Indian Freedom Fighters in Hindi (महान भारतीय स्वतंत्रता सेनानी)

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Indian Freedom Fighters

लगभग 73 साल पहले, 15 अगस्त 1947 की ऐतिहासिक तारीख को, भारत ब्रिटिश प्रभुत्व से मुक्त हो गया। यहां कई आंदोलनों और संघर्षों की परिणति थी जो 1857 के ऐतिहासिक विद्रोह सहित ब्रिटिश शासन के समय में व्याप्त थे। यह स्वतंत्रता कई क्रांतिकारी स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों के माध्यम से हासिल की गई थी, जिन्होंने संघर्ष को आयोजित करने का बीड़ा उठाया जिसके कारण भारत की स्वतंत्रता हुईं। हालांकि वे विभिन्न विचारधाराओं से लेकर चरमपंथियों तक के थे, लेकिन भारत के स्वतंत्रता संग्राम में उनके योगदान को हर भारतीय के दिमाग में अमर कर दिया गया है। Indian Freedom Fighters in Hindi (स्वतंत्रता सेनानी) के बारे में अधिक जानने के लिए इस ब्लॉग पर एक नज़र डालें, जिनके लिए हम अपनी स्वतंत्रता का श्रेय देते हैं।

The Blog Includes:
  1. Indian Freedom Fighters in Hindi (भारतीय स्वतंत्रता सेनानी)
  2. महत्वपूर्ण Indian Freedom Fighters और उनके योगदान
  3. About Indian Freedom Fighters in Hindi
    1. Mahatma Gandhi (महात्मा गांधी)
    2. Subhash Chandra Bose (सुभाष चंद्र बोस)
    3. Sardar Vallabhbhai Patel (सरदार वल्लभभाई पटेल)
    4. Jawaharlal Nehru (जवाहरलाल नेहरू)
    5. Lal Bahadur Shastri (लाल बहादुर शास्त्री)
    6. Bhagat Singh (भगत सिंह)
    7. Dadabhai Naoroji  (दादा भाई नौरोजी)
    8. Bipin Chandra Pal (बिपिन चंद्र पाल)
    9. Lala Lajpat Rai (लाला लाजपत राय)
    10. Raja Ram Mohan Roy (राजा राम मोहन रॉय)
    11. तांतिया टोपे
    12. बाल गंगाधर तिलक
    13. अशफाकउल्ला खान 
    14. नाना साहब
    15. सुखदेव
    16. कुंवर सिंह
    17. मंगल पांडे
    18. सी. राजगोपालाचारी
    19. राम प्रसाद बिस्मिल
    20. चंद्रशेखर आजाद 
  4. Women Indian Freedom Fighters in Hindi
    1. Rani Lakshmi Bai (रानी लक्ष्मीबाई)
    2. Begum Hazrat Mahal (बेगम हजरत महल)
    3. सरोजिनी नायडू
    4. सावित्रिभाई फुले
    5. विजयलक्ष्मी पंडित
  5. Quotes of Indian Freedom Fighters in Hindi

Indian Freedom Fighters in Hindi (भारतीय स्वतंत्रता सेनानी)

भारत से अंग्रेजों को बाहर करने के संघर्ष में देश के हर कोने के लोगों ने भाग लिया। उनमें से कई ने भारत को अंग्रेजों के अत्याचारी शासन से मुक्त करने के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया। आइए हम कुछ महान हस्तियों पर एक नज़र डालें जिनके प्रयासों के बिना हम शायद आज भी ब्रिटिश शासन में होंगे।

  1. महात्मा गांधी
  2. कुनव सिंह
  3. विनायक दामोदर सावरकर
  4. दादाभाई नौरोजी
  5. टांटिया टोपे
  6. के. एम. मुंशी
  7. जवाहरलाल नेहरू
  8. अशफाकला खान
  9. सरदार वल्लभभाई पटेल
  10. लाला लाजपत राय
  11. राम प्रसाद बिस्मिल
  12. बाल गंगाधर तिलक
  13. रानी लक्ष्मी बाई
  14. बिपिन चंद्र पाल
  15. चितरंजन दास
  16. बेगम हजरत महल
  17. भगत सिंह
  18. लाल बहादुर शास्त्री
  19. नाना साहब
  20. चंद्र शेखर आज़ाद
  21. सी. राजगोपालाचारी
  22. अब्दुल हाफिज मोहम्मद बाराकतुल्लाह
  23. सुभाष चंद्र बोस
  24. राजा राम मोहन रॉय

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महत्वपूर्ण Indian Freedom Fighters और उनके योगदान

महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका में नेशनल सिविल राइट्स एक्टिविस्ट के पिता,  सती ग्राही सविनय अवज्ञा मूवमेंट क्विट इंडिया मूवमेंट
कुंवर सिंह इंडियन रिबेलीयन 1857
विनायक दामोदर सावरकर हिंदू महाशा के प्रमुख आंकड़े और हिंदू राष्ट्रवादी दर्शन के सूत्रधार
दादाभाई नौरोजी भारत के अनौपचारिक राजदूत
तात्या टोपे 1857 का भारतीय विद्रोह
के एम मुंशी भारतीय विद्या भवन के संस्थापक
जवाहरलाल नेहरू भारत के प्रमुख प्रधानमंत्री।
अशफाकला खान हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य
सरदार वल्लभभाई पटेल विनय अवज्ञा आंदोलन और भारत आंदोलन से बाहर निकलें
लाला लाजपत राय पंजाब केसरी अगेंस्ट साइमन कमीशन
राम प्रसाद बिस्मिल हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के संस्थापक सदस्य
बाल गंगाधर तिलक आधुनिक भारत के निर्माता आंदोलन
रानी लक्ष्मीबाई 1857 का भारतीय विद्रोह
बिपिन चंद्र पाल क्रांतिकारी विचार के पिता
चितरंजन दास बंगाल से असहयोग आंदोलन में नेता और स्वराज पार्टी के संस्थापक
बेगम हजरत महल 1857 का भारतीय विद्रोह
भगत सिंह सबसे प्रभावशाली क्रांतिकारी में से एक
लाल बहादुर शास्त्री श्वेत क्रांति ग्रीन क्रांति भारत के प्रधानमंत्री
नाना साहेब 1857 का भारतीय विद्रोह
चंद्रशेखर आजाद हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के अपने नए नाम के तहत हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (एचआरए) का पुनर्गठन किया
सी राजगोपालाचारी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के India Leader के अंतिम गवर्नर जनरल
अब्दुल हफीज मोहब्बत बरकतउल्ला क्रांतिकारी लेखक
सुभाष चंद्र बोस द्वितीय विश्व युद्ध के राष्ट्रीय कांग्रेस

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About Indian Freedom Fighters in Hindi

