कैसे लिखे सबसे अच्छा ऑर्टिकल?

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Article Writing in Hindi

Article writing in Hindi बहुत ही आसान होता है, परंतु जब हम उसे लिखने बैठते हैं तो हमें समझ नहीं आता कि क्या लिखें और क्या नहीं! जब हम बोलते हैं तब हमारी बातों पर हमारा कंट्रोल नहीं होता , हम बहुत सारी बातें बोलते हैं। परंतु जब लिखने की बात आती है तब हम वही बातें लिखते हैं जो बहुत जरूरी होती है। ठीक उसी तरह आर्टिकल लिखने मतलब होता है कि कम से कम शब्दों में ज्यादा से ज्यादा और जानकारी के बारे में बताना। जब हम बातें करते हैं तो हमें सामने वाले चेहरे को देखकर पता चलता है कि हम जो बोल रहे हैं वह उसे समझ आ रहा है या नहीं, परंतु जब लिखने के बाद आती है तब हमें इस बात का पता नहीं चलता।

यदि आप पैराग्राफ राइटिंग इन हिंदी लिखना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करें: Paragraph writing in hindi

आर्टिकल लेखन क्या है?

आर्टिकल लेखन एक ऐसा तरीका है जिसमें हम किसी भी विषय के बारे में लिखकर उसकी जानकारी या उसके बारे में बता सकते है। उसे हिंदी में ‘ लेख ‘  कहा जाता है। Article writing का मतलब होता है कि किसी भी विषय पर ज्यादा से ज्यादा जानकारी देना। आर्टिकल राइटिंग दो प्रकार के होते हैं।

  1. पहला प्रकार-  जिसके हर शब्द का अपना एक अलग ही महत्व होता है।
  2. दूसरा प्रकार- किसी भी आर्टिकल में उस विषय की जानकारी को सरल और साधारण भाषा में समझाया गया हो।

आर्टिकल लेखन के उद्देश्य

एक लेख निम्नलिखित उद्देश्यों को ध्यान में रखकर लिखा जाना चाहिए:

  • इसे विषय या रुचि के विषय को अग्रभूमि में लाना चाहिए।
  • लेख में सभी आवश्यक जानकारी पर चर्चा होनी चाहिए।
  • इसे पाठकों को सिफारिशें करनी चाहिए या सुझाव देना चाहिए।
  • यह पाठकों पर प्रभाव डालने और उन्हें सोचने पर मजबूर करने के योग्य होना चाहिए।
  • लेख में लोगों, स्थानों, उभरती चुनौतियों और तकनीकी प्रगति सहित विषयों की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल होनी चाहिए।

आर्टिकल लेखन प्रारूप

आप जो कुछ भी लिखना चाहते हैं, आपके लिए यह महत्वपूर्ण है कि आप पहले लेख की संरचना को जानें और फिर उसके अनुसार विवरण का उल्लेख करें। मुख्य रूप से 3 खंडों में विभाजित- शीर्षक, बायलाइन और मुख्य भाग , आइए हम लेख लेखन प्रारूप पर एक नज़र डालते हैं जिसे आपको अपनी जानकारी लिखते समय ध्यान में रखना चाहिए।

शीर्षक या उप शीर्षक

पहली बात जिस पर ध्यान दिया जाना चाहिए और लेख लेखन में सबसे महत्वपूर्ण घटक शीर्षक/शीर्षक है। पाठकों का ध्यान आकर्षित करने के लिए यह आवश्यक है कि लेख को 5 से 6 शब्दों से अधिक का आकर्षक शीर्षक दिया जाए। 

बायलाइन या लेखक का नाम

शीर्षक के नीचे एक बाइलाइन आती है जिसमें उस लेखक का नाम होता है जिसने लेख लिखा है। यह हिस्सा लेखक को वास्तविक श्रेय अर्जित करने में मदद करता है जिसके वे हकदार हैं।

