भारतीय पुलिस सेवा (IPS) भारत की प्रतिष्ठित अखिल भारतीय सेवाओं में से एक है, जिसमें क्लास-वन अधिकारी के रूप में नियुक्ति होती है। IPS बनने के लिए उम्मीदवार को UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है, जो देश की सबसे कठिन परीक्षाओं में मानी जाती है। इसी परीक्षा के ज़रिए IAS, IFS और IPS जैसी सेवाओं के लिए चयन किया जाता है।
UPSC की तैयारी कर रहे ज़्यादातर अभ्यर्थियों के मन में यह कन्फ्यूजन रहता है कि कौन-सी सेवा उनके लिए सही रहेगी और क्या वे इस स्तर की प्रतिस्पर्धा को संभाल पाएँगे। IPS उन उम्मीदवारों को आकर्षित करती है जो प्रशासन के साथ-साथ कानून-व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़ी जिम्मेदार भूमिका निभाना चाहते हैं।
चयन के बाद IPS अधिकारियों को हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी में विशेष प्रशिक्षण दिया जाता है। इस लेख में IPS अधिकारी बनने की योग्यता, चयन प्रक्रिया और परीक्षा से जुड़ी ज़रूरी जानकारी को सरल तरीके से समझाया गया है।
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IPS क्या होता है?
IPS का फुल फॉर्म ‘भारतीय पुलिस सेवा’ है। यह भारत की प्रतिष्ठित सिविल सेवा का हिस्सा है और इसका मुख्य काम कानून‑व्यवस्था बनाए रखना, अपराध रोकना, जांच तथा आंतरिक सुरक्षा सुनिश्चित करना है। पुलिस सेवा में IPS अधिकारियों की भूमिका अहम होती है, जो कानून-व्यवस्था बनाए रखने में नेतृत्व प्रदान करते हैं।
अक्सर अभ्यार्थियों को IAS और IPS में भ्रम होता है। बताना चाहेंगे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) अधिकारी मुख्य रूप से सरकारी नीतियों का निर्माण और प्रशासनिक क्रियान्वयन संभालते हैं, जबकि IPS अधिकारी समाज में कानून‑व्यवस्था बनाए रखने और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं। दोनों ही UPSC सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से चुने जाते हैं, लेकिन उनके कार्य और जिम्मेदारियां अलग‑अलग प्रशासनिक क्षेत्रों में होती हैं।
IPS अधिकारी की जिम्मेदारियां और कार्य
IPS अधिकारी की भूमिका केवल फील्ड ड्यूटी तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें कानून-व्यवस्था से लेकर प्रशासनिक निर्णय तक कई ज़िम्मेदारियाँ शामिल होती हैं। मुख्य रूप से एक IPS अधिकारी को निम्न कार्य संभालने होते हैं:
- कानून-व्यवस्था बनाए रखना – जिले, शहर या राज्य स्तर पर शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करना।
- अपराध नियंत्रण और जांच का नेतृत्व – गंभीर अपराधों की रोकथाम, जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की निगरानी करना।
- VIP और महत्वपूर्ण व्यक्तियों की सुरक्षा – मंत्रियों, न्यायाधीशों और अन्य विशिष्ट व्यक्तियों की सुरक्षा व्यवस्था संभालना।
- इंटेलिजेंस और सुरक्षा निगरानी – खुफिया सूचनाएँ जुटाकर संभावित खतरों से पहले सतर्क रहना।
- यातायात और भीड़ प्रबंधन – यातायात व्यवस्था को नियंत्रित करना और आपात स्थितियों में भीड़ को संभालना।
- प्रशासनिक और नेतृत्व संबंधी कार्य – पुलिस कर्मियों की पोस्टिंग, संसाधनों का प्रबंधन और सुरक्षा योजनाओं का क्रियान्वयन करना।