Source: News Bugz

आइए नीचे Indian Freedom Fighters in Hindi (स्वतंत्रता सेनानी) के बारे में कुछ महत्वपूर्ण जानकारी लेंगे-

Mahatma Gandhi (महात्मा गांधी)

Indian Freedom Fighters - Mahatma Gandhi
Source: Wikipedia

महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 को गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था। इनका पूरा नाम मोहनदास करमचंद गांधी था। इनके पिता का नाम करमचंद गांधी था। मोहनदास की माता का नाम पुतलीबाई था जो करमचंद गांधी जी की चौथी पत्नी थीं। मोहनदास अपने पिता की चौथी पत्नी की अंतिम संतान थे। महात्मा गांधी को ब्रिटिश शासन के खिलाफ भारतीय राष्ट्रीय आंदोलन का नेता और ‘राष्ट्रपिता’ माना जाता है। महात्मा गांधी Indian Freedom Fighters in Hindi (स्वतंत्रता सेनानी) मे से एक महान व्यक्ति थे।

महात्मा गांधी के बारे में 10 रोचक तथ्य 

  • गांधी जी की मातृभाषा गुजराती थी।
  • गांधी जी ने अल्फ्रेड हाई स्कूल, राजकोट से पढ़ाई की थी
  • गांधी जी का जन्मदिन 2 अक्टूबर अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में विश्वभर में मनाया जाता है।
  • महात्मा गांधी जी अपने माता-पिता के सबसे छोटी संतान थे उनके दो भाई और एक बहन थी।
  • उनके  पिता धार्मिक रूप से हिंदू तथा जाति से मोध बनिया थे।
  • माधव देसाई, गांधी जी के निजी सचिव थे।
  • उनकी हत्या बिरला भवन के बगीचे में हुई थी।
  • गांधी जी और प्रसिध्द लेखक लियो टोलस्टोय के बीच लगातार पत्र व्यवहार होता था।
  • गांधी जी ने दक्षिण अफ्रीका के सत्याग्रह संघर्ष के दौरान , जोहांसबर्ग से 21 मील दूर एक 1100 एकड़ की छोटी सी कालोनी, टॉलस्टॉय फार्म स्थापित की थी।  
  • 1930 में, उन्होंने दांडी साल्ट मार्च का नेतृत्व किया और 1942 में, उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान भारत छोड़ो आंदोलन चलाया।

Subhash Chandra Bose (सुभाष चंद्र बोस)

Indian Freedom Fighter - Subhash Chandra Bose
Source: Wikipedia

हमारे देश के एक महान Indian freedom fighter (स्वतंत्रता सेनानी) नेताजी सुभाष चन्द्र बोस का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक शहर में हुआ था। उनके पिता का नाम जानकीनाथ बोस और मां का नाम प्रभावती था, उनके पिताजी कटक शहर के मशहूर वकील थे।सुभाष चंद्र बोस कुल मिलकर 14 भाई बहन थे।सुभाष चंद्र बोस एक महान स्वतंत्रता सेनानी थे। ‘तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा’ उन्होंने ने ही हमारे भारत को यह नारा दिया जिससे भारत के कई युवा वर्ग भारत से अंग्रेजों को बाहर निकालने की लड़ाई लड़ने के लिए प्रेरित हुये।नेताजी ने चितरंजन दास के साथ काम किया जो बंगाल के एक राजनीतिक नेता, शिक्षक और बंगलार कथा नाम के बंगाल सप्ताहिक में पत्रकार थे। बाद में वो बंगाल कांग्रेस के वालंटियर कमांडेंट, नेशनल कॉलेज के प्रिंसीपल, कलकत्ता के मेयर और उसके बाद निगम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी के रुप में नियुक्त किये गये।

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सुभाष चंद्र बोस द्वारा बोले गए अनमोल वचन

  • “तुम मुझे खून दो ,मैं तुम्हें आजादी दूंगा !”
  • “ये हमारा कर्तव्य है कि हम अपनी स्वतंत्रता का मोल अपने खून से चुकाएं. हमें अपने बलिदान और परिश्रम से जो आज़ादी मिलेगी,  हमारे अन्दर उसकी रक्षा करने की ताकत होनी चाहिए.”
  • “आज हमारे अन्दर बस एक ही इच्छा होनी चाहिए, मरने की इच्छा ताकि भारत जी सके! एक शहीद की मौत मरने की इच्छा ताकि स्वतंत्रता का मार्ग शहीदों के खून से प्रशश्त हो सके.”
  • “मुझे यह नहीं मालूम की स्वतंत्रता के इस युद्ध में हममे से कौन  कौन   जीवित बचेंगे ! परन्तु में यह जानता हूँ ,अंत में विजय हमारी ही होगी !”
  • “राष्ट्रवाद  मानव  जाति  के  उच्चतम आदर्श सत्य, शिव और  सुन्दर  से   प्रेरित  है .”
  • “भारत  में  राष्ट्रवाद  ने  एक ऐसी सृजनात्मक शक्ति  का  संचार  किया  है  जो सदियों से   लोगों  के  अन्दर   से  सुसुप्त पड़ी  थी .”
  • “मेरे  मन  में  कोई  संदेह  नहीं  है  कि  हमारे  देश  की  प्रमुख समस्यायों जैसे गरीबी ,अशिक्षा , बीमारी ,  कुशल  उत्पादन  एवं   वितरण  का समाधान  सिर्फ  समाजवादी  तरीके  से  ही  की  जा  सकती  है .”
  • “यदि आपको अस्थायी रूप से झुकना पड़े तब वीरों की भांति झुकना !”
  • “समझोतापरस्ती बड़ी अपवित्र वस्तु है !”
  • “मध्या भावे गुडं दद्यात — अर्थात जहाँ शहद का अभाव हो वहां गुड से ही शहद का कार्य निकालना  चाहिए !”

Sardar Vallabhbhai Patel (सरदार वल्लभभाई पटेल)

Indian Freedom Fighters - Sardar Vallabhbhai Patel
Source: Sardar Vallabhbhai Patel

सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को नादिद ग्राम में हुआ था, जिन्होंने Indian freedom fighter बनके अंग्रेजी लोगों को देश से बगाया था। उनके पिता झवेरभाई पटेल एक साधारण किसान और माता लाड बाई एक साधारण महिला थी। बचपन से ही पटेल कड़ी महेनत करते आए थे, बचपन से ही वे परिश्रमी थे।  पेटलाद की एन.के. हाई स्कूल में पढ़ते थे। उन्होंने 1896 में अपनी हाई-स्कूल परीक्षा पास की। स्कूल के दिनों से ही वे हुशार और विद्वान थे।भारत माता की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनका महत्वपूर्ण योगदान था इसी वजह से उन्हें भारत का लौह पुरुष कहा जाता है। सरदार वल्लभ भाई पटेल जी ने अपने जीवन में महात्मा गाँधी जी से प्रेरणा ली थी और स्वतंत्रता आन्दोलन में भाग लेकर अपना योगदान दिया था।हमारे भारत के इतिहास में सरदार वल्लभ भाई पटेल का नाम सुनहरे अक्षरों में लिखा जायेगा और हमारा भारत हमेशा इस महान , साहसी , निडर , निर्भयी , दबंग , अनुशासित , अटल महान पुरुष को याद करेगा।

