अर्धचालक (Semiconductor) ऐसे पदार्थ होते हैं जिनकी विद्युत चालकता चालक और कुचालक के बीच होती है। सामान्य ताप पर ये कम मात्रा में विद्युत का चालन करते हैं, लेकिन ताप बढ़ाने या इनमें नियंत्रित मात्रा में अशुद्धि मिलाने पर इनकी चालकता बढ़ जाती है। इसी विशेष व्यवहार के कारण इन्हें अर्धचालक कहा जाता है।
सिलिकॉन और जर्मेनियम अर्धचालकों के प्रमुख उदाहरण हैं। इन पदार्थों की परमाणु संरचना ऐसी होती है कि ऊर्जा या ताप मिलने पर कुछ इलेक्ट्रॉन अपने बंधन से मुक्त हो जाते हैं और विद्युत धारा के प्रवाह में भाग लेने लगते हैं। जब अर्धचालक में थोड़ी मात्रा में उपयुक्त अशुद्धि मिलाई जाती है, तो मुक्त आवेश वाहकों की संख्या बढ़ जाती है, जिससे विद्युत प्रवाह और अधिक आसान हो जाता है। इस प्रक्रिया को डोपिंग कहते हैं।
डोपिंग के आधार पर अर्धचालक दो प्रकार के होते हैं – N- प्रकार और P- प्रकार। N-प्रकार अर्धचालक में इलेक्ट्रॉनों की संख्या अधिक होती है, जबकि P-प्रकार अर्धचालक में छिद्र (holes) विद्युत धारा के प्रवाह में मुख्य भूमिका निभाते हैं। इन्हीं दोनों के संयोजन से डायोड, ट्रांजिस्टर और अन्य इलेक्ट्रॉनिक यंत्र बनाए जाते हैं।
आज कंप्यूटर, मोबाइल फोन, एलईडी, सोलर सेल और लगभग सभी आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का मूल आधार अर्धचालक ही हैं।

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