कैसे काम करता है Manav Pachan Tantra

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मानव पाचन तंत्र

मनुष्य के शरीर में बहुत सारी तंत्रिका प्रणाली हैं। जिनके अलग-अलग काम होते हैं और यह शरीर को आगे बढ़ने में मदद करती है। शरीर का सबसे महत्वपूर्ण तंत्र है Manav Pachan Tantra। यह शरीर में जाने वाले भोजन को पचाने में सहायता करता है और देखता है कि पाचन कार्य ठीक से हो रहा है या नहीं। तो आइए, हम आपको Manav Pachan Tantra के बारे में देंगे विस्तार से जानकारी।

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पित्ताशयी ग्रंथि (Gall Bladder)

Manav Pachan Tantra में पित्ताशयी ग्रंथि (Gallbladder) पेट में होती है। यह ग्रंथियां हाइड्रोक्लोरिक एसिड और पित्ताशय रस का डिस्चार्ज करती हैं और हाइड्रोक्लोरिक एसिड भोजन को अम्लीय (Acidic) बनाता है।

लार ग्रंथि (Salivary Gland)

लार ग्रंथि (Salivary gland) मुंह में होती है। मनुष्य में तीन प्रकार की लार ग्रंथियां होती हैं जिनसे लार का डिस्चार्ज होता है। लार में उपस्थित एन्जाइम (Enzyme) को लार अमालेस (salivary amylase) कहते हैं, जो मुंह से स्टार्च के टुकड़े करती है। Manav Pachan Tantra में Saliva ग्रास नली को जाते हुए भोजन को भी नम करता है।

आंत्रिक ग्रंथियां (Intestinal Glands)

छोटी आंत की दीवार में कई प्रकार की ग्रंथियां होती हैं। इन ग्रंथियों से बहने वाला एन्जाइम (Enzyme) भोजन के पाचक के लिए जिम्मेदार होते हैं।

यकृत (Liver)

यह मनुष्य में पाई जाने वाली सबसे बड़ी ग्रंथी (Gland) होती है। यकृत (Liver) में से बाइल द्रव (Bile Fluid) का डिस्चार्ज होता है जो कि पित्ताशय में होता है। यह पाचन में सहायक है। बाइल द्रव का मुख्य कार्य वसा (Fat) को छोटे भागों में बांटकर उसे पाचक बनाता है, जिससे वह आसानी से पच सके। Manav Pachan Tantra में पेट का अम्लीय भोजन अब क्षारीय (Alkaline) हो जाता है।

अग्नाशय (Pancreatic)

Manav Pachan Tantra में Liver के बाद यह दूसरा सबसे बड़ा ग्लैंड है। यह ग्रहणी (Duodenum) के रिंग में होती है। इसमें अग्नाशय रस का स्राव होता है जिसमें काफी सारे पाचक एंजाइम होते हैं। ट्रिपसिन (Trypsin) और कोमोट्रिपसिन (Chymotrypsin) प्रोटीन के बिखराव में सहायक होते हैं। अमीलेस, पॉलीसैकराइड (Polysaccharide) का विघटन करता है। लीपेस वसा (Lipase fat) का और न्यूक्लिएसिक न्यूक्लिक अम्ल (nucleic acid) के विघटन में सहायक होते हैं। अग्नाशय U आकार के ग्रहणी के बीच स्थिति एक लंबी ग्रंथि है जो बहिःस्रावी (Exocrine) और अंतःस्रावी (endocrine), दोनों ही ग्रंथियों की तरह कार्य करती है।

बहिःस्राव भाग से क्षारीय अग्नाशयी स्राव निकलता है, जिसमें एंजाइम होते हैं और अतःस्रावी भाग से इंसुलिन और ग्लुकेगोन (Glucagon) नामक हार्मोन का स्राव होता है।

  • जो पाचक एंजाइम ड्यूडनम और इलियम (Ilium) में लाए जाते हैं वो क्षारीय खाद्य पदार्थ (Alkaline Foods) के विघटन में उत्प्रेरक (Catalyst) होते हैं।
  • आंत्रिक ग्रंथियां आंत्रिक (Intestinal) रस का स्राव करती हैं।
  • यकृत की कोशिकाओं से पित्त (Bile) का स्राव होता है जो यकृत नलिका से होते हुए एक पतली पेशीय थैली-पित्ताशय में कंसन्ट्रेट व जमा होता है।

मुखगुहा (Buccal Cavity)

