Tokyo Olympics की ब्रॉन्ज मेडलिस्ट पीवी सिंधु की प्रेणादायक कहानी

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पीवी सिंधु

प्रसिद्ध भारतीय बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने बहुत ही कम समय में सफलता का आसमान छू लिया है। भारत की इस होनहार बेटी ने अपने खेल से अपने विरोधियों को भी अपना दीवाना बना दिया है। जज्बे और जूनून की मिसाल हैं पीवी सिंधु। अपने लक्ष्य को कैसे पाना है यह कोई उनसे सीखे। पीवी सिंधु ने यह साबित किया है कि लक्ष्य चाहे पहाड़ जितना बड़ा क्यों न हो आपको उस पर चढ़ाई करते रहना जब तक उस पहाड़ की चोटी तक आप न पहुंच जाएं। जानिए सिंधु ने कैसे किया हर मैदान फतह

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प्रारंभिक जीवन

पी.वी. सिंधु
Source: Wikipedia

पीवी सिंधु का पूरा नाम पुसर्ला वेंकट सिंधु है इनका जन्म 5 जुलाई, 1995 को हैदराबाद हुआ था। उनके पिता का नाम पी. वी. रमण हैं और उनकी माता का नाम पी. विजया हैं। उनके माता और पिता दोनों ही देश के लिए नेशनल लेवल पर वॉलीबॉल खेल चुके हैं। उनकी एक बहन भी हैं, जिसका नाम पी. वी. दिव्या हैं। 1986 में हुए एशियाई खेलों में सिंधु के पिता की टीम ने ब्रोंज़ मैडल जीता था। उनको खेल में जाने का माहौल उनको अपने घर से ही मिला था।

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शिक्षा

पी.वी. सिंधु
Source: Asianet News Hindi

पीवी सिंधु ने हैदराबाद के औक्सिलियम हाई स्कूल से अपनी प्रारंभिक शिखा ली और और सेंट. एन महिला कॉलेज से एमबीए की डिग्री प्राप्त की। सिंधु ने बीकॉम और चेन्नई वेल्स यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि भी हासिल की है।

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पीवी सिंधु का शुरुआती व घरेलु प्रदर्शन

पी.वी. सिंधु
Source: Pinterest

पूर्व बैडमिंटन खिलाड़ी पुलेला गोपीचंद को देख पीवी सिंधु ने मात्र 8 वर्ष की उम्र से ही बैडमिंटन खेलना शुरू कर दिया था. सिंधु ने बैडमिंटन सीखने की शुरुआत सिकंदराबाद में इंडियन रेल्वे इंस्टिट्यूट ऑफ़ सिग्नल इंजीनियरिंग एंड टेलीकम्यूनिकेशन में मेहबूब अली की देखरेख में की. इसके बाद उन्होंने पुलेला गोपीचंद की बैडमिंटन अकादमी में एडमिशन लिया. उन्होंने अंडर-10 आयु वर्ग में कई खिताब जीते. उन्होंने नेशनल स्कूल गेम्स ऑफ इंडिया में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही अंडर-13 व अंडर-12 एकल व युगल वर्ग में कई राष्ट्रीय खिताब अपने नाम किए. सिंधु ने अंडर-10 कैटेगिरी की पांचवीं सर्वो ऑल इंडिया रैंकिंग चैंपियनशिप जीती थी। इसके अलावा पीवी सिंधु ने ऑल इंडिया रैंकिंग में अंबुजा सीमेंट की ओर से एकल खिताब भी जीता।