लेख का मुख्य भाग

मुख्य भाग में एक लेख की मुख्य सामग्री होती है। कहानी लेखन हो या लेख लेखन, यह पूरी तरह से लेखक पर निर्भर करता है कि वह रचना की लंबाई और उन पैराग्राफों की संख्या तय करे जो जानकारी को एम्बेड करेंगे। आम तौर पर, एक लेख में 3 या 4 पैराग्राफ होते हैं, जिसमें पहला पैराग्राफ पाठकों को यह बताता है कि लेख किस बारे में होगा और सभी आवश्यक जानकारी। दूसरे और तीसरे पैराग्राफ में विषय की जड़ को शामिल किया जाएगा और यहां सभी प्रासंगिक डेटा, केस स्टडी और आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं। इसके बाद, चौथा पैराग्राफ उस लेख को समाप्त करेगा जहां समस्याओं के समाधान, जैसा कि दूसरे और तीसरे मार्ग (यदि कोई हो) में प्रस्तुत किया गया है, पर चर्चा की जाएगी। 

ऑटिकल कैसे लिखा जाता है

जब भी आप किसी भी टॉपिक पर आर्टिकल लिखते हैं तो आपको बहुत सारी बातों को ध्यान रखना पड़ता है जो आपके लिखने की क्षमता को कई गुना ज्यादा निखरता हैं इसलिए ऑटिकल लिखने के लिए नीचे दिए गए जानकारी को ध्यान से पढ़े जो आपको ऑटिकल लिखने में कई ज्यादा मदद करेंगा।

सोचकर लिखना सीखें

यह ऑटिकल  का सबसे महत्वपूर्ण अंग और सबसे पहला भाग है कि आप किसी भी टॉपिक में कोई भी ऑटिकल लिखते है तो सिर्फ एक विचार को ध्यान में रखकर ना लिखे बल्कि उस पूरे समाज और सभी लोगों के लिए लिखें जो आपके इस ऑटिकल का फायदा मिल सकें। और इमेजिनेशन ही एक ऐसी चीज है जिसे आप हर तरह का सीन क्रिएट कर सकते हैं इमेजिनेशन के जरिये ही आप अपने अंदर ही अंदर आर्टिकल का एक बेतरीन स्ट्रक्चर तैयार कर सकते है जो आपके रीडर्स को आपका पूरा आर्टिकल पढ़ने के लिए उत्साहित करता है।

शांत वातावरण

अक्सर आपने फिल्मों में देखा और पढ़ा होगा कि अगर कोई लिखता है तो वह एक ऐसा वातावरण देखते है जहाँ शाति हो और वहाँ वे अपनी लिखने की कौशल को एक बेहतर लेखन शैली पर लेकर जा सकें। ऐसा इसलिए ताकि वह किसी भी तरीके से डिस्टर्ब न हो ताकि वह अपनी इमेजिनेशन पर पूरी तरह से केंद्रित रह सकें क्योंकि हमारा मन बहुत चंचल हैं और अगर कोई हमें डिस्टर्ब कर देता है तो हम उस इमेजिनेशन से एक दम बहार आ जाते है औऱ फिर से उसपर केंद्रित होने में काफ़ी समय लग सकता है इसलिए हमेशा एक अच्छा और बेहतरीन ऑटिकल लिखने के पहले शांत वातावरण की जरूरत होती है।

एक शब्द का इस्तेमाल बार-बार ना करें

ऑटिकल लिखते समय इस बात का हमेशा आपको ध्यान रखना है कि आप किसी भी शब्द को एक से ज्यादा बार अपने ऑटिकल में इस्तेमाल नहीं करें। अब इसका मुख्या कारण यानी ऐसा करने से आपके रीजर्स ऑटिकल पढ़ते पढ़ते बोर हो जाते है जिसके बाद उस ऑटिकल में ज्यादा संख्या में व्यू नहीं आते हैं। इसलिए एक जैसे शब्दों का प्रयोग न करके उसके जैसे समान अर्थ वाले शब्दों का प्रयोग करें जिसे रीडर्स को यह न लगे कि वह बार-बार की की लाइन पढ़ रहा है।।

ज़ीरो से लिखना शुरू करें

आर्टिकल लिखते समय आपको नहीं पता होता कि आपका यह ऑटिकल दुनिया के किन कौने में कौन से व्यक्ति द्वारा पढ़ा जा रहा है। इसलिए आपने ऑटिकल में जब भी आप किसी भी टॉपिक के बारे में बताएं तो इस बात को ध्यान में रखकर लिखें जिसको पढ़कर उस टॉपिक के बारे में किसी भी रीडर में मन में अधूरी जानकारी ना रहें। इसलिए आपको अपने आर्टिकल को बिल्कुल ज़ीरो से लिखना चाहिए ताकि हर वर्ग का व्यक्ति बहुत आसनी से समझ सकें क्योंकि जब आपके लिखे गए तथ्य लोगों के समझ नही आते तो वह आपके आर्टिकल को छोड़कर चले जाते है।