विचार :

  • जीवन की डोर तो ईश्वर के हाथ में है, इसलिए चिंता की कोई बात हो ही नहीं सकती
  • कठिन समय में कायर बहाना ढूंढ़ते हैं बहादुर व्यक्ति रास्ता खोजते हैं
  • उतावले उत्साह से बड़ा परिणाम निकलने की आशा नहीं रखनी चाहिये
  • हमें अपमान सहना सीखना चाहिए
  • बोलने में मर्यादा मत छोड़ना, गालियाँ देना तो कायरों का काम है
  • शत्रु का लोहा भले ही गर्म हो जाये, पर हथौड़ा तो ठंडा रहकर ही काम दे सकता है
  • आपकी अच्छाई आपके मार्ग में बाधक है, इसलिए अपनी आंखें को क्रोध से लाल होने दीजिये, और अन्याय का मजबूत हाथों से सामना कीजिये

Jawaharlal Nehru (जवाहरलाल नेहरू)

indian Freedom Fighters - Jawaharlal Nehru
Source: Wikipedia

जवाहरलाल नेहरू का जन्म 14 नवम्बर 1889 को ब्रिटिश भारत में इलाहाबाद में हुआ। उनके पिता, मोतीलाल नेहरू (1861–1931), एक धनी बैरिस्टर जो कश्मीरी पण्डित समुदाय से थे, स्वतन्त्रता संग्राम के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के दो बार अध्यक्ष चुने गए। उनकी माता स्वरूपरानी थुस्सू (1868–1938), जो लाहौर में बसे एक सुपरिचित कश्मीरी ब्राह्मण परिवार से थी, मोतीलाल की दूसरी पत्नी थी व पहली पत्नी की प्रसव के दौरान मृत्यु हो गई थी। जवाहरलाल तीन बच्चों में से सबसे बड़े थे, जिनमें बाकी दो लड़कियाँ थी।बड़ी बहन, विजया लक्ष्मी, बाद में संयुक्त राष्ट्र महासभा की पहली महिला अध्यक्ष बनी। सबसे छोटी बहन, कृष्णा हठीसिंग, एक उल्लेखनीय लेखिका बनी और उन्होंने अपने भाई पर कई पुस्तकें लिखी।जवाहरलाल नेहरु जी को 1955 में भारत रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। जवाहरलाल नेहरू जी को पंडित नेहरू और चाचा नेहरू भी कहा जाता है, साथ ही में उन्हें आधुनिक भारत के शिल्पकार भी कहा जाता है। जवाहरलाल नेहरु जी को सभी बच्चे चाचा नेहरू कहा करते थे, इस वजह से जवाहरलाल नेहरू जी के जन्मदिन 14 नवंबर को हर वर्ष बाल दिवस मनाया जाता है।

Lal Bahadur Shastri (लाल बहादुर शास्त्री)

Indian Freedom Fighters - Lal Bahadur Shastri
Source: Wikipedia

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर, 1904 को मुगलसराय, उत्तरप्रदेश में ‘मुंशी शारदा प्रसाद श्रीवास्तव’ के यहां हुआ था। उनकी माता का नाम ‘रामदुलारी’ था। उनके पिता प्राथमिक विद्यालय में शिक्षक थे। ऐसे में सब उन्हें ‘मुंशी जी’ ही कहते थे।लाल बहादुर शास्त्री जी भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे।शास्त्री जी ने जय जवान – जय किसान का नारा दिया था।1965 का भारत पाकिस्तान युद्ध शास्त्रीजी के कार्यकाल में लड़ा और जीता गया था ।11 जनवरी 1966 की रात को ताशकंत में शास्त्री जी की संदिग्ध मृत्यु हो गई थी ।शास्त्री जी के समाधि स्थल का नाम विजय घाट है।

लाल बहादुर शास्त्री जी के अनमोल विचार

  • हम शांति और शांतिपूर्ण विकास में विश्वास करते हैं, न केवल अपने लिए बल्कि दुनिया भर के लोगों के लिए।
  • शासन का मूल विचार, जैसा कि मैं इसे देखता हूं, समाज को एक साथ रखना है ताकि यह निश्चित लक्ष्यों की ओर विकसित हो सके और मार्च कर सके।
  • भारत को अपना सिर शर्म से झुकाना पड़ेगा, अगर एक भी ऐसा व्यक्ति बचा हो जिसे अछूत कहा जाए।
  • हम दुनिया में सम्मान तभी जीत सकते हैं जब हम आंतरिक रूप से मजबूत होंगे और अपने देश से गरीबी और बेरोजगारी को दूर कर सकते हैं।
  • हमारे देश की अनोखी बात यह है कि हमारे पास हिंदू, मुस्लिम, ईसाई, सिख, पारसी और अन्य सभी धर्मों के लोग हैं। हमारे पास मंदिर और मस्जिद, गुरुद्वारे और चर्च हैं। लेकिन हम यह सब राजनीति में नहीं लाते … भारत और पाकिस्तान के बीच यही अंतर है।
  • हमारा देश अक्सर आम खतरे के सामने एक ठोस चट्टान की तरह खड़ा हो गया है, और एक गहरी अंतर्निहित एकता है जो हमारी सभी प्रतीत होती विविधता के माध्यम से एक सुनहरे धागे की तरह चलती है।
  • हमें शांति से लड़ना चाहिए क्योंकि हम युद्ध में लड़े थे।
  • हमारा रास्ता सीधा और स्पष्ट है – घर में एक समाजवादी लोकतंत्र का निर्माण, सभी के लिए स्वतंत्रता और समृद्धि, और विश्व शांति और विदेश में सभी देशों के साथ मित्रता का रखरखाव।
  • हम शांति के माध्यम से सभी विवादों के निपटारे में, युद्ध के उन्मूलन में, और, विशेष रूप से, परमाणु युद्ध में शांति में विश्वास करते हैं।
  • हम एक व्यक्ति के रूप में मनुष्य की गरिमा में विश्वास करते हैं, जो भी उसकी जाति, रंग या पंथ और बेहतर, पूर्ण, और समृद्ध जीवन के लिए उसका अधिकार है।

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Bhagat Singh (भगत सिंह)

