DRDO Kya Hai

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DRDO kya hai

एक देश की ताकत का आकलन उसकी सैन्य और विज्ञान कैसी है उससे पता चलता है। देश की ताकत और सुरक्षा तब और सुनिचित है जब ये दोनों समानांतर रूप से काम करे। अगर आप DRDO के बारे में जानकारी प्राप्त करना चाहते है की DRDO Kya hai ,DRDO Ki Full Form,डीआरडीओ का काम क्या है ,डीआरडीओ  का मोटो क्या है इस प्रकार ही हर जानकारी आपको इस ब्लॉग से प्राप्त होगी।   

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DRDO Ki Full Form

DRDO ki Full-Form Defence Research and Development Organisation है। जिसे हिंदी में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन  के नाम से जाना जाता है।  

DRDO Kya Hai

आप भी ये जानना चाहते होंगे  DRDO Kya Hai ? तो चलिए जानते है DRDO Kya Hai DRDO की स्थापना  में हुई थी ये भारत की रक्षा से जुड़े अनुसंधान का काम और रक्षा शक्ति को मजबूत बनाने  में काफी बड़ा योगदान है।  ये भारत की शैन्य शक्ति को मजबूत बनाने के लिए की गयी थी। ये थल सेना और  यह रक्षा मंत्रालय के अंदर काम करती है।  इसका मोटो है “बालस्य मूलं विज्ञानम है”  यानी शक्ति का आधार विज्ञान है।  इसे अंग्रेज़ी में “Strenght’s Origin is Science” कहते है। इसके वर्तमान में चेयरमैन Dr. G Satheesh Reddy है। 

DRDO भारत का सबसे बड़ा शोध संगठन है।इसकी स्थापन 10छोटे प्रयोगशालाओ से हुई वर्तमान में  प्रयोगशाला है । DRDOने 1960 में अपनी पहली परियोजना (Surface -To -Air Missile) में  मिसाइलों की पहली परियोजना इंडिगो के नाम से शुरू की , विफल होने के बाद इसे बंद कर दिया। 1970 के दशक में Short Range Surface -To -Air Missile को विकसित किया  

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DRDO के काम 

अभी आपने ऊपर देखा  DRDO Kya Hai? DRDO भारत के रक्षा प्रणालियों के डिज़ाइन और विकास के लिए लगातार जुटे रहने वाला संगठन है । ये जल, थल, नभ, सेनाओ की रक्षा जरूरतों के अनुसार विश्व स्तरीय हथियार प्रणाली और यंत्र का उत्पादन करती है। DRDO सैन्य प्रौद्योगिकी के बहुत से छेत्रो  में भी काम करती है। इसके अलावा साइबर,  अंतरिक्ष, लाइफ साइंस, कृषि और परिक्षण के छेत्र में भी तेज़ी ला रहा है।  ताकि देश की सुरक्षा और मजबूत हो।  

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DRDO Kya Hai : DRDO के उत्पाद 

इसके द्वारा विकशित  किये गये प्रमुख उत्पाद और प्रौद्योगिकी की लिस्ट काफी लम्बी है।  तो भारत की सुरक्षा के लिए DRDO द्वारा तैयार की गयी अग्नि, प्रथ्वी, नाग, त्रिशूल और आकाश मिशाइल भी इसी लिस्ट में शामिल है। 

भारत की मिसाइल प्रणाली
               मिसाइल        विशेषताएँ

                अग्नि- I

सिंगल स्टेज, ठोस ईंधन, मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (MRBM)।ठोस प्रणोदन बूस्टर और एक तरल प्रणोदन ऊपरी चरण का उपयोग करना।700-800 किमी. की मारक दूरी।
                अग्नि- II मध्यम दूरी वाली बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM)।2000 किमी. से अधिक की मारक दूरी।

               अग्नि- III

दो चरणों वाली मध्यम दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल (IRBM)।वारहेड कॉन्फिगरेशन की एक विस्तृत शृंखला को सपोर्ट करती है।2,500 किलोमीटर से अधिक की मारक दूरी।

               अग्नि- IV 

ठोस प्रणोदक द्वारा संचालित दो चरणों वाली मिसाइल।रोड मोबाइल लॉन्चर से फायर कर सकते हैं।3,500 किमी. से अधिक की मारक दूरी है।यह स्वदेशी रूप से विकसित रिंग लेज़र गायरो और समग्र रॉकेट मोटर से लैस है।

                 अग्नि- V 

तीन चरणों वाली ठोस ईंधन, स्वदेशी अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM)।1.5 टन परमाणु वारहेड ले जाने में सक्षम।नेविगेशन और मार्गदर्शन, वारहेड और इंजन के संदर्भ में नवीनतम एवं सबसे उन्नत संस्करण।इसके सेना में शामिल होने के बाद भारत भी अमेरिका, रूस, चीन, फ्राँस और ब्रिटेन जैसे देशों के एक विशेष क्लब में शामिल हो जाएगा, जिनके पास अंतर-महाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल क्षमता है।5,000 किमी. से अधिक की मारक दूरी।