अपना अनुभव के साथ लिखें

अगर आप किसी एक ऐसे विषय पर लिख रहे हैं जिसमे आपका अपना कोई पर्सनल अनुभव हैं तो आपको उसी आधार पर अपने आर्टिकल को लिखना चाहिए। क्योंकि हम सब की एक जैसी समस्याएं होती हैं और रीडर्स उस समय सबसे ज्यादा आर्टिकल को पढ़ने के लिए उत्साहित होता है जब उसे लगता है कि उसकी समस्या भी बिल्कुल ऐसी है और फिर वह उनका हल जाने के लिए अंत तक आर्टिकल पढ़ता है।

आर्टिकल लिखने का सही तरीका

आर्टिकल लेखन सरल और साधारण भाषा में होना चाहिए। ताकि उसे एक बार पढ़ना शुरू करें तो अंत तक उसे पूरा पढ़ कर ही रखें।आर्टिकल पढ़ने वाले के लिए लाभदायक होना चाहिए ताकि उसके हर सवालों के जवाब उसके अंदर उसे मिल जाए। इसलिए आर्टिकल लिखने से पहले उसके फॉर्मेट के बारे में हमें पता होना चाहिए। आर्टिकल लिखने की शुरुआत कैसी करनी चाहिए? कहां पर किस बारे में बताना चाहिए ?आर्टिकल को पूरा कैसे करना चाहिए ?उसके अंदर कौनसी-कौनसी बातों का उल्लेख करना चाहिए? ऐसे कई सारी बातों का ध्यान में रखकर आर्टिकल आप शानदार रूप से लिख सकते हैं। Article writing in Hindi को तीन भाग में विभाजित किया गया है:

  • लेख लेखन उद्घाटन अनुभाग
  • लेख लेखन कार्रवाई अनुभाग
  • लेख लेखन समापन अनुभाग

यदि आप informal letter in hindi के बारे में जानकारी चाहते हैं तो दिए गए लिंक पर क्लिक करें।

लेख लेखन उद्घाटन अनुभाग

आर्टिकल लेखन की शुरुआत सरल और आसान भाषा से होनी चाहिए। आर्टिकल के अंदर कहीं जाने वाली बातों का उल्लेख करना चाहिए। सीधे-सीधे बातों को पेश न करके उसे रोचक वाले शब्दों से उद्घाटन करना चाहिए। इमैजिनेशन जैसे शब्दों का इस्तेमाल करके आर्टिकल को पढ़ने पर मजबूर करने वाले शब्दों का प्रयोग करें। अपने कई बार देखा होगा न्यूज़ में कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग होता है जिससे हम न्यूज़ को देखने के लिए व्याकुल हो जाते हैं।

उदाहरण के तौर पर,” गौर से देखिए इस मासूम बच्ची को”,यह शब्द सुनते ही हमारा पूरा ध्यान न्यूज़ की  तरफ केंद्रित हो जाता है। हमें वह न्यूज़ को देखने पर मजबूर कर देता है। ठीक उसी तरह हमारे आर्टिकल में भी कुछ ऐसे शब्दों का प्रयोग करके हम रीडर्स को अपनी तरफ आकर्षित कर सकते हैं। किसी भी बात को समझाने के लिए सीधे-सीधे ना बताकर, रोचक वाले शब्दों का इस्तेमाल करके अपने आर्टिकल को आकर्षित बना सकते हैं।

लेख लेखन कार्रवाई अनुभाग

यह सबसे अहम विमाग होता है। जिसमें हम उन बातों का उल्लेख करता है , जिसके लिए रीडर आर्टिकल को पढ़ने के लिए आया होता है। इसलिए यह एक्शन पार्ट कहलाता है। इसके अंदर रीडर्स के सवालों के जवाब के बारे में लिखा जाता है।