जूनियर स्तर पर IPS अधिकारी (जैसे ASP) ज़्यादातर फील्ड ड्यूटी और जिला स्तर के कार्य संभालते हैं, जबकि वरिष्ठ अधिकारी (IG, ADG, DGP) बड़े क्षेत्रों की कानून-व्यवस्था और नीतिगत फैसलों की जिम्मेदारी निभाते हैं।
IPS बनने के लिए योग्यता
IPS अधिकारी बनने के लिए उम्मीदवार को UPSC द्वारा निर्धारित एलिजिबिलिटी क्राइटेरिया को पूरा करना अनिवार्य होता है। इसमें राष्ट्रीयता, आयु सीमा और शैक्षिक योग्यता से जुड़ी शर्तें शामिल हैं।
- राष्ट्रीयता: उम्मीदवार का भारत का नागरिक होना आवश्यक है। इसके अलावा नेपाल और भूटान के नागरिक तथा वे तिब्बती शरणार्थी जो 1 जनवरी 1962 से पहले भारत आए हों, UPSC के नियमों के अनुसार कुछ शर्तों के साथ पात्र माने जाते हैं।
- आयु सीमा: IPS परीक्षा के लिए उम्मीदवार की न्यूनतम आयु 21 वर्ष होनी चाहिए। अधिकतम आयु सीमा श्रेणी के अनुसार अलग-अलग तय की गई है:
- सामान्य वर्ग (General): 32 वर्ष
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC): 35 वर्ष
- अनुसूचित जाति / अनुसूचित जनजाति (SC/ST): 37 वर्ष
- इसके अलावा दिव्यांग उम्मीदवारों (PwBD) और पूर्व सैनिकों को UPSC के नियमों के अनुसार अतिरिक्त आयु-छूट दी जाती है। आयु की गणना UPSC द्वारा निर्धारित कट-ऑफ तिथि के आधार पर की जाती है।
- शैक्षिक योग्यता: उम्मीदवार के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय या संस्थान से ग्रेजुएशन की डिग्री होनी चाहिए। जो अभ्यर्थी अंतिम वर्ष या अंतिम सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल हो रहे हैं, वे भी आवेदन कर सकते हैं, बशर्ते आयोग द्वारा तय अंतिम तिथि तक वे अपनी डिग्री प्राप्त कर लें।
- शारीरिक योग्यता: IPS बनने के लिए केवल परीक्षा पास करना ही नहीं, बल्कि शारीरिक और मानसिक रूप से भी इस जिम्मेदारी के लिए फिट होना जरूरी होता है। कानून और व्यवस्था से जुड़ी तकनीकी सेवा होने के कारण आईपीएस अधिकारियों के लिए कुछ शारीरिक योग्यताओं का होना अनिवार्य है, जिनकी जांच चिकित्सा परीक्षा के दौरान की जाती है:
| आवश्यकता | पुरुष | महिला |
| ऊंचाई | न्यूनतम 165 सेमी (कुछ श्रेणियों जैसे अनुसूचित जनजाति के लिए 160 सेमी तक छूट) | न्यूनतम 150 सेमी (कुछ श्रेणियों के लिए 145 सेमी तक छूट) |
| छाती की परिधि | न्यूनतम 84 सेमी | न्यूनतम 79 सेमी |
| डिस्टेंट विजन | बेहतर आंख में 6/6 या 6/9, खराब आंख में 6/12 या 6/9। | बेहतर आंख: 6/6 या 6/9; खराब आंख: 6/12 या 6/9 |
| नियर विजन | क्रमशः J1 और खराब आंख में J2। | क्रमशः J1 और खराब आंख में J2। |
| चश्मा | यदि दृष्टि क्षमता मानकों को पूरा करती है तो अनुमति है | यदि दृष्टि क्षमता मानकों को पूरा करती है तो अनुमति है |
UPSC में प्रयासों की संख्या
यूपीएससी उम्मीदवारों की श्रेणी के आधार पर प्रयासों की संख्या निर्धारित करता है। श्रेणीवार प्रयासों की संख्या इस प्रकार है:
| श्रेणी | प्रयास |
| सामान्य | 6 |
| OBC | 9 |
| SC/ST | असीमित (आयु सीमा तक) |
| PWBD | 9 (OBC), असीमित (SC/ST), 6 (सामान्य) |
नोट: ध्यान दें कि उम्मीदवार के प्रयास की गणना तभी होगी जब वह प्रारंभिक परीक्षा में भाग लेगा।
IPS कैसे बनते हैं?