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पीवी सिंधु का करियर

पी.वी. सिंधु
Source: Pinterest

पीवी सिंधु ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपना पहला पदक 2009 में कोलम्बो के सबजूनियर एशियन चैम्पियनशिप में कांस्य पदक जीत कर अंतरराष्ट्रीय बैडमिंटन सर्किट में कदम रखा। 2010 में मैक्सिको में जूनियर विश्व चैम्पियनशिप के क्वार्टरफाइनल तक का सफर भी उन्होंने तय किया। 2010 यूबर कप में वह भारतीय महिला टीम की सदस्य भी थीं। 2012 में सिंधु ने जापान की नोजोमी ओकुहारा को हराकर अंडर-19 यूथ एशियन बैडमिंटन चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम किया। 2012 के चाइना मास्टर्स सुपर सीरीज में सिंधु ने ली जुएरुई को पराजित कर सेमीफाइनल में जगह बनाई, हालांकि सिंधु उसमें हार गईं थी।

2013 की शुरुआत में ही सिंधु ने मलेशियन ओपन का खिताब हासिल कर वापसी की। यह उनका पहला ग्रांप्री गोल्ड खिताब था। इसी वर्ष सिंधु ने चीन की मौजूदा चैंपियन वांग यिहान को हराकर विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप के महिला सिंगल्स क्वार्टरफाइनल में प्रवेश किया। सिंधु ने फिर क्वार्टरफाइनल में चीन की वांग शिजियान को हराकर सेमीफाइनल में जगह बनाने के साथ ही ब्रोंज पदक भी पक्का कर लिया। सिंधु इसके साथ ही विश्व चैम्पियनशिप में पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बन गईं। इसी साल सिंधु ने मकाउ ओपन ग्रांप्री गोल्ड खिताब जीता। 2014 में ग्लास्गो कामनवेल्थ खेलों में शानदार प्रदर्शन करते हुए सिंधु सेमीफाइनल में पहुंच कर हार गईं थी, उन्होंने इसके तुरंत बाद हुई विश्व बैडमिंटन चैम्पियनशिप में लगातार दूसरा रजत पदक जीत कर इतिहास रच दिया। वह विश्व चैम्पियनशिप में लगातार दो पदक जीतने वाली पहली भारतीय शटलर बनीं।

2015 में सिंधु अपने पहले सुपर सीरीज टूर्नामेंट के फाइनल में पहुंची। उन्होंने सेमीफाइनल में स्पेन की कैरोलिना मारिन को हराकर डेनमार्क ओपन के फाइनल में जगह बनाई। हालांकि उन्हें फाइनल में ली जुएरुई के हाथों हार गईं। इसी साल सिंधु ने मकाउ ओपन में अपना खिताब भी बरकरार रखा। 2016 की जनवरी में मलेशिया मास्टर्स ग्रैंड प्रिक्स गोल्ड वोमेन्स सिंगल जीता। अगस्त 2017 में बीडब्लूऍफ़ विश्व चैंपियनशिप का आयोजन स्कॉटलैंड में हुआ था वहां उन्होंने सिल्वर मैडल जीता था। सिंधु ने 2018 कॉमनवेल्थ खेलों में मिक्स्ड टीम इवेंट में गोल्ड मैडल जीता था, इसके साथ ही महिला सिंगल्स में उन्हें सिल्वर मैडल मिला था।

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पीवी सिंधु का ओलिंपिक में बेहतरीन प्रदर्शन

पी.वी. सिंधु
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पीवी सिंधु ने 2016 में हुए रियो ओलिंपिक में सिल्वर मैडल अपने नाम किया था। सिंधु ने जापान की नोजोमी ओकुहारा को हरा दिया था और इसके साथ ही वह देश की सबसे कम उम्र की मैडल जीतने वाली खिलाड़ी बनी. हालांकि, स्पेनिश खिलाड़ी कैरोलिना मारिन से सिंधु फाइनल में हार गईं थी।