उदाहरण के लिए

  • डॉक्टर कैसे बने
  • डॉक्टर के लिए कौन सी पढ़ाई करनी चाहिए
  • डॉक्टर के लिए कौन सा कोर्स करना चाहिए
  • डॉक्टर के लिए टॉप कॉलेजे
  • डॉक्टर के लिए टॉप सरकारी कॉलेज
  • डॉक्टर के लिए कितने साल की पढ़ाई होती है
  • डॉक्टर की पढ़ाई के बाद क्या करना चाहिए
  • ऐसे कई सारे सवालों का जवाब आर्टिकल के अंदर उल्लेख होना चा

इन सभी सवालों का जवाब देकर आप रीडर को अपनी तरफ आकर्षित कर सकते हैं। आर्टिकल लेखन हमेशा सरल और साधारण वाक्य और भाषा में होना चाहिए। आर्टिकल को अलग-अलग उदाहरण के साथ समझा भी सकते हैं।

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लेख लेखन समापन अनुभाग

जितना आर्टिकल राइटिंग का ओपनिंग सेक्शन जरूरी होता है ठीक उतना ही आर्टिकल राइटिंग का समापन विभाग भी उतना ही जरूरी होता है। आर्टिकल राइटिंग क्लोजिंग सेक्शन में आप पूरे आर्टिकल के ओवरव्यू के बारे में बताते हैं। इसके अंदर कुछ महत्वपूर्ण बातों के बारे में समझा सकते हैं। समापन विभाग तुरंत खत्म ना करें उसके अंदर थोड़ी-थोड़ी रोचक वाले शब्दों का प्रयोग करके  आकर्षित बनाएं ताकि रीडर अंत तक पूरा आर्टिकल पढ़ें। Article Writing in Hindi इस प्रकार तीन हिस्सों में बांट सकते हैं। अगर आप यह तीन हिस्सों में अच्छे से आर्टिकल लिखेंगे तो आप रीडर को अपनी तरफ आकर्षित कर सकते हैं। आर्टिकल राइटिंग को बेहतर बनाने के लिए उसके अंदर राइटिंग स्किल होना बहुत ही जरूरी है। राइटिंग स्किल से आप अपने आर्टिकल को और भी बेहतर बना सकते हैं।

आर्टिकल राइटिंग के लिए स्टेप बाय स्टेप गाइड 

प्रारूप जानने के बाद, आइए लेख लिखने की प्रक्रिया में शामिल 5 सरल चरणों पर एक नजर डालते हैं: 

चरण 1: अपने लक्षित दर्शकों को खोजें

किसी भी विषय पर लिखने से पहले, लेखक के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह पहले उन श्रोताओं की पहचान करे जो लेख लक्षित करता है। यह लोगों, बच्चों, छात्रों, किशोरों, युवा वयस्कों, मध्यम आयु वर्ग, बुजुर्ग लोगों, व्यवसायी लोगों, सेवा वर्ग आदि का एक विशेष समूह हो सकता है। आप जिस भी समूह के लोगों के लिए लिखना चुनते हैं, उस विषय का चयन करें जो प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से हो। उनके जीवन को प्रभावित करता है या प्रासंगिक जानकारी फैलाता है। 

उदाहरण के लिए, यदि लेख माता-पिता पर केंद्रित है, तो आप बाल मनोविज्ञान, बच्चे के दैनिक पोषण आहार आदि के बारे में लिख सकते हैं। स्वर और भाषा भी लेख लेखन में उपयुक्त श्रोताओं से मेल खाना चाहिए। 

चरण 2: एक विषय और एक आकर्षक शीर्षक चुनें

अपने लक्षित दर्शकों को चुनने के बाद, लेख लेखन में दूसरा महत्वपूर्ण कदम अपनी रचना के लिए एक उपयुक्त विषय चुनना है। यह एक विचार देता है कि आपको लेख के साथ कैसे प्रक्रिया करनी चाहिए। विषय का चयन करने के बाद, उसके लिए एक दिलचस्प शीर्षक के बारे में सोचें। 

उदाहरण के लिए, यदि आप छात्रों को उपलब्ध विभिन्न एमबीए विशेषज्ञताओं से अवगत कराना चाहते हैं, तो आप लिख सकते हैं – ” एमबीए विशेषज्ञता के बारे में आपको जो कुछ भी जानने की आवश्यकता है “।

