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उत्तर: राम की विनयपूर्ण बातों का जवाब परशुराम ने क्रोधपूर्वक दिया। उन्होंने कहा—”तुम सेवक हो? सेवक तो वही होता है, जो सेवा करता है, जो शत्रु जैसा कार्य करता है, वह तो लड़ाई ही मोल लेता है।” यह कथन परशुराम ने इसलिए कहा क्योंकि उन्हें यह संदेह हो गया था कि शिव-धनुष को तोड़ने वाले श्रीराम ही हैं। इसलिए वे अपनी तीव्र भावनाओं पर नियंत्रण नहीं रख सके और क्रोधवश ऐसा उत्तर दिया।
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