‘प्रीति-नदी में पाउँ न बोर्यो’ के माध्यम से गोपियाँ उद्धव से क्या कहना चाहती हैं?

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प्रीति-नदी में पाउँ न बोर्यो के माध्यम से गोपियाँ उद्धव से क्या कहना चाहती हैं
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उत्तर: ‘प्रीति-नदी में पाउँ न बोर्यो’ के माध्यम से गोपियाँ उद्धव को यह कहना चाहती हैं कि वे कृष्ण के समीप रहकर भी कभी प्रेम-भाव में नहीं डूबे। जैसे कोई व्यक्ति नदी के किनारे रहकर भी उसमें पैर न डाले, उसी प्रकार उद्धव ने कृष्ण के सान्निध्य में रहकर भी उनके प्रेम की गहराई को नहीं समझा। गोपियाँ उन्हें यह बताना चाहती हैं कि केवल ज्ञान और तर्क से नहीं, प्रेम में डूबकर ही सच्चा अनुभव किया जा सकता है। उद्धव ने प्रेम की इस अनुभूति-नदी में कभी भी डुबकी नहीं लगाई, इसलिए वे गोपियों के प्रेम को नहीं समझ पा रहे हैं।

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