चरण 3: अनुसंधान कुंजी है

अपने लक्षित दर्शकों, विषय और लेख के शीर्षक का चयन करने के परिणामस्वरूप, लेख लेखन में शोध सबसे महत्वपूर्ण चीज है। लेख में शामिल की जाने वाली सभी सूचनाओं को जानने के लिए ढेर सारे लेख, आंकड़े, तथ्य और डेटा, और नए शासी कानून (यदि कोई हों) पढ़ें। इसके अतिरिक्त, डेटा की प्रामाणिकता की जांच करें, ताकि आप कुछ भी पुराना न बताएं। लेख लिखने के साथ आगे बढ़ने से पहले, बुलेट पॉइंट्स और कीवर्ड्स में लेख का एक रफ ड्राफ्ट या रूपरेखा तैयार करें ताकि आप महत्वपूर्ण जानकारी से न चूकें। 

चरण 4: लिखें और प्रूफरीड

एक बार जब आप सभी तथ्य और डेटा एकत्र कर लेते हैं, तो अब आप अपना लेख लिखना शुरू कर सकते हैं। जैसा कि चर्चा की गई है, लेख को एक परिचयात्मक पैराग्राफ के साथ शुरू करें, उसके बाद एक वर्णनात्मक और एक समापन पैराग्राफ। आपके द्वारा सब कुछ लिखने के बाद, अपने पूरे लेख को प्रूफरीड करना और यह जांचना उचित है कि कहीं कोई व्याकरण संबंधी त्रुटि तो नहीं है। एक पाठक के रूप में, जब आप एक छोटी सी गलती भी देखते हैं तो यह एक बड़ा मोड़ बन जाता है। साथ ही, सुनिश्चित करें कि सामग्री किसी अन्य वेबसाइट से कॉपी नहीं की गई है। 

चरण 5: चित्र और इन्फोग्राफिक्स जोड़ें

लोगों को पढ़ने के लिए अपनी सामग्री को और अधिक आकर्षक बनाने के लिए, आप कुछ इन्फोग्राफिक्स भी शामिल कर सकते हैं। छवियों को जोड़ने से लेख और भी आकर्षक हो जाता है और यह अधिक प्रभावशाली साबित होता है। इस प्रकार आपके लेख लेखन के उद्देश्य को सफल बनाते हैं!

आर्टिकल राइटिंग के उदाहरण

महिला सशक्तिकरण

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः।
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः।।

जब बात महिलाओं की आती है तो सबसे पहले इसी श्लोक को याद किया जाता है। हम सब औरत को देवी का रुप मानते है, आत्मविश्वास, अनुभव, रचनात्मकता से परिपूर्ण वास्तविकता में यहीं एक औरत की पहचान है। पारंपरिक समाज और चार दिवारों तक सीमित रहने वाली औरत आज देश कि राष्ट्रीय आय में अपनी भूमिका निभा रही है। महिलाएं आर्थिक कारकों के कारण उद्यमिता में प्रवेश करती हैं जो उन्हें अपने दम पर आगे बढ़ाती हैं।
भारतीय महिलाएं, जिन्हें बेहतर माना जाता है लेकिन वे समाज में समान भागीदार नहीं हैं। महिलाओं की उद्यमीता में लिंग अंतर बहुत मायने रखता है। जिसके कारण बहुत सी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। आईआईटी, दिल्ली द्वारा किए सर्वेक्षण के अनुसार संयुक्त राज्य अमेरिका और कनाडा में छोटे व्यवसाय का एक तिहाई महिलाएं है। एशियाई देशों में कुल कार्यबल का 40 प्रतिशत हिस्सा महिलाओं का है। भारत में महिलाएं अपने परिवार से बहुत भावनात्मक रूप से जुड़ी हुई हैं। घर के काम, बच्चों परिवार के सदस्यों की देखभाल करने में व्यस्त रहती है। ऐसे में उनके पास अपने लिए कुछ करने ंका समय कहां बचता है। दुसरी समस्या है हमारा पुरुष प्रधान समाज। महिलओं के साथ पुरुषों के बराबर व्यवहार नहीं किया जाता है। व्यवसाय में उनके प्रवेश के लिए परिवार के प्रमुख की मुजूरी की आवश्यकता होती है। पारंपरिक रूप से उद्यमिता को पुरुषों कि निगरानी में रखा गया है जो महिलाओं के विकास में रूकावट हैं। महिला साक्षरता को लेकर आंकडे बदल रहे है। भारतीय समाजों में प्रचलित परंपराएं और रीति-रिवाज एक बोझ बन जाते है।
भारत में महिलाएं स्वभाव से कमजोर, शर्मीली और सौम्य है। ऐसे में शिक्षा, प्रशिक्षण और वित्तीय सहायता की कमी उनकी क्षमता में कमी कर देती है। चूंकि महिलाएं मार्केटिंग, डिस्ट्रीब्यूशन और मनी कलेक्शन के लिए इधर-उधर भाग दौड़ नहीं कर सकती हैं, इसलिए उन्हें निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन इन सबके बाद भी उन्होंने अपनी पहचान पा ली है जैसे-
अखिला श्रीनिवासन, प्रबंध निदेशक, श्रीराम इनवेस्टमेंट लि.,
चंदा कोचर, कार्यकारी निदेशक, आईसीआईसीआई बैंक,
एकता कपूर, क्रिएटिव डायरेक्टर, बालाजी टेलीफिल्म्स लि.,
ज्योति नाइक, अध्यक्ष, लिज्जत पापड.,
किरण मजूमदार शॉ, अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक, बायोकॉन लि,
ललिता डी गुप्ते, जेएमडी, आईसीआईसीआई बैंक
, नैना लाल किडवार, डिप्टी सीईओ,
प्रीता रेड्डी, प्रबंध निदेशक, अपोलो अस्पताल,
प्रिया पॉल, अध्यक्ष, एपीजे पार्क होटल
राजश्री पैथी, अध्यक्ष, राश्री शुगर्स एंड केमिकल्स लि

