उत्तर: परशुराम ब्राह्मण कुल में जन्मे बाल-ब्रह्मचारी थे। वे वीर योद्धा, क्रोधी और अहंकारी स्वभाव के थे। वे क्षत्रिय कुल के विरोधी भी थे। शिव के परम भक्त होने के कारण वे शिव के धनुष को अत्यंत पूजते थे। जब सीता स्वयंवर में शिवधनुष टूटा तो वे अपने गुरु के धनुष के टूटने से क्रोधित हो गए। परशुराम के अनुसार, सेवक वही होता है जो सेवा करता है, और जो शत्रु के समान कार्य करता है, उससे लड़ाई करनी चाहिए। हालांकि वे क्रोधी थे, फिर भी किसी के विनय और याचना पर उनका क्रोध शांत हो जाता था। विश्वामित्र के शील-युक्त वचन सुनकर वे लक्ष्मण को क्षमा भी कर देते हैं। इस प्रकार, परशुराम का स्वभाव वीरता, क्रोध, अहंकार के साथ-साथ अनुशासन और मर्यादा का भी है।
इस पाठ के अन्य प्रश्न
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