IPS अधिकारी बनने के लिए उम्मीदवार को UPSC द्वारा आयोजित सिविल सेवा परीक्षा पास करनी होती है। IPS के लिए कोई अलग परीक्षा नहीं होती, बल्कि प्राप्त रैंक, सेवा-वरीयता और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर सेवा आवंटित की जाती है। पूरी प्रक्रिया नीचे क्रमवार समझी जा सकती है:
स्टेप 1: UPSC प्रीलिम्स परीक्षा
प्रीलिम्स परीक्षा सिविल सेवा की पहली चरण की परीक्षा होती है। इसमें दो ऑब्जेक्टिव (MCQ) पेपर होते हैं, जिनमें प्रत्येक 200 अंकों का होता है। यह चरण केवल क्वालिफाइंग नेचर का होता है और इसमें कटऑफ अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार ही मेंस परीक्षा के लिए योग्य माने जाते हैं। प्रत्येक पेपर की समय सीमा दो घंटे होती है।
स्टेप 2: UPSC मेंस परीक्षा
मेंस परीक्षा सिविल सेवा की दूसरी और मुख्य लिखित परीक्षा होती है। यह डिस्क्रिप्टिव होती है और इसमें कुल 9 प्रश्नपत्र शामिल होते हैं, जिनमें से 2 क्वालिफाइंग और 7 मेरिट के लिए गिने जाते हैं। मेंस परीक्षा के अंक अंतिम चयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। तय कटऑफ हासिल करने वाले उम्मीदवारों को इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है।
स्टेप 3: इंटरव्यू (पर्सनैलिटी टेस्ट)
मेंस परीक्षा के बाद उम्मीदवारों को लगभग 45 मिनट के पर्सनल इंटरव्यू के लिए बुलाया जाता है। इस चरण में उम्मीदवार की व्यक्तित्व, निर्णय-क्षमता, नेतृत्व गुण और प्रशासनिक समझ का मूल्यांकन किया जाता है। इंटरव्यू के अंक भी अंतिम मेरिट में जोड़े जाते हैं।
स्टेप 4: रैंक और सेवा आवंटन (IPS कैसे मिलती है)
UPSC द्वारा घोषित अंतिम मेरिट सूची के आधार पर उम्मीदवारों को सेवा आवंटित की जाती है। इसमें अभ्यर्थी की ऑल इंडिया रैंक, दी गई सेवा-वरीयता और उस वर्ष उपलब्ध रिक्तियाँ निर्णायक होती हैं। IPS सेवा इसी प्रक्रिया के तहत मिलती है; इसके लिए कोई अलग परीक्षा नहीं होती। सेवा आवंटन कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) की नीति के अनुसार किया जाता है।
यह भी पढ़ें – IPS परीक्षा का सिलेबस और परीक्षा पैटर्न
IPS अधिकारी की ट्रेनिंग कहां होती है?
UPSC परीक्षा पास करने और IPS सेवा के लिए चयन होने के बाद उम्मीदवार को सबसे पहले मसूरी स्थित लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (LBSNAA) भेजा जाता है, जहाँ वह अन्य सेवाओं के अधिकारियों के साथ फाउंडेशन कोर्स पूरा करता है। इसके बाद IPS प्रशिक्षुओं को हैदराबाद स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल राष्ट्रीय पुलिस अकादमी (SVPNPA) में विशेष पुलिस प्रशिक्षण के लिए भेजा जाता है। इस प्रशिक्षण की अवधि समय-समय पर UPSC और गृह मंत्रालय के निर्देशों के अनुसार बदल सकती है।
यह प्रशिक्षण मुख्य रूप से दो हिस्सों में बाँटा जाता है – इनडोर और आउटडोर। इनडोर ट्रेनिंग में भारतीय संविधान, कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन, आंतरिक सुरक्षा, नैतिकता और मानवाधिकार जैसे विषयों की पढ़ाई कराई जाती है। वहीं आउटडोर ट्रेनिंग में शारीरिक प्रशिक्षण (PT), एथलेटिक्स, योग, तैराकी, क्रॉस-कंट्री रन, अनआर्म्ड कॉम्बैट, ड्रिल और खेलकूद जैसी गतिविधियाँ शामिल होती हैं, जिससे प्रशिक्षुओं को शारीरिक और मानसिक रूप से तैयार किया जाता है।
ट्रेनिंग पूरी होने के बाद उम्मीदवारों को उनकी रैंक और सेवा-वरीयता के आधार पर राज्य कैडर आवंटित किया जाता है। इसके बाद वे अपने आवंटित कैडर में पहली फील्ड पोस्टिंग के साथ एक IPS अधिकारी के रूप में सेवा शुरू करते हैं।
IPS अधिकारी की सैलरी और सुविधाएं