छात्रों के लिए कोविड-19 पर लेख लेखन

कोविड-19 ने मानव जीवन के सभी वर्गों को प्रभावित किया है। जबकि इसने सभी उद्योग क्षेत्रों को प्रभावित किया, इसका शिक्षा पर बड़ा प्रभाव पड़ा। रात के भीतर कक्षाओं को ऑफलाइन से ऑनलाइन कर दिया गया था, लेकिन इससे छात्रों में भ्रम की स्थिति पैदा हो गई, खासकर उन छात्रों के लिए जो कॉलेजों में प्रवेश करने वाले थे। स्थिति बेहतर होने की उम्मीद में छात्रों ने एक साल का अंतराल भी लिया। जबकि दुनिया भर में टीकाकरण के कारण स्कूल और कॉलेज खुल रहे हैं, अभी भी कई चुनौतियाँ हैं।

COVID-19 को समझना, यह कैसे फैलता है, और खुद को कैसे सुरक्षित रखना है, यह सबसे महत्वपूर्ण चीजें हैं जो स्कूल के फिर से खुलते ही सबसे पहले सीखी जानी चाहिए। छात्रों को उन नियमों को जानना चाहिए जिनका वे पालन करने जा रहे हैं और स्कूल कक्षा में कोविड-19 सुरक्षा नियमों का पालन करने के लाभ। बच्चों को समझाना बहुत मुश्किल है क्योंकि हो सकता है कि मासूम दिमाग वर्तमान परिस्थितियों से परिचित न हो।

कोविड-19 के संपर्क में आने के जोखिम से बचने के लिए हर छात्र और स्कूल फैकल्टी को हर समय इन नियमों का पालन करना चाहिए। छात्रों को हर समय हैंड सैनिटाइटर साथ रखना होगा। छात्रों को कभी भी अपने हाथों पर छींक नहीं देनी चाहिए, बल्कि उन्हें इसे अपनी कोहनी से ढंकना चाहिए, या एक ऊतक या रूमाल का उपयोग कर सकते हैं। छात्रों को सूचित करें कि वे अपनी आंख, नाक और मुंह को बार-बार न छुएं। चूंकि आंखों और नाक को छूने से वायरस फैलने की संभावना बहुत अधिक है। यदि छात्र और शिक्षक इन बुनियादी नियमों का पालन करते हैं, तो प्रसार को रोका जा सकता है और स्कूल फिर से खुल सकते हैं।