Indian Freedom Fighters - Bhagat Singh
Source: Wikipedia

भगत सिंह जी का जन्म 28 सितंबर, 1907 को पाकिस्तान के बंगा में हुआ था। भगत सिंह जी के पिता का नाम सरदार किशन सिंह संधू था और माता का नाम विद्यावती कौर था। भगत सिंह जी एक सिक्ख थे। भगत सिंह जी की दादी ने इनका नाम भागाँवाला रखा था क्योंकि उनकी दादी जी का कहना था कि यह बच्चा बड़ा भाग्यशाली होगा।भगत सिंह वास्तव में एक सच्चे देशभक्त थे। न केवल उन्होंने देश की आजादी के लिए लड़ाई लड़ी बल्कि इस घटना में अपनी जान तक दे दी। उनकी मृत्यु ने पूरे देश में उच्च देशभक्ति की भावनाएं पैदा कीं।

भगत सिंह के अनमोल विचार

  • मेरी गर्मी के कारण राख का एक एक कण चलायमान हैं में ऐसा पागल हूँ जो जेल में भी स्वतंत्र हूँ।
  • क्रांति में सदैव संघर्ष हो यह जरुरी नहीं| यह बम और पिस्तौल की राह नहीं है।
  • जो व्यक्ति उन्नति के लिए राह में खड़ा होता है उसे परम्परागत चलन की आलोचना एवम विरोध करना होगा साथ ही उसे चुनौती देनी होगी।
  • मैं यह मानता हूँ की मह्त्वकांक्षी, आशावादी एवम जीवन के प्रति उत्साही हूँ लेकिन आवश्यकता अनुसार मैं इस सबका परित्याग कर सकता हूँ सही सच्चा त्याग होगा।
  • कोई भी व्यक्ति तब ही कुछ करता है जब वह अपने कार्य के परिणाम को लेकर आश्व्स्त (औचित्य) होता है जैसे हम असेम्बली में बम फेकने पर थे।
  • कठोरता एवं आजाद सोच ये दो क्रांतिकारी होने के गुण है।
  • मैं एक इन्सान हूँ और जो भी चीजे इंसानियत पर प्रभाव डालती है मुझे उनसे फर्क पड़ता है।

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Dadabhai Naoroji  (दादा भाई नौरोजी)

Source: Pragati

दादाभाई नौरोजी का जन्म 4 सितंबर, 1825 को मुम्बई के एक ग़रीब पारसी परिवार में हुआ। जब दादाभाई 4 वर्ष के थे, तब उनके पिता का देहांत हो गया। उनकी माँ ने निर्धनता में भी बेटे को उच्च शिक्षा दिलाई। उच्च शिक्षा प्राप्त करके दादाभाई लंदन के यूनिवर्सिटी कॉलेज में पढ़ाने लगे थे।1885 में दादाभाई नौरोजी ने एओ ह्यूम द्वारा स्थापित भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह तीन बार (1886, 1893, 1906) भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए।

दादाभाई नौरोजी की प्रमुख पुस्तकें:-

  • पावर्टी एंड अन ब्रिटिश रूल इन इंडिया
  • स्पीच एंड राइटिंग
  • ग्रांट ऑफ इंडिया
  • पावर्टी इन इंडिया

कांग्रेस की अध्यक्षता :-

यह कांग्रेस की तीन बार अध्यक्ष रहे

  • 1886 ( कांग्रेस का दूसरा अधिवेशन जो कोलकाता में हुआ)।
  • 1893 ( कांग्रेस का 9 वां अधिवेशन जो लाहौर में हुआ)।
  • 1906 ( कांग्रेस का 22 वां अधिवेशन जो कोलकाता में हुआ इसी अधिवेशन में नौरोजी ने सर्वप्रथम स्वराज्य शब्द का प्रयोग किया था)।

दादाभाई नौरोजी के प्रमुख विचार:-

  • नौरोजी गोखले की भाति उदारवादी राष्ट्रवादी थे और अंग्रेजी में न्यायप्रियता में विश्वास रखते ।
  • भारत के लिए ब्रिटिश शासन को वरदान मानते थे ।
  • स्वदेशी और बहिष्कार का सांकेतिक रूप से प्रयोग करने पर बल देते थे ।
  • उन्होंने सर्वप्रथम भारत का आर्थिक आधार पर अध्ययन किया।

Bipin Chandra Pal (बिपिन चंद्र पाल)

Credit: MyVoice

बिपिन चंद्र पाल का जन्म 7 नवंबर 1858 को वर्तमान बांग्लादेश के सिलहट जिले के पोइला गाँव में हुआ था।उनका जन्म एक धनी हिंदू वैष्णव परिवार में हुआ था।उनके पिता रामचंद्र पाल एक फारसी विद्वान और एक छोटे जमींदार थे।बिपिन चंद्र पाल तीन उग्रवादी देशभक्तों में से एक के रूप में प्रसिद्ध थे। जिन्हें ‘लाल-बाल-पाल’ के नाम से जाना जाता था। उन्हें श्री अरबिंदो द्वारा ‘राष्ट्रवाद का सबसे शक्तिशाली पैगंबर’ कहा गया।बिपिन चन्द्र पाल एक प्रख्यात पत्रकार भी थे जिनकी ख्याति पूरे विश्व में फैली हुई थी। उन्होंने अपनी पत्रकारिता का इस्तेमाल देशभक्ति की भावना और सामाजिक जागरूकता  के प्रसारण में किया। उनकी प्रमुख पुस्तकों में स्वराज और वर्तमान स्थिति, हिंदुत्व का नूतन तात्पर्य, भारतीय राष्ट्रवाद, भारत की आत्मा, राष्ट्रीयता और साम्राज्य, सामाजिक सुधार के आधार और अध्ययन शामिल है। वे डेमोक्रेटिक, इंडिपेंडेंट और कई अन्य पत्रिकाओं और समाचारपत्रों के संपादक रहे; परिदर्शक, न्यू इंडिया जैसी पत्रिकाएं शुरू की थीं।

बिपिन चंद्र पाल 1858 में ब्रिटिश सेना के खिलाफ सबसे बड़ी क्रांति के दौरान पैदा हुए क्रांतिकारी थे। वह भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का एक महत्वपूर्ण हिस्सा थे और उन्होंने विदेशी वस्तुओं के परित्याग को प्रोत्साहित किया। उन्होंने लाला लाजपत राय और बाल गंगाधर तिलक के साथ एक तिकड़ी बनाई, जिसे लाल-बाल-पाल के नाम से जाना जाता है, जहां उन्होंने कई क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम दिया।

  • जन्म: 7 नवंबर 1858, हबीगंज जिला, बांग्लादेश
  • मृत्यु: 20 मई 1932, कोलकाता
  • शिक्षा: सेंट पॉल कैथेड्रल मिशन कॉलेज, प्रेसीडेंसी विश्वविद्यालय
  • प्रसिद्ध रूप से जाना जाता है: क्रांतिकारी विचारों के पिता

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Lala Lajpat Rai (लाला लाजपत राय)

