(माध्यमिक शिक्षा बोर्ड, मॉडल पेपर, 2021–22)
उत्तर: सूरदास जी ने उद्धव की तुलना कमल के पत्ते से की है। जिस प्रकार कमल का पत्ता जल में रहने के बावजूद जल को अपने ऊपर टिकने नहीं देता, उसी प्रकार उद्धव कृष्ण के सान्निध्य में रहकर भी उनके प्रेम से प्रभावित नहीं होते। वे केवल ज्ञान और योग की बातें करते हैं, लेकिन प्रेम की भावना से रिक्त हैं। सूरदास के अनुसार उद्धव में प्रेम को आत्मसात करने की क्षमता नहीं है, इसलिए वे गोपियों के गहरे प्रेम और भक्ति को नहीं समझ पाते। यह तुलना यह दर्शाती है कि केवल समीपता से नहीं, बल्कि भावनात्मक जुड़ाव से ही प्रेम सच्चा होता है।
अन्य प्रश्न
- गोपियाँ किस आशा पर विरह के कष्ट को सहन कर रही थीं?
- गोपियों द्वारा उद्धव को भाग्यवान कहने में क्या व्यंग्य निहित है?
- उद्धव के व्यवहार की तुलना किस-किस से की गई है?
- गोपियों ने किन-किन उदाहरणों के माध्यम से उद्धव को उलहाने दिए हैं?
- ‘नाहीं परत कही’ में गोपियाँ अपनी व्यथा क्यों नहीं कह पा रही हैं?
- गोपियों को उद्धव द्वारा दिया गया योग संदेश कैसा लगता है और क्यों?
- ‘यह तौ ‘सूर’ तिनहिं लै सौंपौ, जिनके मन चकरी’ इस पंक्ति का आशय स्पष्ट कीजिए।
- ‘हरि हैं राजनीति पढ़ि आए’ इस पद में गोपियाँ कृष्ण के किस रूप का वर्णन कर रही हैं?
- गोपियों के अनुसार अनीति क्या है?
- उपर्युक्त पद में गोपियों की कौन-सी विशेषता प्रकट हो रही है?
- पहले के भले लोगों का कैसा स्वभाव होता था?

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