IPS अधिकारी की सैलरी उनके पद, वरिष्ठता और पोस्टिंग के आधार पर तय होती है। 7वें वेतन आयोग के तहत एक IPS अधिकारी की शुरुआती बेसिक सैलरी INR 56,100 प्रति माह होती है। इसके अलावा उन्हें महंगाई भत्ता (DA), ट्रेवल अलाउंस (TA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) या सरकारी आवास जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
सभी भत्तों को जोड़ने पर IPS अधिकारी की शुरुआती इन-हैंड सैलरी लगभग INR 80,000 से INR 1 लाख रुपये तक हो सकती है। हालांकि यह राशि शहर की श्रेणी (X, Y, Z), HRA मिलने या सरकारी आवास उपलब्ध होने और अन्य प्रशासनिक भत्तों के आधार पर ऊपर-नीचे हो सकती है।
सैलरी के अलावा IPS अधिकारियों को कई अतिरिक्त सुविधाएं भी मिलती हैं, जिनमें सरकारी वाहन, सुरक्षा कर्मी, चिकित्सा सुविधा, आधिकारिक यात्रा भत्ता और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन शामिल हैं।
यह भी ध्यान देने योग्य है कि जनवरी 2016 से लागू 7वें केंद्रीय वेतन आयोग के बाद ग्रेड पे की जगह पे मैट्रिक्स सिस्टम लागू किया गया है। इस सिस्टम में अलग-अलग पे लेवल तय हैं, जिनके अनुसार अधिकारी की सैलरी उनके पद और सेवा अवधि के साथ बढ़ती जाती है।
IPS बनने के बाद करियर और प्रमोशन
IPS बनने के बाद एक अधिकारी के पास कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक क्षेत्र में एक स्पष्ट करियर ग्रोथ पाथ होता है। ट्रेनिंग पूरी होने के बाद अधिकारी की पहली नियुक्ति आमतौर पर असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) के पद पर होती है। इसके बाद अनुभव, सेवा रिकॉर्ड और उपलब्ध रिक्तियों के आधार पर क्रमशः प्रमोशन मिलता है।
सामान्य रूप से एक IPS अधिकारी को ASP से SP बनने में लगभग 4–6 वर्ष, SP से DIG तक 8–10 वर्ष, और DIG से IG/ADG स्तर तक 15–20 वर्ष या उससे अधिक का समय लग सकता है। DGP का पद राज्य का सर्वोच्च पुलिस पद होता है, जिस तक पहुँचने में आमतौर पर 25–30 वर्ष से अधिक की सेवा लगती है। यह समय-सीमा राज्य कैडर, प्रमोशन नीति और अधिकारी की सेवा अवधि के अनुसार बदल सकती है।
प्रमोशन के अलावा, योग्य IPS अधिकारियों को CBI, NIA, IB, RAW जैसी केंद्रीय जांच और खुफिया एजेंसियों में प्रतिनियुक्ति पर काम करने का अवसर भी मिलता है। कुछ अधिकारी संयुक्त राष्ट्र (UN) मिशनों के तहत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत का प्रतिनिधित्व करते हैं।
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IPS अधिकारी बनने के फायदे और चुनौतियां
नीचे दी गई तालिका में IPS सेवा से जुड़े मुख्य बेनिफिट्स और चुनौतियां देखी जा सकती हैं:
| बेनिफिट्स | चुनौतियां |
| IPS अधिकारी का पद समाज में बहुत प्रतिष्ठित माना जाता है और उन्हें सम्मान, आदर और अधिकार मिलता है। | IPS अधिकारी की नौकरी 9 से 5 की नहीं होती; उन्हें ज़रूरत के अनुसार दिन‑रात काम करना पड़ता है, जिससे व्यक्तिगत जीवन पर असर पड़ सकता है। |
| 7वें वेतन आयोग के अनुसार शुरुआती सैलरी अच्छी होती है और पदोन्नति के साथ यह काफी बढ़ती है। इसके अलावा DA, HRA सहित कई भत्ते भी मिलते हैं। | उन्हें कभी‑कभी राजनीतिक दबाव झेलना पड़ता है और कई बार प्रशासनिक प्रतिबंधों, संसाधन की कमी या आधारभूत संरचना सीमाओं से निपटना होता है। |
| अधिकारियों को सरकारी आवास, आधिकारिक वाहन, घरेलू सहायता, सुरक्षा कर्मी और सेवानिवृत्ति के बाद पेंशन जैसी सुविधाएं मिलती हैं। | कानून‑व्यवस्था बनाए रखना, सामुदायिक अपेक्षाओं को पूरा करना और कठिन परिस्थितियों में निर्णय लेना IPS की रोज़मर्रा की चुनौती है। |
FAQs