Source: Wikipedia

लाला लाजपत राय का जन्म 28 जनवरी 1865 को दुधिके गॉव में हुआ था जो वर्तमान में पंजाब के मोगा जिले में स्थित है। वह मुंशी राधा किशन आज़ाद और गुलाब देवी के ज्येष्ठ पुत्र थे। उनके पिता बनिया जाति के अग्रवाल थे। बचपन से ही उनकी माँ ने उनको उच्च नैतिक मूल्यों की शिक्षा दी थी।लाला लाजपत राय यह एक स्वतंत्रता सेनानी होने के साथ साथ एक लेखक भी थे | उन्होंने अपने कार्य और विचारों के साथ लेखन कार्य से भी लोगों को मार्गदर्शन किया |उनके द्वारा लिखी गयी पुस्तके – हिस्ट्री ऑफ़ आर्य समाज, शिवाजी का चरित्र चित्रण, दयानंद सरस्वती, भगवत गीता का संदेश, युगपुरुष भगवान श्रीकृष्ण इत्यादि. पुस्तके उन्होंने लिखी थी |

लाला लाजपत राय पर कविता | Lala Lajpat Rai Poem in Hindi

लाला लाजपत राय उनका नाम था,
भारत की आजादी के लिए उनका हर काम था,
अंग्रेजी हुकूमत को मिलता करारा जवाब था,
भारत की आजादी का उनके आखों में ख्वाब था.
गरम उनका स्वभाव था,
गरीबों के लिए प्रेम भाव था,
अंग्रेज भी उनसे डरते थे,
क्योंकि झुकना उनका स्वभाव न था.
देश के खातिर प्राणों का बलिदान दिया,
स्कूल और कॉलेज खोलकर सबको ज्ञान दिया,
देश पर तन-मन-धन न्यौछावर कर डाला
देशभक्तों के लहू में चिंगारी लगाकर स्वतंत्रता का वरदान दिया.

Raja Ram Mohan Roy (राजा राम मोहन रॉय)

Ram Mohan Roy

राम मोहन का जन्म 22 मई 1772 को बंगाल के हूगली जिले के में राधानगर गाँव में हुआ था। उनके पिता का नाम रामकंतो रॉय और माता का नाम तैरिनी था। राम मोहन का परिवार वैष्णव था, जो कि धर्म सम्बन्धित मामलो में बहुत कट्टर था।  उनकी शादी 9 वर्ष की उम्र में ही कर दी गई। लेकिन उनकी प्रथम पत्नी का जल्द ही देहांत हो गया। इसके बाद 10 वर्ष की उम्र में उनकी दूसरी शादी की गयी जिसे उनके 2 पुत्र हुए लेकिन 1826 में उस पत्नी का भी देहांत हो गया और इसके बाद उसकी तीसरी पत्नी भी ज्यादा समय जीवित नहीं रह सकी।1803 में रॉय ने हिन्दू धर्म और इसमें शामिल विभिन्न मतों में अंध-विश्वासों पर अपनी राय रखी।राजा राम मोहन रॉय को मुगल सम्राट अकबर द्वितीय ने राजा की उपाधि दी थी।राजा राम मोहन रॉय को अनेक भाषा जैसे कि अरबी, फारसी, अंग्रेजी और हिब्रू भाषाओं का ज्ञान था। राजा राम मोहन रॉय का प्रभाव लोक प्रशासन, राजनीति, शिक्षा और धर्म के क्षेत्र में स्पष्ट था।राजा राम मोहन रॉय को सती और बाल विवाह की प्रथाओं को खत्म करने के लिए जाना जाता है। राजा राम मोहन राय को कई इतिहासकारों द्वारा “बंगाल पुनर्जागरण का पिता” माना जाता है। महज 15 साल की उम्र में राजा राम मोहन राय ने बंगाल में पुस्‍तक लिखकर मूर्तिपूता का विरोध शुरू किया था। राजा राम मोहन राय ने अंग्रेजी की शिक्षा प्राप्त कर मैथ्‍स, फिजिक्‍स, बॉटनी और फिलॉसफी जैसे विषयों को पढ़ने के साथ साथ वेदों और उपनिषदों को भी जीवन के लिए अनिवार्य बताया था।

तांतिया टोपे

Indian Freedom Fighters in Hindi
Source : Pinterest

तांतिया टोपे 1857 के विद्रोह के प्रसिद्ध क्रांतिकारियों में से एक थे। 1814 में जन्मे, उन्होंने अपने सैनिकों को ब्रिटिश शासन के प्रभुत्व के खिलाफ लड़ने के लिए नेतृत्व किया। उन्होंने जनरल विन्धम को कानपुर छोड़ दिया और रानी लक्ष्मीबाई को ग्वालियर बहाल करने में मदद की।

  • जन्म: 1814, येओला
  • मृत्यु: 18 April 1859, शिवपुरी
  • पूरा नाम: रामचंद्र पांडुरंग टोपे

बाल गंगाधर तिलक

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बाल गंगाधर तिलक 1856 में पैदा हुए एक उल्लेखनीय स्वतंत्रता सेनानी थे। अपने उद्धरण के लिए प्रसिद्ध, ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है। उन्होंने कई विद्रोही समाचार पत्र प्रकाशित किए और ब्रिटिश शासन की अवहेलना करने के लिए स्कूलों का निर्माण किया। वह लाला लाजपत राय और बिपिन चंद्र पाल के साथ लाल-बाल-पाल के तीसरे सदस्य थे।

  • जन्म: 23  जुलाई 1856, चिखलीक
  • मृत्यु: 1 अगस्त 1920, मुंबई
  • लोकमान्य तिलक के नाम से प्रसिद्ध

अशफाकउल्ला खान 

Indian Freedom Fighter in HIndi
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22 अक्टूबर 1900 को उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले में जन्मे अशफाकउल्ला खान महात्मा गांधी के नेतृत्व में चल रहे असहयोग आंदोलन के साथ बड़े हुए। जब वह एक युवा सज्जन थे, तभी अशफाकउल्ला खान राम प्रसाद बिस्मिल से परिचित हो गए। वह गोरखपुर में हुई चौरी-चौरा कांड के मुख्य साजिशकर्ताओं में से एक था। वह स्वतंत्रता के प्रबल समर्थक थे और चाहते थे कि अंग्रेज किसी भी कीमत पर भारत छोड़ दें। अशफाकउल्ला खान एक लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी थे, जिन्हें बिस्मिल के साथ सच्ची दोस्ती के लिए जाना जाता था, उन्हें काकोरी ट्रेन डकैती के लिए मौत की सजा सुनाई गई थी। इसे 1925 के काकोरी षडयंत्र के नाम से जाना जाता था।

  • जन्म: 22 अक्टूबर 1900, शाहजहांपुर
  • मृत्यु: 19 दिसंबर 1927, फैजाबाद
  • संगठन: हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन
  • प्रसिद्ध रूप से जाना जाता है: अशफाक उल्ला खान