यह एक छोटी ग्रसनी (Pharynx) में खुलती है जो वायु एवं भोजन का मार्ग है। एक उपास्थिमय घॉटी (cartilaginous valley), भोजन को निगलते समय श्वासनली (trachea )में प्रवेश करने से रोकती है। ग्रसिका (Oesophagus) एक पराली (Straw) लंबी नली है, जो गर्दन एवं मध्यपट (Diaphragm) से होते हुए पीछे के भाग में थैलीनुमा पेट में खुलती है।

Manav Pachan Tantra में छोटी आंत के तीन भाग होते हैं

  • J’ आकार की ग्रहणी
  • कुंडलित मध्यभाग अग्रक्षुद्रांत्र (Coiled Midsection Anterior Scrotum)
  • लंबी कुडलित (Clumped) क्षुद्रांत्र

पेट का ग्रहणी में निकास जठरनिर्गम अवरोधिनी (Pyloric Block) द्वारा नियंत्रित होता है। क्षुदांत्र (Intestine) बड़ी आंत में खुलती है जो अंधनाल (Caecum), बृहदांत्र (Colon) और मलाशय (rectum) से बनी होती है।

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आहारनाल (Alimentary Canal)

आहारनाल आगे के भाग में मुंह से शुरू होकर पिछले भाग में स्थित गुदा, जो 9 मीटर लंबी होती है, द्वार बाहर की ओर खुलता है। मुंह, मुखगुहा में खुलता है। मुखगुहा में 32 दांत और एक पेशीय जिहा (Muscular Tongue) होती है। प्रत्येक दांत जबड़े में बने एक सांचे (Mold) में स्थित होता है। Manav Pachan Tantra में इस तरह की व्यवस्था को गर्तदंती (Trough) कहते हैं।

मनुष्य सहित अधिकांश स्तनधारियों (Mammals) के जीवन में दो तरह के दांत आते हैं। अस्थायी दंत समूह अथवा दूध के दांत जो वयस्कों में स्थायी दांतों से बदल जाते हैं। इस तरह की दंत-व्यवस्था को द्विबारदंती (Diphyodont) कहते हैं।

Manav Pachan Tantra में वयस्क मनुष्य में 32 स्थायी दांत होते हैं, जिनके चार प्रकार होते हैं, जैसे –

  1. कृतक (Incisors)
  2. रदनक (Canines) 
  3. अचवर्गक (Premolars)
  4. चवर्णक (Molars) 

ऊपरी एवं निचले जबड़ों के प्रत्येक आधे भाग में दांतों की व्यवस्था Incisors, Canines, Premolars, Molars में एक दंतसूत्र (denticle) के अनुसार होती है जो मनुष्य के लिए 2123e2123 है।

इनैमल (Enamel) से बनी दांतों की चबाने वाली सख्त सतह भोजन को चबाने में मदद करती है। जीभ स्वतंत्र रूप से घूमने योग्य एक पेशीय अंग है जो फैनुलम (Frenulum) द्वारा मुखगुहा के आधार से जुड़ी होती है। जीभ की ऊपरी सतह पर छोटे-छोटे उभार के रूप में पिप्पल और पैपिला (Papilla) होते हैं, जिनमें कुछ पर स्वाद कलिकाएं (Taste Buds) होती हैं।

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अवशोष (Absorption)

पाचन के बाद भोजन के कण छोटे हो जाते हैं और छोटी आंत से होते हुए हमारे रक्त में जाते हैं। छोटी आंत पचाये हुए भोजन के अवशोषण करती है। छोटी आंत की अंदरूनी सतह में लाखों, उंगलियों जैसे लांच होते हैं जिन्हें विली कहा जाता है। Manav Pachan Tantra में ये अवशोषण के लिए बड़ा सतह क्षेत्र प्रदान करते हैं और पचा हुआ भोजन हमारे खून में जाता है।

समावेश (Assimilation)

खून पचे और घुले हुए भोजन को शरीर के सभी अंगों तक ले जाता है, जहां यह कोशिका के रूप में समावेशित होता है। शरीर की कोशिकाएं समावेशित भोजन का प्रयोग ऊर्जा प्राप्त करने के साथ – साथ शरीर के विकास और मरम्मत के लिए भी करती हैं। अपचा भोजन यकृत में कार्बोहाइड्रेट के रूप में जमा होता है जिसे ग्लाइकोजेन (Glycogen) कहते हैं और जरूरत पड़ने पर शरीर इसका उपयोग कर सकता है।

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Manav Pachan Tantra के इसं ब्लॉग में आपने जाना शरीर में पाचन तंत्र कैसे काम करता है। ऐसे ही और नए-नए तरह के ब्लॉग्स के लिए आप हमारी Leverage Edu वेबसाइट पर विजिट कर सकते हैं।

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