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कवि ने कविता “अट नहीं रही है” में प्रकृति की व्यापकता को फागुन मास की रंग-बिरंगी छटा के रूप में दर्शाया है। कवि ने दिखाया कि फागुन की खुशबू और सौंदर्य हर घर में फैल रही है, हवा में उड़कर पूरे वातावरण को महका रही है। हरे-भरे और लाल पत्तों की कतारें, पुष्प-माल और हल्की महक से पूरा वातावरण सज गया है। इस प्रकार कवि ने प्रकृति की सर्वव्यापकता और सौंदर्य को इस तरह प्रस्तुत किया कि पाठक स्वयं उस माहौल का अनुभव कर सके।
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