नाना साहब

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बालाजीराव भट, जिन्हें आमतौर पर नाना साहिब के नाम से जाना जाता है, का जन्म मई 1824 में बिठूर (कानपुर जिला), उत्तर प्रदेश में हुआ था। वह भारत के मराठा साम्राज्य के आठवें पेशवा थे। शिवाजी के शासनकाल के बाद, वह सबसे शक्तिशाली राजाओं में से एक थे और इतिहास में सबसे साहसी भारतीय स्वतंत्रता योद्धाओं में से एक थे। उनका दूसरा नाम बालाजी बाजीराव था। 1749 में जब छत्रपति शाहू की मृत्यु हुई, तो उन्होंने मराठा साम्राज्य को पेशवाओं के पास छोड़ दिया। उनके राज्य का कोई उत्तराधिकारी नहीं था, इसलिए उन्होंने वीर पेशवाओं को अपना उत्तराधिकारी नामित किया। मराठा साम्राज्य के राजा के रूप में नाना साहिब ने पुणे के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया। उनके शासन काल में पूना एक छोटे से गांव से महानगर में तब्दील हो गया था। उन्होंने नए जिलों, मंदिरों और पुलों का निर्माण करके शहर को नया रूप दिया। यह कहते हुए कि, 1857 के विद्रोह में साहिब का महत्वपूर्ण योगदान था, उत्साही विद्रोहियों के एक समूह का नेतृत्व। उसने कानपुर में ब्रिटिश सैनिकों को पछाड़ दिया और बचे लोगों की हत्या करके ब्रिटिश खेमे को खतरे में डाल दिया। हालाँकि, नाना साहब और उनके आदमियों को हराने के बाद, अंग्रेज कानपुर को वापस लेने में सक्षम थे।

  • जन्म : 19 मई 1824, बिठूर
  • पूरा नाम: धोंडू पंतो
  • मृत्यु: 1859, नैमिशा वन
  • गायब: जुलाई 1857 को कानपुर (अब कानपुर), ब्रिटिश भारत में
  • नाना साहब के नाम से मशहूर

सुखदेव

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सुखदेव, जिनका जन्म 1907 में हुआ था, एक बहादुर क्रांतिकारी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन के प्रमुख सदस्य थे। बिना किसी संदेह के, वह भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के सबसे प्रतिष्ठित व्यक्तियों में से एक थे। उन्होंने अपने सहयोगियों भगत सिंह और शिवराम राजगुरु के साथ मिलकर काम किया। उन पर ब्रिटिश अधिकारी जॉन सॉन्डर्स की हत्या में शामिल होने का आरोप लगाया गया था। दुर्भाग्य से, 24 साल की उम्र में, उन्हें 23 मार्च, 1931 को पंजाब के हुसैनवाला (अब पाकिस्तान में) में भगत सिंह और शिवराम राजगुरु के साथ पकड़ा गया और फांसी पर लटका दिया गया।

  • जन्म: 15 मई 1907, लुधियाना
  • मृत्यु: 23 मार्च 1931, लाहौर, पाकिस्तान
  • शिक्षा: नेशनल कॉलेज ऑफ आर्ट्स, नेशनल कॉलेज, लाहौर
  • सदस्य: हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA)

कुंवर सिंह

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कुंवर सिंह का जन्म अप्रैल 1777 में जगदीशपुर के महाराजा और महारानी (अब भोजपुर जिले, बिहार में) के महाराजा और जगदीसपुर की महारानी के यहाँ हुआ था। विद्रोह के अन्य प्रसिद्ध नामों के बीच उनका नाम अक्सर खो जाता है। बहरहाल, प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में उनका योगदान बहुत बड़ा था। बिहार में विद्रोह का नेतृत्व कुंवर सिंह ने किया था। 25 जुलाई, 1857 को, उन्होंने लगभग 80 वर्ष की आयु में दानापुर में तैनात सिपाहियों की कमान प्राप्त की। कुंवर सिंह ने मार्च 1858 में आजमगढ़ पर अधिकार कर लिया। (अब यूपी में)। फिर वह घर गया और 23 जुलाई को जगदीशपुर के पास एक सफल लड़ाई की कमान संभाली। कुंवर सिंह के इस तथ्य के बावजूद कि कुंवर सिंह गंभीर रूप से आहत हुए थे, कैप्टन ले ग्रैंड के नेतृत्व में अंग्रेजों को इस लड़ाई में पीटा गया था।

  • जन्म: नवंबर 1777, जगदीशपुर
  • मृत्यु: 26 अप्रैल 1858, जगदीशपुर
  • पूरा नाम: बाबू वीर कुंवर सिंह
  • वीर कुंवर सिंह के नाम से मशहूर

मंगल पांडे

Courtesy: Connect Gujarat

एक प्रसिद्ध भारतीय स्वतंत्रता सेनानी मंगल पांडे को आमतौर पर अंग्रेजों के खिलाफ 1857 के विद्रोह के अग्रदूत के रूप में पहचाना जाता है, जिसे भारत की स्वतंत्रता की पहली लड़ाई माना जाता है। ईस्ट इंडिया कंपनी की सेना की 34 वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (बीएनआई) रेजिमेंट में एक सैनिक के रूप में, उन्होंने सिपाही विद्रोह का नेतृत्व किया, जिसके कारण अंततः 1857 का विद्रोह हुआ। 1850 के दशक के मध्य में जब भारत में एक नई एनफील्ड राइफल लॉन्च की गई, तो व्यापार के साथ उनका सबसे बड़ा विवाद शुरू हुआ। राइफल के कारतूसों में जानवरों की चर्बी, विशेष रूप से गाय और सुअर की चर्बी के साथ चिकनाई होने की अफवाह थी। कारतूसों के उपयोग के परिणामस्वरूप, भारतीय सैनिकों ने निगम के खिलाफ विद्रोह कर दिया क्योंकि इसने उनकी धार्मिक मान्यताओं का उल्लंघन किया था। पांडे और उनके साथी सिपाहियों ने 29 मार्च, 1857 को ब्रिटिश कमांडरों के खिलाफ विद्रोह किया और उन्हें मारने का भी प्रयास किया।

  • जन्म: 19 जुलाई 1827, नागवा
  • मृत्यु: 8 अप्रैल 1857, बैरकपुर
  • व्यवसाय: सिपाही (सैनिक)
  • मौत का कारण : फाँसी लगाकर दी गई फांसी
  • के लिए जाना जाता है: भारतीय स्वतंत्रता सेनानी