एक अच्छा लेख लिखने के लिए टिप्स

कुछ ही समय में एक उत्कृष्ट लेख लिखने में आपकी मदद करने के लिए बहुत सारे उपयोगी संकेतों के साथ चरण-दर-चरण मार्गदर्शिका यहां दी गई है:

  1. सभी विचारों की सूची बनाना और उन्हें संभाल कर रखना 
  2. सभी प्रकार के विकर्षणों को दूर करना 
  3. विषय पर कुशलता से शोध करना 
  4. इसे सरल और कम जटिल रखना 
  5. अपने विचारों को बुलेट पॉइंट्स में लिखने का प्रयास करें 
  6. पहला मसौदा लिखने के बाद संपादित करें 
  7. एक टाइमर सेट करें 

लेख लेखन में सामान्य गलतियों से बचना चाहिए

त्रुटियों की संभावना अब बढ़ जाती है जब आप लेख लेखन के चरणों और लेख लेखन प्रारूप को समझते हैं। सामान्य भूलों के कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं: 

  • तथ्यों या उद्धरणों या इसी तरह के मामलों का उपयोग नहीं करना
  • ऐसे स्वर का उपयोग करना जो बहुत औपचारिक हो
  • इसका अर्थ जाने बिना कठिन शब्दावली का प्रयोग करना 
  • अपने लेख के लिए आकर्षक शीर्षक का उपयोग नहीं करना 
  • जानकारी को विभाजित करने के लिए अनुच्छेदों का उपयोग नहीं करना
  • व्यक्तिगत विचार या राय व्यक्त नहीं करना

ध्यान रखने योग्य बातें

  • लेखों के विषय अद्वितीय और प्रासंगिक होने चाहिए
  • लेख पर ध्यान देना चाहिए
  • यह दिलचस्प होना चाहिए
  • इसे पढ़ना आसान होना चाहिए
  • एक लेख लिखने का मुख्य लक्ष्य खोजें। लक्ष्य सूचना, मनोरंजन, और सलाह प्रदान करने या तुलना करने आदि से कुछ भी हो सकता है।
  • शीर्षक आकर्षक, स्पष्ट और दिलचस्प होना चाहिए
  • परिचय या प्रारंभिक पैराग्राफ अत्यधिक चौकस होना चाहिए। अपने शब्दावली कौशल का प्रयोग करें या शुरुआत के लिए कुछ प्रश्नवाचक शब्दों का उपयोग करने का प्रयास करें
  • स्पष्ट कथनों का प्रयोग करें और अभिकथन करें
  • दोहराव और शीर्ष तर्क और कारणों से बचें
  • अनुच्छेद लेखन की शैली का उपयोग करें और सामग्री को विशिष्ट और स्पष्ट रूप से लिखें
  • उन बिंदुओं का उपयोग करने से बचें जो केवल आपकी रुचि रखते हैं और आम जनता के लिए नहीं
  • अपने लेख लेखन को हमेशा एक अच्छे और तार्किक नोट पर समाप्त करें

आर्टिकल लेखन टॉपिक्स

क्या आपको एक लेख लिखना है जो अभी चलन में है और आपको बेहतर स्कोर करने में मदद करेगा या आपको बेहतर अभ्यास करने में मदद करेगा? लेख लेखन के लिए समसामयिक विषयों की सूची इस प्रकार है:

  1. ग्लोबल वार्मिंग
  2. पर्यावरण प्रदूषण
  3. भ्रष्टाचार
  4. इंटरनेट का प्रभाव
  5. महिला सशक्तिकरण
  6. शिक्षा और फिल्में
  7. शिक्षा में खेलों का महत्व
  8. योग और माइंड हीलिंग
  9. मानसिक स्वास्थ्य का महत्व
  10. समाज में शिक्षा का महत्व
  11. शिक्षा के महत्व पर लेख
  12. लेख नियम
  13. ग्लोबल वार्मिंग पर निबंध
  14. इंटरनेट पर निबंध
  15. जीवन में मेरा उद्देश्य पर निबंध
  16. शिक्षा प्रणाली पर निबंध
  17. लोकतंत्र पर निबंध
  18. करियर लक्ष्य निबंध कैसे लिखें?
  19. डिजिटल इंडिया पर निबंध

Education Quotes in Hindi

Courtesy: English Online

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