सही उत्तर – (B) 6
उत्तर: संस्कृत में करक के 6 भेद होते हैं।
इस प्रश्न का विस्तृत उत्तर
संस्कृत व्याकरण में, कारक वे होते हैं जिनका क्रिया से सीधा संबंध होता है। इस परिभाषा के अनुसार, संस्कृत में छह (6) कारक होते हैं:
- कर्ता कारक
- कर्म कारक
- करण कारक
- सम्प्रदान कारक
- अपादान कारक
- अधिकरण कारक
कर्ता कारक किसे कहते हैं?
संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप जो किसी क्रिया के होने का बोध कराता है, उसे कर्ता कारक कहते हैं। इसका चिन्ह ‘ने’ होता है।
उदाहरण: सीमा ने खाना खाया। इसमें ‘सीमा’ कर्ता कारक है, क्योंकि सीमा क्रिया को करने वाली है।
कर्म कारक किसे कहते हैं?
संज्ञा सर्वनाम का वह रूप जिस पर क्रिया का प्रभाव पड़ता है, उसे कर्म कारक कहते हैं। इसका चिन्ह अक्सर ‘को’ होता है।
उदाहरण: अध्यापक ने छात्र को पढ़ाया। इसमें ‘छात्र’ कर्म कारक है, क्योंकि पढ़ने का प्रभाव छात्र पर पड़ रहा है।
करण कारक किसे कहते हैं?
संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप है, जिस क्रिया की जाती है या जो क्रिया का साधन होता है, उसे करण कारक कहते हैं। इसके चिन्ह ‘से’ या ‘के द्वारा’ होते हैं।
उदाहरण: वह पेंसिल से लिखता है। इसमें ‘पेंसिल’ करण कारक है, क्योंकि यह लिखने का साधन है।
सम्प्रदान कारक किसे कहते हैं?
संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप है, जिसके लिए कोई क्रिया की जाती है, उसे संप्रदान कारक कहते हैं। इसके चिन्ह ‘को’ या ‘के लिए’ होते हैं।
उदाहरण: मां ने बच्चों को खिलौना दिया। इसमें ‘बच्चों’ संप्रदान कारक है, क्योंकि खिलौना बच्चों के लिए दिया गया है।
अपादान कारक किसे कहते हैं?
संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप है, जिससे अलग होने का भाव प्रकट होता है, उसे अपादान कारक कहते हैं। इसका चिन्ह ‘से’ होता है (अलग होने की तिथि में)।
उदाहरण: पेड़ से आम गिरा। इसमें ‘पेड़’ अपादान कारक है, क्योंकि आम पेड़ से अलग हो रहा है।
अधिकरण कारक किसे कहते हैं?
संज्ञा या सर्वनाम का वह रूप है, जो क्रिया के आधार पर निर्भर होता है जो स्थान या समय का बोध कराता है, उसे अधिकरण कारक कहते हैं। इसके चिन्ह ‘में’ या ‘पर’ होते हैं।
उदाहरण: नाव पानी में तैरती है। इसमें ‘पानी’ अधिकरण कारक है, जो तैरने का स्थान बता रहा है।

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