सी. राजगोपालाचारी

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सी राजगोपालाचारी, 1878 में पैदा हुए, 1906 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होने से पहले पेशे से एक वकील थे और एक मान्यता प्राप्त कांग्रेस विधायक बनने के लिए रैंकों के माध्यम से बढ़ते हुए। राजगोपालाचारी समकालीन भारतीय राजनीति में एक महान व्यक्ति थे। वह स्वतंत्रता पूर्व युग के दौरान भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के सदस्य और महात्मा गांधी के कट्टर समर्थक थे। वे लाजपत राय के असहयोग आंदोलन में भी सक्रिय रूप से लगे हुए थे।

  • जन्म: 10 दिसंबर 1878,थोरापल्ली
  • मृत्यु:  25 दिसंबर 1972, चेन्नई
  • शिक्षा: प्रेसीडेंसी कॉलेज, बैंगलोर केंद्रीय विश्वविद्यालय (1894), बैंगलोर विश्वविद्यालय
  • सीआर के रूप में प्रसिद्ध, कृष्णागिरी के आम, राजाजी
  • पुरस्कार: भारत रत्न

राम प्रसाद बिस्मिल

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“देश मारा पाया हुआ है”
देश पर मर जाएंगे
मार्ते मार्ते देश को
जिंदा मगर कर जाएंगे”

राम प्रसाद बिस्मिल सबसे उल्लेखनीय भारतीय क्रांतिकारियों में से एक थे, जिन्होंने ब्रिटिश उपनिवेशवाद से लड़ाई लड़ी और देश के लिए स्वतंत्रता की हवा में सांस लेना संभव बनाया, शाही ताकतों के खिलाफ संघर्ष के बाद, स्वतंत्रता की इच्छा और क्रांतिकारी भावना हर इंच में गूंजती रही। उनका शरीर और कविता। बिस्मिल, जिनका जन्म 1897 में हुआ था, सुखदेव के साथ हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के एक सम्मानित सदस्य थे। वह कुख्यात काकोरी ट्रेन डकैती में भी भागीदार था, जिसके लिए ब्रिटिश सरकार ने उसे मौत की सजा दी थी।

  • जन्म: 11 जून 1897, शाहजहांपुर
  • मृत्यु: 19 दिसंबर 1927, गोरखपुर जेल, गोरखपुर
  • मौत का कारण : फाँसी लगाकर दी गई फांसी
  • Organization: Hindustan Socialist Republican Association

चंद्रशेखर आजाद 

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1906 में पैदा हुए चंद्रशेखर आजाद स्वतंत्रता आंदोलन में भगत सिंह के करीबी साथी थे। वह हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन के सदस्य भी थे और ब्रिटिश अधिकारियों के खिलाफ सबसे बहादुर और साहसी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी भी थे। ब्रिटिश सेना के साथ युद्ध के दौरान कई विरोधियों की हत्या करने के बाद, उसने अपनी कोल्ट पिस्तौल से खुद को गोली मार ली। उसने वादा किया कि वह कभी भी अंग्रेजों द्वारा जिंदा नहीं पकड़ा जाएगा।

  • जन्म: 23 जुलाई 1906, भावरस
  • मृत्यु: 27 फरवरी 1931, चंद्रशेखर आजाद पार्क
  • पूरा नाम: चंद्रशेखर तिवारी
  • शिक्षा: महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ

Women Indian Freedom Fighters in Hindi

Source : Tribune India

कई महिला भारतीय स्वतंत्रता सेनानियों ने भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, चाहे वह स्थानीय स्तर पर देश के लिए लड़कर हो या पुरुषों के साथ मिलकर। भारत की स्वतंत्रता में महिला स्वतंत्रता सैनानियों ने भी भाग लिया जिनके बारे में नीचे बताया गया है:

  1. झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई
  2. एनी बेसेंट
  3. मैडम भीकाजी कामा
  4. कस्तूरबा गांधी
  5. अरुणा आसफ अली
  6. सरोजिनी नायडू
  7. उषा मेहता
  8. बेगम हजरत महल
  9. कमला नेहरू
  10. विजया लक्ष्मी पंडित
  11. झलकारी बाई
  12. सावित्री बाई फुले
  13. अम्मू स्वामीनाथनी
  14. किट्टू रानी चेन्नम्मा
  15. दुर्गा देवी

Rani Lakshmi Bai (रानी लक्ष्मीबाई)

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झांसी की रानी का जन्म मणिकर्णिका तांबे 19 नवंबर 1828 वाराणसी भारत में हुआ था। इनके पिता का नाम मोरोपंत तांबे और माता का नाम भागीरथी सप्रे था। इनके पति का नाम नरेश महाराज गंगाधर राव नायलयर और बच्चे का नाम दामोदर राव और आनंद राव था।रानी जी ने बहुत बहादुरी से युद्ध में अपना परिचय दिया था। रानी लक्ष्मीबाई ने अपने दत्तक पुत्र को पीठ पर कसकर अंग्रेजों से युद्ध किया था।

रानी लक्ष्मीबाई के अनमोल विचार

  • शौर्य और वीरता झलकती है लक्ष्मीबाई के नाम में,प्रथम स्वतंत्रता संग्राम की डोरी थी जिसके हाथ में।
  • दूर फिरंगी को करने की सबने मन में ठानी थी,चमक उठी सन सत्तावन में वह तलवार पुरानी थी
  • बुंदेले हरबोलों के मुँह हमने सुनी कहानी थी,खूब लड़ी मर्दानी वो तो झाँसी वाली रानी थी।
  • मैं झांसी की रानी हूं, और इस धरती मां की बेटी मेरे होते हुए कोई भी फिरंगी झांसी को हाथ नहीं लगा सकता, मैं अपनी झांसी कभी नहीं दूंगी चाहे इसके लिए मुझे अपनी जान भी क्यों न देनी पड़े झांसी मेरी आन है.. शान है.. ईमान है..।
  • मुर्दों में भी जान डाल दे,
    उनकी ऐसी कहानी है
    वो कोई और नहीं
    झांसी की रानी हैं
  • हम लडे़ंगे ताकि हमारी आने वाली पीढ़ियां अपनी आज़ादी का उत्सव मना सके।
  • अपने हौसले की एक कहानी बनाना,हो सके तो खुद को झांसी की रानी बनाना।
  • हर औरत के अंदर है झाँसी की रानी
     कुछ विचित्र थी उनकी कहा
    मातृभूमि के लिए प्राणाहुति देने को 
    ठानी,अंतिम सांस तक लड़ी थी वो मर्दानी।
  • रानी लक्ष्मी बाई लड़ी तो,
    उम्र तेईस में स्वर्ग सिधारी
    तन मन धन सब कुछ दे डाला,
    अंतरमन से कभी ना हारी।
  • मातृभूमि के लिए झांसी की रानी ने जान गवाई थी,
    अरि दल कांप गया रण में, जब 
    लक्ष्मीबाई आई थी

Begum Hazrat Mahal (बेगम हजरत महल)

