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उत्तर: परशुराम के क्रोधित होने का कारण था—सीता स्वयंवर में उनके गुरु शिवजी के धनुष का श्रीराम द्वारा टूट जाना। परशुराम इस धनुष को शिवजी का प्रतीक और पूज्य मानते थे। उनका मानना था कि इस धनुष का टूट जाना उनके आराध्य शिवजी और उनके स्वयं के सम्मान का अपमान है। इसी कारण वे अत्यन्त क्रोधित होकर सभा में पहुँचे और राम तथा लक्ष्मण से कठोर वचन कहे।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
- परशुराम ने लक्ष्मण के बारे में विश्वामित्र से क्या-क्या कहा?
- परशुराम की बात सुनकर विश्वामित्र ने उनसे क्या प्रार्थना की?
- सभा में हाहाकार क्यों मच गया था?
- लक्ष्मण के कुल में किन-किन पर वीरता नहीं दिखाई जाती है और क्यों?
- परशुराम ने राम की विनयपूर्ण बातों का क्या जवाब दिया और क्यों?
- फरसे को दिखाते हुए परशुराम ने लक्ष्मण से आवेगपूर्ण वाणी में क्या कहा था?
- ‘अहो मुनीसु महाभट मानी’ में निहित व्यंग्य को स्पष्ट कीजिए।
- पाठ ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ के आधार पर परशुराम की स्वभावगत विशेषताएँ बताइए।
- लक्ष्मण द्वारा परशुराम पर किए गए व्यंग्यों का उल्लेख कीजिए।
- ‘राम-लक्ष्मण-परशुराम संवाद’ में राम के किस स्वभाव की प्रशंसा व्यक्त हुई है?
- तुलसीदास का व्यक्तित्व एवं कृतित्व संक्षेप में लिखिए।

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