टोक्यो ओलंपिक में जीता ब्रॉन्ज

पीवी सिंधु
Source – Inside Sports

भारत की महानतम बैडमिंटन खिलाड़ी पीवी सिंधु ने टोक्यो ओलंपिक में ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किया है। इसी के साथ सिंधु लगातार दो ओलंपिक में पदक जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी भी बन गईं हैं। सिंधु ने इससे पहले रियो ओलंपिक में सिल्वर मेडल जीता था। टोक्यो ओलंपिक में सिंधु ने चीन की, दुनिया की नौवें नंबर की बाएं हाथ की खिलाड़ी, बिंग जियाओ को 21-13, 21-15 से शिकस्त दी। इससे पहले सिंधु अपना सेमिफिनल मुकाबला जीतने में नाकाम रहीं थीं। इस ओलंपिक में भी भारतीय महिला खिलाड़ियों ने अपना दबदबा कायम करके रखा हुआ है।

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राष्ट्रीय सम्मान   

  • अर्जुन अवार्ड (2013)
  • पद्म श्री (2015)
  • FICCI की तरफ से स्पोर्ट पर्सन ऑफ़ दी इयर का सम्मान (2014)
  • NDTV की तरफ से इंडियन ऑफ़ दी इयर का सम्मान (2014)
  • बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया की तरफ से 10 लाख का पुरस्कार (2015)
  • बैडमिंटन एसोसिएशन ऑफ़ इंडिया की तरफ से 5 लाख का पुरस्कार (2016)
  • राजीव गांधी खेल रत्न पुरुस्कार (2016)

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2016 के रियो ओलिंपिक के बाद मिले पुरस्कार

पी.वी. सिंधु
Source: Pinterest
  • तेलंगाना सरकार की तरफ से 5 करोड़ और जमीन पुरस्कार स्वरुप दी गई। 
  • आंध्रप्रदेश सरकार की तरफ से 3 करोड़ की राशी, ग्रुप A कैडर जॉब और 1000 यार्ड जमीन पुरस्कार स्वरुप दी गई।
  • अरविंद केजरीवाल की दिल्ली सरकार द्वारा 2 करोड़ का पुरस्कार। 
  • हरियाणा सरकार द्वारा 50 लाख की नगद राशी पुरस्कार स्वरुप दी गई।
  • भारत पेट्रोलियम कारपोरेशन द्वारा 75 लाख की नगद राशी पुरस्कार स्वरुप दी गई। 
  • मध्य प्रदेश सरकार द्वारा 50 लाख की नगद राशी पुरस्कार स्वरुप दी गई।
  • हैदराबाद डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन द्वारा पुरस्कार स्वरुप एक BMW कार दी गई।

क्रिकेटर कैसे बने?

रोचक जानकारी

Source: Olympics

पीवी सिंधु के बारे में यहाँ आपको वह जानकारी दी जाएगी जो आपको पहले शायद न ही पता हो. चलिए, बताते हैं- 

  • पीवी सिंधु के ओलिंपिक में क्वालीफाई करने पर अभिनेता सलमान खान की ओर से उन्हें 1 लाख रूपये इनाम में दिए गए।
  • सिंधु अपने पिता की तरह ही अर्जुन अवार्ड से सम्मानित हैं। उनके पिता को यह पुरस्कार वर्ष 2000 में मिला था।
  • सिंधु का बैडमिंटन कैंप उनके घर से 56 किलोमीटर दूर था, उसके बावजूद वह रोज़ समय पर पहुंचती थीं।
  • सिंधु के माता-पिता चाहते थे कि वह भी उनकी तरह की वॉलीबॉल में नाम कमाएं, लेकिन उन्होंने बैडमिंटन चुना।
  • सिंधु हमेशा से बहुत मेहनती रही हैं. वह बैडमिंटन ट्रेनिंग को रोज सुबह 4:15 बजे से किया करती थी।
  • पीवी सिंधु की नेट वर्थ 2021 में 5.5 मिलियन डॉलर आंकी गई है.

Check out – सुनील छेत्री 

उम्मीद है, पीवी सिंधु की प्रेणादायक कहानी आपको पसंद आयी होगी। यदि आप भी पीवी सिंधु की तरह अपने सपनों को पूरा करना चाहते है और विदेश में पढ़ना चाहते है तो आज ही Leverage Edu से संपर्क करे।

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