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उत्तर: लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण और तीखे वचन सुनकर परशुराम क्रोधित होकर अपना फरसा उठा चुके थे। यह देखकर सभा में भय और चौंकन का माहौल बन गया था। सब लोग चिंतित हो उठे कि अब लक्ष्मण के विरुद्ध गंभीर घटना घट सकती है। इसी कारण सभा में हाहाकार मच गया था।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
- अपने किसी परिचित या मित्र के स्वभाव की विशेषताएँ लिखिए।
- दूसरों की क्षमताओं को कम नहीं समझना चाहिए इस विषय पर कहानी लिखिए।
- उन घटनाओं को याद करके लिखिए जब आपने अन्याय का प्रतिकार किया हो।
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- लक्ष्मण को परशुराम को मारने पर पाप और अपयश की सम्भावना क्यों थी?
- क्रोध पर विनय और व्यंग्य का अलग-अलग प्रभाव कैसे पड़ता है? ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
- ‘कहेउ लखन मुनि सीलु तुम्हारा। को नहि जान बिदित संसारा।।’ इस कथन का आशय स्पष्ट कीजिए।
- शूरवीर और कायर में क्या अंतर बताया गया है?
- ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ पाठ में क्या संदेश दिया गया है?
- परशुराम ने लक्ष्मण के बारे में विश्वामित्र से क्या-क्या कहा?
- परशुराम की बात सुनकर विश्वामित्र ने उनसे क्या प्रार्थना की?

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