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अंग्रेजों को दिश से भगाने में बेगम हज़रत महल ने Indian Freedom Fighter बनके अहम भूमिका निभाई थी , जिनका जन्म अवध प्रांत के फैजाबाद जिले में सन 1820 में हुआ था। उनके बचपन का नाम मुहम्मदी खातून था।बेगम हजरत महल के बचपन का नाम मुहम्मदी खातून था। इनके गरीब माता-पिता की हैसियत एक बेटी को पालने की नहीं थी। इसलिए उन्होंने इन्हें एक दलाल के हाथों बेच दिया।बेगम हज़रत महल का मकबरा काठमांडू के मध्य जामा मस्जिद के पास (घंटाघर पर) स्थित है।बेगम हज़रत महल और रानी लक्ष्मीबाई के सैनिक दल में तमाम महिलाएं शामिल थीं।वह कई भूमिकाओं की महिला – एक माँ, एक रानी और सबसे महत्वपूर्ण, प्रतिरोध का प्रतीक। बहुत कमजोर आर्थिक पृष्ठभूमि वाले परिवार में जन्मी, उसका पहला नाम मुहम्मद बेगम था। एक परिचर के रूप में शाही हरम के लिए बहुत कम उम्र में बेचा गया, बेगम हज़रत महल को शिष्टाचार में उचित प्रशिक्षण मिला। उन्हें परी खान में ‘महक परी’ का नया नाम दिया गया था और बाद में नवाब वाजिद अली शाह के अनुबंध के तहत पत्नियों में से एक बन गई। स्वतंत्रता संघर्ष में उनका सबसे बड़ा योगदान हिंदुओं और मुसलमानों को अंग्रेजों से लड़ने के लिए एक बल के रूप में एकजुट होना था। उन्होंने एक नेता के रूप में अपनी सूक्ष्मता साबित की। यहां तक कि उन्होंने महिलाओं को अपने घरों से बाहर निकलने और स्वतंत्रता के संघर्ष में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित करने और प्रेरित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका मानना था कि महिलाएं दुनिया में कुछ भी कर सकती हैं, किसी भी लड़ाई को लड़ सकती हैं और विजेता के रूप में सामने आ सकती हैं।

सरोजिनी नायडू

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निश्चित रूप से सरोजिनी नायडू आज की महिलाओं के लिए एक रोल मॉडल हैं. जिस जमाने में महिलाओं को घर से बाहर निकलने तक की आजादी नहीं थी, सरोजिनी नायडू घर बाहर एक कर देश को आजाद करने के लक्ष्‍य के साथ दिन रात महिलाओं को जागरूक कर रही थीं.  सरोजिनी नायडू उन चुनिंदा महिलाओं में से थीं जो बाद में INC की पहली प्रेज़िडेंट बनीं और उत्तर प्रदेश की गवर्नर के पद पर भी रहीं. वह एक कवयित्री भी थीं.

सावित्रिभाई फुले

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महिलाओं को शिक्षित करने के महत्‍व को उन्‍होंने जन जन में फैलाने का जिम्‍मा उठाया था. उन्‍होंने ही कहा था कि अगर आप किसी लड़के को शिक्षित करते हैं तो आप अकेले एक शख्स को शिक्षित कर रहे हैं, लेकिन अगर आप एक लड़की को शिक्षा देते हैं तो पूरे परिवार को शिक्षित कर रहे हैं। उन्‍होंने अपने समय में महिला उत्पीड़न के कई पहलू देखे थे और लड़कियों को शिक्षा के अधिकार से वंचित होते देखा था. ऐसे में तमाम विरोध झेलने और अपमानित होने के बावजूद उन्‍होंने लड़कियों को मुख्‍य धारा में लाने के लिए उन्हें आधारभूत शिक्षा प्रदान करने की जिम्‍मेदारी उठाई थी.

विजयलक्ष्मी पंडित

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जवाहरलाल नेहरू की बहन विजयलक्ष्मी भी देश के विकास के लिए तमाम गतिविधियों में बढ़चढ़ कर हिस्‍सा लेती थीं. उन्होंने कई सालों तक देश की सेवा की और बाद में संयुक्त राष्ट्र जनरल असेंब्ली की पहली महिला प्रेज़िडेंट भी बनीं. वे डिप्लोमैट, राजनेता के अलावा लेखिका भी थीं

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Quotes of Indian Freedom Fighters in Hindi

  • एक सच्चे और वीर सैनिक को सैन्य और आध्यात्मिक दोनों ही प्रशिक्षण की जरूरत होती है।- नेता जी सुभाष चन्द्र बोस
  • आराम, हराम है।-  जवाहर लाल नेहरू
  • सारे जहां से अच्छा हिन्दुस्तां हमारा।- मोहम्मद इकबाल
  • दुश्मनों की गोलियों का हम डटकर सामना करेंगे, आज़ाद हैं, आज़ाद ही रहेंगे।- चन्द्रशेखर आज़ाद
  • “भारतीय एकता का मुख्य आधार इसकी संस्कृति ही है, इसका उत्साह कभी भी नहीं टूटा और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत है। भारतीय संस्कृति अक्षुण्ण है, क्योंकि भारतीय संस्कृति की धारा निरंतर बहती रहती है, और हमेशा बहती रहेगी। – मदन मोहन मालवीय
  • अब भी जिसका खून न खौला खून नहीं वो पानी है…जो ना आए देश के काम वो बेकार जवानी है।- चन्द्रशेखर आज़ाद
  • “हिन्दी, हिन्दू और हिन्दुस्तान। – भारतेन्दु हरिश्चन्द्र
  • मेरा रंग दे बसंती चोला,माय रंग दे बसंती चोला।- सुखदेव
  • मेरे शरीर पर पड़ी एक-एक चोट ब्रिटिश सम्राज्य के ताबूत की कील बनेगी। – लाला लाजपत राय
  • अगर लोगों को स्वराज और सच्चा लोकतंत्र हासिल करना है , तो वे इसे कभी असत्य और हिंसा के द्धारा प्राप्त नहीं कर सकते हैं।-   लाल बहादुर शास्त्री
  • आलसी व्यक्तियों के लिए भगवान कभी अवतार नहीं लेते, वे हमेशा मेहनती व्यक्ति के लिए ही अवतरित होते हैं , इसलिए काम करना शुरु करें। – बाल गंगाधर तिलक
  • “पहले तो वो आप पर बिल्कुल ध्यान नहीं देंगे, और फिर वो आप पर जमकर हंसेंगे, फिर वो आप से लड़ेंगे और फिर आप जीत जाएंगे। – राष्ट्रपिता, महात्मा गांधी
  • विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊंचा रहे हमारा। – श्याम लाल गुप्ता
  • आज़ादी मिलती नहीं है बल्कि इसे छीनना पड़ता है।-सुभाष चंद्र बोस

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