शेर के मुख्य पर्यायवाची शब्द – सिंह, वनराज, मृगेन्द्र, केहरी, केशरी, नाहर, शार्दूल।
[UPSC सिविल सेवा (मुख्य) परीक्षा, 2023 हिंदी अनिवार्य पेपर]
शेर के पर्यायवाची शब्दों का वाक्यों में प्रयोग
- रामधारी सिंह ‘दिनकर’ ने अपनी कविता ‘ओ द्विधाग्रस्त शार्दूल! बोल’ में पराधीन भारत के युवाओं को शार्दूल कहकर संबोधित किया है, ताकि वे अपनी शक्ति को पहचानकर बेड़ियाँ तोड़ सकें।
- पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि जंगलों में शेरों की घटती संख्या पारिस्थितिकी तंत्र के लिए एक बड़ा खतरा है।
- असीम शक्ति, निडर स्वभाव और अपनी गंभीर गर्जना के कारण शेर को वनराज के रूप में जाना जाता है।
- सारनाथ के अशोक स्तंभ पर अंकित सिंहों की मुखमुद्रा न केवल भारत की शक्ति का प्रतीक है, बल्कि यह हमारे राजकीय गौरव को भी दर्शाती है।
- अरे, उसे क्या डरा रहे हो? वह तो अकेले अंधेरी रात में भी खेत पर चला जाता है, बिल्कुल नाहर का कलेजा है उसका।
नोट: शेर के लिए अलग-अलग शब्दों का चुनाव इस बात पर निर्भर करता है कि आप कहाँ लिख रहे हैं। सरकारी काम या आम बातचीत में ‘सिंह’ सबसे अधिक उपयोग किया जाता है, जबकि जंगल के राजा के रूप में उसे ‘वनराज’ या ‘मृगेन्द्र’ कहा जाता है। शेर की गर्दन के घने बालों के कारण उसे ‘केशरी’ या ‘केहरी’ कहा जाता है, वहीं लोक-कथाओं और ग्रामीण पृष्ठभूमि के साहित्य में ‘नाहर’ और गंभीर साहित्य या उच्च श्रेणी की कविताओं में उसकी शक्ति को दर्शाने के लिए ‘शार्दूल’ जैसे प्रभावशाली शब्दों का प्रयोग किया जाता है।

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