                 त्रिशूल

सभी मौसम में सतह-से-आकाश में मार करने में सक्षम कम दूरी, त्वरित प्रतिक्रिया वाली मिसाइल को निम्न स्तर के हमले का मुकाबला करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।

                आकाश 

एक साथ कई लक्ष्यों को भेदने की क्षमता के साथ सतह-से-आकाश में मार करने वाली मध्यम दूरी की मिसाइल है।एक से अधिक वारहेड ले जाने में सक्षम है।उच्च-ऊर्जा ठोस प्रणोदक और रैम-रॉकेट प्रणोदक प्रणाली।

                 नाग

यह तीसरी पीढ़ी की ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget), 4-8 किमी. की मारक दूरी की क्षमता के साथ टैंक भेदी मिसाइल है।स्वदेशी रूप से इसे एक एंटी-वेपन के रूप में विकसित किया गया है जो उड़ान मार्गदर्शन के लिये सेंसर फ्यूजन प्रौद्योगिकियों को नियोजित करती है।हेलीना (HELINA) नाग का हवा से सतह पर मार करने वाला संस्करण है जो ध्रुव हेलीकाप्टर के साथ एकीकृत है।
                पृथ्वी IGMDP के तहत स्वदेशी तौर पर निर्मित पहली बैलिस्टिक मिसाइल।सतह-से-सतह पर मार करने वाली बैटल फील्ड मिसाइल।150 किमी. से 300 किमी. तक की मारक दूरी की क्षमता।

              ब्रह्मोस

सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइल।इसे निजी संयुक्त उद्यम के रूप में रूस के साथ विकसित किया गया है।मल्टी-प्लेटफॉर्म क्रूज़ विभिन्न प्रकार के प्लेटफार्मों से आक्रमण कर सकता है।2.5-2.8 मैक की गति के साथ विश्व की सबसे तेज़ सुपरसोनिक क्रूज़ मिसाइलों में से एक है।एक बार लक्ष्य साधने के बाद इसे कंट्रोल केंद्र से मार्गदर्शन की आवश्यकता नही होती है इसलिये इसे ‘दागो और भूल जाओ’ (Fire and Forget) मिसाइल भी कहा जाता है। 

निर्भय

सबसोनिक मिसाइल, ब्रह्मोस का पूरक।भूमि, समुद्र और वायु पर कई प्लेटफाॅर्मो से लॉन्च किये जाने में सक्षम।1,000 किमी. तक की पहुँच है।

सागरिका

पनडुब्बी-लॉन्च बैलिस्टिक मिसाइल (SLBM)।भारत की परमाणु ऊर्जा संचालित अरिहंत श्रेणी की पनडुब्बी के साथ एकीकृत है।700 किमी. की मारक दूरी।
                शौर्य K-15 सागरिका का एक प्रकार है।पनडुब्बी- परमाणु-सक्षम मिसाइल।भारत की दूसरी,आक्रमण क्षमता को बढ़ाने का लक्ष्य।

धनुष

सी-बेस्ड, कम दूरी, तरल प्रणोदक बैलिस्टिक मिसाइल।पृथ्वी II का नौसेना संस्करण।अधिकतम 350 किमी. की मारक दूरी।

               अस्त्र 

ठोस-प्रणोदक का उपयोग करते हुए दृश्य-रेंज से परे हवा-से-हवा में मार करने वाली मिसाइल।आकार और वज़न के मामले में DRDO द्वारा विकसित सबसे छोटे हथियारों में से एक है।लक्ष्य खोजने के लिये सक्रिय रडार साधक।इलेक्ट्रॉनिक काउंटर-माप क्षमता।80 किमी. की रेंज में हेड-ऑन मोड में सुपरसोनिक गति से दुश्मन के विमान को रोकने और नष्ट करने के लिये डिज़ाइन किया गया है।

प्रहार

यह भारत की नवीनतम 150 किमी. की दूरी की मारक क्षमता के साथ सतह-से-सतह पर मार करने वाली मिसाइल है।इसका प्राथमिक उद्देश्य अन-गाइडेड पिनाका मल्टी-बैरल रॉकेट लॉन्चर और निर्देशित पृथ्वी मिसाइल वेरिएंट के मध्य की खाई को पाटना है।इसकी उच्च गतिशीलता, त्वरण और सटीकता है।

DRDO में किस प्रकार के पद निकलते है

यह समय समय पर पद निकलता है | जिसमे अलग अलग योग्यता के हिसाब से नौकरी के  विकल्प निकलते  है | और इस संस्था में आप Clerk, स्टेनोग्राफर ,फायर इंजन ड्राइवर , जूनियर Research Fellow और Research Associate जैसी नौकरियाँ अपनी योग्यता के आधार पर पा सकते है |

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