमाने पर व्यापारिक उद्देश्यों के लिए की जाती है। इसमें मुख्य रूप से ये विशेषताएँ होती हैं:
- इसमें एक बार में सिर्फ एक ही फसल (जैसे चाय या कॉफी) उगाई जाती है।
- इस खेती में ज़मीन, मशीनें और कारखाने बनाने इत्यादि में काफी पैसा लगाना पड़ता है।
- इसमें बहुत ज़्यादा मज़दूरों की ज़रूरत खासकर कटाई और प्रोसेसिंग के लिए पड़ती है।
- फसल कटने के बाद, उसे तुरंत खेत पर या पास के कारखाने में ही प्रोसेस किया जाता है, ताकि उसकी क्वालिटी बनी रहे।
- उत्पादों को मंडियों तक पहुँचाने के लिए अच्छी सड़कें या परिवहन व्यवस्था होना बहुत ज़रूरी है।
- यह खेती मुख्य रूप से दुनिया के गर्म और नमी वाले इलाकों (उष्णकटिबंधीय प्रदेशों) में होती है, जैसे भारत, ब्राजील आदि।
रोपण कृषि का महत्व
रोपण कृषि का अर्थव्यवस्थाओं पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है, खासकर उन देशों में जहाँ यह बड़े पैमाने पर की जाती है। यह विदेशी मुद्रा अर्जित करने का एक बड़ा स्रोत हो सकती है और बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार प्रदान करती है। हालांकि, इसमें पर्यावरणीय और सामाजिक चुनौतियाँ भी हो सकती हैं, जैसे कि बड़े पैमाने पर वनों की कटाई और मजदूरों के अधिकारों से जुड़े मुद्दे।
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