IPS बनने के लिए उम्मीदवार को UPSC सिविल सेवा परीक्षा (CSE) पास करनी होती है। प्रीलिम्स, मेंस और इंटरव्यू तीनों चरणों में प्राप्त अंकों के आधार पर ऑल इंडिया रैंक तय होती है। रैंक, सेवा-वरीयता और उपलब्ध रिक्तियों के अनुसार IPS सेवा आवंटित की जाती है। चयन के बाद उम्मीदवार को SVPNPA, हैदराबाद में प्रशिक्षण दिया जाता है।
नहीं, IPS बनने के लिए मैथ्स विषय अनिवार्य नहीं है। हालाँकि UPSC प्रीलिम्स में सामान्य गणित, डेटा इंटरप्रिटेशन और लॉजिकल रीजनिंग से जुड़े प्रश्न आते हैं, इसलिए बेसिक गणितीय समझ होना ज़रूरी है।
हाँ, महिलाएँ भी UPSC सिविल सेवा परीक्षा पास करके IPS अधिकारी बन सकती हैं। चयन प्रक्रिया, परीक्षा और पद पुरुष उम्मीदवारों के समान होते हैं। केवल कुछ शारीरिक मानकों (जैसे ऊँचाई) में अंतर होता है।
सामान्य रूप से IPS अधिकारी कैडर नहीं बदल सकते। हालाँकि विवाह, गंभीर मानवीय कारण या विशेष परिस्थितियों में गृह मंत्रालय (MHA) और DoPT के नियमों के तहत सीमित मामलों में कैडर परिवर्तन की अनुमति दी जा सकती है।
SVPNPA में प्रशिक्षण पूरा करने के बाद IPS अधिकारी की पहली फील्ड पोस्टिंग आमतौर पर अपने आवंटित राज्य कैडर में ASP (Assistant Superintendent of Police) के रूप में होती है।
IPS की तैयारी में आमतौर पर 2 से 3 साल का समय लग सकता है। कुछ उम्मीदवार पहले प्रयास में सफल हो जाते हैं, जबकि कई को 3–4 प्रयास भी करने पड़ते हैं। यह पूरी तरह उम्मीदवार की तैयारी की रणनीति, समय और निरंतरता पर निर्भर करता है।
IPS एक अखिल भारतीय सेवा है, जिसमें चयन UPSC सिविल सेवा परीक्षा के माध्यम से होता है। IPS अधिकारी राज्य और केंद्र दोनों स्तरों पर सेवा दे सकते हैं।
वहीं DSP (डिप्टी एसपी) राज्य पुलिस सेवा का पद होता है, जिसका चयन राज्य लोक सेवा आयोग द्वारा किया जाता है। DSP का कार्यक्षेत्र सीमित राज्य तक रहता है और कैडर ग्रोथ IPS से अलग होती है।
IPS मेडिकल टेस्ट में फेल होने के आम कारणों में कलर ब्लाइंडनेस, छाती के फुलाव में कमी, गंभीर फ्लैट फीट, अत्यधिक मोटापा, वैरिकोज़ वेन्स और विज़न स्टैंडर्ड पूरे न होना शामिल हैं। क्योंकि IPS की भूमिका फील्ड ड्यूटी से जुड़ी होती है, इसलिए मेडिकल मानकों को लेकर कोई ढील नहीं दी जाती।
हाँ, IPS अधिकारी चाहें तो नौकरी से इस्तीफ़ा दे सकते हैं, लेकिन इसके लिए उन्हें केंद्र सरकार की अनुमति लेनी होती है। सेवा के शुरुआती वर्षों में इस्तीफ़ा देने पर प्रशिक्षण लागत से जुड़ी शर्तें लागू हो सकती हैं। कई अधिकारी निजी क्षेत्र, अंतरराष्ट्रीय संस्थानों या अकादमिक क्षेत्र में जाने के लिए सेवा छोड़ते हैं।
IPS और IAS दोनों के लिए एक ही UPSC परीक्षा होती है। फर्क केवल सेवा आवंटन का होता है, जो रैंक और वरीयता पर निर्भर करता है। IAS के लिए आमतौर पर ऊँची रैंक की आवश्यकता होती है, जबकि IPS थोड़ा नीचे रैंक पर मिल सकता है, लेकिन दोनों की तैयारी का स्तर समान ही माना जाता है।
IPS अधिकारी कानून-व्यवस्था, पुलिस प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं। IAS अधिकारी प्रशासन, नीति निर्माण और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन का नेतृत्व करते हैं। दोनों ही अखिल भारतीय सेवाएँ हैं, लेकिन कार्य की प्रकृति और भूमिका अलग होती है।
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उम्मीद है इस लेख से IPS अधिकारी बनने की पूरी प्रक्रिया आपको स्पष्ट रूप से समझ आई होगी। ध्यान रखें कि हर साल नियमों और शर्तों में मामूली बदलाव हो सकते हैं, इसलिए आवेदन से पहले UPSC की आधिकारिक नोटिफिकेशन देखना ज़रूरी है। ऐसे ही करियर से जुड़े अन्य विषयों पर जानकारी के लिए Leverage Edu के लेख भी देख सकते हैं।
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